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कोरोना का कोहरा

आशा शर्मा
समर के साथ उसका रिश्ता कितना पारदर्शी है... एकदम शीशे की तरह... जिसके आरपार सब कुछ साफ-साफ दिखाई देता है। लेकिन इन दिनों इस शीशे पर चिकनाई-सी महसूस होने लगी है। कहीं हाथ से फिसल न जाए। कॉफी का मग अचानक हाथ से फिसला तो सियोना ने तत्काल उसे संभाल लिया।
लेकिन क्या वह अपने रिश्ते को भी इतनी ही आसानी से बचा पाएगी? या फिर फिसलने दे इसे हाथ से? लेकिन रिश्ते की तुलना क्या कॉफी के मग से की जा सकती है? नहीं ना! मग तो टूटने के बाद दूसरा भी खरीदा जा सकता है... लेकिन समर? क्या उसे लौटा देने के बाद वापस पुकारना मुमकिन होगा? सियोना घूँट-घूँट कॉफी के साथ जाने कितने ही सवाल सुडकती जा रही थी।
सियोना और समर दोनों यहाँ इटली के पोलिटेक्निको दी मिलानो यूनिवर्सिटी में शोधार्थी हैं। एक ही देश के होने के कारण दोनों का आपसी जुडाव स्वाभाविक ही था। यह जुडाव धीरे-धीरे दोस्ती और फिर लगभग प्रेम में बदल गया। इसे लगभग प्रेम इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि दोनों ने ही खुलकर इस रिश्ते पर अपनी स्वीकारोक्ति की मुहर नहीं लगाई थी। यह अलग बात है कि उन दोनों के अलावा कॉलेज के उनके सभी साथी उन्हें मेड फॉर ईच अदर कहने लगे थे।
पिछले दिनों की ही बात है जब समर ने उसके सामने अगले वीकेंड पर लेक कोमो चलने का प्रस्ताव रखा था। यह पहली बार था जब समर ने उसे अकेले चलने के लिए कहा था वरना इससे पहले तो सब दोस्तों का गु*प प्रोग्राम ही बनता रहा है और सब इसे एन्जॉय करते हैं। सियोना तय नहीं कर पा रही थी कि समर को हाँ कहे या कोई बहाना बना कर टाल दे।
फिलहाल इसे टालना ही बेहतर होगा। मुझे अभी खुद को थोडा और समय देना चाहिए। कहीं अकेले में बहक गए तो? कहीं जरा-सी जल्दबाजी उम्र भर का नासूर न बन जाए। सियोना ने तय कर लिया कि अभी के लिए वह समर के साथ जाना टाल देगी।
क्यों क्या हुआ? तुम तो बहुत आधुनिक बनती हो ना? फिर ये पुरातन सोच क्यों हावी हो रही है? सियोना के सोच की दिशा बदली।
नहीं! मेरी सोच पुरातन नहीं है लेकिन मैं समर के साथ सतही रिश्ता नहीं रखना चाहती। मैं इस रिश्ते को जिंदगी भर निभाना चाहती हूँ, इसलिए अपने आप को समय देना चाहती हूँ। अपने भीतर समर के लिए तडप महसूस करना चाहती हूँ। और वही तडप समर के भीतर भी... जिस दिन मुझे ऐसा महसूस होगा उस दिन मैं हर बाधा फलाँग कर समर के पास आ जाउँगी। सियोना ने अपनी सोच को वापस अपने पक्ष में किया।
शायद नियति उसका साथ देना चाह रही थी इसलिए वीकेंड से एक दिन पहले ही उसे बुखार आ गया और यह कार्यक्रम स्वतः ही रद्द हो गया।
इधर सियोना के भाई की शादी तय हो गई थी और उसे भारत आना था। एअरपोर्ट तक छोडने आये समर से गले मिलकर विदा होती सियोना की आँखें छलक उठी। पहली बार दो सप्ताह के लिए समर से अलग हो रही थी। दो सप्ताह उसके फैसले को बहुत प्रभावित करने वाले थे। कौन जाने वापसी तक उनके बीच कितना लगाव बचा रहेगा।
हालांकि व्हाट्सएप और विडियो चैट के जरीये दोनों एक-दूसरे से जुडे हुए थे लेकिन उसके बावजूद भी शादी की रस्मों के बीच जब अचानक ही समर याद आ जाता, तो सियोना भीड में भी अकेलापन महसूस करने लगती और फिर उस वक्त वह सिर्फ समर के पास होती थी। सही कहा है किसी ने- जब हम किसी एक के पास होते हैं, तो संभव ही नहीं होता किसी भी दूसरे के पास होना।
किसी भी फंक्शन के लिए तैयार होती सियोना सजधज कर विडियो पर आती और समर अपनी अनामिका ऊंगली और अँगूठे को आपस में मिलाकर हिलाता और परफेक्ट का इशारा कर देता तो कोई भी रंग पहने सियोना यकायक गुलाबी हो जाती।
भाई की शादी बहुत हँसीखुशी निपट गई। सियोना के भी वापसी के दिन नजदीक आने लगे। समर अपनी हर चैट मिस यू के साथ खत्म करता, लेकिन सियोना अभी तक उसे मिस यू टू का रिप्लाई नहीं दे पा रही थी।
तो क्या इन पंद्रह दिनों में भी वह समर के लिए वो तडप महसूस नहीं कर पाई जो वह फैसला लेने के लिए महसूस करना चाहती थी।... तो क्या उसे समर से सिर्फ लगाव है, प्रेम नहीं।...क्या वह अपने असमंजस में लिपटी ही वापस लौट जाएगी। सियोना धीरे-धीरे अपना सामान पैक करने लगी। चार दिन बाद उसकी फ्लाइट है।
तभी अचानक कोरोना वायरस के महामारी के रूप में फैलने की खबरें आने लगी। चीन के बाद सबसे अधिक प्रभावित देशों में जब इटली का नाम आया, तो सियोना काँप उठी। सबसे पहले समर का चेहरा आँखों के सामने कौंधा।
हे ईश्वर! सब ठीक हो। अचानक ही अतिआधुनिक सियोना के हाथ उस परम शक्ति के सामने झुक गए। उसने तुरंत समर को विडियो कॉल लगाया। फोन नो रिप्लाई हो गया। सियोना की धडकने बढ गई। बेचैन-सी सियोना बार-बार फोन लगाने लगी लेकिन नतीजा अब भी वही था जो पहले था। सियोना टीवी पर न्यू*ा चैनल लगाकर देश-दुनिया की खबरों के अपडेट देखने लगी।
लाखों की संख्या में संक्रमित और हजारों की संख्या में मृत्यु के आँकडे खतरे की भयावहता बताने के लिए काफी थे। घबराकर सियोना ने टीवी बंद कर दिया। समर का खयाल आते ही ध्यान फिर से मोबाइल की तरफ गया। देखा तो समर के दो मिसकॉल थे।
उफ्फ! मिस कर दिया। सोचते हुए उसने व्हाट्सएप देखा। समर ऑनलाइन दिखा। सियोना ने बिना एक पल गँवाए विडियो कॉल लगाईं। फोन उठाते ही समर मुँह पर मास्क चढाये दिखाई दिया।
आर यू ओके? सियोना ने पूछा।
अभी तक तो ठीक हूँ। कल का कोई पता नहीं। समर कह रहा, था लेकिन सियोना ने उसे बीच में टोक दिया।
चुप रहो। जब देखो तब फालतू की बातें करते रहते हो। कुछ नहीं होगा तुम्हें। सियोना ने उसे प्यार और अधिकार से डपट दिया। समर ने मुँह से मास्क हटाया और मुस्कुरा दिया।
दुनिया की सब लडकियाँ एक जैसी ही होती हैं। मेरी माँ भी यही कहती है। समर ने उसे चिढाया। तभी सियोना को लगा मानो समर को खाँसी-सी आई, लेकिन स्थिति स्पष्ट होने से पहले ही इंटरनेट का कनेक्शन कट गया। उसके बाद तो कनेक्शन जुडा ही नहीं। सियोना परेशान हो गई।
सप्ताह भर हो गया। सियोना का वापस इटली जाना फिलहाल के लिए रद्द हो गया लेकिन समर अभी भी वहीं फँसा था। उसका कोई समाचार नहीं मिल पा रहा था। सियोना हर समय टीवी और इंटरनेट पर कोरोना वायरस से फैली महामारी और उससे प्रभावितों के आँकडे ही देखती-सुनती रहती है। दिन में कई बार समर को फोन लगाने की कोशिश करती, लेकिन हर बार निराश ही होती।
इधर महामारी के चलते भारत ने भी इटली और चीन से आने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी और उधर इटली ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया। एहतियात के तौर पर जो जहाँ है वहीं रहेगा, महामारी से मरने वालों की संख्या लगातार बढती जा रही थी और सियोना का दिल अब समर के लिए सचमुच तडपने लगा।
इटली में सुरसा की तरह मुँह पसारते कोरोना की आती खबरों के बीच सियोना का दिल भारत में बिल्कुल नहीं लग रहा था। काश! उसके पंख होते, तो अभी उडकर इटली पहुँच जाती... काश! वह समर के लिए कुछ कर पाती... ऐसे हर काश पर सियोना की आह निकल जाती।
सोशल मीडिया पर वायरल होते संदेश... बडे-बुजुर्गों की अनुभवी सलाहें... और कभी-कभी खुद अपने आजमाए हुए देसी नुस्खे... सियोना गूगल पर खोज-खोज कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली जडी-बूंटियों के बारे में जानकारी जुटाने लगी। फिर उसने गिलोय, काली मिर्च, तुलसी, सोंठ आदि को कूट-पीसकर काढा बनाने और उसे उपयोग में लेने की विधि लिखकर समर को मेल कर दिया। वह नहीं जानती थी कि उसका यह प्रयास कितना कारगर है, लेकिन ऐसा करके उसे बेहद आत्मिक संतुष्टि मिली थी। जाने-अनजाने समर के प्रति उसके प्रेम को उसके मन ने स्वीकृति दे दी थी।
कहते हैं कि बात जब अपनों की हो तो फिर दिल हर तर्क के आगे हार जाता है। पूजापाठ को ढकोसला बताने वाली सियोना इन दिनों घर के मंदिर में बिराजे हर देवता के आगे सिर झुकाने लगी थी। हर समय उसके हाथ प्रार्थना में जुडे से रहने लगे। हर वक्त समर की सलामती की दुआएँ दिल से निकलती।
रात सोने से पहले आखिरी बार फोन लेकर समर को कॉल लगाने की कोशिश की। हालांकि जानती थी कि फोन नहीं लगेगा, लेकिन मन कब किसी की सुनता है। सियोना ने आँखें बंद करके फोन लगा दिया।
हेलो-हेलो की आवाज सुनकर सियोना को यकीन नहीं हुआ। देखा तो विडियो पर समर था। सियोना की आँखें छलक उठीं। समर मुस्कुरा रहा था।
फोन क्यों नहीं किया इतने दिन? जानते हो मैं कितनी परेशान थी? सियोना ने रोते हुए उलाहना दिया।
यहाँ कोई कनेक्टिविटी ही नहीं थी। आज ही नेट चालू हुआ है। ये भी कब कट जाए कोई भरोसा नहीं। इससे पहले कि फोन कटे, जो कुछ कहना है, कह डालो। समर ने चुहल की। सियोना चुप... मुँह से कोई बोल नहीं फूटा...
कुछ कहना ही नहीं था तो फोन क्यों लगा रही थी। समर अब भी मजाक के मूड में था।
समर! आई मिस यू... सियोना किसी तरह से कह पाई।
सिर्फ मिस? समर ने आँखें मटकाई।
नहीं! एक्चुअली आई लव यू। सियोना ने अटकते-अटकते कहा।
देखा! आखिर सच उगलवा ही लिया ना। समर का टाँग खींचना अब भी जारी था। सियोना शरमाई। समर ने एक फ्लाइंग किस सियोना की तरफ उछाल दिया। सियोना ने उसे पकडने का अभिनय करते हुए अपने दिल से लगा लिया।
लेकिन तुम हो कहाँ? ये मुझे तुम्हारे पीछे दिल्ली का एयरपोर्ट क्यों दिखाई दे रहा है? सियोना ने हैरानी से पूछा।
क्योंकि मैं इडिया आ चुका हूँ। सरकार ने विदेशों में फँसे अपने छात्रों को एयर लिफ्ट किया है। समर ने कहा तो सियोना को यकीन नहीं हुआ कि उसका प्यार उसके इतना नजदीक है... वो भी एकदम सुरक्षित।
बस! अब कुछ दिन का आइसोलेशन पीरियड... और फिर घर.... समर मुस्कुराया।
मुझे बताया क्यों नहीं? सियोना ने उलाहना दिया।
बता देता तो इस खुशी को कैसे महसूस करता जो तुम्हारे चेहरे पर दिखाई दे रही है। समर ने प्यार से कहा। सियोना के कुछ कहने से पहले ही फोन कट गया।
हे ईश्वर! जल्दी राहत दो... इस महामारी से सबकी रक्षा करो... सियोना भी बुदबुदाई और आसमान की तरफ हाथ जोड दिए।
निराशाओं का कोहरा छँटते ही प्रेम की चटख धूप खिल गई। अब बस इंतजार था तो सिर्फ कोरोना का कोहरा छँटने का...

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