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साहित्यिक परिदृश्य

नहीं रहे कथाकार पानू खोलिया
उत्तराखण्ड के अल्मोडा जिले के देवली गाँव में सन् 1939 में जन्मे 81 वर्षीय पानू खोलिया का निधन 1 जनवरी 2020 को ईश्वर विहार, मल्ली बामौरी, हल्द्वानी में स्थित अपने निवास पर हुआ। वे लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। अपने पीछे वे पत्नी, चार पुत्रियाँ व एक पुत्र छोड गए हैं।
ध्यातव्य है कि स्व. पानू खोलिया ने राजस्थान लोकसेवा आयोग से चयन के पश्चात् सन् 62 से 97 लगभग 35 वर्ष तक राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में हिन्दी प्राध्यापक, उपाचार्य एवं प्राचार्य के बतौर अपनी सेवाएँ दीं थीं। वे 97 में राजकीय महाविद्यालय सिरोही के स्नातकोत्तर प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
पानू खोलिया हिन्दी की साठोत्तर कथा-पीढी के महत्वपूर्ण कथाकार रहे हैं। भारतीय साहित्य को समृद्ध करने में पानू खोलिया का अप्रतिम योगदान रहा है। पानू खोलिया के प्रकाशित साहित्य के अन्तर्गत तीन कहानी-संग्रह एक किरती और, अन्ना और दण्डनायक तथा चार उपन्यास- सत्तर पार के शिखर, टूटे हुए सूर्यबिम्ब, वाहन और मुझे मेरे घर जाने दो शामिल हैं। उनके कई कहानी-संग्रह तथा उपन्यास तथा आत्मकथा अपनी ही राख से पुनर्जीवित होना प्रकाशनाधीन हैं। अपने समय की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं जैसे धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, सारिका, ज्ञानोदय, रविवार, कहानी, माया, कादम्बिनी, नवभारत टाइम्स, योजना, नीहारिका, उत्कर्ष, विकल्प, आजकल, त्रिपथगा, मधुमती आदि में उनकी कहानियाँ लगातार छपती थीं। उनके कई उपन्यास धारावाहिक छपे। पानू खोलिया ने अपने एक ताजा साक्षात्कार में अभी कहा था- आज का कथाकार मानव जीवन की अन्तर्गूढ गुत्थियों को खोलता है, पात्रों का सतही चित्रण भर नहीं करता। यह एक जीवन-व्यापी शोध है।
पानू खोलिया को सत्तर पार के शिखर पर सत्र 1979-80 में राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च मीरां स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया था।
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर पानू खोलिया जी के आकस्मिक निधन पर गहरा हार्दिक शोक व्यक्त करती है तथा उनके परिजनों को इस दुःख को सहन करने का धैर्य प्रदान करने की परमपिता से प्रार्थना करती है।
- शंभु गुप्त, अलवर

बालमन को भाया ‘चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्विल
सीखा कहानी-कविता लिखना, जानी कार्टून की बारीकियाँ
नन्हें-मुन्ने बच्चों में कला, साहित्य एवं संस्कृति के प्रति लगाव पैदा करने और समसामयिक मुद्दों के प्रति जागरुकता के उद्देश्य से पत्रकारों, साहित्यकारों तथा प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा लगातार दूसरे वर्ष 25 से 27 दिसम्बर तक बीकानेर के अंत्योदय नगर स्थित रमेश इंग्लिश स्कूल में ‘चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया। एक ओर जहां बीकानेर सहित नोखा, श्रीडूंगरगढ, जोधपुर, उदयपुर, चूरू तथा नोयडा के 540 बच्चों ने इस फेस्टिवल में भागीदारी निभाई वहीं दूसरी ओर विभिन्न क्षेत्र के प्रखर अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन इन बच्चों को मिला। अकेले बीकानेर के 18 निजी और 3 सरकारी विद्यालयों का प्रतिनिधित्व इस फेस्टिवल में रहा।
तीन दिवसीय चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन सत्र माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्री हिमांशु गुप्ता, केन्द्रीय साहित्य अकादमी में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक श्री मधु आचार्य ‘आशावादी’ तथा सुसवाणी माता मोरखाणा ट्रस्ट के मंत्री श्री मोहन सुराणा के आतिथ्य में आयोजित हुआ। पहले सत्र ‘आओ नाटक खेलें’ में विख्यात रंगकर्मी श्री आशीष देव चारण, श्री विपिन पुरोहित और श्री सुनीलम् पुरोहित ने बच्चों को रंगकर्म की बारीकियां सिखाई। इस सत्र के दौरान बच्चों की जिज्ञासा देखने लायक थी। इस दौरान एक टीम का चयन हुआ, जिसने समापन-सत्र के दौरान शानदार प्रस्तुति दी। इसके बाद प्रसिद्ध कथाकार श्री प्रमोद चमोली ने बाल कहानियों-कविताओं की बारीकियों के बारे में बताया।
बीकानेर चिल्ड्रन फेस्टिवल के दूसरे दिन सात वर्षीय बाल गायक थानू खां को नोखा (बीकानेर) के विवेकानंद एजुकेशनल सोसायटी की ओर से ‘सीएलएफ अवार्ड’ दिया गया। इस दौरान थानू खां को ग्यारह हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए गए। इस कार्यऋम के मुख्य अतिथि महापौर श्रीमती सुशीला कंवर तथा जिला कलक्टर श्री कुमारपाल गौतम थे। यह पहल छोटे-छोटे बच्चों के लिए प्रेरणादायी रही।
इसके पश्चात् ‘रचनात्मकता के विकास के लिए क्या करें’ विषयक सत्र में श्री रामकिशन अडिग ने बच्चों को मार्गदर्शन दिया। ‘कैसे लिखें कविता’ और ‘कैसे लिखें कहानी’ जैसे सत्रों के साथ बच्चों को कहानी और कविता लेखन की बारीकियों से रूबरू करवाया गया। कविता के सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में लोक कला मर्मज्ञ डॉ. श्रीलाल मोहता, मरूदेश संस्थान सुजानग? के श्री घनश्याम नाथ तथा ‘मधुमति’ पत्रिका के सम्पादक डॉ. बृजरतन जोशी रहे। सत्र प्रभारी के रूप में श्रीमती सीमा भाटी, श्रीमती संजू श्रीमाली और श्रीमती अनामिका जोशी ने भागीदारी निभाई। वहीं कहानी सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ व्यंग्य लेखक श्री बुलाकी शर्मा, डॉ. भूपेन्द्र सिंह एवं प्रमोद सिंह मौजूद रहे। इन सत्रों के प्रभारी की भूमिका श्री इरशाद अजीज, श्रीमती ऋतु शर्मा और श्री नगेन्द्र किराडू ने निभाई। वहीं अंतिम सत्र में प्रख्यात कार्टूनिस्ट श्री चंद्र शेखर हाडा ने कार्टून एवं कामनसेंस विषय पर अपनी बात रखी तथा फिल्म निर्मात्री और लेखिका इरा टाक ने ‘नन्हें परिंदे, खुला आसमान’ विषयक सत्र को संबोधित किया।
तीसरे दिन के कार्यऋमों की शुरूआत एक समसामयिक विषय ‘चाइल्ड प्रोटेक्शन’ के साथ हुई। इसमें बीकानेर के कोटगेट थाना प्रभारी श्री धर्म पूनिया ने बच्चों को बाल अधिकारों एवं इनकी रक्षा के बारे में बताया। राष्ट्रीय नाट्य अकादमी, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. अर्जुनदेव चारण ने तीन दिनों में बच्चों द्वारा अर्जित ज्ञान पर अभिव्यक्ति आधारित कार्यऋम ‘आओ मन खोलें, कुछ बोलें’ में बच्चों के साथ मधुर संवाद किया। पत्रकारिता और समाज से के जुडे बच्चों के सवालों के जवाब वरिष्ठ पत्रकार श्री मधु आचार्य ‘आशावादी’, श्री लूणकरण छाजे? और श्री दीपचंद सांखला ने दिए।
इसके बाद आयोजित समापन सत्र में बीकानेर पुलिस रेंज के महानिरीक्षक श्री जोस मोहन, श्री अर्जुनदेव चारण, श्री मधु आचार्य ‘आशावादी’, श्री मीठेश निर्मोही तथा डॉ. श्रीलाल मोहता ने अतिथियों के रूप में मौजूद रहकर बच्चों की हौसला अफजाई की। इस दौरान सभी बच्चों को भागीदारी के प्रमाण पत्र दिए गए। चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल के संयोजक श्री अनुराग हर्ष, सहसंयोजक श्री मनोज व्यास, समस्त कार्यऋमों का सफल संचालन करने वाले श्री हरीश बी. शर्मा तथा श्रीमती सेणुका हर्ष सहित पूरी टीम के अथक परिश्रम की बदौलत यह कार्यऋम बेहद सफल रहा।
आयोजकों द्वारा लगातार तीन दिनों तक ‘बुक फेयर’ आयोजन किया गया। इस दौरान स्तरीय प्रकाशकों की सौ से अधिक प्रकार की बाल साहित्य की पुस्तकें बच्चों के अवलोकनार्थ एवं विऋय के लिए रखी गई। बाल कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास से लेकर लगभग प्रत्येक विधा से संबंधित पुस्तकें बच्चों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। इस दौरान बच्चों ने ‘सेल्फी पाइंट’ का जबरदस्त लुत्फ उठाया। कुल मिलाकर तीन दिनों तक एक सुमधुर माहौल में रहने के बाद बच्चे अगले वर्ष फिर मिलने के वादे के साथ लौटे। बडी बात यह रही कि आयोजकों द्वारा अगले वर्ष इसे राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बनाने की घोषणा की।
-हरि शंकर आचार्य