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एक दिन अचानक

जसविंदर शर्मा
;सुबह छः बजे, स्टेज पर सन्नाटे और दहशत का माहौल। टेलीफोन की घंटी पूरी खनक के साथ बजती है। जानकी उसे सुनती है। वह चाय के कप एक बर्तन में लेकर सामने आती है।द्ध
जानकी - अभी-अभी चन्दन का फोन आया है। बिमला ताई गुजर गई है। आज शाम तीन बजे उसकी शवयात्रा है।
बडा बेटा चाय का कप हाथ में लेकर सोफे पर पसरते हुए - अरे कैसे हुई ताई की मौत
जानकी - चन्दर ने बताया कि नेचुरल डैथ थी।
बडा बेटा - कोई बीमारी तो थी नहीं ताई को।
जानकी - सुबह-सुबह चन्दर के डैडी पोच बजे उठ जाते हैं। सैर करने जाते हैं। आज भी इसी वक्त उठे तो देखा कि ताई चुपचाप सोई हुई है। ताई को लम्बे-लम्बे खर्राटे लेकर सोने की आदत है। ताई को बिस्तर पर य चुपचाप पडी देखकर चन्दर के डैडी का माथा ठनका। उन्होंने फटाफट ताई को हाथ से हिलाया-डुलाया, नब्ज देखी। सब कुछ शांत था।
बडा बेटा - अरे, डाक्टर को नहीं बुलाया उन्होंने? कहीं ले जाते इमरजेन्सी में।
जानकी - वह तो वही जानें। चन्दर कह रहा था कि न जाने रात के किस पहर में ताई की मौत हो गई थी। ऐसी शांत मौत किस्मत वालों को नसीब होती है।
बडा बेटा - जरा-सी सावट्टाानी बरत लेते तो ताई बच सकती थी।
जानकी - अरे बेटे, तुम्हें तो हर बात में कोई न कोई नुक्स निकालने की आदत है। ये नासपीटा तुम्हारा ऑडिट डिपार्टमेन्ट ही ऐसा है। वहो तुम पूरा दिन लोगों की फाइलों पर आपायो लगाते रहते हो, तुम्हारी आदत ही वैसी हो गई है। किसी की बात पर यकीन ही नहीं करते। बडा बेटा - मैंने कुछ गलत कहा अम्मा? ताई के लिए एक डाक्टर तो बुला ही सकते थे वे लोग।
जानकी - सारी बात मुझे भी नहीं पता कि ताई की मौत कैसे हुई। चन्दर ने बताया था कि नेचुरल डैथ थी।
बडा बेटा - ऐसा कैसे हो सकता है? ताई भली-चंगी थी। नेचुरल डैथ की वजह से या तो ब्रेन हेमरेज हो सकता है या हार्ट अटैक...
बात बीच में ही रुक गई। जानकी के छोटे बेटे के हाथ से चाय का कप फिसलकर नीचे गिर गया। वह अपने स्मार्ट फोन पर व्यस्त था। उसने ताई की मौत को इतनी गम्भीरता से नहीं लिया था। उसका रवैया भी ऐसा ही रहता है कि बात को टालते रहो, जब तक टल सकती है।
छोटा बेटा - सुबह इतनी जल्दी उठने की क्य पडी रहती है आप लोगों को? मेरी नींद ही पूरी नहीं होती।
जानकी - सुबह के शांत माहौल में एक घंटे में इतने काम हो जाते हैं जितने दिन में तीन घंटे में नहीं हो पाते। मेरी पूजा भी जल्दी निबट जाती है।
बडा बेटा - इस आलसी आदमी को समय के महव का क्या पता। हम न उठाऐ तो यह बंदा रोजाना दय्तर लेट पहचे।
छोटा बेटा - तुम दोनों का रुटीन यही है। सुबह जल्दी उठकर किसी न किसी बात पर माथा-पच्ची करना। आज ऐसा हुआ कि बडी देर से इतनी बहस कर रहे हो।
बडा बेटा - तुम ये कान में ईयर-प्लग लगाकर बैठ जाते हो, जैसे इस घर से कुछ लेना-देना नहीं।
जानकी - शक्तिनगर से सुबह ६ बजे चन्दर का फोन आया था। मेरा तो कलेजा ही कोप गया कि इतनी सुबह किसका फोन हो सकता है। बिमला ताई की डैथ हो गई है। दोपहर बाद शवयात्रा है।
बडा बेटा ;रोब सेद्ध - तू छुड्डी ले ले पंकज। दोपहर तक अम्मा को शक्तिनगर छोड आना।
छोटा बेटा - साफ बता देता ह। मैं तो किसी भी कीमत पर छुड्डी नहीं कर सकता। मेरे दय्तर में तो ऑडिट चल रहा है। सारे स्टॉक की पडताल होनी है। चाबियो मेरे पास हैं। बडे बॉस का आदेश है कि किसी को भी छुड्डी मत दो।
बडा बेटा - अम्मा, ऐसा करता ह कि मैं दोपहर बाद आट्टाी छुड्डी लेकर दय्तर से ही ताई की शवयात्रा में शरीक हो आेगा। ग्यारह दिनों बाद किरिया में आप चली जाना।
जानकी - देख बेटा, मैं कुछ और ही सोच रही थी। बिमला ताई की मौत पर सारी बिरादरी इकद्दी होगी। मेरा ससुराल-परिवार वहो आएगा। लोकल मौत है। कोई न जाए तो आसपास बहुत चर्चा होती है। इससे परिवार की बदनामी होती है। खुशी के मौके पर कोई न जाए तो कोई बात नहीं, मगर गमी में न जाओ तो थू-थू होती है। बाद में बहाना कोई नहीं सुनता। अगर आज मैं नही जाेगी तो मेरे भाई-भाभी क्या सोचेंगे।
बडा बेटा - पंकज, तू आज आट्टो दिन बाद घर आ जाना।
जानकी - इसने कह तो दिया कि इसके दय्तर में ऑडिट चल रहा है।
बडा बेटा - मैं जानता ह कि ऑडिट किस तरह होते हैं। खा-पीकर सब खानापूर्ति हो जाती है।
जानकी - अब इसके पीछे क्य पड गया तू। तुम दोनों मेरे साथ नहीं जा सकते तो दोनों बहुओं से पूछ लो। उनमें से कोई एक छुड्डी ले ले और घर सम्भाल ले तो मैं कैब कर के शक्तिनगर खुद ही चली जाेगी।
;वहीं से आवाज लगाने पर दोनों बहुऐ हाजर होती है।द्ध
बडा बेटा - तुम में से किसी एक को आज छुड्डी करनी होगी। अम्मा को एक डैथ में जाना है। बडी बहू - मेरा बॉस तो बहुत खडूस है। य अचानक छुड्डी कर लगी तो वह मेरी एक दिन की तनख्वाह काट लेगा। सरकारी विभाग नहीं है मेरा कि जहो यह सब चल जाता है। सरकारी नौकरी में तो बेशक घर से ही फोन कर दो। मुझे तो एक दिन पहले बताकर छुड्डी देकर आना होता है।
छोटी बहू - मैं तो बैंक में केशियर ह। एक बार जाकर बैंक खुलवाना ही पडेगा। मेरे फिंगरप्रिन्ट से ही कैश की तिजोरी खुलेगी। हो, दोपहर बाद मैं घर आ सकती ह, मगर वहो से घर तक आने में ही तीन बज जाऐगे। आपको तो पता ही है कि दोपहर में सडकों पर और भी ज्यादा रश हो जाता है। स्कूलों से बच्चों की छुड्डी जो हो जाती है।
जानकी - तुम चारों यह तय कर लो कि छुड्डी किसको लेनी हे। मेरा वहो जाना लाजमी है।
छोटा बेटा - भाई, आप ले लो न आज छुड्डी। कई बार तो बेमतलब घर बैठे रहते हो।
बडा बेटा - मेरे खाते में एक भी छुड्डी नहीं बचाी। तुम लोगों को क्या पता कि पापा के मरने के बाद इस घर को खडा करने में मैंने कितने पापड बेले हैं। तुम्हें तो सब कुछ बना बनाया मिल गया।
जानकी - क्य इतना भडकता है। शांति से बात करो न। आज मुझे बिमला ताई की मौत का इतना अफसोस नहीं हो रहा है जितना दुख इस बात का हो रहा है कि तुम लोगों की गृहस्थी में मैं बुरी तरह फेस गई ह। दलदल में फेसी हुई गाय की तरह। इस घर की बहुऐ तो सज-ट्टाज कर सुबह-सवेरे सब कुछ मेरे हवाले करके घर से निकल जाती है। मुझे एक पल का चैन नसीब नहीं है। घर के झाडू-पौंचे में ही बारह बज जाते हैं। एक बजे के बाद तुम्हारे बच्चे आ जाते हैं स्कूलों से। उन्हें समय पर खाना खिलाना, सुलाना, होमवर्क देखना। फिर शाम को बाजार से सब्जी और सौदा-सुल्फ लाना। तुम चारों तो पेइंग गेस्ट की तरह घर से निकलते हो और देर शाम घर में घुसते हो।
बडा बेटा ;नरमी सेद्ध - अब नौकरीपेशा वालों को यह सब करना पडता है न अम्मा।
जानकी - मैं कब तक इस घर का सारा बोझ उठाती रहगी। पहले अपने बच्चों का गू-मूत साफ किया। अब उनकी औलादों का करना पड रहा है। मेरा भी मन करता है कि कभी समय निकाल कर मायके जाे या कभी अपने ससुराल के रिश्तेदार के पास रह। उनका दुःख-सुख साझा करूे।
छोटा बेटा - तो आपको रोकता कौन है? छुड्डी वाले दिन चले जाया करो।
जानकी - बाकी दिनों में जाने से मनाही है क्या? य मुझे हर बार गमी-शादी में जाने से तुम क्य रोकते हो? भला किसलिए
बडा बेटा - नहीं अम्मा, हमने तो आपको कभी नहीं रोका।
जानकी - अपने मतलब के लिए न ताकि तुम्हारे बच्चों को ताजा खाना मिलता रहे। ताकि तुम्हारे घर की रखवाली होती रहे। किसी अन्य आदमी या औरत को ऐसे नहीं रख सकते न। बहुत पैसे लगते हैं तुम्हारे। नौकरी वाली बहुऐ लाकर मैंने बहुत भारी गलती की है।
छोटा बेटा - आजकल अगर मियां-बीवी दोनों न कमाऐ तो घर का गुजारा नहीं होता।
जानकी - मुझे किसी के मरने-जीने में शिरकत नहीं करने देते। कभी मैं भी टें बोल गई तो मेरा मुर्दा सम्भालने के लिए लेबर चौक से चार मजदूर लाने पडेंगे तुम्हें। कोई नहीं आएगा तुम्हारे दरवाजे पर। तुम किसी के पास जाकर राजी नहीं। सारी उम्र तुम्हारे लिए मर-खपकर क्या मिला मुझे। अपना सारा गुबार निकालकर अपना गला ही दुखाया है मैंने। तुम लोग मेरे लिए एक दिन की छुड्डी नहीं ले सकते। तुम्हें शर्म नहीं है। तुम्हारे पापा की सगी ताई है जिसकी मौत हुई है और तुमसे क्या उम्मीदें हैं
छोटा बेटा - अम्मा, दिल छोटा न करो। एक तरकीब है मेरे पास।
बडा बेटा - जल्दी से बता।
छोटा बेटा - पहले तुम सारे कहो कि मेरा सुझाव तुम मानोगे।
चारों एक स्वर में - जल्दी से बताओ बाबा।
छोटा बेटा - हम चारों अपने-अपने नाम की पर्ची एक कटोरे में डालते हैं। उसमें से एक पर्ची उठाऐगे। जिसके नाम की पर्ची निकलेगी, आज छुड्डी उसे ही करनी पडेगी।
सबके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान दौड जाती है।
२०५, जी एच-३, सेक्टर-२४, पंचकूला-१३४११६ ;हरियाणाद्ध, मो. ९८७२४३०७०७