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कविता : जॉयस किल्मर और लैंगस्टन ह्यूग्स

महिमा श्रीवास्तव
1.
वृक्ष

मैं सोचता हूँ कि
मैं कभी ना देखूँगा
एक वृक्ष जितनी सुंदर कविता
वह वृक्ष जिसका क्षुधातुर मुख
धरा की मिठास भरी
छाती से लगा है
वह वृक्ष जो ईश्वर की तरफ
पूरा दिन ताकता है
और अपनी पत्तेदार बाँहें
उठाता है प्रार्थना के लिए
वृक्ष जो गर्मियों में
धारण करता
चिडियों का घोंसला
अपने केशों में।




2.
स्वप्न

स्वप्नों को कस के पकडे रखो
क्योंकि यदि स्वप्न मरे तो
जीवन एक कटे पर
वाली चिरैया है
जो उड नहीं सकती
स्वप्नों को पकडे रखो
क्योंकि जब
स्वप्न चले जाते
जीवन एक बंजर
खलिहान होता है
बर्फ से जमा हुआ।



कविता- लैंगस्टन ह्यूग्स
3.
आग और बर्फ

कुछ लोग कहते
दुनिया समाप्त होगी
अग्नि से जल कर
कुछ कहते समाप्त
होगी बर्फ में ।
जितना कि मैं
इच्छाओं के
विषय में जानता
मैं उनके साथ हूँ
जो अग्नि के पक्षधर हैं।
पर यदि दो बार इसको
समाप्त होना है
मैं सोचता हूँ कि
मैं घृणा के विषय में
काफी जानता हूँ
यह कहने के लिए
कि विनाश के लिए बर्फ
शानदार है
और पर्याप्त भी।


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