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संवाद निरन्तर

हमें पाठकों/लेखक/अन्य सुधीजनों से अपेक्षा है कि वे इस कॉलम के
लिए विश्लेषणात्मक टिप्पणी ही भेजें, प्रशंसात्मक नहीं।
माननीय
सम्पादक महोदय,
’मधुमती‘ का जून-२०१९ अंक मैंने पूरा पढा। सम्पादकीय अति रुचिपूर्ण लगा। लेख - शीन काफ निजाम, डिजिटल दुनिया और माक्र्सवाद, गाँधी और हिन्दी साहित्य; कहानी - अपराध और सजा, दुविधा; कविताएँ, संस्मरण, सभी रचनाएँ हमें खूब पसन्द आईं।
मैंने मधुमती के लिए २०१६-२०१७-२०१८ में काफी रचनाएँ भेजी, मगर उनमें से किसी का प्रकाशन आज तक नहीं हुआ, न लौटाई गई। क्या हमारी रचनाएँ आपने हटा दी हैं या प्रकाशित की जाएंगी
हम मधुमती के ५० साल से पाठक हैं। पत्रिका नियमित पढता हूँ। आपने बाल जगत् बंद करके अच्छा नहीं किया। प्रार्थना है बाल जगत् की रचनाएँ पुनः प्रकाशित की जाए।
- बद्रीप्रसाद वर्मा ’अनजान‘, गोरखपुर
मधुमती निरन्तर मिल रही है, सभी लेख, रचनाएँ उत्कृष्ट एवं सारगर्भित प्रेरणादायक होते ह। राजस्थान साहित्य अकादमी निरन्तर नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहन एवं पुरस्कृत भी करती रही है। हिन्दी साहित्य की ये उत्कृष्ट पत्रिका दिनों-दिन भविष्य की ओर अग्रसर है, बधाई।
- सुभाष नागर, अकलेरा
मधुमती जुलाई २०१९ के अंक में फूलचन्द ’मानव‘ की कहानी आज का आदमी में आज के युवाओं की जीवनशैली के लेख रूपी दर्पण में स्वाभाविक वर्णन किया है। बुद्धि की अस्थिरता, असमंजस एवं द्वन्द्वात्मक उलझी जीवनशैली का रेखांकन कर अप्रत्यक्ष रूप से हमारे युवाओं को सही तरीके से जीवन जीने की सलाह दी है। ’केवल जगाने के लिए अखबार लगाया है‘ कथन में कितनी अभिव्यंजना है। लेखक ने सटीक वक्रोक्ति में उलाहना दी है। समझ लेना चाहिए। लेख श्रेष्ठ व सारगर्भित है।
- इन्द्रलाल आमेटा, गादोली, जि. उदयपुर
मधुमती और राजस्थान साहित्य अकादमी में सकारात्मक परिवर्तन दृष्टिगोचर हो रहा है, बधाईयाँ।
- डॉ. संदीप अवस्थी, अजमेर
जुलाई २०१९ का अंक हर लिहाज से बहुत शानदान लगा। सारी कविताएं, कहानियाँ, लेख प्रभावी है। आपका लिखा सम्पादकीय बहुत ही सुन्दर विचारोतेजक लगा। एन्जेलों के शानदार कथन से आपने अपने संपादकीय का आगाज किया जो विनोबा भावे, विपिन कुमार अग्रवाल व अज्ञेय का उल्लेख करते हुए आपने अपनी बात सृजन और भाषाबोध के संबंध में कही है। वह बहुत महत्वपूर्ण है। कला विवेक व आज की कविताओं के संबंध में आपकी बात अभी आपसे और पढनी है। अतः निवेदन है कि सृजन और भाषाबोध पर यह आपका संपादकीय इस नाम से लिखी जाने वाली सीरीज का पहला संपादकीय मानते हुए अगले संपादकीय में इस विषय पर ओर आप लिखें ताकि लेखको पाठकों को और लाभ हो सके।
- राकेश मुथा, जोधपुर