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पाँच कविताऐ

राजकुमार कुम्भज
न्नेम-जल
प्रेम-जल ह टकराेगा
थप-थप चीरते हुए सीना चट्टान का
इस पार से उस पार चला जाेगा
कि जिस पार लहलहाना है मुझे
और गुनगुनाना है खेतों में
हरे के लिए
हर किसी भी भूख के विरु=
और हमेशा-हमेशा बिखेरते हुए
अपना क्तदयस्थ प्रेम-जल।
सबसे कठिन प्रश्न है प्रेम
सबसे कठिन प्रश्न है प्रेम
लेकिन अगर सबसे सरल है कुछ भी
और इस दुनिया में तो प्रेम ही
प्रेम मजा नहीं सजा है किन्तु कोमल
काटोगे तो जानोगे
वर्ना जिंदगी भर पछताओगे
इसीलिए सोच रहा होता है ईश्वर
कि उसने क्यों नहीं किया प्रेम
क्यों नहीं पाई सजा
था जो प्रेम-आकांक्षी
था जो प्रेम-आकांक्षी
बु=माों की मूर्खताओं से मारा गया
राहों पर जख्म नहीं रह गया था कोई भी
राहों पर जख्म नहीं रह पाता है कोई भी
पदचाप सैकडों, परेशानियो सैकडों
और सैकडों-हजारों सोच-विचार वगैरह
रौंद ही देते हैं वह सब कुछ जो असहाय
किन्तु असहाय कब हुआ प्रेम ?
और प्रेम वह जो रौंदता नहीं, रोपता है
अच्छे भरोसे की तरह जनमता है सभी में
सभी के लिए था जो प्रेम-आकांक्षी।
प्रेम के बंदे हजार
प्रेम के बंदे हजार
इट्टार-उट्टार देखो तो हत्यारे चार
चार लाचार ये, वे, वे और वे भी
जो करते रहे दावा कि नहीं शामिल
किसी भी साजिश में
उठाते रहे ट्टार्म-ग्रंथ
अपने-अपने गंदे हाथों में अक्सर
अपने-अपने गंदे इरादों के साथ
मुश्किल की घडी थी
मुश्किल बेहद बडी थी
बीच में कानून-कायदों की छडी थी
फिर भी थी हिम्मतें कि लडी थीं
हों हिम्मतें तो हारती हैं र्‍ूरताऐ
र्‍ूरताओं के हारने से
हर हाल लहलहाती हैं पृथ्वी की अनंतताऐ
पृथ्वी की अनंतताऐ बची रहें, बचा रहे प्रेम
प्रेम के बंदे हजार।
हरा है जंगल
हरा है जंगल
हरे जंगल में हरी है आग
आग की अनुगजों में गजता है प्रेम
प्रम में कुलांचे भर रहे हैं मृगछौने
मदमस्त है शराबियों की टोली
प्रट्टाानमंत्री का सुनते हुए भाषण
चमक रही है स्वार्थ की चोदी
और चोदनी और चौपाल
जरूरतमंदों की फैली-पसरी
जरूरी चीजों के विरु=
इस सबके विरु= ह मैं भी
पता नहीं कब से
अपनी आत्मा के कोनों में समेटे
और हर कहीं एक महायु=
जबकि बाजार में
बिक रही है बंदूकें, बैंगन के संग-संग
ऐसे में सपनों की गरज है कविता में
सपनों को चमकाने की गरज लिए
मैं चलता ह, तो चलता ह
किसी खासे परिदृश्य की तरफ
बाहर पानी, भीतर ज्वालाऐ
नमक और रोटी की तरह प्रेम
अपनी-अपनी ट्टाुन में बरस रहे हैं बादल
लोग ताने हैं रंग-बिरंगी छतरियो
हरा है जंगल।
३३१, जवाहर मार्ग, इंदौर-४५२ ००२,
दूरभाष ः ०७३१-२५४३३८०