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वसन्त पंचमी है जन्मोत्सव

डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी
वसन्त पंचमी है जन्मोत्सव
दो फरवरी, वसन्त पंचमी
ट्टाूप खिली हर्षाई।
मो-शारदा रमेश पिता के
घर में थी मैं आई।
सारस्वत पूजन में
नवजाता ने ओखें खोली।
वेद (चाऐ स्वस्ति स्वरों में
सारभूत कुछ बोलीं।
ब्र॰ा ने आशीष दिये
संकल्प-सूक्त दुहराया।
नाम महाश्वेता देकर
शिव ने सुमार्ग दर्शाया
जो कुछ भी पाया है मैंने
कभी नहीं बिसराया।
स्वयं प्रकृति ने झूम-झूम कर
राग वसन्त सुनाया।