fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar

संवाद निरन्तर

श्रीयुत् डॉ. ब्रजरतन जोशी
सम्पादक मधुमती।

मधुमती के विगत मई 2019 के बाद के जून, जुलाई और हाल में अगस्त अंक देखा। कथ्य, विचार एवं प्रस्तुति की दृष्टि से अनूठी पत्रिका बना दी है आपने। अगस्त अंक की शुरुआत आपने संस्कृति का स्वभाव के अपने गंभीर संपादकीय से की है। बहुत अच्छी स्थापना आपने की है। इस अंक में जाने-माने कवि, रंग-आलोचक नेमिचन्द जैन की जन्मशती पर कलाविद् ज्योतिष जोशी के आलेख को प्रकाशित कर आपने नेमिजी के अवदान को सलीके से रेखांकित किया है। इसी के साथ नन्दकिशोर आचार्य के कवित्व पर पंकज पराशर का लेख बहुत ही उम्दा है। गिरिजाकुमार माथुर की जन्मशती पर मेरे लेख मालवा का कवि मन छाप कर आपने माथुर जी की शख्सियत को आलोकित किया है। कविता में गाँधी विषय पर मंगलेश डबराल ने अच्छी बातचीत की है। कहानियों और कविताओं से सम्पन्न यह पत्रिका अब अपने समय की जरूरी पत्रिका बन गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपने इसके प्रसार की जो मुहिम चलाई है कि यह महाविद्यालयों में पढी-पढाई जाए, उन्हें वार्षिक सदस्य बनाया जाए। यह कार्य स्तुत्य है।
इससे पूर्व शायद ऐसी पहल किसी ने नहीं की है। हमारी बहुत-बहुत बधाई। और आशा है कि आगामी अंक ऐसे ही विचारोत्तेजक और प्रासंगिक होंगे।

डॉ. ओम निश्चल
नई दिल्ली