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राहुल राजेश की कविताएँ

राहुल राजेश
निरुपाय

ऐसी कोई जगह नहीं बची थी
जहाँ मृत्यु की छाया न पडी हो

हर तरफ विनम्र श्रद्धांजलि
देने की अफरातफरी थी

मृतकों के मुस्कुराते चेहरों से
पटा था आभासी संसार

और उनके कृत्य-अकृत्य
बाँचते हाँफ रहे थे शब्द

स्मृति इससे पहले कभी
इतनी निष्ठुर नहीं हुई थी

मृत्यु को बिसराने का
एक भी उपाय न बचा था

जीवन के पास...

मृत्यु
जब मृत्यु
हर दरवाजे पर दस्तक दे रही है

तब कब कौन
मृत्यु का ग्रास बन जाए

माता या पिता, पति या पत्नी
पुत्र या पुत्री, पडोसी या मित्र
वृद्ध या युवा, राजा या रंक

कुछ कहा नहीं जा सकता...

इस कोरोना काल में
किसी के काल-कवलित हो जाने की

दूर गाँव या शहर से या
बिल्कुल पास से आयी खबर

अब दुख से ज्यादा
बेबसी से भर देती है...
आज स्वप्न में क्या देखता हूँ
कि मैंने अपनी देह पर
नमक हल्दी तेल मल कर

खुद को तैयार कर लिया है!
अब इसे देख कर
मृत्यु लौट जाए

या काल की कढाही में
मुझे तल कर खा जाए

मेरी बला से!!

***
खबर

मौत अब बस
खबर बनकर आती है

खबरों की मौत की
खबर भी ऐसे ही आई

अफसोस कि इस बार किसी ने
अफसोस तक न जताया

बस चैनल बदल दिया
पन्ना पलट दिया

विज्ञापनों में मुस्कुराते चेहरे पर
थूकने का मन तक न किया...


***
तब भी

फूलों ने खिलना बंद नहीं किया है
पेडों ने झूमना बंद नहीं किया है
हवाओं ने बहना बंद नहीं किया है
चिडियों ने चहचहाना बंद नहीं किया है

लहरों ने उठना बंद नहीं किया है
सूरज ने उगना बंद नहीं किया है
खेतों ने लहलहाना बंद नहीं किया है
बच्चों ने खिलखिलाना बंद नहीं किया है

जब हर तरफ जीवन सांसत में है
तब भी साँसों ने चलना बंद नहीं किया है
आँखों ने देखना बंद नहीं किया है
कानों ने सुनना बंद नहीं किया है

जब सारे दरवाजे बंद हैं तब भी
खिडकियाँ ने खुलना बंद नहीं किया है
दुआ में हाथों ने उठना बंद नहीं किया है
मंदिरों के पट बंद हैं लेकिन घरों में
घंटियों ने बजना बंद नहीं किया है

मृत्यु ने मंडराना बंद नहीं किया है तो
जीवन ने भी अँखुआना बंद नहीं किया है।

***

सम्पर्क - जे-2/406, रिज़र्व बैंक अधिकारी आवास,
गोकुलधाम, गोरेगांव (पूर्व), मुंबई-400063 मो. 9429608159.