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दस कविताएँ

ओम नागर
(१)
चुल्लू भर
डूबने के लिए

ओक भर
प्यास के लिए

अंजुरी भर
किसी के कमंडल में
विध्वंस के लिए

यहाँ तो
आँख भर बचा है
जिस में डबडबाता है
काला हीरा।

(२)
धूप सूख कर
काँटा हुई

हवा सूख कर
हुई प्यास

पानी सूख कर
धरती

धरती सूख कर
हो गई आकाश

बादल पसीज कर
पानी न हुआ।

(३)
जहाँ नहीं पानी की
एक बूँद!
वहाँ एक तालाब था कभी

जहाँ नहीं दिख रही
मुट्ठी भर रेत
वहाँ बहती थी एक नदी

जहाँ नहीं बचा है
एक भी पेड
वहाँ जंगल था घना

जहाँ खडी दिख रही है
बहुमंजला इमारत
वहाँ दबा पडा है एक तालाब
नदी की रेत
जंगल वाला पेड।

(४)
तपता हुआ दिन
पेड खजूर का

जहाँ जा बैठा पानी इन दिनों
छाँव है जितनी
उतने ही दूर हैं फल।

(५)
पीतल की चरी में
भरा टँगा है जो बरसों से
घर की खूँटी पर
गंगाजल

जिसके आचमन को
लगी जनार होगी कितनी लम्बी
कितनी छोटी
जल बिन
किसने देखी जीवन की पीठ।

(६)
सबसे कर्कश
नल से पानी की बूँदों का टपकना

सबसे मनोरम
ऊँचे पहाड से नीचे गिरता हुआ झरना

सबसे सुंदर
कल-कल बहना लगता एक नदी का

सबसे दुर्गम
प्यास लिए सीढयाँ चढना कुएँ की

सबसे आसान
जो पानी के सिवा होगा।

(७)
एक कुआँ है
गाँव के बाहर / बडा-सा डस्टबीन

जिसकी दीवारों में उग आये
पीपल
लटके हैं औंधे मुँह

जरा-सी आहट
कि एक जोडी कबूतर
दुबक जाते हैं कुएँ की खोह में

पनघट है कुएँ की
रस्सियों के निशाँ भी जस के तस
पनिहारिनें भी नहीं आतीं
गंगा-चरी पूजन तो अब हुई
गुजरे समय की बात

सब हैं कुएँ में
कुएँ के आस-पास
लेकिन उसके तल में पानी नहीं है
इसीलिए तो चहचहाती जिंदगानी नहीं है।

(८)
तालाब भी है यूँ तो
गाँव की बगल में
पहले बडा था, अब हुआ छोटा/
क्रिकेट का मैदान

बावडंी तो कब की मर गई दब कर
बहुत सुन्दर हैं सीढयाँ/मनमोवणी

दुनियाँ में जो भी सुन्दर है
वह पानी से है
जब पानी नहीं होगा
यह दुनियाँ वाकई हो जाएगी
असुंदर

सारी खूबसूरती पानी से बनती है
उसके बिना
उसे एक दिन माटी में मिल जाना है।

(९)
सूख गई
जो नदी दूर थी गाँव से
अब बहुत दूर
तो उजड गई बस्ती

इतिहास में इंसान की बसावट
और उजाड
दोनों पानी की बदौलत

सेनाएँ खडी होंगी
जहाँ बचा होगा पानी प्यास-भर
हर सिम्त करबला होगा।

(१०)
जल ही जीवन है
पढा बहुत
मगर गुना नहीं किसी ने

जल है तो कल है
कहा बहुत
मगर माना नहीं किसी ने
यह कह कर
कि कल किसने देखा है

’बिन पानी सब सून‘
’कबीरा खडा बाजार में‘
सबकी खैर ही माँगता रहा सदा
यहाँ हाट-हाट बिक गया पानी।
हिन्दी, राजस्थानी और अनुवाद की दस पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न सम्मानों एवं पुरस्कारों से पुरस्कृत भी हैं।