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छठी की रात

नितिन यादव
कस्बे में क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा था। मुकाबला एक शहर की टीम और पडोस के एक गाँव के बीच था। शहर की टीम के विशाल स्कोर के जवाब में गाँव की टीम के विकेट तडा-तडा गिर रहे थे, तभी दर्शकों के बीच कानाफूसी हुई अब पोलार्ड आ गया, यह इन शहरी चिकलुओं को सबक सिखाएगा। पोलार्ड जिसका दसवीं की मार्कशीट में नाम मनोज था, उसने आते ही लगातार दो बार गेंद सीधी दर्शकों के पास भेज दी। काफी समय से सुस्ताए हुए दशकों में थोडा करंट आ गया और वह जोर-जोर से पोलार्ड-पोलार्ड चिल्लाने लगे। तीसरी गेंद पर पोलार्ड रन आउट हो गया और दशकों का बिजली का कट आउट उखड गया जिससे उनकी लाइट चली गई, साथ ही वे धीरे धीरे मैदान से गायब होने लगे । मनोज ने मैदान से बाहर आकर बल्ला एक और फेंका और अपना मोबाइल कब्जे में किया ।
थोडी देर में अपनी हारी हुई टीम के साथी के साथ मनोज मोटरसाइकिल पर सवार था। आज शाम को जल्दी आ जाना , याद है ना तुझे आज दीपक के लडके की छठी की रात है। मनोज ने मोटर साइकिल सवार से कहा। दीपक मनोज का चचेरा भाई था । दीपक आईटीआई करके कस्बे की एक फैक्ट्री में काम करता था । हाँ, हाँ भाई आ जाऊँगा , व्यवस्था तो पूरी है ना ? चलो अच्छा है आज मैच में लडाई भी नहीं हुई मोटर साइकिल सवार ने कहा । मनोज ने हँसते हुए कहा व्यवस्था फुल है। चिंता मत कर दारू और बीयर की नदी बहेगी आज। तभी मनोज के पास दीपक का फोन आया। वो नाचने वाले लडकों की व्यवस्था कर ली तूने? मोबाइल से आवाज आई। सब व्यवस्था एक नंबर की कर दी है, तू मस्त रह। कई वर्षों पहले दीपक के पिता की सडक दुर्घटना में मौत हो गई थी, जो शहर में टैक्सी चलाते थे।
दीपक के पिता और मनोज के पिता जो की खेती करते थे, दोनों साझे में ही रहते थे। वह साझा अभी तक चला रहा था। मनोज के पास दो ही काम थे एक क्रिकेट खेलना और दूसरा मोटरसाइकिल दौडाना। दोनों क्षेत्रों में ही आसपास के इलाके में उसकी ठीक-ठाक ख्याति थी। वैसे वह अपने दोस्तों में यह बताना नहीं चुकता था कि उसके घर वालों ने दिल्ली के उसके एक रिश्तेदार को उसकी सरकारी नौकरी लगवाने के लिए पाँच लाख रुपए नगद दे रखे हैं।
सत्तर वाट के बल्ब की पीली रोशनी में ऊँघते कमरे का अचानक दरवाजा खुला। चारपाई पर आँखें बन्द करके लेटे राम सिंह को अचानक अपने पाँव के पास एक स्पर्श महसूस हुआ। उसमें धीमी आवाज में खुद से कहा कौन? बाबा मैं रवि राम सिंह ने रवि के सर पर हाथ सहलाते हुए कहा ओहो! खुश रहो! भाई कब आया? अकेला आया है? बस बाबा अभी आया हूँ, हाँ, बाबा अकेला ही आया हूँ,पापा की तबीयत ठीक नहीं थी और आपकी भौढिया (पौत्रवधू ) पीहर गई हुई है । रवि ने कहा ।
राम सिंह को पता था रवि का पापा जगमाल क्यों नहीं आया । राम सिंह के तीनों बेटों में जगमाल सबसे बडा था । स्कूल की मास्टरी और छोटी-मोटी प्रॉपर्टी डीलिंग के बदौलत उसने पडोस के शहर में मकान बना लिया था। पिछले साल रवि भी स्कूल मास्टर लग गया था। थोडे दिन पहले हुए सरपंची के चुनाव में जगमाल का दोस्त रिटायर्ड मास्टर फतेह सिंह भी खडा था। जगमाल ने पूरे परिवार से उसे वोट डालने को कहा था, लेकिन उसके दोनों भतीजे दीपक और मनोज ने भूतपूर्व सरपंच के युवा लडके को न सिर्फ वोट दिया बल्कि उसका जमकर प्रचार भी किया। उसके बाद ही जगमाल का गाँव आना लगभग बन्द हो गया था। रवि ने पूछा बाबा रोटी खा ली? हाँ भाई, जा तू भी खा ले जाते हुए रवि ने कहा पानी लाऊँ? ना अभी पिया है राम सिंह ने धीमी आवाज में कहा। कमरा फिर अकेला हो गया।
***
हरामखोर आराम से, नीचे हाथ लगा ले,यदि एक भी बियर टूट गई ना तो तेरे कान में से धुआँ निकाल दूंगा। मनोज ने पुश्तैनी हवेली की सीढियाँ चढते हुए अपने दोस्त से कहा। हद हो गई तेरे आगे ! आज तक कभी ऐसा हुआ है? इस पुश्तैनी हवेली का एक कोठा मनोज के दादा रामसिंह के हिस्से आया था, जिसमें तूडा (पराली) भरी जाती थी । मनोज ने जैसे ही ताला खोलकर सांकल हटाई कमरे की उमस और बेजान हवा ने उनको घेर लिया । बर्फ की सिल्ली के ऊपर बियर लिटाते हुए मनोज ने पूछा कम तो नहीं पडेगीं बियर, दारू की दो पेटी तो तूने छत पर रख ही दी होंगी? चिन्ता मत कर, कम पडेगी तो और ले आएँगे , ठेके वाले का फोन नंबर है मेरे पास। कार्यक्रम कब शुरू करना है? मनोज के दोस्त ने लापरवाही से कहा। कौन है? एक धीमी व्याकुल आवाज उनके कानों से टकराई। कमला माँ, मैं हूँ मनोज। कमला मनोज के पिता की रिश्ते में ताई लगती थी, जो इस निर्जन खंडहर हवेली में अकेली रहती थी। हवेली वहीं खडी रह गई और जमाना आगे निकल गया।
हवेली से छिटका जीवन कुछ खेतों की ओर भागा,कुछ कस्बों और शहरों की तरफ और जो बच गया वह हवेली की तरह साक्षात दिखकर भी नजरों से ओझल हो गया। कमला को उसके बडे बेटे जिसे आजकल गाँव वाले भगत जी कहते थे ने घर से निकाल दिया था। जिसके बाद कमला ने सुनसान हवेली के एक कमरे में शरण ली। राशन और कुछ पैसे उसके पोते पहुँचा आते थे। हवेली का बिजली से कोई सम्बन्ध नहीं था, इसलिए कमला अपने जीवन का अंधियारा मिट्टी के तेल से जलने वाली डिबरी से दूर करती थी। हवेली से भगत जी का घर भले ही पचास गज दूर हो, लेकिन अब यह दूरी कमला सिर्फ कल्पना में ही पूरी करती थी। हवेली में चूल्हे की मौत हुए मुद्दत हो गई थी ।
कमला ने वहाँ फिर से चूल्हा जलाकर वहाँ आराम करते कुत्तों की आँख में एक नई चमक भर दी थी। हवेली के एक कमरे में कमला रहती थी बाकी सभी कमरों पर ताला लगा हुआ था। कमरों में बन्द सन्नाटा कभी महीनों तो कभी सालों में टूटता था। कमला की शादी दूर के एक गाँव में हुई थी जो दूसरे राज्य में था । गरीबी में पैदा हुई कमला शादी के बाद और गरीबी में पहुँच गई। पुराने बडे बुजुर्ग दबी जबान से कभी बताते थे कि कमला को चार हजार रुपए नगद में वीरेंद्र सिंह उसके पति से लाया था वीरेंद्र सिंह के तीन लडकियाँ थी। उसके लडके की चाह कमला ने ही पूरी की। कमला से उसको तीन लडके हुए। जिनमें से अभी सिर्फ एक ही जीवित था,भगतजी ।
बेटा,यहाँ क्या कर रहे हो? कमला ने पूछा तो मनोज ने हंसते हुए कहा कुछ नहीं माँ, इस बिरजू को हवेली में भूत दिखाने लाया था! तुम गई नहीं अभी तक? दीपक के छोरे की छठी की रात है आज, रागिनी वाले बुलाए हैं। बस भाई अभी जा ही रही हूँ कमला ने दरवाजे के साँकल लगाते हुए कहा। ताला उसके पास था नहीं, वैसे भी वह ज्यादा दूर कहीं आती जाती नहीं थी। अक्सर हवेली के बाहर बैठी आते-जाते लोगों को देखती रहती थी। कमला के जाते ही मनोज ने कहा इस बुढिया को यहाँ डर भी नहीं लगता अन्धेरे में ! हलवाई से पकोडे लिया और कार्यक्रम शुरू कर। पानी की बाल्टी और डिस्पोजल मैं भिजवाता हूँ।
माइक टेस्टिंग हो चुकी थी, लोगों का जमावडा जमने लगा था। रामसिंह भी छडी टिकाते हुए बाहर आकर चुपचाप मुड्ढे पर बैठ गया। हुक्का पीते गाँव के अधेड ने राम सिंह की तरफ हुक्का बढाया। राम सिंह ने हाथ के इशारे से मना कर दिया। अधेड ने पूछा बाबा छोड दिया? राम सिंह को सुनाई नहीं दिया, उसे कई वर्षों से सुनना कम हो गया था ।
उसने अन्दाजे से जवाब दिया डॉक्टर ने मना कर रखा है, तुम लोग पियो। बाबा तम्बाकू तो अच्छी है, कहाँ से लाया? बाजार से ही मँगवाई होगी आजकल तो कौन बौता है गाँव में दूसरे अधेड ने हुक्का हाथ में लेते हुए कहा। हाँ, सही कहा, तंबाकू कडक नहीं हो तो हुक्का पीने का मजा ही नहीं आता पर घर की तम्बाकू की होड नहीं होती। बाजार वाली तम्बाकू कई बार ठीक निकल आती है तो कई बार हल्की। पहले अधेड ने जवाब दिया। राम सिंह को सुना नकली हाँ भाई, अब तो नकली का ही जमाना है उसने सर हिलाते हुए कहा। अधेड ने हँसते हुए कहा बाबा अब तो तबीयत ठीक है ? सुना कल-परसो पेशाब जाते हुए गिर पडे। रामसिंह को सुनाई नहीं दिया। उसने कहा हाँ। रागिनी वाला तो हेलू का छोरा मुख्तार ही लग रहा है। हेलू और राम सिंह हम उम्र ही थे।
हेलू दलित परिवार से था। जमीन थी नहीं तो लोगों के खेत में मजदूरी करता था। वक्त बेवक्त हेलू और रामसिंह अपनी आपबीती एक दूसरे से बतिया लेते थे। पास बैठे एक बुजुर्ग ने रामसिंह की ओर देखते हुए कहा बुड्ढी के जाते ही बुड्ढे की रौनक चली गई, वरना दोनों आँगन में पेड के नीचे खाट डाले चुपचाप बैठे रहते थे। बूढी को दिखता कम था और डोकरे को सुनता ऊँचा था। बुड्ढा अब ज्यादा नहीं जिएगा। तभी एक कुर्सी खिसका कर बैठते हुए गाँव के युवा सरपंच ने कहा बाबा राम-राम गाँव के एक अधेड ने चिरौरी करते हुए कहा यार हरिया का तो तूने बीपीएल कार्ड बनवा दिया, हमारा भी बनवा दे। ताऊ जुल्म कर दिया वोट तो तुम उस मास्टर फतेह सिंह को दो और बीपीएल कार्ड मैं बनवाऊँ? पर भाई मेरे लडकों ने तो तेरे को ही वोट दिया था अधेड ने दयनीयता से कहा। तो ताऊ जब तेरे लडके कहेंगे तब मैं कार्ड बनवा दूँगा। तू आराम से फतेहसिंह मास्टर के साथ मन्दिर का चन्दा इकट्ठा कर। तेरा मास्टर फतेह सिंह अभी चंदे की रसीद लेकर आता ही होगा। वह मन्दिर के नाम पर कितनी ही रसीद काट ले। चुनाव तो मैं उसे अगली बार भी नहीं जीतने दूँगा। धर्म-कर्म अपनी जगह है और राजनीति अपनी जगह क्यों बाबा? सरपंच ने धाराप्रवाह बोलते हुए कहा । राम सिंह को धर्म शब्द सुनाई दिया। उसने कहा हाँ भाई,धर्म के बिना तो पार नहीं पडती। सरपंच मनोज और उसके दोस्तों के कन्धों पर थपकी देकर चला गया ।
उसके जाते ही एक बुजुर्ग बोला सारे फसाद की जड यह सरपंच ही है। गाँव के सारे छोरों को इसने बिगाड रखा है । गाँव के लडकों का पढाई लिखाई से कोई वास्ता नहीं रहा । सारे फन्ने खाँ और नेता बने बैठे हैं नौकरी की किसी को चिंता नहीं। एक अधेड रिटायर फौजी, जो श्रीलंका गई भारतीय शान्ति सेना में था। वह बात बेबात हर मौके पर वहाँ के किस्से सुनाया करता था इसलिए उसका नाम गाँव में जाफना पड गया था। उसने कहा नौकरी है कहाँ बाबा? बुजुर्ग ने जवाब दिया राजनीति में कौन सा इनको लड्डू मिलने वाला है? घर से रोटी पानी मिल रही है, उमर निकल जाएगी तब रोते घूमेंगे।
***
नेताजी अगले गाँव होकर चलना है । वहाँ पोलार्ड के भाई के लडका हुआ है , उसकी आज छठी की रात है। गाडी की पिछली सीट पर बैठे एक कार्यकर्ता ने नेताजी यानी विवेक से कहा । विवेक ने पिछले विधायकी के चुनाव में दूसरे नंबर पर आकर उन राजनीतिक पण्डितों को चुप कर दिया था जो उसे नौसिखिया छोरा कहते थे। हाँ भाई, इस गाँव को कैसे छोड सकते हैं ? एक तरफा वोट दिए थे इस गाँव ने मुझे। नेताजी ने व्हाट्सएप पर दो दिल के निशान बनाते हुए कहा। नेताजी वैसे भी इस गाँव से तो आपका करीबी रिश्ता रहा है। नेताजी के मुँहलगे कार्यकर्ता ने हँसते हुए कहा। पगलो तुम क्या जानो प्यार क्या होता है? नेता ने साइड मिरर में झाँकते हुए कहा। सही है नेताजी हम क्या समझे आपका प्यार , जो हर गाँव में दो-तीन प्रेमिका के रूप में उग आता है। नेताजी के स्वागत के लिए मनोज अपनी पूरी टोली के साथ सडक पर खडा था। आते ही सबने नेताजी के साथ सेल्फियाँ दे मारी। जो अभागे बच गए उन्होंने नेताजी की गाडी के साथ सेल्फी लेकर सांत्वना प्राप्त की। नेताजी हल्की ले लो मनोज ने छूटते ही कहा । नेताजी ने हँसते हुए कहा अभी अगले गाँव जागरण में भी जाना है, फिर कभी तसल्ली से बैठेंगे। नेताजी अपनी मुँह दिखाई करके और रागनी वाली पार्टी को पाँच सौ रुपए देकर अंतर्ध्यान हो गए । उसके जाते ही एक लडके ने कहा चोर है साला!
पोलार्ड तेरा यह नेता छह महीने पहले क्रिकेट टूर्नामेंट में इक्कीस हजार रुपए बोल कर गया था। आज तक नहीं दिए, तूने इसे बोला क्यों नहीं कि रुपए कब देगा? मनोज ने उसे झिडकते हुए कहा तुझे इक्कीस हजार रुपए की पडी है ! तुझे पता है पिछला विधानसभा चुनाव इसे कितने करोड का पडा है? लडके ने जवाब दिया तो इसके बाप ने प्रॉपर्टी डीलिंग से क्या कम रुपए कमा रखें हैं ? होटलों में कॉल गर्ल के लिए पैसे तो है,यहाँ क्रिकेट किट के लिए देने को पैसे नहीं है। मनोज ने हँसते हुए कहा यार फिर भी औरों से तो यह ठीक ही है, कम से कम फोन करते ही आ तो जाता है । चलो हवेली की छत पर पहुँचो सारी व्यवस्था हो चुकी है। इधर रागिनी की आवाज आ रही थी
लेणा एक ना देणे दो,
दिलदार बणे हाँडै सैं
मन मैं घुण्डी रहै पाप की,
यार बणें हाँडैं सैं
नई-नई यारी लागै प्यारी,
दोष पाछले ढक ले
मतलब खात्यर यार बणें,
फेर थोडे दिन में छिक ले ।
हवेली की छत गुलजार हो चुकी थी । तुम्हारी दादी गई , छत पर आ जाओ एक लडके ने कमला के दोनों पोतों को आवाज दी। एक लडके ने बियर की चुस्की लेते हुए कहा कुछ भी कहो यार , हवेली की छत पर पीने और पतंग उडाने का आनंद ही अलग है । यह मजा खेत में और ढाबे पर पीने में नहीं आता । दूसरे ने सिगरेट सुलगाते हुए कहा सही कहा भाई । सुना है कभी यह हवेली गाँव में सबसे ऊँची थी। अब जब खूब ऊँचे-ऊँचे मकान बन गए और यह सबसे नीची रह गई तब भी इसकी खुली छत पर पतंग उडाने का मजा ही कुछ और है। इधर राम सिंह को रागिनी में शब्द सुनाई दिया चूडियाँ.... वह जीते जी कभी अपनी पत्नी को सोने या चाँदी की चूडियाँ नहीं करा पाया। बेचारी अस्सी बरस काँच की चूडियों में ही काट गई। जब उसकी ननद और बहुओं के लिए सोने की चूडियाँ बनीं, तो उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। भग्गी के समय जब देश का बँटवारा हुआ था, वह तेरह साल का था। नई-नई शादी हुई थी। पिता थे नहीं और भाई छोटा था। पडोस का गाँव मुसलमानों का था। खून से सनी कुल्हाडी और जेवर तलाश करती वासनामय आँखें उस गाँव में घूम रही थी । वह भी अपने रिश्ते के एक चाचा के साथ अलसुबह उस लुटे-पिटे वीरान गाँव में गया था। लौटा तो उसकी आँखों में चील और गिद्ध की परछाइयाँ थीं और हाथ में पतली सी बच्चों के हाथ में पहनने वाली चाँदी की चूडियाँ थीं जो उसे एक छप्पर की छत में दुबकी हुई मिली थीं । जिन्होंने सोने चाँदी के जेवर लूटे थे उन्होंने कई दिन उसका मजाक उडाया। लाया भी तो क्या लाया...बच्चे के हाथ की चूडियाँ और वह भी चाँदी की। कईं साल टूटे बक्से में बंद रहने के बाद वे चूडियाँ सुनार के पास पहुँच गई, उसकी बहन का पाजेब बनने के लिए। रागिनी गाते मुख्तार ने एक लंबा आलाप लिया।
हो-ग्या इंजन फेल चालण तैं,
घंटे बन्द, घडी रह-गी।
छोड ड्राइवर चल्या गया,
टेशन पै रेल खडी रह-गी।।
हवेली की छत पर एक लडके ने कहा पोलार्ड तेरा ताऊ वाला लडका गुरुजी भी तो आया हुआ है। उसको भी यहीं बुला ले । वहाँ कहाँ वह बूढों में बैठकर रागनी सुन रहा है । दौडकर एक लडका रवि को बुला लाया। गुरुजी कुछ ठण्डा-गरम? लडके ने पूछा । रवि के मना करने पर एक लडके ने कहा गुरुजी आपको बियर बार भाते हैं और हमारे साथ पीने में शर्म आती है? रवि ने कहा नहीं भाई, मैं पीता ही नहीं हूँ। लडके ने कहा अच्छा गुरुजी! आपने क्या हमें अपने स्कूल के बच्चे समझ रखा है? वैसे आजकल तो बच्चे भी गुरुओं झाँसे में नहीं आते । चल भाई गुरु जी को कोल्ड ड्रिंक दे। एक लडके ने कहा गुरुजी गाँव में ही ट्रांसफर करा लो वैसे भी अपने सरकारी स्कूल में पचास बच्चे भी नहीं है । आराम से कट जाएगी। सबकी औलादें तो बस में बैठकर सुबह-सुबह इंटरनेशनल स्कूलों में चली जाती है। सरकारी स्कूल में क्यों नहीं भेजते बच्चों को? रवि ने एक मासूम सवाल पूछा । लडके ने जवाब दिया गुरुजी हद कर दी आपने ! आपको मास्टर ताऊजी ने शुरू से बाहर पढने भेजा फिर तीन साल कोचिंग कराई , दो साल आपकी भर्ती कोर्ट में अटकी रही । उसमें वकीलों को ताऊजी ने मोटी फीस दी तब जाकर आपकी नौकरी लगी और आप कहते हैं उन्हें सरकारी स्कूल में हिन्दी मीडियम में पढाए !
रवि ने बात बदलते हुए कहा तुम लोगों को फालतू का ज्ञान देने के अलावा कुछ आता है? एक ने ग्लास में बर्फ मिलाते हुए कहा गुरुजी आपने मुझे फेसबुक पर अनफ्रेण्ड कैसे कर दिया? रवि ने गुस्से में जवाब दिया गधों तुम उन पोस्टों पर कमेंट करते हो, जहाँ लिखा होता है यदि मैं सुन्दर दिख रही हूँ, तो कमेंट बॉक्स में पाँच लिखो। फेक आईडी होती है वह सब। मूर्खों लडकी के नाम से लडके आईडी बनाकर तुम्हारे स्वाद लेते हैं। एक लडके ने कोने में पेशाब करते हुए पूछा गुरुजी आपको कितनी बार गाँव के लडकों के व्हाट्सएप ग्रुप से जोडा, आप हर बार निकल लेते हैं ,क्या बात है? रवि ने हँसते हुए कहा तुम उस ग्रुप में झूठी और मनगढंत खबरें शेयर करो और जब मैं उनका विरोध करूँ, तो ग्रुप में मुझे गाली बको। फिर भी तुम चाहते हो कि मैं उस ग्रुप में रहूँ! यह सही है गुरुजी ! जो खबर आपको पसन्द हो वह तो सच्ची और जो नापसन्द हो वह झूठी ! फिर भी आपको बता दूँ इस बार सरपंच हमारे व्हाट्सएप ग्रुप ने ही बनाया है। चुनाव से पहले हमने व्हाट्सएप पर सबकी राय पूछी थी और चुनाव का नतीजा भी उसी राय के अनुसार ही आया। एक लडके ने उबासी लेते हुए कहा। भाई पोलार्ड तेरे को सिर्फ मोटरसाइकिल भगाना आता है। उस दिन जब हाई सैकेण्डरी में दूसरे गाँव वाले लडकों से लडाई हुई ,तब तो तेरे से भागा नहीं गया। एक लडके ने सिगरेट की राख झाडते हुए मनोज की चुटकी ली।
तिलमिला कर मनोज बोला साले तुम सब के सब बुजदिल हो तुम सब तो भाग गए , मेरे अकेले को घेर लिया। अब फेसबुक पर वह दूसरे गाँव वाले छोरे पूरे गाँव की इज्जत उछालते हैं ,मेरे बारे में कुछ कुछ लिखते हैं । किसी दिन उनसे हिसाब तो बराबर करना ही है। तभी अचानक एक लडके को शराब की बोतल ढूँढते हुए नाचने के लिए बुलाए हुए लडकों की याद आई। उसने कहा पोलार्ड तेरे नाचने वाले लडके आ गए होंगे चल तमाशा देखते हैं। मनोज ने कहा अभी वो गाँजा पीकर गरम हो रहे हैं, इतने तू भोलू का एक कडक पैक बना।
भोलू अधेड उम्र में पहुँचने के बावजूद कुंवारा था। मामूली जमीन थी। भाइयों के साथ ही रहता था और उनके खेतों में काम करता था। भोलू खुश होते हुए बोला हाँ, मजा नहीं आ रहा एक झल्लू-सा पैक बना जब गिलास आधा भर गया तो वह बिना पानी मिलाए एक साँस में उसे पी गया । तभी एक लडके ने नीचे से आवाज लगाई लडकों ने रंग जमा दिया है, जल्दी आओ। उसके पीछे पीछे सभी भागे सबसे अंत में रवि था । तेज आवाज में बजते संगीत के बीच वह दोनों लडके, लडकियों के कपडों में थिरक रहे थे। भोलू ने जाते ही उनके साथ जुगलबन्दी कर ली। नाचते-नाचते अचानक वह रामसिंह के सामने आ गिरा । रामसिंह के बगल में बैठे बुजुर्ग ने कहा रामसिंह जब तू सरपंच था, तब तूने ही धर्मशाला के बाहर गाँव में बारात के नाचने पर और वीडियो पर फिल्म दिखाने पर मनाही कराई थी जो पूरे बीस बरस चली। रामसिंह को सुनाई दिया बारात। पहले गाँव में आई हर बारात में नाचने पर झगडा होता था। जिसमें कई सारे बाराती और कुछ गाँव वाले जरूर पिटते थे ।
वीडियो देख कर आते लडकों की भी छेडछाड की शिकायत पंचायत में आती रहती थी, इसलिए उसने सर्व सहमति से इन पर रोक लगा दी थी परन्तु कुछ सालों बाद धीरे-धीरे यह रोक हट गई और अब तो... लडकों को दम भरने का समय देने के लिए रागनी वालों ने फिर कमान सँभाल ली थी । लडकों के नाच के बाद उससे प्रभावित होकर रागिनी गाने वाला एक बुजुर्ग अतिनाटकीयता के साथ अपने शरीर को हिलाने का असफल प्रयास कर रहा था जिसके खिलाफ उसके शरीर ने विद्रोह कर दिया था। उसने उखडी हुई साँसों के साथ गाना शुरू किया ..
जगह देख कै बाग लगा दिया, छोटी-छोटी क्यारी।
तरह-तरह के फूल बाग में, खुश्बो न्यारी-न्यारी।
इधर चौक की दीवार के पीछे लडके भोलू को स्टील के गिलास में शराब डालकर मनुहार के साथ पिला रहे थे जिसे हल्की ना-नूकर के साथ भोलू फुर्ती से गटक रहा था। रवि ने कोने में सर पर तोलिया बाँधकर चुपचाप बैठे अपने छोटे चाचा को देखा। उसे अपने बचपन की छोटे चाचा की शादी की घटना याद आई जब छोटे चाचा ने एक रिश्तेदार की शराब की बोतल और गिलास को सडक पर फेंक दिया था और कहा था मेरे घर में यह सब नहीं चलेगा। कहाँ गुम हो गया चाचा का घर? तभी उसके चाचा ने उठकर पाँच सौ का नोट रागिनी वाले मुख्तयार की तरफ बढाया मुख्त्यार ने सलीके से नोट रखते हुए माइक से बच्चे और चाचा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
तभी अचानक रवि को ख्याल आया बाबा को भी मुख्तयार को पैसे देने होंगे। उसने पर्स से होले से पाँच सौ के दो नोट निकाले। एक बाबा के लिए और एक खुद के लिए । वह रामसिंह तक पहुँचने ही वाला था कि मुख्तयार ने माइक पर घोषणा की कि लडकी के परदादा रामसिंह की तरफ से दो सौ इक्यावन रुपए। रवि ठिठक गया और उसने पर्स से सौ-सौ के दो नोट निकाले। उसने कान में रामसिंह से पूछा बाबा कुछ और पैसे चाहिए क्या ? रामसिंह ने कहा नहीं । बरामदे में बैठी औरतों ने भी अपनी अपनी लुगडी के किनारे पर लगी गाँठ में से पैसे निकाल कर आगे बढा दिए। कमला बरामदे की दीवार के पास बैठी अपनी बेटों की बहू को ढूँढ रही थी, लेकिन वो भगतजी के डर से कमला से दूर दूसरे छोर पर बैठी थी। कमला ने अपनी मुट्ठी में दबा मुंडा-तुडा बीस का नोट चुपचाप से आगे बैठी औरत की और बढा दिया।
इधर भोलू को लडकों ने घाघरा लुगडी पहना दिया था और वह झूमता हुआ नाचने वाले लडकों के साथ किसी चलताऊ फिल्मी गीत पर लुढकने लगा । स्त्री बने एक लडके ने भोलू के धक्का दिया, तो भोलू जाकर रिटायर्ड फौजी जाफना पर गिरा। जाफना जैसे ही पीछे खिसका स्त्री बना वह लडका उसके एकदम निकट आ गया। जाफना एकदम सकते में आ गया, उसकी आँखों में एकाएक भय के बादल घुमड आए। अगले ही पल स्त्री बना वह लडका मारक मुस्कान के साथ आगे बढ गया। संकट टलते ही जाफना ने राहत की साँस ली। तभी उस स्त्री बने लडके ने भगतजी पर पानी का लोटा उडेल दिया। जिसे देख लडके हँसने लगे और उनके मुँह से निकली शराब की गंध भी फिल्मी गाने के साथ सुर मिलाने लगी। भोलू ने ऊपर के शरीर के हिस्से के कपडे निकाल कर रागिनी गाने वाले बुजुर्ग पर फेंक दिए और सिर्फ घाघरे में नाचने लगा । धीरे-धीरे बुजुर्ग और अधेड अपने-अपने घरों की ओर खिसकने लगे । तभी किसी शरारती लडके ने जग में पानी भरकर भोलू पर फेंक दिया । भोलू उन लडकों को गालियाँ बकने लगा जिसकी प्रतिक्रिया में लडके जोर-जोर से सीटी और तालियाँ बजाने लगे। इसी बीच भोलू लडखडा कर गिर गया।
रामसिंह जो अपने गुस्से को को इतने समय तक ज*ब करके बैठा था उसने उठकर भोलू के एक तमाचा जड दिया और कहा कल मैं तेरे घर आकर तेरे भाइयों से बात करूँगा। अब तू यहाँ से चुपचाप चला जा। तमाचे से छाई शांति के बीच लडके उसे पकडकर हवेली की ओर ले गए। रागिनी वाले अपना सामान समेटने लगे और स्त्री बने लडके उसी कमरे में बन्द हो गए जिस कमरे से निकलकर वे आए थे। तभी अचानक लाइट चली गई। लडके ट्रांसफार्मर की तरफ भागे क्योंकि उन्हें ट्रांसफार्मर की और से आवाज सुनाई दी थी।
अंधेरे में भगतजी ने रामसिंह का हाथ पकड कर सहारे से उसके कमरे में पहुँचाया। कमरे में अंधेरे में चारपाई पर लेटे रामसिंह की आँखें कोने में सुनी पडी चारपाई को तलाश रही थी । बुढिया के जाने के बाद इस चारपाई का अकेलापन उसे बहुत कचोटता था। बुढिया अक्सर रात में बडबडाती थी इस बुड्ढे को तो कुछ भी नहीं सुनता । इसके भरोसे तो कोई पुकार पुकार कर ही मर जाए। उसके मरने पर कितना खर्च किया था उसके बेटों ने लेकिन उसके जीते जी दूध का एक गिलास और मांगने पर भी हंगामा हो जाता था । घुटनों में दर्द से रात-रात भर कहारती रहती थी। अच्छा हुआ चली गई। आखिर कब तक घर वालों की आँखों में खटकती रहती।
छोटी बहू तो एक दिन किसी से कही रही थी जब से शादी हो कर आई हूँ बुढिया ने एक दिन भी शांति के नहीं रहने दिया । अब जाकर शांति मिली है। छोटा बेटा एक दिन मनोज से कह रहा था बाबा चला जाए तो सरसों इसी कमरे में भर दिया करेंगे, पर बाबा के हाथ में तो नहीं है जाना जब बुलावा आएगा तभी तो वह जाएगा। किसी को शांति चाहिए तो किसी को खाली कमरा और उसे? उसे तो बस कुछ नहीं चाहिए। नींद में रामसिंह को अचानक आवाजें सुनाई दी । उसकी नींद उचट गई। उसे लगा बाहर से चिल्लाने की आवाज आ रही है। पेशाब भी लग रहा था, वह उठकर पेशाब करने के लिए खडा हुआ, बरामदे के बाहर निकल कर जैसे ही बाथरूम की सीढियाँ चढने लगा वह चक्कर खाकर गिर गया। उसने दम भर कर उठने की कोशिश की, लेकिन सब कुछ धुंधला पड गया था। उसने आवाज लगाई मनोज... मनोज...
लेकिन वहाँ कोई नहीं था। जबान सूखने लगी आसमान में तारों के बीच उसे एक धुंधली लाल रेखा नजर आई उसमें पास पडी हुई छडी को पकडने की कोशिश की और फिर ताकत बटोर कर मनोज को आवाज दी, लेकिन पेड के पीछे रोती बिल्ली के रुदन में उसकी आवाज दब गई । उसे दूर कहीं से अपनी दिवंगत पत्नी की आवाज सुनाई दी यह बुड्ढा कभी नहीं मरेगा। तभी आंगन के नीम के पेड से एक पीला पत्ता गिरा। रामसिंह उठने की कोशिश की तो उसके कुर्ते की जेब से एक सिक्का निकलकर गोल घूम कर मिट्टी में उसकी आँखों के करीब गिर गया। न जाने कितने समय तक गली का कुत्ता रामसिंह की पार्थिव देह के पास भौंकता रहा। रवि ने आकर रामसिंह की देह को झकझोरा बाबा! लेकिन रामसिंह पास में पडी छडी की तरह शान्त रहा।
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हवेली की छत पर भोलू उल्टियाँ कर रहा था। नीचे कमला अभी कुछ देर पहले जो देख कर आई थी उसके बाद उसकी आँखों में नींद गायब थी। रह रह कर वह दृश्य बार-बार उसकी आँखों के सामने आ रहा था.... आज शाम से ही उसका पेट खराब था ऊपर से छठी की रात के आयोजन में उसने पकौडे खा लिए थे । हवेली में पाखाना था नहीं, तो लाइट जाते ही वह खाली खेत में शौच के लिए गई थी। उसके बाद उसने हल्ला सुना । जब वह वहाँ गई तो कुछ क्षण उसके कुछ समझ में नहीं आया । उसके बाद ...खून से सना वह चेहरा.. उसके पोते के हाथ में सरिया, उसको धक्का देना, कमला का गिर जाना, उठने पर फिर धक्का देना, कमला का आवाज देकर लोगों को बुलाना, उसका मुँह बन्द करना, गिरते पडते जैसे तैसे कमला का हवेली तक पहुँचना। उसके सामने पैदा हुए यह लडके कब हिंसक पशु में बदल गए उसे पता ही नहीं लगा । नशे में धुत होकर यह किसी की जान भी ले सकते हैं इसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी ।
जब वीरेंद्र सिंह उसे लेकर आया तब उसके डेढ साल का लडका था मोहन, जिसे उसके पहले पति ने ही रख लिया था। उसके बाद उसने मोहन को आज तक नहीं देखा। आज उसे मोहन की बहुत याद आ रही थी।
उधर मनोज मोटरसाइकिल पर दो लडकों को और बिठाकर बदहवास सा खाली खेतों की ओर चले जा रहा था।
रामसिंह का दाह संस्कार हो चुका था। चौक में बैठे लोगों के बीच पुलिस वाले भी एक कोने मैं बैठे थे। सभी मोबाइल में वह वीडियो देख रहे थे जो रात का था। उधर खेत में बनी कोठरी में एक लडका मनोज से कह रहा था हरामखोर पोलार्ड वैसे तो तेरे से एक ढँग की सेल्फी नहीं खींचती, लेकिन व्हाट्सएप ग्रुप में यह वीडियो बनाकर डालने में तूने एक मिनट नहीं लगाई। मनोज बोला ज्यादा डर मत । मेरी नेताजी से और सरपंच से बात हो गई है । कुछ नहीं होगा। उसके सर पर सरिया किसने मारा था? उसको जान से थोडी मारना था , हाई सैकेण्डरी में हुई लडाई का बदला लेना था बस। उसके मरने से अब रायता फैल गया । सरिया तो मैंने मारा था, नशे और गुस्से में यार पता ही नहीं लगा। पर सरिया लाया कौन था? एक लडके ने कहा। सरिया तो मैं लाया था बगल के घर के पिछवाडे से निकालकर साला चुप ही नहीं हो रहा था पता नहीं अपने आप को क्या समझता था। यह तो ठीक रहा चाचा जाफना ने आकर पुलिस को फोन कर दिया वरना वह दूसरा लडका भी नहीं बच पाता। दूसरे लडके ने कहा। मनोज ने कुछ सोचते हुए कहा चाचा जाफना और कमला माँ ही गले की घन्टी बनेंगे देखना इस मामले में।
रवि को कोने में ले जाकर उसके पिता ने पूछा क्या हुआ था रात को? रवि ने धीरे से कहा रात को लाइट चली गई थी, ट्रांसफार्मर की तरफ से आवाज आई थी। सबने सोचा शायद फेस उड गया, इसलिए फेस बदलने के लिए ट्रांसफार्मर के पास गए थे। तभी रास्ते में एक बुलेट मोटरसाइकिल की रोशनी दिखाई दी। पोलार्ड ने मोटरसाइकिल पर लगी रंग-बिरंगी लाइटों से मोटरसाइकिल सवार को पहचान लिया था। पोलार्ड जोर से चिल्लाया वही हरामजादा है । लडकों ने उसे रोका तो उसने स्पीड और बढा दी । एक लडके ने मोटरसाइकिल पर पत्थर फेंका । फिर अचानक पता नहीं क्या हुआ , वे मोटरसाइकिल सवार और उसके साथ के लडके को मारने लगे। पोलार्ड बोला यह हाई सैकेण्डरी का ग्राउण्ड नहीं है। अब बोल फेसबुक पर तो बडा फुदकता है। लडके ने कहा साले कायर अपने गाँव में शेर बनता है। फिर उन्हें बिजली के खम्भे से बाँध दिया। एक लडका पता नहीं कहाँ से सरिया ले आया और उसके सिर पर दे मारा। और फिर सारे लडके उन पर टूट पडे। तूने उन्हें रोका नहीं? उसके पिता ने पूछा मैं.. मैं डर गया था, कमला मां ने उन्हें रोका था, लेकिन उन्होंने कमला माँ को धक्का दे दिया। कमला ताई वहाँ क्या करने गई थी? उसके पिता ने पूछा पता नहीं हवेली में टॉयलेट नहीं है, तो शायद उधर के खाली खेत में......।
तभी एक पुलिस वाले ने उसके पिता से कहा मास्टर जी आफ गाँव के लडकों के बडे हौसले बुलंद हैं। शराब पीकर तो यह वैसे भी किसी को कुछ नहीं समझते रवि के पिता ने पूछा दूसरा लडका बच जाएगा क्या? पुलिस वाले ने कहा इमरजेंसी में है! देखो, उसके बयान बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। आफ गाँव के छोरे खुद ही घटना का वीडियो बनाकर बाँटते फिर रहे हैं।
इधर हवेली में कमला के पास क्षेत्र के विधायक से लेकर सभी पार्टियों के छोटे बडे नेता बैठे थे। गाँव के सरपंच ने कहा माँ घर के ही बच्चे हैं । माना गलती हो गई लेकिन पुलिस के आगे तू कुछ मत कहना। तेरे से हाथ जोडकर विनती है और चाचा जाफना तू भी चुप रहना। जो हो गया उसे तो अब कोई नहीं बदल सकता। रिटायर्ड फौजी ने कहा यह सब एक दिन में नहीं हुआ है, मैंने तुझे कितनी बार कहा था इन जवान लडकों को अपने स्वार्थ के लिए शह मत दे, पर सरपंच तेरा क्या जाता है? तेरा परिवार तो शहर में रहता है। तुझे आज सरपंच, कल प्रधान और परसों एमएलए बनना है। सरपंच ने कहा चाचा हर चीज में मेरे को दोष देना ठीक नहीं है। यह घटना हुई तब तो मैं यहाँ था भी नहीं। एमएलए ने कहा माई सबका भला इसी में है कि तू चुप रहे। वैसे भी लडकों ने वीडियो डालकर खुद के पैरों पर कुल्हाडी मार ही ली है। कमला बोली भाई किसी की कोख उजडी है। तुम लोगों को इस दर्द का क्या पता ? तुम्हारे घर में होता, तो तुम्हें पता लगता।
कमला के बेटे की बहू आज कईं सालों में हवेली में आई थी । उसने कमला के पैर पकड रखे थे । कमला बोली बेटी अँधी मत बन, यह अँधा प्रेम पूरे गाँव को जलाकर राख कर देगा । कमला के बगल के कमरे से रोने की आवाज आ रही थी । बदहवासी में कुछ लडके आकर रात को उस कमरे में छुप गए थे और डर के कारण अब उनकी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। सरपंच ने दरवाजे पर लात मारी और उन्हें बाहर निकाल कर वहाँ से भगाया। तभी एक कुत्ता भौंकने लगा। छत पर अलसाए से पडे भोलू ने बियर की एक खाली बोतल कुत्ते पर फेंकते हुए दूसरी तरफ करवट ली।

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