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साहित्यिक परिदृश्य

द पर्सपेक्टिव इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सोशल साइंस एंड ह्यूमनिटीज का प्रवेशांक प्रकाशित
कोलकाता। सामाजिक विज्ञान और मानविकी के त्रैमासिक जर्नल ‘द पर्सपेक्टिव इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सोशल साइंस एंड ह्यूमनिटीज’ (The Perspective International Journal of Social Science and Humanities-TPIJSSH) का प्रवेशांक प्रकाशित हो गया है। इस द्विभाषी (हिन्दी और अँग्रेजी) ऑनलाइन जर्नल के संरक्षक के रूप में यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुखदेव थोरात और भारत सरकार के आदिवासी मामलों की समिति के पूर्व सदस्य प्रो. वर्जिनियस खाखा जुडे हुए हैं। जर्नल के संपादक महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के सहायक प्रोफेसर एवं कोलकाता क्षेत्रीय केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार सुमन हैं। उप संपादक के रूप में युवा लेखक-अध्येता अनीश कुमार, नीतिशा खलखो एवं रजनीश कुमार अंबेडकर अपना योगदान दे रहे हैं। जर्नल के संपादक डॉ. सुनील कुमार सुमन अपने संपादकीय में लिखते हैं- हमने अपने सफर का पहला कदम बढा दिया है। यह यात्रा अकादमिक व बौद्धिक जमीन को समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ शुरू हुई है। ज्ञान के इन विविध क्षेत्रों-पक्षों से कुछ उत्कृष्ट शोध पाएँ।
सामाजिक विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में यह जर्नल कुछ अलग और गंभीर अकादमिक प्रयास करता हुआ दिखाई देता है। इसके पहले अंक में विदेशों से भी शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं।
- आकांक्षा कुरील, वर्धा

अंग्रेजी माध्यम ने हमारी बुद्धि को नष्ट कर दिया - कवि नरेश सक्सेना
दिल्ली। मातृभाषाओं में पढे-समझे बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। रटी हुई भाषा में रटे हुए विचार ही आएँगे, वहाँ मौलिक और नये विचार पैदा नहीं हो सकते। सुप्रसिद्ध हिंदी कवि नरेश सक्सेना ने उक्त विचार हिन्दू कालेज की हिंदी साहित्य सभा का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए। सक्सेना ने हिंदी की वर्तमान स्थिति के प्रति चिंता और दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी आज तक ज्ञान की भाषा नहीं बन पाई, साथ ही कोई भी भारतीय भाषा ज्ञान की भाषा नहीं बन सकी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए क्षोभ व्यक्त किया कि अंग्रेजी माध्यम ने हमारी बुद्धि को नष्ट कर दिया है। अपने व्याख्यान के दुसरे हिस्से में सक्सेना ने हिंदी कविता के पढने-पढाने की रूढ प्रविधियों से भिन्न नए ढंग से कविताओं को समझने की जरूरत बताई। सक्सेना ने कुछ प्रसिद्ध कविताओं का सस्वर वाचन करके उन कविताओं में लय और ताल की उपस्थिति की चर्चा की। व्याख्यान के बाद सक्सेना और विद्यार्थियों के बीच संवाद सत्र (सवाल-जवाब) हुआ ,जिसका संयोजन साहित्य सभा के संयोजक हर्ष उरमलिया ने किया । इससे पहले विभाग के प्रभारी डॉ पल्लव ने शैक्षणिक सत्र 2020 21 के लिए गठित हिंदी साहित्य सभा की कार्यकारिणी की घोषणा की। वेबिनार की समाप्ति नरेश सक्सेना जी के माउथ ऑर्गन वादन के साथ हुई। - प्रखर दीक्षित, दिल्ली
स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान सुधीर विद्यार्थी को
चित्तौडगढ। सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना के जन्म शताब्दी वर्ष में साहित्य संस्कृति के संस्थान संभावना द्वारा स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान की घोषणा कर दी गई है। संभावना के अध्यक्ष डॉ के सी शर्मा ने बताया कि वर्ष 2020 के लिए स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान बरेली (उत्तर प्रदेश) निवासी सुधीर विद्यार्थी को उनकी चर्चित कृति क्रांतिकारी आन्दोलन : एक पुनर्पाठ पर दिया जाएगा। डॉ शर्मा ने बताया कि बनारस निवासी वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार प्रो काशीनाथ सिंह, भोपाल निवासी वरिष्ठ हिंदी कवि राजेश जोशी और जयपुर निवासी वरिष्ठ लेखक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल की चयन समिति ने सर्व सम्मति से भारतीय स्वाधीनता आंदोलन पर लिखी गई इस कृति को पुरस्कार के योग्य पाया। काशीनाथ सिंह ने वक्तव्य में कहा कि स्वाधीनता संग्राम में भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों के आंदोलनात्मक अवदान पर विद्यार्थी की किताब नयी दृष्टि से विचार करती है। राजेश जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सुधीर विद्यार्थी ने अपने जीवन का बडा समय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उपेक्षित पक्षों को रोशन करने के लिए किताबें लिखने में लगाया है और उनकी पुस्तक क्रांतिकारी आन्दोलन :एक पुनर्पाठ उनके इसी लेखन का शिखर है। डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने अपनी अनुशंसा में इसे नयी पीढी के लिए आवश्यक पठनीय पुस्तक माना जो स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक दृष्टिकोण से भी अवगत करवाती है।
डॉ.शर्मा ने बताया कि स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान में कृति के लेखक को ग्यारह हजार रुपये, शाल और प्रशस्ति पत्र भेंट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चित्तौडगढ में आयोज्य समारोह में सुधीर विद्यार्थी को सम्मानित किया जाएगा। डॉ. जैन ने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी पक्ष का इतिहास और उसकी स्मृतियों के लेखन के लिए सुधीर विद्यार्थी का हिंदी संसार में गहरा सम्मान है। वे स्वयं एक कवि और गद्यकार के रूप में भी सक्रिय रहे हैं तथापि अशफाक उल्ला खां, भगत सिंह, चंद्रशेखर, रामप्रसाद बिस्मिल, बटुकेश्वर दत्त, शहीद रोशन सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों पर लिखी उनकी पुस्तकों का महत्त्व इस तथ्य में है कि नयी पीढी को उन्होंने हमारी विरासत का सही और जरूरी परिचय दिया। विद्यार्थी की पचास से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे सेनानियों की स्मृति में अनेक स्मारकों का निर्माण करवाने तथा उनकी स्मृतियों को संरक्षित करने के बहुविध कार्य किये हैं।
- डॉ कनक जैन, चित्तौडगढ