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साहित्यिक परिदृश्य

21वीं सदी और साहित्यिक विमर्श
दो दिवसीय चिन्तन, मनन, मंथन विमर्श संगोष्ठी प्रतिवेदन।
उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान (मानित विश्वविद्यालय), मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के हिन्दी विभाग, गाँधी विद्या मन्दिर, सरदारशहर, चूरू (राज.) द्वारा दिनाँक 8-9 नवम्बर, 2019 को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्धाटन डॉ. सदीप अवस्थी एवं ब्रजरतन जोशी के कर- कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. संदीप अवस्थी ने दलित, आदिवासी परिवार और थर्ड जेंडर विमर्श पर भी अपने विचार व्यक्त किए। मधुमती के सम्पादक ब्रजरतन जोशी ने कहा कि ज्ञान त्रि*या के बिना भार स्वरूप है। जोशी ने साहित्य में विमर्श के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उद्धाटन सत्र को संबोधित करते हुए सत्र अध्यक्ष हिमांशु दूगड ने कहा कि स्त्री-पुरूष समानता का बिन्दु परिभाषित हो। मानव जाति एवं मानव धर्म पर विमर्श किया जाए साथ ही हिन्दी भाषा के शब्दकोष में नवीनीकरण के लिए सुझाव भी दिए। उन्होनें थर्ड जेंडर विमर्श पर भी अपने विचार व्यक्ति किए। समाज में उनकी स्थिति क्या है? और इनकी अपनी समस्याएँ क्या हैं? उन्हें कैसे न्याय मिले इस पर भी चर्चा की। कुलपति डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्री-पुरूष का भेद था ही नहीं। यह तो कालान्तर में विदेशी आऋमणों के कारण भारत में आया। प्रो. देवेन्द्र मोहन ने हिन्दी साहित्य के 20वीं सदी के साहित्यकारों की विशेषताओं से परिचित करवाया डॉ. कल्पना मौर्य, संगोष्ठी समन्वयक ने अतिथि परिचय, संगोष्ठी परिचय एवं स्वागत उद्बोधन दिया।
उद्घाटन-सत्र में विभिन्न राज्यों से आये हुए अतिथियों, प्रतिभागियों, अन्तरराष्ट्रीय स्तर की निहारिका मालवीय (स्वीडन), डॉ. शिवानी हर्डिया (डेनमार्क), मुन्नालाल हर्डिया (परीक्षा नियन्त्रक, देवी अहल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर, म.प्र.), डॉ. शेखर (आई.टी कॉलेज), प्रो. टी.जी. बिकार्या (राजकोट, गुजरात), डॉ. बीना शर्मा (कर्नाटक) तथा गाँधी विद्या मन्दिर के सभी विद्वजन एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

डॉ. कल्पना मौर्य, सरदारशहर
‘माछल्या रा आंसू’
पर्यावरणहित की श्रेष्ठ कृतियों मे से एक है ः बुलाकी शर्मा
कोटा। राष्ट्रीय कवि विश्वामित्र दाधीच की पर्यावरण केन्द्रित राजस्थानी भाषा की बाल काव्य कृति ‘माछल्या रा आँसू’ का लोकार्पण दिनाँक 14 नवम्बर को गवर्मेंट डिवीजनल पब्लिक लाइब्रेरी कोटा में आयोजित संभाग स्तरीय बाल दिवस समारोह मे सम्पन्ना हुआ। इस कार्यऋम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार श्री बशीर अहमद मयूख, अध्यक्षता व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा बीकानेर एवं विशिष्ठ अतिथि श्री दुर्गादान सिह गौड ,श्री अम्बिका दत्त चतुर्वेदी एवं श्री अनुराग हर्ष, सम्पादक, दैनिक नेशनल बीकानेर के प्रमुख रहे तथा मंच संयोजन श्री रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने किया। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि श्री भवानीसिंह पालावत सचिव, नगर विकास न्यास रहे तथा मंच संयोजन श्रीमती सीमा घोष ने किया ।
अध्यक्ष बुलाकी शर्मा ने कहा कि मछली के माध्यम से प्रदूषण की, जो व्यंजना जो कवि विश्वामित्र दाधीच ने उकेरी है, वह आज तक देखने में नहीं आयी। कृति का शीर्षक अपने आप में सार्थक है। विशिष्ठ अतिथि अनुराग हर्ष ने कहा कि- जिस तरह मछली जल प्रदूषण से परेशान है, उसी तरह शब्द प्रदूषण बढता जा रहा है। विशिष्ठ अतिथि दुर्गादान ने कहा कि आज हाडौती समृद्ध है जिसमे व्यापकता है। मुख्य वक्ता जितेन्द्र निर्मोही ने कहा कि सोरठा विधा के आधिकारिक हाडौती अंचल से बालकृष्ण थोलम्बिया जाने जाते हैं, लेकिन बीस वर्ष बाद विश्वामित्र दाधीच की यह कृति जो सम्पूर्ण सोरठा छंद मे एतिहासिक महत्त्व रखती है। कृतिकार विश्वामित्र दाधीच ने सम्पूर्ण रचना प्रत्रि*या को बताते हुए महत्त्वपूर्ण छंदों का वाचन किया तथा छंदों के माध्यम से जल प्रदूषण समस्या का निदान बताया ।
डॉ. दीपक श्रीवास्तव के उद्घाटन भाषण में राजस्थानी भाषा के लिए शोध के साथ उसकी मान्यता की बात की । इस अवसर पर लघु नाटिका ‘सोरी बेटा’ का मंचन एवं श्यामा शर्मा की बाल दिवस की कविता पोस्टर एवं आने वाली कृति के पोस्टर का विमोचन हुआ। बाल रंगकर्मी डेयर, वात्सल्य, भव्य एवं ख्याति ‘बाल रंगश्री सम्मानः2019’ तथा बाल लेखक ओजस, यागेन्द्र तथा सम्यक ‘बाल नमोन्मेष लेखन सम्मान- 2019’ से सम्मानित किया गया। वही बाल नृत्य श्री सम्मान से दिव्य श्रीवास्तव को समानित किया गया।

- रेनू ‘शब्द मुखर’