हिन्दी साहित्य में पावस ऋतु — राज्य स्तरीय साहित्य, कला एवं संस्कृति संगोष्ठी
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर एवं त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 19 सितम्बर 2026 (शनिवार) को श्री गोवर्धन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नाथद्वारा में “हिन्दी साहित्य में पावस ऋतु” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय साहित्य, कला एवं संस्कृति संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी, त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान की संस्थापक एवं अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा तथा संस्थान के महामंत्री संजय गुप्ता ‘देवेश’ के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में डॉ. बसंत सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. श्याम सुंदर पालीवाल, डॉ. मनीषा शर्मा, मा. रामदेव दीक्षित, मा. श्री ललित कोठारी एवं मा. दयाशंकर पालीवाल सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना एवं मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात राग मल्हार पर आधारित हवेली संगीत, बाँसुरी वादन तथा विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियों ने साहित्यिक आयोजन को विशेष सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।
प्रथम सत्र में डॉ. नगेन्द्र मेहता द्वारा “हिन्दी साहित्य में वर्षा : विरह, मिलन और श्रृंगार का भावलोक” विषय पर पत्र-वाचन किया गया। मा. कृष्ण बिहारी पाठक ने “तुलसी की सर्जना में मेघ और वृष्टि” विषय पर पत्र-वाचन प्रस्तुत किया। इस सत्र में डॉ. महिपाल सिंह चारण, मा. प्रमोद सनाढ्य, श्री देवी लाल जोशी, मा. गायत्री सनाढ्य एवं मा. सुधाकर अधिकारी की सहभागिता रही। साथ ही यशस्वी सनाढ्य, प्रियांश सनाढ्य, सोहनलाल मेघवाल एवं डॉ. सरस्वती जोशी द्वारा कविता-पाठ प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में हिन्दी सेवी सम्मान के अंतर्गत श्री सुभाष अग्रवाल को सम्मानित किया गया। यह सम्मान हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रति उनकी सेवाओं और योगदान के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति रहा। द्वितीय सत्र में डॉ. बनवारी पारिक ‘नवल’ को भी हिन्दी सेवी सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों एवं विद्वानों ने हिन्दी भाषा के संवर्धन, साहित्य के प्रचार-प्रसार तथा नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के महत्व पर विचार व्यक्त किए।
द्वितीय सत्र में मा. कुसुम अग्रवाल, मा. माधव नागदा, मा. बंसी लाल लड्डा, मा. कुसुम भारद्वाज, मा. राजेश्वर त्रिपाठी, मा. शरद बागेरा, मा. स्वाति शंकुत एवं मा. बंसी लाल लोहार की सहभागिता रही। इस सत्र में डॉ. वंदना जोशी की “गाँड मदर” तथा डॉ. मनीषा शर्मा की “तुम से होकर” पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसके साथ कविता-पाठ एवं समूहगान की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध किया।
कार्यक्रम में सूरदास के पद, राग दरबारी कान्हड़ा, राग मल्हार आधारित हवेली संगीत, एकल नृत्य, युगल नृत्य, समूह नृत्य तथा बाँसुरी वादन जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्य, संगीत, नृत्य एवं लोक-संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। आयोजन में वर्षा ऋतु के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ हिन्दी साहित्य में उससे जुड़े विरह, मिलन, श्रृंगार, प्रकृति-प्रेम और लोकजीवन के विविध भावों पर सार्थक चर्चा हुई।
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर की इस राज्य स्तरीय संगोष्ठी ने साहित्यकारों, विद्वानों, कलाकारों, शिक्षाविदों एवं साहित्यप्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान किया। हिन्दी सेवी सम्मान, पुस्तक-विमोचन, पत्र-वाचन, कविता-पाठ एवं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह आयोजन हिन्दी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।















