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चिद्दी-पत्री

बधीप्रसाद वर्मा अनजान, गोरखपुर(उ.प्र)

सम्पादक जी,
’मट्टाुमती‘ नवम्बर-२०१८ का अंक भी हमेशा की तरह स्तरीय व सार्थक है। इसमें संवाद, कथा सृष्टि, गद्यभूमि, अन्तर्भारती, बालजगत में परोसी सामग्री भी समीचीन लगी। गीत, गजल, कविता भी रोचक व सटीक हैं, वहीं विविट्टाा। में आई रचना भी मर्मस्पर्शी। ’समाचार पत्रों में स्त्री विषयक मुड्ढे और माखनलाल चतुर्वेदी‘ ;शोट्टा आलेखद्ध भी रोचक व सार्थक लगा। पुस्तक परिर्मा ;इक्कीस कहानी-संग्रहद्ध छोटी होकर भी बहुत कुछ कहती है।
आपकी सम्पादकीय मननीय है। समग्रतः यह अंक भी पठनीय/मननीय और संग्रहणीय है। स्तरीय सम्पादकीय, संपादन-संयोजन के लिए आप व पूरे संस्थान को बट्टााई, शुभकामना दोनों।
- कमला देवडा, तराना ;जिला उज्जैनद्ध म.प्र.
’मट्टाुमती‘ का नवम्बर-२०१८ का अंक प्राप्त हुआ। सभी विट्टााओं को सहेज कर सम्पादित अंक सराहनीय एवं संग्रहणीय है।
- जयसिंह आशावत, नैनवां, बूंदी ;राज.द्ध
’मट्टाुमती‘ का नवम्बर-२०१८ का अंक पढा। सम्पादकीय, कविताऐ, कहानी ’यूज एण्ड थ्रो‘, दो पाट, लेख - ’हिन्दी बाल कविता में कसमसाता बचपन‘, ’बाल साहित्य बच्चों तक कैसे पहचे‘ काफी पसन्द आइङ। बच्चों की पुस्तकें अब हर कोई खरीद कर नहीं पढता है। बाल पत्रिकाऐ भी कम पढने को मिल रही हैं। हर पत्रिका में, अखबार में बच्चों का पन्ना हो तो बाल साहित्य को नई दिशा और दशा मिल सकती है।
- बधीप्रसाद वर्मा अनजान, गोरखपुर ;उ.प्र.द्ध