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साहित्यिक समाचार

नहीं रहे सुप्रिसिद्ध साहित्यकार डॉ. श्रीलाल मोहता
प्रख्यात लोककला मर्मज्ञ, साहित्यकार एवं मौखिक इतिहास के विशिष्टज्ञाता बहुविज्ञ व्यक्तित्व के धनी डॉ. श्रीलाल मोहता के अ-सामयिक निधन से कला-साहित्य एवं संस्थानिकजगत में शोक की लहर छा गई। कोविड-19 महामारी से साहित्य परिवार का एक और नक्षत्र अस्त हो गया। डॉ. मोहता का जन्म 30 अगस्त 1943 को प्रख्यात मनीषी डॉ. छगनमोहता के घर हुआ था।
डॉ. मोहता ने अपने साहित्यिक जीवन में सांस्कृतिक गाथाएं, मथेरण कला और रंगों की कहानी, निज आतम मंगल रूप सदा, लोक का आलोक, मरू-संस्कृति कोश, आरसी आगै हाथ पसार्यां फुटरापो, राजस्थान का आंचलिक परिदृश्य, गणगौर गाथा, शब्द साधना, संगीत संस्कृति की प्रकृति, वदति तुलसीदास और सद्यप्रकाशित तुलसी वृंदावन सरीखी पुस्तकें रच कर उल्लेखनीय अवदान दिया।
डॉ. मोहता ने साहित्य के अतिरिक्त एक मूल्यवान सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बीकानेर प्रौढ शिक्षण समिति, राजस्थान प्रौढ शिक्षण समिति, प्रज्ञा परिवृते, परम्परा, अजीत फाउण्डेशन, उरमूल जैसी अनेक संस्थाओं में शिक्षा, स्वास्थ और रोजगार के क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य किया।
- मधुमती डेस्क

विख्यात आलोचक प्रो. नवलकिशोर का निधन
कोविड महामारी ने हमारे राजस्थान साहित्य अकादेमी परिवार के महत्त्वपूर्ण सदस्य विख्यात आलोचक प्रो.नवल किशोर को हमसे छिन लिया। वे पिछले कई दिनों से कोविड से लड रहे थे। उदयपुर निवासी प्रो नवलकिशोर मानववाद और साहित्य जैसे कालजयी ग्रंथ के लिए हिंदी जगत में सम्मानित थे। वर्ष 2019 में उनकी नयी किताब प्रेमचंद की प्रगतिशीलता का प्रकाशन हुआ और उनकी पुरानी किताबों के नए संस्करण भी आए। उनकी मृत्यु के समाचार से प्रदेश के साहित्यिक जगत में शोक की लहर है।

प्रख्यात इतिहासविद् प्रो.लालबहादुर वर्मा नहीं रहे

प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा भी कोरोना के क्रूर प्रहार से इस दुनिया से विदा हो गए. बिहार में जन्मे, पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से स्कूली शिक्षा लेकर फ्रांस की राजधानी पेरिस तक उच्च शिक्षा हासिल करने वाले प्रोफेसर वर्मा ने इतिहास लेखन को नई ऊंचाई दी। लाल बहादुर वर्मा इतिहास की आंदोलनकारी और विचारधर्मी भूमिका के समर्थक थे। प्रो.वर्मा मौजूदा दौर के उन गिने-चुने लोगों में से थे जिनकी पुस्तकें देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों के किसी न किसी पाठ्यक्रम में पढाई जा रही हैं।