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तीन कविताऐ

आमिर विद्यार्थी
;१द्ध
कुछ इस तरह आना...
आना...
जैसे आता है वसंत
पेडों पर खजो के बाद
आते हैं माह
आषाढ, सावन, भादो
(तुऐ...मसलन
वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर
आना...
जैसे आता है
आम पर बौर
नीम पर निबोली
गेह में दूट्टा, दरिया में रवानी
आना...
किसी झिलमिल रंग की
स्वप्निल छवि की तरह
मानिन्दे-बूए-गुल की तरह
गौहरे-शबनम की तरह
सुनहरी फसल की तरह
आना...
जैसे आती है भोर
ट्टाीरे-ट्टाीरे ओचल पसारे
जैसे आता है माट्टाुर्य
नेरुदा-नाजम की किसी प्रेम कविता में
आना...
जैसे बु= के चेहरे पर मुस्कान
आना...
हो कुछ इसी तरह आना
जैसे आते हैं लौटकर
थके-हारे पक्षी समूह में
नील गगन से पृथ्वी पर
यह बताने कि
आना जाने से कहीं ज्यादा बेहतर है।
;२द्ध
नदी
युगों-युगों से
अम्बर-अम्बर
पर्वत-पर्वत
जंगल-जंगल
अनहद नाद की तरह बजते हुए
अपने-आप में मग्न हो...
बस उसे बहते रहना था
क्योंकि बहना ः
नदी होना है।
(3)
तुम मुझे फिर मिलना
;अमृता प्रीतम की कविता ’मैं तुझे फिर मिलगी‘ के जवाब मेंद्ध
तुम मुझे फिर मिलना
तबले की ताल बनकर
वीणा की झेकार बनकर
दुःख में सुख बनकर
बारिश में छाता बनकर
तुम मुझे फिर मिलना
किसी कविता की
अविस्मरणीय पंक्तियो बनकर
प्रेम पर आट्टाारित किसी
उपन्यास का विराम बनकर
सुबह-सुबह घास पर तुहिन-कण बनकर
पक्षियों के वृंद का कलरव बनकर
तुम मुझे फिर मिलना
प्यार बनकर, अहसास बनकर
गीत-संगीत बनकर
निध में स्वप्न बनकर
न मिलना सरपट दौडती
गाडी की गति बनकर
बल्कि मिलना
कछुए की चाल बनकर
और मिलना
मृत्यु के निकट
मेरी अंतिम इच्छा बनकर।
दरगाह के पास, भजनपुरा, नई दिल्ली। मो. ९९५८२ ८६५८६