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सोशल मीडिया पर प्राप्त संदेश

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
आफ कुशल संपादन में मधुमती का नया अवतार हुआ है। इसका सर्वात्मना विकसित एवं समग्र सारस्वत स्वरूप इसकी सर्वांगीण समृद्धि का पुष्कल प्रमाण है। आपका संपादकीय विचार वैभव संपन्न एवं नेत्रोन्मीलक होता है। अभी अभी कपिला वात्स्यायन पर केन्द्रित मधुमती का अंक मिला। इतनी विरल ज्ञान सामग्री से समृद्ध यह अंक न केवल पुनः पुनः पठनीय है अपितु संग्रह योग्य भी है। आपकी विलक्षण प्रतिभा को देर से पहचाना गया है। आपको अनेकशः बधाई।
डॉ. नरेंद्र शर्मा कुसुम, जयपुर
आदरणीय संपादक महोदय
सादर प्रणाम।
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। कल शाम को मधुमती का दिसंबर अंक प्राप्त हुआ। हार्दिक आभार। इस अंक का संपादकीय न केवल मधुमती परिवार अपितु हिंदी जगत के लिए सहेजने योग्य दस्तावेज है, जैसे संपूर्ण विगत वर्ष के मंथन से निकला नवनीत इस अंक में समाहित हो गया है। सबसे पहले संस्कृति की श्रेष्ठतम संभावनाओं की साकार प्रतिमूर्ति विदुषी कपिला वात्स्यायन जी का पुण्य स्मरण। महीयसी के व्यक्तित्व के माध्यम से सफलता और सार्थकता का सूक्ष्म पर्यावलोकन सार्थकता की ओर प्रेरित करने का साधु प्रयास है। संज्ञाओं को क्रियाओं में जीने वाली और अनेक क्रियाओं की एक संज्ञा जैसे वाक्य कलात्मक व्यक्तित्व के प्रति अनन्य कलात्मक श्रद्धांजलि जैसे बन पडे हैं। आत्मीय स्पर्श के साथ लिखा गया है यह संपादकीय आलेख।
रिनपोछेजी के व्यक्तित्व का उद्घाटन उनके शील और सात्विकता के अनुरूप ही सुकुमारता और स्वस्ति भावना से मिश्रित है। संपादकीय भाषायी संरचना में यह विशेषता आसानी से लक्ष्य की जा सकती है कि भाषा वर्ण्य विषय के अनुरूप ही आकार लेती है। वात्स्यायनजी के प्रति श्रद्धाभाव, रिनपोछेजी के प्रति पूज्यबुद्धि गर्भित आदर भाव, और मंगलेश डबरालजी के प्रति आत्मीय स्पर्श लेखन में जीवन के स्वर भर रहे हैं।
अंत में विगत वर्ष की स्मृतियों उपलब्धियों के बीच नये वर्ष का स्वागत करता यह संपादकीय जैसे आगामी वर्ष में नयी उपलब्धियों, नये प्रतिमानों की संप्राप्ति का आवाहन है। नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं सहित।
आपका
कृष्ण बिहारी पाठक, कोटा