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दो कविताएँ

अजन्ता देव
1. शव परीक्षा

शव परीक्षा - 1

उंगलियों की खाल सख्त
मोटी लकडी के लगातार पकडे जाने के चिन्ह मौजूद
शरीर में मेद नहीं के बराबर
लम्बे समय तक कठिन कार्य करने के प्रमाण
त्वचा झुलसी हुई
और मृत्यु के वक्त चेहरे का भाव वहशत का

* एफ आइ आर के विवरणों से मिलाने पर मृतक के आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता ।

शव परीक्षा - 2

आँखें बाहर की तरफ निकल कर ठहर गई थीं
बहुत पहले से नजारों से फेर ली थीं नजर
गला पकडने को एक पूरी जमात लगी हुई थी बरसों से
चौखाने वाला मफलर भी छिपा नहीं पा रहा था
लगातार गहरा होता निशान
साँस लेते ही बारूदी हवा पी जाती थी अंदर की प्राणवायु
उसके और मृतक के हक बराबर थे ,या शायद मृतक के कुछ *यादा।
*मौत दम घुटने से हुई,लगभग बारह घंटे पहले

शव परीक्षा -3

मेरी शव परीक्षा में
नहीं पाई गई भुखमरी से मृत्यु
डॉक्टरों ने नहीं खोला मेरा पेट
देखी खुर्दबीन से मेरी उंगलियाँ
लिखा ,नाखूनों पर मिले हैं आटे के अंश
नहीं पता चला किसी को मेरी मौत का
उन्हें भी नहीं ,जिनके घर मैं खाना बनाती थी।

*अज्ञात कारणों से मौत, मृतका किसी क्रॉनिक बीमारी से ग्रस्त नहीं थी।

शिकारी से बचने के अचूक मंत्र
आधुनिक कुटिल इंद्रजाल से

2. मंत्र

मंत्र -1

तना हुआ ही ताजा और पोषक होता है
इस आदिम समझ के साथ ही
हम करते हैं शिकार आज भी

(अपना हरा भूरे में छिपाएँ )

मंत्र -2
बडे शिकार को लादना मुश्किल है
हर रोज अनेक छोटे शिकार भी
भूख मिटा सकते हैं
काम चलाऊ शिकारियों से जंगल भरा पडा है।

(छोटे ना दिखें हमेशा फूले फूले रहें )

मंत्र -3
सिर्फ रंग बदल लेने से जान नहीं बचती
त्वचा पर काँटे और लार में जहर ही असली हथियार है ।

(कैसे भी अपना जहर बचा कर रखें )

मंत्र -4
चाँद बलवान के लिए चमकता है
निर्बल को सहारा अंधेरे ने दिया है हमेशा
शिकारी का साथ देने का कलंक
पूर्णिमा में साफ दिखता है चाँद के माथे पर ।

(जहाँ अँधेरा हो वहीं पानी की तलाश करें )

मंत्र -5
सिर्फ अपने अहसास पर भरोसा रखें
टिटहरी पर नहीं
उसकी चेतावनी शिकारी के कानो तक भी पहुँचती है ।

(सन्नाटे को सुनें )

मंत्र -6

सीधे रास्ते सरल होते हैं
सरलता भीड भरी
भीड किसी को बचाती नहीं
कई बार भीड अपने आप को भी कुचल देती है घबरा कर
भीड एक सरल शत्रु है
शिकारी झुंड पर हमला करता है और कोई एक हत्थे चढ जाता है ।

( हमेशा टेढा और कठिन रास्ता चुनें)

मंत्र -7
झाडियों के पीछे ही अक्सर छुपा होता है शिकारी
दूर से दो तितलियों की तरह लगती हैं आँखें
मृत्यु मरने से नहीं लोभ से होती है

(जाल सुंदर होता नहीं ,बनाया जाता है -बचें)

सम्पर्क : - 701, महिमा पैनोरमा,
जगतपुरा, जयपुर 302017
मो. ८८९०१८६८०४