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पाँच कविताएँ

विनोद विट्ठल
1. कोरोना कविता
(1/1)
बताया नहीं जा सकता
कब हुआ
कैसे हुआ
किस छुअन से
किस साँस से

प्रेम से
कितना मिलता-जुलता है यह !

(1/2)
दो हिस्सों में बाँटूँगा दुनिया
कोरोना से पहले और बाद की

कितनी-कितनी चीजें आईं
और फैलती चली गईं
इसके संऋमण की तरह र्‍
हिंसा, लालच, घृणा , ईर्ष्या

लेकिन प्रेम भी तो आया था इसी तरह
चुपचाप, बेआवाज

और अभी तक दुनिया संऋमित भी है इससे !

(1/3)
छेद के बाहर से देखो
कोरोना समेत लाखों वायरस कह रहे हैं -

मनुष्य भी एक खतरनाक वायरस है !
(1/4)
तीस साल पहले
मैंने लगा दिया था मास्क कि न लूँ कोई खुशबू तुम्हारे सिवा
न मिलाऊँ किसी से हाथ तुम्हारे बाद

भीतर रहते
इतना संन्यस्त हो गया हूँ मैं
कि दुनिया को देखे बिना जी रहा हूँ

इतने लम्बे क्वॉरंटीन के बाद भी
नहीं मर रहा है ढाई अक्षर का वायरस !
(1/5)
कोई छूता है अकेले में
केवल एक बार
और फिर हरहरा दरिया बन जाती है छुअन
फैलती रहती है लगातार
कोरोना की तरह प्रेम भी फैलता है
इसी तरह !
2. सिंध से आए थे रेवाचंद सिंधी

दूसरे विश्वयुद्ध में फर्स्ट-एड बॉक्स के काम में आई एक ट्राॅली में
वे बेचते थे कुछ-कुछ, हर रोज नई-नई चीजें
कभी लेमनचूस, कभी नानखटाई, कभी शक्करपारे
कभी मीरपुर खास की मठडियाँ

दरअसल बेचना उनके लिए खरीदने का पुल था
न कभी ज्यादा बिका, न ज्यादा खरीदा गया
बरसों-बरस

जोधपुर के इतिहास में वे कहीं दर्ज नहीं थे
सिवा इसके कि अपने आखिरी दिनों में वे पागल हो गए थे
सहगल के साथ बीडी पीते थे
नूरजहाँ के फैसले से ईर्ष्या करते थे
गालियाँ निकालते थे सावरकर और जिन्ना को

क्या वे सचमुच पागल थे ?

उनका बेटा हरिकिशन जो अब मुंबई रहता है
वह भी विस्थापन की बात करता है
ग्रामोफोन की गुमशुदगी उसका जाती गम है

उनकी बेटियाँ ; हीरा और तारा
दो-दो तलाकों के बाद अब एक स्टोर्स चलाती हैं
उनकी बातों में भी विस्थापन है
और वे सचमुच ऋष्ट*ह्य के नाम से बेचना चाहती हैं फिर से
मीरपुर खास की मठडियाँ ।

(3)
सितार बजाती साँवली लडकी के लिए

मैंने भाषा के सबसे सुंदर शब्द
तुम्हारे लिए बचा कर रखे
मनचीते सपनों से बचने को रतजगे किए
बसंत के लिए मौसम में हेर-फेर की
चाँद को देखना मुल्तवी किया
सुबह की सैर बंद की

अपने अस्तित्त्व को समेट
प्रतीक्षा के पानी से धरती को धो
तलुओं तक के निशान से बचाया

न सूँघ कर खुश्बू को
न देख कर दृश्यों को बचाया
जैसे न बोल कर सन्नाटे को
एकांत को किसी से न मिल कर

समय तक को अनसुना किया
सब-कुछ बचाने के लिए

याद और प्रतीक्षा के यही तरीके आते हैं मुझे !

(4)
रफ कॉपी पर दर्जन भर रफ कविताएँ
(4/1)
हर कॉपी रफ कॉपी नहीं होती शुरू में
बन जाती है बाद में
जैसे कुछ बच्चे बन जाते हैं चोर या भिखारी
(4/2)
हर कॉपी फेयर बने रहना चाहती है
सम्भाली जाना चाहती है किसी प्रेम-पत्र की तरह
वो क्या होता है नागरिक की तरह जो उसे बेबस कर देता है
(4/3)
शुरुआत ठीक होती है हर कॉपी की रिश्तों की तरह ही
पर गर्मियों में अचानक गंध छोडती आलू की सब्जी की तरह कुछ बिगड जाता है

और रफ हो जाती है कोई कॉपी जैसे गंधा जाते हैं रिश्ते
(4/4)
नयी कोपियों को नए रिश्तों की तरह ही
नहीं पता होता है हमारी फितरत के बारे में
और इस तरह वे भी रफकोपियों में बदल जाती हैं
(4/5)
कटी पतंग और अमर प्रेम के गीत
सुषमा पालीवाल के लैंडलाइन नम्बर
मधु गहलोत और कविता शर्मा के जन्मदिन
सितार बजाती खुले बालोंवाली
प्रेरणा शर्मा का एक स्केच

इतनी जरूरी चीजें
हम गैर जरूरी समझ रफ कॉपी में लिखते हैं
और फिर पूरी जंदगी उदास रहते हैं

(4/6)
पाँच साल में एक बार डालते हैं वोट
फेयर कॉपी की तरह
सरकारें उसे रफ कॉपी बना देती हैं
(4/7)
जब रफ कोपियाँ नहीं होंगी हम किसमें अभ्यास करेंगे
बडे होने पर क्या जिंदगी ही रफ कॉपी हो जाती है
(4/8)
फेयर कोपियों के बचे पन्नों की
कुछ बनाते हैं रफ कोपियाँ
कुछ के लिए ये ही फेयर होती हैं
फिर भी, उन्हें पकडो
जो देश की कॉपी को रफ कॉपी में बदल रहे हैं
(4/9)
रफ कॉपी का कोई एक विषय नहीं होता
एक भाषा भी नहीं
फिर दुनिया को इकरंगा क्यूँ बनाया जा रहा है
देश को कुछ लोग बना रहे हैं जैसे

(4/1॰)
कुछ तुकें होती है इनमें; कुछ रेखाएँ भी
रफ कॉपी के साथ इस तरह खो जाते हैं
कुछ कवि और चित्रकार
(4/11)
कोई तो स्कूल हो जहाँ रफ कॉपी के भी नम्बर मिलें
कमतर या कम सजावटी होना क्या कोई मूल्य नहीं
(4/12)
नौकरी में बरसों बाद समझ में आता है -
मैं तो एक रफ कॉपी था, केवल इस्तेमाल हुआ

(5)
जीवन

एक लम्बी लेकिन अधूरी कहानी की तरह वह मिला सितार की तरह बजाता उसे
अगर एक तार कम न होता

रेलवे स्टेशन की तरह उसे साफ रखना संभव न था
इकतरफा प्यार की तरह
वह हमेशा बेध्यानी से मुझे देखता

अगंभीर था किसी गंभीर विदूषक की तरह

मैं उस पर लिखना चाहता था एक कविता
वक्त आधी रात का होता
और इकलौते पेन में रिफिल नहीं होती थी


सम्पर्क : हेड-सीएसआर, जे एस डब्लू फाउंडेशन
जे.एस.डब्लू. हाईड्रो एनर्जी लिमिटेड ए-8,
शोलतू कॉलोनी, टापरी
जिला-किन्नौर-172194 (हिमाचल)