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मेवणी मेरे गोव की

रेवती रमण शर्मा
मटके पर मटका रख
दूर गोव से
पानी लाती
मेवणी१ मेरे गोव की।
कुड्डी करती
पहिया घुमाती
घूम रही पवनचक्की सी
दिन भर खटती
खेत पर
बोध-भरोटा२
सोझ घर आती
उसे देख गायें रेभाती
हाथ फेर दुलराती
डालती चारा मो जैसी।
अच्छी फसल के
सपने बोती
सुबह छोटे को
लिये गोद में
बेटी को स्कूल छोडती
मेवणी मेरे गोव की।
१. मेवणी ः मेवात क्षेत्र की मेव स्त्री
२. भरोटा ः चारे का गद्दर