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तीन की कविताएँ

पुनीत कुमार रंगा
1. पिता

एक व्यक्तित्व जो
अनजान
जिसे न साहित्य
ने रचा
न ही कला ने
उकेरा
न ही संगीत ने
सुनाया
और न ही उसे
कोई समझ पाया
बस केवल क्रोध मूर्त
रूप में पाया
पर यह न माता न भगवान
केवल इंसान
जिसे कहा जन्मदाता, हाँ
पिता!

2. क्या नहीं है कलम

गीता है, कुरान है
कलम
माँ का वात्सल्य है
कलम
पिता का आशीर्वाद है
कलम
भाई का स्नेह है
कलम
बहिन का प्यार है
कलम
सूर्य की धूप है
कलम
चांद की चांदनी है
कलम
पानी-सी तरल है
कलम
आग की तपन है
कलम
जीवन का अर्जन है
कलम
सृष्टि का सर्जन है
कलम
क्या नहीं है
कलम-

3. भाषा

मैं भाषा
तुम भाषी
इस रिश्ते को पहचानो

न बांधो मुझे रस्मों में
न करो दिखावा तुम
करो आजाद मुझे
शब्दकोश की कारा से

मैं भाषा
तुम भाषी
इस रिश्ते को पहचानो

क्यूं परदेसी अपनाओ
लो संकल्प मन से
इतना-सा ही
अपनी ही भाषा अपनाओ

मैं भाषा
तुम भाषी
इस रिश्ते को पहचानो।
नालन्दा पब्लिक स्कूल के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर, बीकानेर-३३४००४,
मो. ९८२९१३८००१