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स्वप्न का यथार्थ

अखिलेश
वैन गॉग कहते हैं मैं अपने चित्रों का स्वप्न देखता हूँ फिर स्वप्न को चित्रित करता हूँ , इसलिए जब एक चित्रकार स्वप्न को सफलतापूर्वक केनवास पर चित्रित करता है तब वह चित्र दर्शक के लिए अद्भुत अनुभव होता है। जब मैंने पहली बार अमित हारित के चित्रों को देखा तो सुखद अनुभूति हुई, वह अपने मित्र सुप्रिय के साथ इंदौर की देवलालीकर गैलरी में कला प्रदर्शनी कर रहे थे। इस प्रदर्शनी में मैंने इस युवा कलाकार की कला के प्रति गंभीरता को अनुभव किया।
अमित अपने कार्य, कार्यशैली और रंगों के प्रति बहुत सजग है कि वह क्या कर रहा है उसके लिए हर आकृति चित्र और चित्रण के बीच मौजूद यथार्थ में है। यह यथार्थ दिखाई देने वाले यथार्थ से अलग स्वप्न में मौजूद यथार्थ-सा है। वह रंगों के उपयोग और लगाने के ढंग को लेकर जागा हुआ है। रंग लगाने के लिए नहीं लगा रहा है। वह उनके भीतर स्थित स्वप्न से संवाद कर रहा है।
चित्रकार को यह अवस्था इतनी उम्र में नहीं प्राप्त होती इसके लिए सघन साधना का लम्बा समय एकाग्रता में बिताना होता है। वह अपने चित्र शैली के साथ बहुत सहज है। अक्सर जब हम किसी युवा कलाकार को काम करते देखते हैं उसका चित्र आपको एक कलाकार के रूप में बढने की सम्भावना को दर्शाता है ना कि खुद कलाकार को। आप देख पाते हैं जो चित्र में घट रहा है। आप चित्रकार की कल्पनाशीलता को लक्ष्य करते हैं। उसके रंग-प्रयोग, रेखाओं के इस्तेमाल और संयोजन की क्षमता को जाँचते हैं। आप देखते हैं कि कल्पना का निवेश कितना है सिर्फ संयोजन में नहीं बल्कि चित्र के हर स्तर पर जिसमें रंग-पैलेट भी शामिल है।
अमित के चित्र यहाँ चमत्कृत करते हैं। वह न सिर्फ कल्पनाशील है बल्कि उसे एहसास है कि इस कल्पना को यथार्थ का जामा किस तरह पहनाना है। यही वो जगह जहाँ लगभग सभी युवा चित्रकार गच्चा खाते हैं।
अमित रंगों और शैली को इस्तेमाल करने में बहुत आकस्मिक हैं। अमित के चित्र का वातावरण और उसका चित्रण किसी अनुभवी कलाकार की तरह का है। आरंभ से ही उनके पास एक विकसित दृष्टिकोण है। उनके चित्रों का कच्चापन भी पका हुआ है। ठीक देखे गए स्वप्न की तरह जहाँ यथार्थ वास्तविकता से भिन्न और गहरा है। वह अपने स्वप्नों पर काम करते हैं और बहुत अद्भुत ढंग से सफलतापूर्वक कैनवास पर चित्रित कर ले जाते हैं। स्वप्न का यथार्थ देखे गए यथार्थ से ज्यादा अनुभव दे जाता है, अक्सर यह अनुभव वास्तविक अनुभव से ज्यादा ज्वलंत और तीखा होता है। इसका एक असर यह भी है कि यह वास्तविकता से अधिक लुभावना होता है। अनुभव की तीव्रता और आकर्षण स्वप्न को यथार्थ से दूर ले जाता है किन्तु यह स्मृति का वह इलाका है जहाँ कल्पना का वास है यही जमीन चित्रकला की है। इस बात का अहसास अमित के चित्रों से टपकता रहता है।
अमित की कलाकृतियों में उनका अनूठा दृष्टिकोण भली-भाँति देखा जा सकता है। इन चित्रों में आकस्मिकता की प्रमुखता इन्हें यह अनूठापन प्रदान करती है। इन चित्रों में मौजूद आकस्मिक दृष्टिकोण और काल्पनिक दुनिया का सटीक मिश्रण का प्रभाव दर्शक को आनंदित करता है। चित्र की यात्रा उसे अनजान प्रदेश में जानी-पहचानी आकृतियों से कराती है जिसे वह पहचानता है, किन्तु यहाँ वह नए रूप में प्रकट हैं। ये चींटियाँ अमित के चित्र की चींटियाँ हैं, या कि चित्रित जानवर, जगह, बिल्डिंग, पेड-पौधे, हवाईजहाज या मोटरकार। इन सबका स्वरूप बदला हुआ है उजला है।
अमित के कैनवास की बहुत-सी सतहों के पार्शव में गाँव के रंग, वहाँ के पर्व, तीज त्योहार, मेलों और मिट्टी की सौंधी महक हैं, रेगिस्तान की सूखी रेत की तपन हैं, पेड, जानवर, मछलियाँ, ट्रेन, मोटरकार, हेलीकॉप्टर, जहाज, पहाड, और शहरों की छवियाँ जो वास्तविक दुनिया में भी मौजूद हैं और यहाँ उस रूप में नहीं ही। ये सब संसार स्वप्न की दुनिया में हैं। जो अमित का स्वप्न है जो आपको किसी अन्य ही ग्रह पर ले जाते हैं, जो कल्पना में है, जहाँ समय रुक गया हैं। हम अपनी वास्तविक दुनिया में जो देखते हैं जीव-जंतु, प्रकृति के अनन्य रूप और मानवीय आकृतियों के जाने पहचाने होते हुए भी उन्हें यहाँ हू-ब-हू नहीं पाते हैं।
अमित एक ऐसे स्थान की खोज कर सकते हैं जहाँ वह अपनी उंगलियों से इस स्वप्निल अमूर्त दुनिया को मूर्त रूप दे सकते हैं। अमित की आँखों से देखा गया कोई भी स्वप्न स्वप्न नहीं रह जाता वह वास्तविक रूप ले लेता हैं। यह वास्तविकता उस चित्र में प्रकट हो रही है जिसे दर्शक अपनी जाग्रत अवस्था में देख रहा है। यहाँ वह अचम्भा पैदा होता है जिसे स्वीकार करने में दर्शक हिचकिचाता है और चित्र की अनदेखी करता है। हुसेन अगर यह कह रहे हैं कि कोई चित्र देखता नहीं है तब वह इसी अनभिज्ञता की तरफ इशारा कर रहे हैं। लोग अक्सर चित्र देखने का नाट्य कर रहे होते हैं। इस नाटक में वह भूल जाते हैं कि चित्रकार भी देख रहा है। अमित इन चित्रों में अपनी काल्पनिक दुनिया का निर्माण कर रहे हैं जहाँ वह महसूस करते हैं कि वह स्वप्नों का इंतजार नहीं कर सकते। अमित के स्वप्न अब यथार्थ हैं। एक यथार्थ जहाँ समय रुक गया है जहाँ कल्पना ही समय है जो अनन्त है।
स्वप्न गहरी निंद्रा में देखे जाते हैं ऐसा मेरे एक डॉक्टर मित्र ने एक बार मुझसे कहा। गहरी निंद्रा अर्थात आप जब अपने शरीर में भी मौजूद नही होते।जब हम अवचेतन अवस्था में होते हैं तब हमें यह भी भान नहीं होता कि आसपास क्या घटित हो रहा है या हम क्या अनुभव कर रहे हैं परंतु ये अहसास वास्तविक होते हैं। स्वप्न का अहसास यथार्थ में भोगे गए अनुभव से ज्यादा मुखर होता है। इन चित्रों में आप सचेत हो जाते है। आप अनदेखी वस्तुओं का अनुभव करते हैं। स्वप्नों की वास्तविकता आफ समक्ष होती हैं। आप स्वप्न की मुखरता से रू-ब-रू होते हैं। यही वो जगह है जहाँ कला का जन्म होता है। कला के इस यथार्थ में उस कल्पना का अहसास है जो इस दुनिया में अचम्भा लाती है।
अमित स्वप्नों का इंतजार नहीं करता वह उन्हें प्रत्यक्ष देखता है। वह रंगों, रेखाओं और शैलियों के साथ खेलता है। उनका इन सभी के प्रति दृष्टिकोण बहुत आकस्मिक है जैसे वह उन्हें रच नहीं रहा हो बल्कि जैसे मंच से परदा उठता है और दृश्य प्रकट होता है कुछ इस तरह अमित की कलाकृति प्रकट होती है। नया दृश्य अनजानी जगह और अनुभव की आकस्मिकता ही अमित के चित्रों का सार है।
इन चित्रों में इस संसार का अनुभव स्पष्ट दिखाई देता है जो दर्शक को चकित कर देता है। दर्शक को सम्बोधित एवं चकित करने की शक्ति जुटाना सहज नही होता। आज के समय में सभी कलाकार इस अज्ञात, अवचेतन अवस्था से बाहर निकलने के लिए प्रयासरत हैं और कुछ ही कलाकार हैं जो बिना प्रयास के वैन गॉग की तरह वहाँ पहुँच पाते हैं। उनकी प्रतिभा, कल्पना, कौशल और इच्छाशक्ति उनसे सहज ही इस तरह का अचम्भा रचा लेती है।
अमित और वैन गॉग में कोई संबंध नहीं हैं सिवाय इस एक के कि दोनों चित्रकार हैं। वैन गॉग स्वप्नों का चित्रण करता हैं और अमित स्वप्नों को रचता हैं। एक युवा कलाकार होने के नाते उसे अभी एक लम्बी दूरी तय करनी है और मैं सोचता हूँ अमित में एक अच्छा चित्रकार बनने की अकूत क्षमता विद्यमान है। वह स्वप्नों को रच सकता है लेकिन स्वप्नों का इंतजार नहीं कर सकता।

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