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साहित्य समाचार

लॉकडाऊन में डिजिटल काव्यसंध्या
भीलवाडा, 26 अप्रैल। भीलवाडा की अग्रणी साहित्यिक संस्था नवमानव सृजनशील चेतना समिति की ओर से रविवार को लॉकडाऊन के दौरान अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चौथी ऑनलाइन डिजिटल काव्यसंध्या आयोजित की गई। इस ऑनलाइन डिजिटल काव्यसंध्या में सभी कवि एक-एक कर अपनी रचना टेक्स्ट, वॉयस, ऑडियो, वीडियो संदेश से ग्रुप में भेजकर सहभागी हुए,संयोजक व शेष सदस्य समीक्षा व टिप्पणियाँ करते रहे। इसमें कोरोना,लॉकडाऊन,भीलवाडा मॉडल,सिविल सर्विस डे(21),विश्व पृथ्वी दिवस(22),विश्व पुस्तक दिवस(23),गुरु अंगददेव जयंती(24),पशुराम जयंती (25),अक्षय तृतीया(26),सूरदास जयंती(28/4) सहित कई विषयों पर रचनाएँ प्रस्तुत की गईं। काव्यसंध्या के प्रतीकात्मक मुख्य अतिथि जीपी पारीक,विशिष्ट अतिथि एसएस गंभीर थे। संचालन व अध्यक्षता डॉ एसके लोहानी खालिस व सरस्वती वंदना लाजवंती शर्मा ने की। कविगण अरुण अजीब,महेंद्र शर्मा, ओम उज्ज्वल, ओम अंकुर,डॉ अवधेश जौहरी, सतीश व्यास आस,दीपक पारीक,पवन गग्गड, श्यामसुन्दर तिवाडी मधुप, आरके जैन,परमेश देव माली आदि सभी ने अपने काव्यपाठ से काव्यसंध्या को समृद्ध किया।
- डॉ एसके लोहानी,
भीलवाडा।

राजस्थान साहित्य अकादमी की
नई पहल
उदयपुर, 13 मई - राजस्थान साहित्य अकादमी की नई पहल ऑनलाइन संवाद श्रृंखला के अन्तर्गत कवि और कविता विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। पहली परिचर्चा मीरा का महत्त्व से इस नवाचार का आरम्भ हुआ। जिसमें मीरा साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान प्रो. माधव हाडा के साथ डॉ. पल्लव की बातचीत प्रसारित हुई। इस परिचर्चा में मीरा और मीरा साहित्य से जुडे कई अस्पर्शी और अल्पलक्षित विषयों पर नवीन व्याख्याएँ सामने आई। फिलहाल यह आयोजन प्रत्येक बुधवार को ग्यारह से बारह बजे के बीच प्रसारित होता है और सुखद प्रतीती यह है कि नई परिस्थति में राजकीय संस्थानिक क्षेत्र में यह पहल राजस्थान की प्रतिनिधि संस्था राजस्थान साहित्य अकादमी के माध्यम से प्रारम्भ हुई है। इसकी दूसरी कडी के अन्तर्गत प्रसिद्ध आलोचक डॉ. जीवन सिंह, से डॉ. संदीप मील, द्वारा संवाद किया गया। डॉ. जीवन सिंह ने रीति काल से लेकर छायावाद, प्रगतिशील- आधुनिक कविता और कवियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को पर्याप्त मात्रा में साहित्य प्रेमियों द्वारा फेसबुक पर देखा व सुना और प्रचारित किया गया।

सचिव,
राजस्थान साहित्य अकादमी,
उदयपुर।
रत्नकुमार सांभरिया को अश्वघोष नाट्य पुरस्कार
अम्बेडरराइट मूवमेंट ऑफ कल्चर एंड लिटरेचर नागपुर की ओर से मधुरम सभागृह नागपुर में 9 फरवरी को राष्टीय पुरस्कार वितरण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं नागालैंड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री संदीप तामगाडगे,अध्यक्ष एवं दलित अस्मिता की संपादक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विमल थोराट,वरिष्ठ कवि श्री जयंत परमार तथा संस्था के अध्यक्ष श्री दादाकान्त धनविजय ने वरिष्ठ साहित्यकार श्री रत्नकुमार सांभरिया को उनकी नाट्यकृति वीमा के लिए राष्ट्रीय अश्वघोष नाट्य पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। श्री सांभरिया को पुरस्कार स्वरूप शॉल,स्मृति चिन्ह व पाँच हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। वीमा निःशक्त एवं दलित विमर्श पर देश का पहला नाटक है,जो पाँच विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल है। श्री सांभरिया के अब तक चार कहानी संग्रह,दो लघुकथा संग्रह,तीन नाटक,एक एकांकी संग्रह,एक आलोचना तथा एक सम्पादन की पुस्तक प्रकाशित हैं। उनकी कहानियों का अंग्रेजी,मराठी,सिंधी,तेलगु, उडिया आदि भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। उपराष्ट्रपति श्री भैरोसिंह शेखावत के द्वारा चपडासन कहानी को पुरस्कृत किया गया है। बिपर सूदर एक कीने कहानी पर कथादेश हिंदी कहानी प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार, राजस्थान पत्रिका का सृजनात्मक पुरस्कार, हरियाणा गौरव पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं।
हाल ही में उनको सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी संस्थान,आगरा द्वारा दिये जाने वाला प्रतिष्ठित हिंदी सेवा सम्मान है,जो सृजनात्मक एवं आलोचना के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जाएगा। पुरस्कार स्वरूप शॉल, प्रशस्ति पत्र तथा पाँच लाख रुपये की राशि दिए जाने का प्रावधान है। पुरस्कार राष्ट्रपति के कर कमलों द्वारा दिया जाता है।

डॉ.धूल चंद मीना