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साहित्यिक समाचार

कंचनजंघा का प्रवेशांक पूर्वोत्तर भारत को समर्पित
सिक्किम दिवस के अवसर पर पूर्वोत्तर भारत को समर्पित कंचनजंघा हिंदी ई-जर्नल के प्रथम अंक (प्रवेशांक) का अनौपचारिक लोकार्पण 16 मई, 2020 को संपन्न हुआ। सिक्किम की हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में कंचनजंघा को बहुत ही महत्त्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय विद्वानों एवं लेखकों के नजरिये से कहें तो, सिक्किम प्रांत से निकलने वाली साहित्य केंद्रित हिंदी की यह पहली पत्रिका है। कंचनजंघा के प्रवेशांक को आप http://www.kanchanjangha.in/ वेब पेज पर पूरा पढ एवं डाउनलोड कर सकते हैं।
सिक्किम विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक प्रोफेसर पद पर कार्यरत कंचनजंघा के संपादक डॉ. प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति को वैश्विक पटल पर साझा करना इस उपक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इस अंक में स्मरण, लेख, कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास अंश, पूर्वोत्तर का पौराणिक क्षितिज (किंवदंतियाँ), लोककथाएँ, पुस्तक समीक्षा, एवं धरोहर (छाया चित्र) आदि कॉलम के अंतर्गत कुल 33 लेखकों की रचनाओं को 250 पृष्ठों में संकलित किया गया है। उत्तर-पूर्व की भाषाओं के साथ सामंजस्य एवं उनके प्रति सम्मान भाव रखते हुए कंचनजंघा का उद्देश्य हिंदी भाषा से अधिकाधिक लोगों को जोडने एवं उनके अंदर भाषा के प्रति रुचि पैदा करना रहेगा।
कंचनजंघा के संपादक डॉ. प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि इसका आगामी अंक दिसंबर-2020 में प्रकाशित होगा, जिसमें पूर्वोत्तर भारत पर केन्द्रित सामग्री को विशेष स्थान दिया जाएगा।
- प्रदीप त्रिपाठी, सिक्किम
राष्ट्रीय पुरस्कारों हेतु प्रस्ताव- प्रविष्टियाँ आमंत्रित
हिन्दी व राजस्थानी भाषा-साहित्य के मौलिक लेखन को सम्मान प्रदान करने के दृष्टिगत राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ द्वारा प्रति वर्ष दिए जाने वाले पुरस्कार क्रमशः डॉ. नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार हेतु कृतियाँ/प्रस्ताव बतौर प्रविष्टि आमंत्रित की गई है। उक्त दोनों ही पुरस्कार ग्यारह-ग्यारह हजार रूपये के होंगे और 14 सितम्बर, 2020 को संस्था के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोज्य समारोह में प्रदान किए जाएँगे। भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय अवदान के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित श्री मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान के लिए भी प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इस सम्मान हेतु विगत 20 वर्षों के सम्बन्धित क्षेत्र के योगदान को ध्यान में रखा जाएगा।
हिन्दी व राजस्थानी पुरस्कारों के लिए आवेदक की आवेदित पुस्तक या प्रस्तावक द्वारा प्रस्तावित पुस्तक पुरस्कार वर्ष से 5 वर्ष पूर्व तक की कालावधि में प्रकाशित होनी चाहिए। इस वर्ष 2020 के पुरस्कारों हेतु वर्ष 2015 से 2019 तक के प्रकाशन ही विचारार्थ स्वीकार्य होंगे। कोई भी आवेदक किसी वर्ष विशेष में केवल एक ही पुरस्कार हेतु आवेदन कर सकेगा। विहित अवधि में प्रकाशित पुस्तक की एक प्रति मय संक्षिप्त परिचय एवं फोटो 31 मई 2020 तक निःशुल्क मंत्री, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, संस्कृति भवन, एन.एच.11 जयपुर रोड, श्रीडूँगरगढ (बीकानेर) राज. 331803 के पते पर प्रेषित करनी होगी।

-श्याम महर्षि, श्रीडूँगरगढ
कोरोना महामारी पर देश सेवा भारी
पुस्तक लोकार्पित
कोरोना कर्मवीरों को समर्पित
बीकानेर। कोरोना कर्मवीरों को समर्पित डॉ. सोमनारायण पुरोहित की काव्य कृति कोरोना महामारी पर देश सेवा भारी का लोकार्पण 4 जून, 2020 को बीकानेर के जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने किया। इस पुस्तक में डॉ. पुरोहित ने अचानक उत्पन्न हुई और जीवन की गति को विकृत करनेवाली असाधारण, विनाशकारी महामारी का चित्रण किया है। मानव जीवन को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए समर्पित समस्त कोरोना कर्मवीरों के साथ भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी और राजस्थान के जननायक गाँधीवादी रीति-नीति के अनुसार सुशासन के लिए के लिए समर्पित श्री अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के प्रति संवदेनशीलता का ज्ञापन करते हुए उनके नेतृत्व में हो रहे जनहित के कार्यों को समाज के लिए हितकारी बताया।
ध्यान रहे श्री पुरोहित लोकसाहित्य और संत साहित्य के अधिकारी विद्वान हैं। श्री पुरोहित ने इस पुस्तक में कोरोनाकाल में समाज के लिए समर्पित चिकित्साकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और अनन्य भामाशाओं के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट की है।
-सुरेश.एन.पुरोहित