fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar

मिथिलेश श्रीवास्तव की कविताएँ

मिथिलेश श्रीवास्तव
तानाशाह को देखना है

तानाशाह को देखना है
तो, उसे कुतुबमीनार की
सबसे ऊँची मंज़ल से देखो
वह बहुत छोटा दिखेगा
दहशत अपने आप कम हो जाएगा

तानाशाह को ख्वाब में देखो
वह रेंगता हुआ नज़र आएगा
ख्वाब देख कर तो देखो

गरजते हुए बादलों को छटते हुए देखना है
तो, एक बार नज़र भर बादलों को घूर कर तो देखो
तानाशाह को देखना है तो बिखरते बादलों में देखो

अनखुली रह गयी किताब

एक पन्ना पलटना चाहता हूँ
दो पन्ने पलट जाते हैं एक साथ
जैसे बीत जाते हैं कई दिन एक साथ
कई शामों कई सुबहों कई यादों को पार कर के एक साथ
अचानक इतना बडा फासला दो पन्नों का और कई दिनों का
जिन्दगी के छोटी होने के एहसास से भरते चले जाते हैं
जबकि सुबह और शाम बारह घंटे के फासले को कम नहीं होने देते
जिन्दगी कभी कभी अनखुली रह गयी किताब की तरह लगती है

छौंक
छौंक से अधिक छौंक की आवाज़ें हमें चौकाती हैं
इन आवाजों में यातनाओं की आवाजें होती हैं
पानी के बूँदों का गर्म कडाही के लाल सतह पर
गिरने और गिरते ही जल कर गर्म भाप में
तब्दील हो जाने की आवाज़ें होती हैं
इन आवाज़ों में बहुत सारी सिसकियाँ होती हैं
प्रताडित हो रहे लोगों की कराहें होती हैं
कडाही से उठते गर्म धुँए में
इतनी खुशबुएँ होती हैं कि हम
पानी के बूँदों के जलने की यातनाएँ देख नहीं पाते
कराहों और सिसकियों को पहचान नहीं पाते
यातनाओं और खुशबुओं के
घालमेल से बना है हमारा समय
खुशफहमियों फरेबों और झूठी आशाओं से
हम सींच रहे हैं अपना समय
हमारे समय में पानी की सतह
जडों की पहुँच से नीचे पहुँच गया है
फुनगियाँ काँटे हो रही हैं
और कांटे आत्मा में चुभ ने लगे हैं

छौंकने की आवाज़ों में जो खुशबुएँ हैं
उनमें जले हुए लाल मिर्च की खुशबू है
जो गले में खराश पैदा करती है
हम खाँसते-खाँसते छींकते-छींकते बेहाल हो रहे हैं
यह वही लालमिर्च है
जो हमारी आँखों में झोंका जा रहा है
हमारी आँखें समय की आँखे हैं
यातनाओं के अश्रु-जल से तरबतर
बूंदों का कडाही में जलना और गर्म भाप में बदलना
यातनाशिविरों की याद दिलाती हैं
जहाँ हमारी औरतें कैद हैं
बूँदों का जलना औरतों ने सबसे अधिक देखा है
बूंदों के भाप में बदलने के ताप को औरतों ने सहा है
लालमिर्च के जलने से औरतों ने
सबसे अधिक खाँसा है
सबसे अधिक औरतें ही रोई हैं सुगंधि
और आवाज़ों के घालमेल से
औरतों ने अपनी आत्मा में लगायी हैं
इतनी सारी घातक छौंके और गर्म कडाही के
उन्माद को अपने भीतर आत्मसात कर लिया है
एक बेमिसाल चुप्पी के साथ
इन औरतों को हम जब कभी धोखा देते हैं
हमारी आत्मा का कोई अंश
बूँदों की तरह जल जाता है