fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का 150 वाँ जन्मवर्ष पत्र-पत्रिकाओं की नजरों में: एक विवरण

कृष्ण वीर सिंह सिकरवार
मनुष्य उस हद तक महान बन जाता है, जिसमें वह लोगों के कल्याण के लिए काम करता है।
- महात्मा गाँधी
2 अक्टूबर, 2019 को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का 150 वाँ जन्म दिवस देशभर में बडी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर देश भर में स्कूलों और दफ्तरों में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहा जा सकता है कि अहिंसा आंदोलन के दम पर देश को आजादी दिलाने वाले बापू आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। गाँधीजी के प्रयासों के चलते ही आज हम आजाद है। महात्मा गाँधी भारत की उन चंद हस्तियों में सबसे आगे है जिनकी सीख व विचार उनकी मृत्यु के इतने वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद भी हमारे बीच आम है। गाँधीजी का जीवन लोगों के लिए प्रेरणादायक है। बापू के विचार और उनकी जीवन शैली ने ही उन्हे एक आम आदमी से महात्मा बना दिया था। कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन भर में कभी भी अपने सिद्धान्तों से समझौता नहीं किया था।
हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी का स्वच्छता अभियान महात्मा गाँधी के सपनों से ही प्रेरित है, क्योंकि महात्मा गाँधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने स्वच्छ भारत का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें।
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150 वें जन्मवर्ष पर उनके इन्ही विचारों और संदेशों को कई स्तर से याद किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से सराहनीय योगदान पत्र-पत्रिकाओं का रहा। राष्ट्रपिता के विचार और दर्शन की प्रांसगिकता को रेखांकित करते हुये जन-जन तक पहुँचानें की दृष्टि से देश भर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं ने अपने-अपने स्तर से महात्मा गाँधी विशेषांकों व परिशिष्टों का प्रकाशन किया। यह विशेषांक कहीं-कहीं आंशिक रूप से एवं कहीं पूर्ण रूप से प्रकाशित होकर पाठकों के समक्ष उपस्थित हुये। प्रस्तुत आलेख में इन्ही पत्रिकाओं के विशेषांकों का एक परिचय पाठकों के सम्मुख रखने का प्रयास किया गया है।
केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, भाषाविज्ञान, भाषाशिक्षण तथा साहित्य चिंतन के रूप में प्रकाशित त्रैमासिक शोध पत्रिका गवेषणा का (अंक-115) जनवरी-मार्च, 2019 अंक महात्मा गाँधी विशेषांक के रूप में प्रकाशित हुआ। स्पष्ट है कि यह अंक प्रकाशन की दृष्टि से बहुत ही विलंब से प्रकाशित हुआ है। पत्रिका के संपादक प्रो. महेन्द्र सिंह राणा एवं प्रधान संपादक प्रो0 नंदकिशोर पाण्डेय हैं। पत्रिका की संरक्षकता प्रेमचंद साहित्य विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध डॉ. कमल किशोर गोयनका जी सँभाल रहे हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि गवेषणा पत्रिका हिंदी साहित्य में शोध की दृष्टि से अपना एक अलग मकाम हासिल किए हुए है। लगभग तीन सौं के लगभग पृष्ठों में बत्तीस लेखकों एवं विचारकों ने अपनी लेखनी से इस पत्रिका को वाकई में शोध पत्रिका के रूप में स्थापित कर दिया है। पाठकों की सुविधा हेतु पत्रिका में संकलित कुछ आलेख की जानकारी इस प्रकार है- गाँधी की पत्रिकारिताः प्रबंधन का स्वरूप-कमल किशोर गोयनका, सांस्कृतिक बहुलता और गाँधीजी- रमेश चन्द्र शाह, गाँधीजी के स्वाधीनता संग्राम की विशिष्टताएँ- एम.ज्ञानम, भारत का स्वराज- पाण्डेय शशिभूषण शीतांशु, गाँधीजी और राष्ट्रभाषा हिंदी-परमानंद पांचाल, महात्मा गाँधी की पत्रकारिता- सभापति मिश्र, गाँधीजी के आध्यात्मिक विचार-आशीष सिसोदिया, महात्मा गाँधी और नमक सत्याग्रह- आदर्श मिश्र, गाँधीजी की शक्ति थीं कस्तूरबा गाँधी- आकांक्षा यादव आदि आलेख महात्मा गाँधी के जीवन की सम्पूर्ण झाँकी प्रस्तुत करते हैं। पत्रिका में गाँधीजी की पत्रकारिता को केन्द्रित चार से पाँच आलेख संकलित किए गए हैं जो गाँधी की पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए महत्त्वपूर्ण योगदान का महत्त्व परिलक्षित करते हैं। इस प्रकार से पत्रकारिता पर केन्द्रित यह आलेख महात्मा गाँधी को कुशल पत्रकार के रूप में स्थापित करते हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि किसी छात्र को गाँधी साहित्य पर शोध करना है, उनके लिए गवेषणा का यह अंक प्रेरणास्तोत का काम कर सकता है। अंक में प्रकाशित सामग्री ऐतिहासिक एवं पठनीय है। इस अंक की कीमत मात्र 40/-रू है।
इतिहासकार-कथाकार प्रियवंद के संपादन में विचारशीलता और बौद्धिक हस्तक्षेप का उपक्रम के रूप में अकार प्रकाशन, सिविल लाइन्स, कानपुर से प्रकाशित पत्रिका अकार का अगस्त 2019 (53वां अंक) गाँधी अंक के रूप में प्रकाशित हुआ। लगभग 205 पृष्ठ की इस पत्रिका में गाँधीजी विभिन्न पक्षों को विस्तार के साथ प्रस्तुत किया गया। वैसे भी अकार पत्रिका लघु पत्रिकाओं की भीड में अपना एक अलग मुकाम रखती है। यह पत्रिका अपने विचारोत्तेजक लेख और धारदार संपादकीय के रूप में प्रसिद्ध है। पत्रिका में कुल 16 आलेख संकलित किए गए है जिनमें से सात शोध आलेख, दो संस्मरण, दो साक्षात्कार, कविताएँ, गाँधीनामा, डायरी एवं स्मृति कथा के तहत संकलित सामग्री गाँधीजी की विशाल साहित्यिक यात्रा का परिचय कराती है। कुल मिलाकर यह अंक पाठकों के लिए गाँधी साहित्य की अभूर्तपूर्व झाँकी प्रस्तुत करता है। यह अंक लंबे समय तक पाठकों को याद रहेगा, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है। इस अंक की कीमत मात्र 50/-रू है।
संपादक डॉ. शिवदान सिंह भदौरिया के संपादन में दिलशाद गार्डन, नईदिल्ली से साहित्य, संस्कृति एवं विचार की द्वैमासिक के रूप में प्रकाशित पत्रिका परिंदे का संयुक्तांक अगस्त से नवम्बर 2019 अंक (वर्ष : 11, अंकः 3-4) गाँधी अंक के रूप में प्रकाशित हुआ। यह पत्रिका पिछले 11 वर्षों से निरंतर पाठकों की सेवा कर रही है, तथा समय-समय पर प्रकाशित पत्रिका ने विभिन्न-विभिन्न पक्षों को लेकर विशेषांकों का प्रकाशन किया है, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुए। इसी श्रृंखला में लगभग 175 पृष्ठ के इस विशेषांक में में गाँधीजी के विभिन्न पक्षों को विस्तार के साथ प्रस्तुत किया गया। इस अंक में विभिन्न वरिष्ठ लेखकों/आलोचकों द्वारा लिए गए आठ साक्षात्कार संकलित किए गए है, जो गाँधीजी के साहित्य के विभिन्न पक्षों पर विस्तृत प्रकाश डालते हैं। आलेख/दस्तावेज के रूप में विभिन्न शोध विचारकों द्वारा लगभग 43 आलेख संकलित हैं। इसके अलावा कविताएँ/गीत, कहानी, लघुकथा/विचार/गजल, किताबें आदि के तहत संकलित सामग्री भी गाँधीजी के संदर्भ में विस्तृत प्रकाश डालते है। कुल मिलाकर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जन्मशती के अवसर पर परिंदे के इस अंक को बहुत से महानुभावों द्वारा अपना योगदान देकर अंक को संग्रहणीय एवं दस्तावेजी बना दिया है। यह अंक शोधार्थियों के लिए शोध की नई राह खोलता है। इस अंक की कीमत मात्र 150/-रू है।
श्री मधुसूदन आनंद के संपादन में साहित्य, समाज, संस्कृति और कलाओं पर केन्द्रित भारतीय ज्ञानपीठ, नईदिल्ली की बहुप्रतिष्ठित मासिक पत्रिका नया ज्ञानोदय का (199वां अंक) सितम्बर, 2019 गाँधीजी के 150 वे जन्मवर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित होकर पाठकों के समक्ष उपस्थित हुआ। पत्रिका का यह अंक विशेषांक के रूप प्रकाशित न होकर आंशिक रूप से ही प्रकाशित हुआ है। संपादकीय के तहत श्री मधुसूदन आनंद ने गाँधी से भी बडे गाँधी की जरूरत शीर्षक से प्रकाशित विचार पाठकों को सोचने हेतु मजबूर कर देते है। उनके विचार वाकई में प्रासंगिक है। अंक में विशेषः गाँधी के 150 वर्ष के तहत कुमार प्रशांत का शोध आलेख हिंदू गाँधी का धर्म, अजय तिवारी का आलेख गाँधीः भाषा का खादी सौन्दर्य एवं राकेश मिश्र का आलेख सभ्यता के विकल्प का (सत्य) आग्रहः हिंद स्वराज आदि प्रकाशित कर भारतीय ज्ञानपीठ ने एक बडा ही कार्य किया है। इस अंक की कीमत मात्र 40/-रू. है।
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर (राजस्थान) से प्रकाशित मासिक पत्रिका मधुमती का (वर्ष-59, संयुक्तांक-9-10) सितम्बर-अक्टूबर, 2019 अंक आंशिक रूप से प्रकाशित होकर पाठकों के समक्ष उपस्थित हुआ है। पत्रिका के संपादक ब्रजरतन जोशी द्वारा लगभग 200 पृष्ठ की इस पत्रिका में महात्मा गाँधी पर 5 शोध आलेखों को संकलित किया गया है। जिनमें प्रमुख आलेख इस प्रकार है-गाँधीः प्रबुद्ध अराजकतावादी, लेखक-नंदकिशोर आचार्य, गाँधी और दिल्ली, लेखक-कुमार प्रशांत, महात्मा गाँधीः एक पुनरावलोकन, लेखक-पवन कुमार गुप्त, स्वच्छता का मानवाधिकार एवं गाँधी दृष्टि, लेखक-वरूण कुमार आदि लेख पत्रिका को पठनीय बनाते हैं। अन्य सामग्री भी स्तरीय है। इस अंक की कीमत मात्र 40/-रू है।
सृजन की उडान के रूप में देश भर में अपनी पहचान बनाने वाली उत्तर प्रदेश से प्रकाशित प्रसिद्ध मासिक पत्रिका पाखी (वर्ष-12, अंक-2) अक्टूबर, 2019 अंक में संपादक अपूर्व जोशी ने महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती पर विशेष रूप से चिट्ठी आई है के तहत कौशल किशोर, अजित कुमार राय एवं सुरेश अनियाल द्वारा दी गई जानकारी पाठकों के लिए बहुमूल्य है। इस अंक की कीमत मात्र 35/-रू है।
भारतीय भाषा परिषद् कोलकाता से प्रकाशित मासिक पत्रिका वागार्थ का (वर्ष-25, अंक-291) अक्टूबर, 2019 अंक विशेषतः गाँधी के रूप में प्रकाशित हुआ है। पत्रिका के संपादक शंभूनाथ ने राजमोहन गाँधी द्वारा लिखित महात्मा गाँधी की विरासत नामक लेख को संकलित किया है। राजीव रंजन गिरि की प्रस्तुति में गाँधी की आवाज शीर्षक से एक परिचर्चा को संकलित किया है जिसमें नंदकिशोर आचार्य, सौरभ वाजपेयी, उदयन वाजपेयी, प्रमोद कुमार, कुमार प्रशांत, सुजाता चौधरी, राधा भट्ट आदि रचनाकारों की परिचर्चा पत्रिका को पठनीय बनाती है। कुल मिलाकर पत्रिका आंशिक रूप से ही सही, किन्तु गाँधी साहित्य को प्रस्तुत करती है। इस अंक की कीमत मात्र 30/-रू. है।
शोध एवं संदर्भ की मासिक पत्रिका के रूप में शिवाजी नगर, भोपाल से समागम पत्रिका का प्रकाशन श्री मनोज कुमार के कुशल संपादन में विगत 19 वर्षों से निरंतर किया जा रहा है। यह पत्रिका एक रिसर्च जर्नल के रूप में पाठकों की अद्भुत सेवा कर रही है। इस पत्रिका का अक्टूबर 2019 का अंक सार्द्धशतीः विलक्षण था बा और बापू का साथ शीर्षक से पाठकों के हाथ में आया है। लगभग 100 पृष्ठों के इस अंक में गाँधीजी के समस्त पहलुओं पर विस्तार के साथ चर्चा की गई है। चूँकि इस पत्रिका के प्रकाशन में विषय-विशेषज्ञ के रूप में प्रदेश के कई वरिष्ठ पत्रकारों एवं प्रोफेसरों का उल्लेखनीय योगदान है, इसलिए इस अंक में संकलित आलेख देश के प्रसिद्ध पत्रकारों एवं चितंको की अथक मेहनत एवं परिश्रम को दर्शाते हैं। इनमें कुछ पत्रकारों का परिचय पाठकों से कराना आवश्यक है-श्री राजेश बादल। श्री गिरिराज किशोर, वरिष्ठ पत्रकार, नईदिल्ली। श्री ललित सुरजन, प्रधान संपादक, देशबंधु समाचार पत्र समूह। श्री रामचंद्र राही, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार, दिल्ली। श्री श्यामलाल चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार लटेरी, जिला विदिशा, म.प्र.। श्री अभि मनोज, संपादकीय अध्यक्ष, इन्टरनेट समाचार पत्र, पलपल इंडिया डॉट कॉम। श्री राजनाथ सिंह सूर्य वरिष्ठ पत्रकार। श्री संजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार एवं भारतीय प्रसारण सेवा से संबद्ध, पटना, बिहार। श्री अजय बोकिल, वरिष्ठ पत्रकार, भोपाल। श्री रामपाल त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकूट। श्री अवनीन्द्र झा, वरिष्ठ पत्रकार, पटना। श्री मनोज कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, भोपाल आदि। इसके अलावा देश के कई वरिष्ठ प्राध्यापकों एवं शोध छात्रों द्वारा लिखित आलेख भी मनमोहक एवं ज्ञानवर्धक है। कुल मिलाकर पत्रकारों की पैनी दृष्टि ने इस अंक को वाकई शोधपरक एवं ऐतिहासिक बना दिया है, जिसके लिए समस्त पत्रकार बंधु बधाई के पात्र है। इस अंक को लंबे समय तक अंक में प्रकाशित अपनी धारदार एवं उत्तेजक सामग्री से पाठकों द्वारा याद किया जाएगा। इस अंक की कीमत मात्र 50/-रू. है।
वर्ष 1927 से निरंतर प्रकाशित देश की एकमात्र हिंदी मासिक पत्रिका वीणा का ध्येय वाक्य है-तेरे गुन-गौरव सुनाऊँ आजु भूतल पै, याते मातु शारदे सुधार निज वीणा तू। इस पत्रिका का (वर्ष-93, अंक-10) अक्टूबर, 2019 अंक महात्मा गाँधी विशेषांक के रूप में प्रकाशित होकर पाठकों को एक सारगर्भित सामग्री प्रस्तुत करता है। वर्तमान में यह पत्रिका श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, रविन्द्रनाथ टैगोर मार्ग, इन्दौर से प्रकाशित हो रही है। इस पत्रिका के संपादक श्री राकेश शर्मा हैं। पत्रिका में कविता के तहत श्री रामधारी सिह दिनकर की कविता बापू, भवानी प्रसाद मिश्र की गाँधी दर्शन कविता उन्होंने जब लिखी, तब 27 जनवरी, 1931 को पहली बार इटारसी स्टेशन पर गाँधीजी को देखा था। सुमित्रानंदन पंत की बापू के प्रति, श्री हरिवंश राय बच्चन की छूकर जिसको क्षिति मुक्त हुई चम्पारन की, श्रीमती सुभद्रा कुमार चौहान की लोहे को पानी कर देना, रामप्रवेश शास्त्री की एक प्रश्न आदि। शोध आलेख के तहत महात्मा गाँधी द्वारा वर्ष 1935 में साहित्य सम्मेलन प्रयाग के अधिवेशन के सभापति के रूप में इन्दौर में दिया गया वक्तव्य को पत्रिका में संकलित किया गया है जो सभापति का भाषण शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। डॉ. विश्वास पाटील का गाँधी साहित्य का परिवेश और प्रभाव, श्री प्रमोद त्रिवेदी का हमें क्षमा करना बापू, डॉ. डी.एन. प्रसाद का गाँधीजी का पर्यावरण चिंतन, श्रीधर वर्वे का क्या भारत विभाजन के लिए गाँधीजी दोषी थे? प्रो. प्रमोद कोवव्रत का साहित्य, गाँधीवादी मूल्य एवं वर्तमान परिदृश्य, डॉ. ओम ठाकुर का गाँधी की प्रासंगकिता आदि आलेख गाँधीजी की साहित्य यात्रा का बखूवी वर्णन करते है। पत्रिका में कुछ दुर्लभ चित्रों को संकलित किया है जिनमें श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इन्दौर का ऐतिहासिक शिवाजी भवन का चित्र है। इस भवन का शिलान्यास वर्ष 1918 में गाँधीजी के करकमलों से हुआ था और इसका लोकार्पण वर्ष 1935 में पूज्य गाँधीजी के द्वारा ही सम्पन्न हुआ। काठियावाडी वेशभूषा में वर्ष 1918 में गाँधीजी के इन्दौर आगमन पर लिया गया चित्र मनमोहक है। पत्रिका में वर्ष 1935 में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के सम्मेलन पर लिया गया दुर्लभ चित्र संकलित किया गया है। इस अंक की कीमत मात्र 30/-रू है।
हरियाण साहित्य अकादमी, हरियाणा का मासिक प्रकाशन हरिगंधा का अक्टूबर 2019, अंक-302 राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती पर प्रकाशित तीसरा हरिगंधा का विशेषांक है, इस अंक से पहले अकादमी द्वारा पुलवामा के शहीदों को समर्पित अंक एवं गुरू नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर विशेषांकों का प्रकाशन किया जा चुका है। वर्तमान में इस पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. पूर्णमल गौड है, जिनके द्वारा किए गए विशेष प्रयासों से हरिगंधा का यह अंक दुर्लभ अंक बन पड है। इस विशेषांक में साहित्यकारों, लेखकों, कवियों ने बहुत गहन चिंतन कर उनके जीवन से सम्बद्ध अनेक पक्षों पर प्रकाश डाला है। मनमोहक कविताएँ पत्रिका को एक नई ऊँचाई देती है। कुल मिलाकर 200 के लगभग पृष्ठों में इस अंक में 23 शोध आलेख एवं 01 यात्रा संस्मरण संतोष बंसल द्वारा लिखित महात्मा गाँधीजी जहाँ जन्मे थे’ मनमोहक है। यह अंक पाठकों को जिस सामग्री की वजह से आकर्षित करता है, वह है इसमें आलेखों के साथ-साथ गाँधीजी की अनेकों दुर्लभ तस्वीरों को संकलित किया जाना। यह तस्वीर सच्चे अर्थों में एक सच्चाई दिखाती है, जिससे पाठकों को आलेख पढते समय सच्चा हिन्दुस्तान आँखों के सामने जीवंत हो उठता है। अंक दुर्लभ एवं ऐतिहासिक है, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है। एक बार अवश्य ही पाठकों को इस ऐतिहासिक अंक को देखना चाहिये। इस अंक की कीमत मात्र 15/-रू है।
मध्यप्रदेश शासन, भोपाल का मासिक प्रकाशन है मध्यप्रदेश संदेश। इस पत्रिका के अक्टूबर, 2019 अंक में महात्मा गाँधी पर अद्भुत आलेखों को संकलित किया गया है, जो पाठकों के लिए शोध की दृष्टि से अनमोल है। पत्रिका के संपादक श्री मनोज खरे है जो संयुक्त संचालक जनसम्पर्क विभाग को देख रहे है। पत्रिका में लगभग 24 शोध आलेख पत्रिका की गरिमा को बयान करती है। पत्रिका में प्रमुख रूप से स्व. बालकवि बैरागी, डॉ. विजय बहादुर सिंह, श्री राजेश बादल, डॉ. मंगला अनुजा, प्रो. संजय द्विवेदी, श्री पंकज शुक्ला आदि के साथ-साथ अन्य आलोचकों व चिंतकों के शोध आलेख वाकई पाठकों को नई दिशा प्रदान करने के साथ-साथ पत्रिका की उपयोगिता को इंगित करते है। कह सकते है पत्रिका में गाँधी के विचारों को प्रमुखता के साथ प्रकाशित कर प्रशासन ने पाठकों पर एक प्रकार से अपकार किया है, जिसके लिये प्रशासन बधाई की पात्र है। इस अंक की कीमत मात्र 25/-रू है।
गर्भनाल प्रवासी भारतीयों की मासिक पत्रिका है जो पूर्व में प्रिन्ट रूप में प्रकाशित की जाती रही थी, परन्तु आज यह केवल बेवजाल पर ई-पत्रिका के रूप में ही प्रकाशित की जा रही है। पत्रिका अपनी जमीन से दूर रहने वाले प्रवासी भारतीयों की आवाज को रखने के मंच के तौर पर गर्भनाल एक मंच प्रदान करने का प्रयास कर रही है। गर्भनाल अप्रवासी भारतीयों की मासिक ई-पत्रिका है जो हर महीने पी.डी.एफ. के रूप में वितरित की जाती है। इसे लगभग 50 हजार ईमेल पतों पर भेजा जाता है। यह प्रयास अनवरत जारी है, दुनियाभर के हिंदी प्रेमियों ने इसे प्रोत्साहन किया और सराहा है। यह एक संपूर्ण साहित्यिक पत्रिका है जो मीनाल रेसीडेन्सी, भोपाल से प्रकाशित हो रही है। इस पत्रिका में हिंदी की दशा व दिशा के साथ-साथ, उसके स्वरूप व उसके विकास को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाता है। धार्मिक चर्चाएँ भी इस पत्रिका की एक प्रमुख खूबी है जिसमें पाठकों के समक्ष रामायण, महाभारत, गीतासार आदि से संबंधित विभिन्न रचनाकारों के विचार प्रमुखता से रखे जाते है। इस पत्रिका की संपादिका श्रीमती सुषमा शर्मा साहित्य की इस बहुरंगी यात्रा के लिये बधाई की पात्र है, जो इतनी बढिया साहित्यिक पत्रिका पाठकों तक पहुँचा रहीं है। इस पत्रिका का अक्टूबर, 2019 अंक में गाँधीजी के विचारों व उनके साहित्यिक जगत में किये गये योगदान की भरपूर चर्चा की गई है। पत्रिका की संपादकीय गाँधीः जो किया वही कहा, जो कहा वही किया शीर्षक में गाँधीजी के विचारों से पाठकों का परिचय कराया गया है। खुद महात्मा गाँधी द्वारा लिखित उनके विचार मेरा अनुयायी खुद मैं हूँ में दर्ज हैं। डॉ. सुधांशु मिश्रा अपने विचार एक संत के रूप में व्यक्त हैं। पत्रिका में मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों द्वारा महात्मा गाँधीजी के विचारों व साहित्य पर केन्द्रित आलेख महत्त्वपूर्ण है। नृविज्ञान में इतिहास विभाग की एक शोध छात्रा अरीना नोविकोवा का लिखा शोध आलेख महात्मा गाँधी की स्मृति, ज्लाटा अंतुशेवा का शोध आलेख महात्मा गाँधी की प्रासांगिकता, आरीना शीकिना का आलेख महात्मा गाँधी और नेतृत्व अलान जिग्काएक का महात्मा गाँधीः सच्चे शांतिदूत पठनीय एवं दिलचस्प है। भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंस में मनोविज्ञान के प्रथम वर्ष की छात्रा वृन्दा शर्मा का शोध आलेख हमारे बापू आदि आलेख पत्रिका में संकलित कर पाठकों को उपलब्ध कराने हेतु इसकी संपादिका बधाई की पात्र हैं।
लोकतंत्र का पाँचवा स्तंभ पिछले तेरह वर्षों से प्रकाशित हो रही है। संस्थापक संपादक एवं गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा, एक राजनीतिक हस्ती होने के साथ-साथ जानी-मानी साहित्यकार, उपन्यासकार, कहानीकार और विचारक है। उन्होंने जो मानक पाँचवा स्तंभ के लिए रखे थे, उनका अनुसरण निरंतर हो रहा है, यह प्रसन्नता का विषय है। इस पत्रिका में साहित्य और संस्कृति के अतिरिक्त इसमें जनता के सरोकारों के विषय के लेख प्रकाशित होते है। अक्टूबर, 2019 का अंक महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती को समर्पित है। गाँधीजी के जीवन, उनकी सोच और उनके कार्याकलापों के विषय में अत्यंत पठनीय सामग्री संगृहित है।
साहित्य, संस्कृति एवं आधुनिक सोच की त्रैमासिक पत्रिका आधुनिक साहित्य शालीमार बाग, दिल्ली से प्रकाशित हो रही है। इस पत्रिका को विष्व हिंदी परिषद् पिछले आठ साल से प्रकाशित कर रही है। यह एक द्विभाषी (हिंदी, अंग्रेजी में प्रकाशित) पत्रिका है, जिसमें अंग्रेजी के लेख के साथ-साथ हिदी साहित्य के विषय मंर भी सारगर्भित लेख रहते है। पत्रिका के संपादक श्री आशीष कंधवे ने कम समय में ही इस पत्रिका को मुख्य धारा में सम्मिलित कर दिया है। इसका जुलाई-दिसम्बर, 2019 संयुक्तांक में भी गाँधीजी से संबंधित लेखों के साथ-साथ अन्य सामग्री भी पाठकों के लिए रूचिकर है। विशेषकर भारतीय अंतराष्ट्रीय संबंध परिषद् के अध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे का साक्षात्कार, जो सोचने के लिए बहुत सारे हिंदु प्रस्तुत करता है। हरेंद्र प्रताप से संपादक ने गाँधीवाद के विषय में जो साक्षात्कार लिया है, वह भी उत्तम है। कुल मिलाकर हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं, विशेषतः कॉलेज व विश्वविद्यालय के स्तर पर यह द्विभाषी त्रैमासिक पत्रिका बहुत ही उपयोगी भूमिका निभाती है। इस अंक की कीमत मात्र 50/-रू है।
साहित्य अकादमी, भोपाल मध्यप्रदेश से प्रकाशित मासिक पत्रिका साक्षात्कार का संयुक्तांक (478-479-480) अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर, 2019 महात्मा गाँधी विशेषांक के रूप में प्रकाशित होकर पाठकों के समक्ष आया। लगभग 400 पृष्ठीय इस विशेषांक में देश के सुपरिचित आलोचक एवं चिंतकों की लेखनी ने गाँधी के सिद्धान्तों व विचारों की एक लंबी श्ाृंखला प्रस्तुत कर साक्षात्कार पत्रिका के इस अंक को वाकई में एक ऐतिहासिक दस्तावेज बना दिया है। साहित्य अकादमी इस योजना को पाठकों तक पहुँचाने के लिए वाकई बधाई की पात्र है। प्रस्तुत अंक में चालीस के करीब शोध आलेख संकलित किये गये हैं जो महात्मा गाँधी के जीवन एवं विचारों की श्ाृखंला से पाठकों को परिचित कराता है। कुछ आलेख इस अंक में स्वयं महात्मा गाँधीजी एवं उनके समकालीन मित्रों द्वारा लिखे गए भी संकलित किए गए हैं, जो ऐतिहासिकता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण आलेख है। डॉ. राममनोहर लोहिया, दादा धर्माधिकारी, प्यारेलाल, विनोबा, रविन्द्रनाथ ठाकुर, जवाहरलाल नेहरू आदि के संकलित आलेख पाठकों को बरबस ही अपनी ओर खींच लेते हैं। इसके अलावा उदयन वाजपेयी, राधावल्लभ त्रिपाठी, नंदकिशोर आचार्य, वागीश शुक्ल, अशोक वाजपेयी, अनुपम मिश्र, कुमार प्रशांत, प्रदीप सरदाना, पुण्य प्रसून वाजपेयी, नवल शुक्ल आदि। इस प्रकार कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150 वें जन्मवर्ष पर जितने भी अंक विशेषांक के रूप में प्रकाशित हुए, उन सबमें साक्षात्कार पत्रिका का यह अंक लंबे समय तक पाठकों को याद रहेगा, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है। इस अंक की कीमत मात्र 25/-रू0 है।
श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय ट्रस्ट, गौर मूर्ति, सागर (म0प्र0) से प्रकाशित हिंदी त्रैमासिक पत्रिका साहित्य सरस्वती का अक्टूबर-दिसम्बर, 2019, वर्ष-छह, अंक-चौबीस के गाँधी विशेषांक में कह सकते है कि पूर्णतः गाँधीजी के साहित्य व विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई है। वर्तमान में पत्रिका के संपादक डॉ. सुरेश आचार्य एवं उप-संपादक सरदार पृथ्वीपाल सिंह एवं डॉ. लक्ष्मी पाण्डेय है। धरोहर के तहत पाँच आलेख संकलित किए गए है। शोध आलेख के रूप में सात आलेख संकलित किये गये है जो शोध की दृष्टि से मूल्यवान है। सात कहानियाँ, लगभग ग्यारह से अधिक कविताएँ एवं एक नाटक पत्रिका को नई ऊँचाई प्रदान करते हैं। कुल मिलाकर एक सौ तैतीस पृष्ठों की इस बहुमूल्य पत्रिका में गाँधीजी के साहित्य की रसधारा अनवरत् बहती हुई दिखायी देती है, जो अन्य जगह देखने को नहीं मिली।
साहित्य, कला संस्कृति का त्रैमासिक संचयन के रूप में सृजन सरोकार का प्रकाशन गोपाल रंजन के संपादन में नईदिल्ली से पिछले तीन वर्षों से निरंतर किया जा रहा है। इस पत्रिका ने अपनी स्तरीय सामग्री के बलवूते पर कम समय में ही पाठकों के बीच अपनी जगह को सुदृढ किया है। अभी तक देखा जाए, तो पत्रिका ने ज्यादातर अंक विशेषांकों के रूप में ही प्रकाशित किए है, जिसमें प्रमुख रूप से जनवरी-मार्च, 2019 का इलाहाबाद विशेषांक एवं अप्रैल-जून, 2019 का नामवर सिंह पर विशेष प्रकाशित अंक पाठकों के बीच अत्यंत ही लोकप्रिय रहे थे। इन अंकों को साहित्यकारों द्वारा बेहतर प्रतिसाद मिला था। इसी श्ाृखंला में पत्रिका का अक्टूबर-दिसम्बर, 2019 का अंक 150 वर्ष के बापू के रूप में प्रकाशित हुआ है। पत्रिका के संपादक ने इस अंक को स्तरीय बनाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोडी है। पत्रिका का संपादकीय गाँधीः एक ठेठ हिन्दुस्तानी जिद में गाँधीजी के बहुआयामी व्यक्तित्व से परिचय कराने का भरपूर प्रयास किया है, एवं पत्रिका में संकलित स्तंभों के तहत गाँधीजी पर प्रकाशित सामग्री रोचक एवं स्तरीय है। समय-संदर्भ में सात शोध आलेख, समय-संवाद में चार आलेख, समय-संवेद्य में सात आलेख, समय-आवर्त में दो आलेख, समय-विमर्ष में एक आलेख एवं अंत में रिपोर्ट के तहत तीन आलेख पत्रिका का एक नई ऊँचाईयाँ प्रदान करते हैं। कुला मिलाकर लगभग सौ पृष्ठों में संकलित सामग्री पत्रिका के स्तर को बखूवी बयाँ करती है। पाठकों द्वारा एक बार अवश्य इस अंक को देखना चाहिए। इस अंक की कीमत मात्र 50/-रू. है।
साहित्य एवं संस्कृति का संवाहक के रूप में आसफ अली रोड, दिल्ली से प्रकाशित मासिक पत्रिका साहित्य अमृत का जनवरी 2020 अंक गाँधी विशेषांक के रूप में पाठकों के समक्ष उपस्थित हुआ। इस ताजातरीन अंक में बेहतरीन पचास शोध आलेख, तीन कविताएँ, गाँधी बाड्मय से तीन आलेख एवं अन्य संकलित सामग्री ने इस विशेषांक को कहीं पठनीय एवं ऐतिहासिक बना दिया है, जिसके लिए इस अंक के संयुक्त संपादक श्री हेमंत कुकरेती बधाई के पात्र हैं। नियमित संपादक श्री त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी के अस्वस्थ्य होने के कारण संयुक्त संपादक द्वारा पत्रिका का कुशलतापूर्वक संपादन कर पत्रिका के स्तर में कहीं कोई गिरावट नहीं आने दी है। इस अंक में गाँधी पर लिखने वाले लेखकों ने गाँधी को भारतीय परंपरा में रखकर उनका तटस्थ मूल्यांकन का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी का न्यूयार्क टाइम्स में लिख लेख का हिंदी अनुवाद यहाँ उपलब्ध है। साथ ही मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, उ.प्र. की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा के लेख भी इसमें संकलित है। अन्य लेख भी आज के समय संदर्भ में गाँधी को प्रासंगिक बनाए रखने का भरपूर प्रयास किया है। समग्रता में देखा जाए तो इस अंक में देश के प्रसिद्ध विचारकों व चिंतकों द्वारा गाँधीजी के समस्त पहलुओं के ऊपर लेखनी चलाई गई है, जो इस अंक का महत्त्वपूर्ण पक्ष है। कहा जा सकता है कि 260 से कुछ अधिक पृष्ठों में समाहित साहित्य अमृत का यह गाँधी विशेषांक गाँधीजी के समस्त पक्षों को लेकर तैयार किया गया महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है, जो लंबे समय तक पाठकों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा। इस अंक की कीमत मात्र 100/-रू है।
समग्रतः कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150 वे जन्म दिवस पर हिंदी साहित्य ने पत्र-पत्रिकाओं के अंक प्रकाशित कर उनके जीवन व विचारों को फिर से जीवंत कर दिया। पाठकों द्वारा भी इन अंकों को भरपूर सराहा गया। इन पत्रिकाओं के अलावा भी अन्य पत्रिकाओं ने महात्माजी के विचारों को केन्द्रित कर अंकों का प्रकाशन किया गया होगा, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन उपरोक्त पत्रिकाएँ कहीं न कहीं पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही, इस कारण इनकी जानकारी से पाठकों को परिचय कराने का एक छोटा सा प्रयास किया गया है। प्रस्तुत आलेख में विस्तार से बचा गया है, क्योंकि प्रत्येक पत्रिका पर एक स्वतंत्र आलेख तैयार किया जा सकता है। इस कारण केवल संक्षेपिका के रूप में पाठकों को परिचय कराया गया है। आशा करता हूँ कि किसी पाठक को इस जानकारी से लाभ हुआ, तो मैं अपने श्रम को सार्थक समझूँगा।

सम्पर्क - आवास क्रमांक एच-3,
राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,
एयरपोर्ट रोड, गाँधी नगर,
भोपाल-462033 (म.प्र.),
मो.नं. 9826583363