fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar

सम्मान


जोट्टापुर। अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद के तवावट्टाान में गोट्टाी भवन में ओमप्रकाश भाटिया के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यर्मर में माट्टाव राठौड को उनकी कहानी की पुस्तक ’माक्र्स में मनु ढढती‘ पर डॉ. रामप्रसाद दाट्टाीच ’प्रसाद‘ साहित्य सम्मान २०१८ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भाटिया ने कहा कि आज हम पर सूचनाओं का सैलाब उमडा हुआ है। टी.वी. हो, अखबार हो, फेसबुक हो, वाट्सएप हो, ट्विटर हो, हर तरफ से आप सूचनाओं के दबाव में हैं।
सम्मानित लेखक माट्टाव राठौड ने कहा कि मैं सत्यनारायण की परम्परा से आता ह, जहो कोई भी सम्मान अपने साथ गहरी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। आज हम जिस समय में रह रहे हैं, उसमें हम साहित्यकारों की जिम्मेदारी बढ जाती है।
अपने अट्टयक्षीय उद्बोट्टान में मोहन कृष्ण बोहरा ने कहा कि डॉ. रामप्रसाद दाट्टाीच ने सम्मान देने की जिम्मेदारी परिषद को सौंपी। उन्होंने सद् साहस किया। यह प्रसन्नता की बात इसलिए है कि युवा वर्ग साहित्य के प्रति आकर्षित होगा और साहित्य रचने के लिए प्रेरित होगा।
पत्रवाचन में कमलेश तिवारी ने कहा कि वर्तमान दौर ने हर किसी को नितांत एकाकी, नीरस और स्व-केन्ध्ति बना दिया है। ऐसे में हर व्यक्ति अपने सुख और दुःख को अकेले झेलने के लिए अभिशप्त है। माट्टाव इन कहानियों में इन एकाकी जिन्दगियों की पडताल करते हैं। अतिथियों का स्वागत कौशलनाथ उपाट्टयाय ने किया। पद्मजा शर्मा ने डॉ. रामप्रसाद दाट्टाीच के साथ ही दाट्टाीच सम्मान का संक्षिप्त परिचय दिया। कार्यर्मा का संचालन अयोट्टयाप्रसाद गौड ने तथा ट्टानयवाद ज्ञापन रमाकांत शर्मा ने किया।
समारोह में सत्यनारायण, नरेन्ध् मिश्र, रंजना उपाट्टयाय, सुशील एम व्यास, मनोहर सिंह राठौड, गजेसिंह राजपुरोहित, रवि दाट्टाीच, दशरथ, संजय दाट्टाीच, फतेहसिंह भाटी, दशरथ सोलंकी, सत्यदेव संवितेन्ध्, हबीब कैफी, राम अकेला, हरिप्रकाश राठी, हरीदास व्यास, श्यामसुन्दर भारती, बृजेश अम्बर, माहिर, रेणु वर्मा, सुनील वर्मा, चोदकौर जोशी, बसंती पेवार, ओमप्रकाश बैरवा सहित अनेक साहित्यकार व साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
प्रस्तुति ः पद्मजा शर्मा
पुस्तक लोकार्पण
जोट्टापुर। अंतर प्रांतीय साहित्य परिषद्, जोट्टापुर के तवावट्टाान में युवा रचनाकार दशरथ कुमार सोलंकी के प्रथम काव्य-संग्रह ’अनुभूति‘ का लोकार्पण समारोह जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में आयोजित हुआ। कार्यर्म के मुख्य अतिथि शायर व कथाकार हबीब कैफी ने रचनाकार द्वारा काव्य में प्रयुक्त बिम्बों की सुन्दरता का उल्लेख करते हुए कहा कि सरलता व सहजता से कही गई इनकी बात पाठक के क्तदय में बैठती है। अट्टयक्षता करते हुए कवि आलोचक रमाकान्त शर्मा ने इसे अनुपम कार्यर्‍म बताते हुए दशरथ सोलंकी को सम्भावनाओं से भरपूर लेखक बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. कौशलनाथ उपाट्टयाय ने कृति की व्यापक समीक्षा करते हुए उसमें छिपे समस्त पहलुओं को सामने रखा। परिषद् की महामंत्री पद्मजा शर्मा ने मो-बेटी आदि सम्बन्ट्टाों और सामाजिक विकृतियों पर चली दशरथ सोलंकी की कलम को रेखांकित किया। डॉ. फतेहसिंह भाटी ने स्वागत उद्बोट्टान एवं बंशीलाल बैरागी ने ट्टान्यवाद ज्ञापित किया। कार्यर्म का संचालन युवा कवयित्री मट्टाुर परिहार ने किया। कार्यर्म में दशरथ सोलंकी ने अपने सृजन पथ के विविट्टा आयामों को सबके सामने रखा। कार्यर्मक में आईदानसिंह भाटी, मनोहरसिंह राठौड, हरिदास व्यास, कैलाश कौशल, सरोज कौशल, जेबा रशीद, हरिप्रकाश राठी, सत्यदेव संवितेन्ध्, नरेन्ध् मिश्र, राकेश मूथा, तुलसीदास शर्मा, बी.एल. दैया, बृजमोहन टांक, मनशाह नायक, क्षितिज महर्षि, माट्टाव राठौड, आनन्द हर्ष, शिवानी राजपुरोहित, संट्टया शुक्ल, कमलेश सहित बडी संख्या में साहित्यकार व साहित्यसुट्टाी श्रोता उपस्थित थे।
प्रस्तुति ः पद्मजा शर्मा
लोकार्पण तथा सम्मान समारोह
जोट्टापुर। ’’सभ्यता फूल है और संस्कृति उसकी सुगन्ट्टा जबकि साहित्य उसका सन्ट्टिा बिन्दु है... उर्दू का लोक साहित्य से सीट्टाा रिश्ता पूर्व में भी नहीं था और वर्तमान में भी नहीं है। इसलिये उार आट्टाुनिक काल में साहित्य के सृजक कबीर और नजीर को पसन्द तो करते हैं परन्तु उनकी जबान में विस्तार से लिखने की जुर्रत नहीं करते... दार्शनिक जब अपने सत्य को शब्द देता है तो साहित्यकार वहो शब्द के सत्य को जानना और पहचानना चाहता है, क्यकि साहित्यकार का सौंदर्य उसके शब्दों में है...।‘‘ यह उद्गार अन्तर्राष्टत्रीय शाइर, चिंतक एवं आलोचक शीन काफ निजाम ने सिटीजन्स सोसायटी फॉर एज्युकेशन के तवावट्टाान में आयोजित व्यास अभिनन्दन समारोह की अट्टयक्षता करते हुए व्यक्त किये। मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गुलाब सिंह चौहान ने अपने उद्बोट्टान में प्रोफेसर जे.के. व्यास के बालिका शिक्षा के उत्थान के लिये किये गये कायोङ को याद किया।
समारोह में इस वर्ष की स्मारिका ’ज्ञान-सुट्टाा‘ शिक्षाविद् नारायणसिंह शेखावत को समर्पित की गई। इस कडी में उनके कृतित्व पर सुनील माथुर ने प्रकाश डाला और उनकी ट्टार्मपत्नी रूफवर का अभिनन्दन किया गया। प्रोफेसर प्रेमशंकर श्रीवास्तव श्रेष्ठ साहित्यिक सृजन पुरस्कार प्राप्त मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोट्टापुर के उर्दू विभाग के विभागाट्टयक्ष प्रोफेसर अजीजुल्लाह शीरानी के संकलन ’नजीर अकबराबादी की शाइरी में हिन्दुस्तानी अनासिर‘, डॉ. नृसिंह राजपुरोहित, राजस्थानी साहित्य प्रतिभा पुरस्कार प्राप्त कैलाशदान लालस की काव्यकृति ’रसवेल‘ तथा दीपा परिहार राव की काव्यकृति ’आभौ‘ का लोकार्पण कर कृतिकारों का सम्मान किया गया। कृतियों पर रंगकर्मी एवं समीक्षक मजाहिर सुलतान जई, सी.एस.ई. मोहनदास वैष्णव तथा वाजिद हसन काजी ने पत्रवाचन किया। विशिष्ट अतिथि लायन महेन्ध् लोढा, एस.डी. बिस्सा, अचलेश्वर बोहरा, अशोक बोहरा, पद्म विभूषण नारायणसिंह माणकलाव, पूर्व विट्टाायक कैलाश भंसाली, प्रोफेसर जहूर खान मेहर, बसन्ती पंवार, श्यामसिंह सजाडा, लुम्बाराम मेघवाल, दीपाराम सुथार, रामेश्वर व्यास, डॉ. मुकेश माण्डन, कमलेश दवे, शेखर पुरोहित, एस.पी. रंगा, राजेश शेखावत, कमला व्यास, रमाकांत शर्मा, मांगीलाल कुमावत, उर्मिला व्यास, संजु व्यास सहित साहित्य, शिक्षा तथा रंगमंच से जुडे बडी संख्या में प्रबु=जन उपस्थित थे। अंत में अनिल बोडा ने आभार व्यक्त किया। कार्यर्मत का संचालन किशनगोपाल जोशी ने किया।
प्रस्तुति ः किशनगोपाल जोशी
पुस्तक लोकार्पण
जोट्टापुर। ’’दो लाख से अट्टिाक शब्दों को राजस्थानी में तलाश कर उसकी उत्पा और व्याख्या पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस ने इसलिये की कि किसी भाषा के अस्तित्व के लिए उसका इतिहास, व्याकरण और शब्द भण्डार होना चाहिए। यह सब समाविष्ट किया अपने शब्दकोष में जिसे सम्पूर्ण उदाहरणों, महावरों के साथ १९३८ तक व्यापक सांस्कृतिक कोष की रचना कर डाली।‘‘ यह उद्गार उनके साथी रहे इतिहासकार एवं राजस्थानी भाषा के साहित्यकार प्रोफेसर जहूर खान मेहर ने सिंवाचीगेट गढी स्थित स्वामी कृष्णानंद स्मृति सभागृह में सिटीजन्स सोसायटी फॉर एज्युकेशन द्वारा राजस्थानी भाषा के शब्दकोष रचियता पद्मश्री ;डॉ.द्ध सीताराम लालस की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति दिवस एवं लोकार्पण समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोट्टान में व्यक्त किये। कार्यर्म की अट्टयक्षता पूर्व सांसद पद्मभूषण नारायणसिंह माणकलाव ने की।
समारोह में लेखिका चोदकौर जोशी रचित कहानी-संग्रह ’उपहार‘ तथा ’ट्टाार्मिक प्रतीक चिँ‘ पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। पुस्तक पर बसन्ती पेवार ने पत्रवाचन किया। लोकार्पणकर्ता जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाट्टयक्ष नन्दलाल कल्ला के लेख का वाजिद हसन काजी ने वाचन किया। तारा लक्ष्मण के कृतित्व व व्यक्तित्व पर निट्टिा गहलोत ने परिचय दिया, जिन्हें कार्यर्मि उपरान्त श्र=ांजलि अर्पित की गई। स्वागताट्टयक्ष तेजदान चोचलवा, लक्ष्मणदान लालस, लुम्बाराम मेघवाल, दीपाराम सुथार, रामेश्वर व्यास, मुकेश माण्डन, अनिल बोडा, श्यामसुन्दर भारती, हबीब कैफी, जैबा रशीद, संतोष रतनू, कैलाशदान लालस, गुरु गोविन्द कल्ला, जुगलकिशोर बोडा, हरिप्रकाश राठी, रामकिशोर फिडोदा सहित साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा तथा राजस्थानी भाषा आंदोलन से जुडे बडी संख्या में प्रबु=जन उपस्थित थे। मोहनदास वैष्णव ने आभार व्यक्त किया। कार्यर्म का संचालन किशनगोपाल जोशी ने किया। प्रातःकालीन सत्र में मथुरादास माथुर अस्पताल शॉपिंग कॉम्पलेक्स, लालस चौराहे पर स्थित पद्मश्री डॉ. सीतारामल लालस की मूर्ति पर पुष्पांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें महिपालसिंह उज्ज्वल, तेजदान लालस, भंवरदान कविया, हींगलाजदान भाटेलाई तथा लालस परिवार के सदस्य एवं प्रबु=जन उपस्थित थे।
प्रस्तुति ः किशनगोपाल जोशी
लोकार्पण
जयपुर। सैनी नसिङग कॉलेज के सभागार में दैनिक प्रजाजन के पूर्व सम्पादक गोवर्ट्टानलाल गर्ग की पुस्तक ’हमारा जीवन कैसा हो - वैदिक मार्ग पर चलने वालों जैसा हो‘ का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर लोकायुक्त सज्जनसिंह कोठारी ने पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वेदों में छन्द अलंकार ऐसे गिने हुए हैं, जिनमें मिलावट नहीं हो सकती।
लेखक ने अपनी पुस्तक पर बोलते हुए मंत्राों की सापेक्षता व इनकी मानव कल्याण के सभी पहलुओं पर बात की। अन्य वक्ताओं में ब्र॰सिंह गुर्जर, अजय कुमार आर्य, राजाराम चेयरमैन, आचार्य षिुर्वुट्टा, डॉ. सुमित्रा आदि ने विचार व्यक्त किए। महेन्धिसंह ट्टााकण एवं विमान ने वेद महिमा गीत प्रस्तुत किये। कार्यर्मं का संचालन यशपाल यश ने किया। शुभकाम, प्रमोद पाल ने आभार व ट्टान्यवाद ज्ञापित किया।
प्रस्तुति ः प्रभाशंकर उपाट्टयाय
काव्य-संग्रह का विमोचन
डूंगरपुर। महर्षि साहित्य एवं लोक कला संस्थान के तवावट्टाान में कवि सत्यदेव पंचाल सत्येश रचित काव्य-संग्रह ’लौटती शाम‘ का विमोचन सम्पन्न हुआ।
कार्यर्म- की अट्टयक्षता ज्योतिपुंज ने की और मुख्य अतिथि हिन्दी पत्रिका विश्वगाथा के सम्पादक पंकज त्रिवेदी थे। विशिष्ट अतिथि गीतकार उपेन्ध् अणु और भरतचन्ध् शर्मा थे। पंकज त्रिवेदी ने कहा कि सत्यदेव पंचाल की कविताऐ समकालीन विध्ूपताओं को उजागर करती हैं और मनन करने पर मजबूर करती हैं। उन्होंने नई पीढी के रचनाकारों से आह्वान किया कि वे साहित्य की हर विट्टाा में लेखन करें और अपना मौलिक दृष्टिकेाण समाज के सामने रखें।
कार्यर्मि के अट्टयक्ष ज्योतिपुंज ने कहा कि प्रकाशित साहित्य हमेशा अमर होता है बशर्ते कि वह साहित्य के मापदण्डों पर लिखा गया हो। साहित्यकार को आत्मश्लाघा से बचना चाहिए। प्रारम्भ में दिनेश पंचाल ने स्वागत उद्बोट्टान दिया। सत्यदेव पंचाल ने अपनी रचना प्रर्या् पर प्रकाश डाला और अपनी कृति से कुछ कविताओं का पाठ किया। उपेन्ध् सिंह ने ’लौटती शाम‘ काव्य-संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की।
कार्यर्म- में भोगीलाल पाटीदार, इस्माइल निसार, राजेन्ध् उपाट्टयाय, छत्रपाल शिवाजी, विपुल विधेही, तरुण शावडे, विरेन्ध् सिंह बेडसा, भूपेन्ध् सिंह देवला, के. प्रेमी, राजेन्ध् पंचाल, मीनाक्षी जोशी, मनीषा पंड्या, डॉ. उर्वशी भड्ड, रेखाश्री खराडी, हर्षिल पाटीदार, दशरथ पारीक, भविष्य दा, हीरालाल यादव, विपिन वत्सल, जयेश शर्मा और जीवेन्ध् समेत कई साहित्यकार और साहित्य-रसिक उपस्थित थे।
संचालन निट्टिा जोशी ने किया और विशाल पंचाल ने आभार प्रदर्शित किया।
प्रस्तुति ः विशाल पंचाल
पुस्तक का लोकार्पण
नई दिल्ली। भारतीय दलित साहित्य अकादमी के दो दिवसीय अंतरराष्टत्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन में देश-विदेश से हजारों लेखकों एवं समाजसेवियों ने शिरकत की। इस सम्मेलन में जोट्टापुर के साहित्यकार राजनलाल जावा ’निर्मोही‘ को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए ’डॉ. अम्बेडकर राष्टत्रीय अवार्ड‘ महाराष्टत्र् के पूर्व मंत्री श्री बबनराव ट्टाोलप एवं अकादमी के राष्टत्रीय अट्टयक्ष डॉ. एस.पी. सुमनाक्षर द्वारा सम्मानित किया गया।
इस सम्मेलन में निर्मोही की पुस्तक ’अम्बेडकर अभिज्ञान प्रश्नोारी‘ का लोकार्पण किया गया।
प्रस्तुति ः बाबूलाल चांवरिया
पुस्तक विमोचन
उदयपुर। श्री हरमन चौहान की नई पुस्तक ’टेढी-टेढी चाल‘ का युगट्टाारा साहित्यिक संस्था के तवावट्टाान में उक्त हास्य-व्यंग्य नाटक का विमोचन किया गया। इस समारोह में राजस्थान साहित्य अकादमी के अट्टयक्ष डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष ने अट्टयक्षता की। मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के डॉ. देव कोठारी थे और विशिष्ट अतिथि राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत थे। विशिष्ट अतिथि विज्ञान समिति के संस्थापक डॉ. कुंदनलाल कोठारी थे। समीक्षक थे - प्रख्यात आलोचक एवं व्यंग्यकार डॉ. देवेन्ध् इन्ध्ेश एवं साहित्यकार डॉ. तरुण दाट्टाीच। संचालन डॉ. शकुन्तला सरूपरिया ने किया।
इस अवसर पर डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष ने कहा कि राजस्थान साहित्य अकादमी साहित्यकारों से निकट सम्बन्ट्टा बनाती है एवं प्रतिभावानों को प्रोत्साहित करती है। हरमन चौहान प्रतिभावान लेखक हैं, उनकी व्यंग्य रचनाऐ सामयिक व सटीक होती हैं। डॉ. देव कोठारी ने कहा कि हरमन से मेरा निकट सम्बन्ट्टा रहा है और इनकी व्यंग्य रचनाओं में तंज, सामाजिक विध्ूपताओं, विसंगतियों पर करारा व्यंग्य होता है। डॉ. कुंदनलाल कोठारी ने लेखक की नई पुस्तक ’टेढी टेढी चाल‘ आज की छिछली राजनीति पर करारा व्यंग्य बताया। समीक्षा करते हुए डॉ. देवेन्ध् इन्ध्ेश एवं डॉ. तरुण दाट्टाीच ने पुस्तक की विशिष्टताऐ बताते हुए लेखक को बट्टााई दी।
अंत में लेखक ने अपनी पुस्तक के बारे में विश्लेषण करते हुए राजस्थान साहित्य अकादमी के अट्टयक्ष श्री तत्पुरुष का आभार प्रकट किया कि उन्होंने इस पुस्तक पर अकादमी की तरफ से आर्थिक अनुदान दिया है। डॉ. देव कोठारी, डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत, के.एल. कोठारी व दोनों समीक्षाकर्ताओं का भी आभार प्रकट किया। डॉ. शकुन्तला सरूपरिया का कार्यर्मय संचालन के लिए बहुत-बहुत आभार प्रकट किया।
प्रस्तुति ः मट्टाुलिका सिंह
व्याख्यानमाला
जोट्टापुर। गोट्टाी शांति प्रतिष्ठान केन्ध् एवं ग्रामीण विकास विज्ञान समिति के संयुक्त तवावट्टाान में बा-बापू १५०‘ व्याख्यानमाला का आयोजन गोट्टाीभवन सभागार में किया गया। व्याख्यानमाला के मुख्य अतिथि यू.के. से पट्टाारे दम्पा डॉ. निकोलस ग्रे और डॉ. मैरी ग्रे थे। निकोलस और मैरी ग्रे गोट्टाीवादी चिंतक और सामाजिक कार्यकाार् हैं। आप दोनों ने अपनी बात पी.पी.टी. के माट्टयम से बताई। उन्होंने बताया कि किस तरह उन पर गोट्टाी का प्रभाव पडा और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खडे आदमी के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि गोट्टाी हमें सिखाते हैं कि सबकी जरूरत तो पूरी हो सकती हैं लेकिन लालच की भूख पूरी नहीं हो सकती है। हमें कोई भी काम करने से पूर्व यह सोचना चाहिए कि इससे गरीब का कितना हित हो सकता है। व्याख्यानमाला की अट्टयक्षता करते हुए देवेन्ध्नाथ मोदी ने गोट्टाी के एकादश व्रतों की चर्चा की। कार्यर्मम की विशिष्ट अतिथि ग्राविस की सचिव शशिबहन त्यागी ने डॉ. निकोलस व मैरी ग्रे के सामाजिक उत्थान के कायोङ का जिर्‍ किया। युवा कार्यकाार् याशी रूटिया ने मैरी व निकोलस ग्रे के वक्तव्य का हिन्दी में अनुवाद किया एवं गोट्टाी शांति प्रतिष्ठान केन्ध् और अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य का परिचय देते हुए संस्थापक-सचिव नेमिचन्ध् जैन ’भावुक‘ को याद किया गया। युवा कार्यकाार् अशोक चौट्टारी ने मंचासीन अतिथि वक्ताओं का परिचय दिया। कार्यर्मच के अंत में पद्मविभूषण से सम्मानित जस्टिस चन्ध्शेखर ट्टार्माट्टिाकारी को दो मिनट का मौन रखकर श्र=ांजलि अर्पित की। कार्यर्म का संचालन ट्टार्मेश रूटिया तथा ट्टान्यवाद ज्ञापन अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् की महामंत्री डॉ. पद्मजा शर्मा ने किया व साहित्य यात्रा से अवगत कराया। प्रारम्भ में अतिथियों ने गोट्टाी के चित्र पर सूतांजली अर्पित की। हेना भड्डाचार्या ने गोट्टाी के प्रिय भजन ’तू ही राम है - तू रहीम है...‘ से कार्यर्मह को गरिमा प्रदान की एवं मंचासीन अतिथियों को सूत की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गीता भड्डाचार्या, डॉ. कमल मोहनोत, सुशीला बोहरा, माट्टाव राठौड, दशरथ सोलंकी, निरूपमा हजारिका, बादलराज सिंघवी, शहरकाजी मोहम्मद तैह्यब अंसारी, डॉ. हर प्रसाद रे, डॉ. संजय श्रीवास्तव, यशपाल सिंघवी, राजेन्धिसंह जुगतावत, गोविन्दसिंह पंवार, विश्व शांति एवं सद्भावना अभियान के राजेन्ध् सिंह गहलोत, मनोहर सिंह चौहान, नवीन चितारा, रामकिशोर जाखड, डॉ. अनुलता गहलोत, जयपाल सिंह चम्पावत, कमलेश एवं मोहन महाो सहित गोट्टाीभवन के कार्यकाार्ओं एवं शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों, साहित्यप्रेमियों व विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
प्रस्तुति ः पद्मजा शर्मा
पुरस्कार समारोह
राजस्थान पत्रिका सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार समारोह का आयोजन पत्रिका प्रट्टाान कार्यालय जयपुर के प्रांगण में आयोजित किया गया। पंडित झाबरमल स्मृति व्याख्यान के अन्तर्गत आयोज्य उक्त समारोह के मुख्य वक्ता पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओ.पी. रावत थे।
कहानी विट्टाा का प्रथम पुरस्कार शिल्पा श्री अहमदाबाद को दिया गया। कहानी विट्टाा में द्वितीय पुरस्कार बांसवाडा राजस्थान के भरतचन्ध् शर्मा को दिया गया।
पत्रिका साहित्यिक प्रकोष्ठ ने भरतचन्ध् के लेखन को आम आदमी को छू जाने वाला लेखन बताया। राजस्थान के कहानीकारों में अपना खास मुकाम रखने वाले भरतचन्ध् शर्मा की कहानी, कविता और व्यंग्य की पोच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। बैंक अट्टिाकारी रह चुके बांसवाडा के भरतचन्ध् शर्मा की देश की विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाऐ सतत् प्रकाशित होती रही हैं। कहानी के इनके विषय आम आदमी को छूने वाले होते हैं।
परिवार परिशिष्ट में प्रकाशित उनकी कहानी ’गोद भराई‘ का कथानक वागड की आंचलिक पृष्ठभूमि पर आट्टाारित है। यह कहानी कुरीति एवं स्वांग के खिलाफ एक महिला के साहस को दर्शाती हैं। आदिवासी जनजीवन की निरक्षर कथा नायिका गोद भराई की रस्म एवं प्रतिशोट्टा स्वरूप स्वांग के झंझावात में घिर जाती है। वो साहसपूर्वक इसके प्रतिकार में खडी हो जाती है।
पुरस्कार स्वरूप श्री शर्मा को शॉल, प्रशस्ति-पत्र एवं रुपये ग्यारह हजार की राशि भेंट की गई। कविता विट्टाा में श्री विद्दल विनोद एवं श्री शंकरानन्द को पुरस्कृत किया गया।
ज्ञातव्य है कि उक्त प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में प्रतिष्ठित कथाकार गंगाप्रसाद विमल दिल्ली, डॉ. सत्यनारायण जोट्टापुर एवं मीता दास भिलाई सम्मिलित थे।
प्रस्तुति ः डॉ. दीपक आचार्य
नंद बाबू के पास संवेदनाओं के पंख थे - गिरिजा व्यास
पूर्व केन्धीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास ने कहा कि प्रो. नंद चतुर्वेदी के काव्य में संवेदनाओं के पंख थे, जिससे उन्होंने सम्पूर्ण समाज को संस्कारित किया। नंद बाबू अस्तित्ववाद के पक्षट्टार थे। डॉ. व्यास २५ दिसम्बर को प्रसंग संस्थान, श्री नंद चतुर्वेदी फाउण्डेशन और वर्ट्टामान महावीर खुला विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय कार्यालय उदयपुर के संयुक्त तवावट्टाान में विश्वविद्यालय सभागार में प्रो. नंद चतुर्वेदी की चौथी पुण्यतिथि पर आयोजित ’स्मरणांजलि‘ काव्य-गोष्ठी को सम्बोट्टिात कर रही थी। इस अवसर पर उन्होंने श्र=ांजलि प्रस्तुत करते हुए काव्य-पाठ भी किया।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यर्मे और भी होते रहने चाहिए। स्मरणांजलि के प्रारम्भ में डॉ. रश्मि बोहरा ने सभी का स्वागत किया एवं फाउण्डेशन के अट्टयक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने संस्था की गतिविट्टिायों का परिचय देते हुए कवि पिता के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
साहित्यिक परिदृश्य
सम्मान
जोट्टापुर। अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद के तवावट्टाान में गोट्टाी भवन में ओमप्रकाश भाटिया के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यर्मर में माट्टाव राठौड को उनकी कहानी की पुस्तक ’माक्र्स में मनु ढढती‘ पर डॉ. रामप्रसाद दाट्टाीच ’प्रसाद‘ साहित्य सम्मान २०१८ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भाटिया ने कहा कि आज हम पर सूचनाओं का सैलाब उमडा हुआ है। टी.वी. हो, अखबार हो, फेसबुक हो, वाट्सएप हो, ट्विटर हो, हर तरफ से आप सूचनाओं के दबाव में हैं।
सम्मानित लेखक माट्टाव राठौड ने कहा कि मैं सत्यनारायण की परम्परा से आता ह, जहो कोई भी सम्मान अपने साथ गहरी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। आज हम जिस समय में रह रहे हैं, उसमें हम साहित्यकारों की जिम्मेदारी बढ जाती है।
अपने अट्टयक्षीय उद्बोट्टान में मोहन कृष्ण बोहरा ने कहा कि डॉ. रामप्रसाद दाट्टाीच ने सम्मान देने की जिम्मेदारी परिषद को सौंपी। उन्होंने सद् साहस किया। यह प्रसन्नता की बात इसलिए है कि युवा वर्ग साहित्य के प्रति आकर्षित होगा और साहित्य रचने के लिए प्रेरित होगा।
पत्रवाचन में कमलेश तिवारी ने कहा कि वर्तमान दौर ने हर किसी को नितांत एकाकी, नीरस और स्व-केन्ध्ति बना दिया है। ऐसे में हर व्यक्ति अपने सुख और दुःख को अकेले झेलने के लिए अभिशप्त है। माट्टाव इन कहानियों में इन एकाकी जिन्दगियों की पडताल करते हैं। अतिथियों का स्वागत कौशलनाथ उपाट्टयाय ने किया। पद्मजा शर्मा ने डॉ. रामप्रसाद दाट्टाीच के साथ ही दाट्टाीच सम्मान का संक्षिप्त परिचय दिया। कार्यर्मा का संचालन अयोट्टयाप्रसाद गौड ने तथा ट्टानयवाद ज्ञापन रमाकांत शर्मा ने किया।
समारोह में सत्यनारायण, नरेन्ध् मिश्र, रंजना उपाट्टयाय, सुशील एम व्यास, मनोहर सिंह राठौड, गजेसिंह राजपुरोहित, रवि दाट्टाीच, दशरथ, संजय दाट्टाीच, फतेहसिंह भाटी, दशरथ सोलंकी, सत्यदेव संवितेन्ध्, हबीब कैफी, राम अकेला, हरिप्रकाश राठी, हरीदास व्यास, श्यामसुन्दर भारती, बृजेश अम्बर, माहिर, रेणु वर्मा, सुनील वर्मा, चोदकौर जोशी, बसंती पेवार, ओमप्रकाश बैरवा सहित अनेक साहित्यकार व साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
प्रस्तुति ः पद्मजा शर्मा
पुस्तक लोकार्पण
जोट्टापुर। अंतर प्रांतीय साहित्य परिषद्, जोट्टापुर के तवावट्टाान में युवा रचनाकार दशरथ कुमार सोलंकी के प्रथम काव्य-संग्रह ’अनुभूति‘ का लोकार्पण समारोह जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में आयोजित हुआ। कार्यर्म के मुख्य अतिथि शायर व कथाकार हबीब कैफी ने रचनाकार द्वारा काव्य में प्रयुक्त बिम्बों की सुन्दरता का उल्लेख करते हुए कहा कि सरलता व सहजता से कही गई इनकी बात पाठक के क्तदय में बैठती है। अट्टयक्षता करते हुए कवि आलोचक रमाकान्त शर्मा ने इसे अनुपम कार्यर्‍म बताते हुए दशरथ सोलंकी को सम्भावनाओं से भरपूर लेखक बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. कौशलनाथ उपाट्टयाय ने कृति की व्यापक समीक्षा करते हुए उसमें छिपे समस्त पहलुओं को सामने रखा। परिषद् की महामंत्री पद्मजा शर्मा ने मो-बेटी आदि सम्बन्ट्टाों और सामाजिक विकृतियों पर चली दशरथ सोलंकी की कलम को रेखांकित किया। डॉ. फतेहसिंह भाटी ने स्वागत उद्बोट्टान एवं बंशीलाल बैरागी ने ट्टान्यवाद ज्ञापित किया। कार्यर्म का संचालन युवा कवयित्री मट्टाुर परिहार ने किया। कार्यर्म में दशरथ सोलंकी ने अपने सृजन पथ के विविट्टा आयामों को सबके सामने रखा। कार्यर्मक में आईदानसिंह भाटी, मनोहरसिंह राठौड, हरिदास व्यास, कैलाश कौशल, सरोज कौशल, जेबा रशीद, हरिप्रकाश राठी, सत्यदेव संवितेन्ध्, नरेन्ध् मिश्र, राकेश मूथा, तुलसीदास शर्मा, बी.एल. दैया, बृजमोहन टांक, मनशाह नायक, क्षितिज महर्षि, माट्टाव राठौड, आनन्द हर्ष, शिवानी राजपुरोहित, संट्टया शुक्ल, कमलेश सहित बडी संख्या में साहित्यकार व साहित्यसुट्टाी श्रोता उपस्थित थे।
प्रस्तुति ः पद्मजा शर्मा
लोकार्पण तथा सम्मान समारोह
जोट्टापुर। ’’सभ्यता फूल है और संस्कृति उसकी सुगन्ट्टा जबकि साहित्य उसका सन्ट्टिा बिन्दु है... उर्दू का लोक साहित्य से सीट्टाा रिश्ता पूर्व में भी नहीं था और वर्तमान में भी नहीं है। इसलिये उार आट्टाुनिक काल में साहित्य के सृजक कबीर और नजीर को पसन्द तो करते हैं परन्तु उनकी जबान में विस्तार से लिखने की जुर्रत नहीं करते... दार्शनिक जब अपने सत्य को शब्द देता है तो साहित्यकार वहो शब्द के सत्य को जानना और पहचानना चाहता है, क्यकि साहित्यकार का सौंदर्य उसके शब्दों में है...।‘‘ यह उद्गार अन्तर्राष्टत्रीय शाइर, चिंतक एवं आलोचक शीन काफ निजाम ने सिटीजन्स सोसायटी फॉर एज्युकेशन के तवावट्टाान में आयोजित व्यास अभिनन्दन समारोह की अट्टयक्षता करते हुए व्यक्त किये। मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गुलाब सिंह चौहान ने अपने उद्बोट्टान में प्रोफेसर जे.के. व्यास के बालिका शिक्षा के उत्थान के लिये किये गये कायोङ को याद किया।
समारोह में इस वर्ष की स्मारिका ’ज्ञान-सुट्टाा‘ शिक्षाविद् नारायणसिंह शेखावत को समर्पित की गई। इस कडी में उनके कृतित्व पर सुनील माथुर ने प्रकाश डाला और उनकी ट्टार्मपत्नी रूफवर का अभिनन्दन किया गया। प्रोफेसर प्रेमशंकर श्रीवास्तव श्रेष्ठ साहित्यिक सृजन पुरस्कार प्राप्त मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोट्टापुर के उर्दू विभाग के विभागाट्टयक्ष प्रोफेसर अजीजुल्लाह शीरानी के संकलन ’नजीर अकबराबादी की शाइरी में हिन्दुस्तानी अनासिर‘, डॉ. नृसिंह राजपुरोहित, राजस्थानी साहित्य प्रतिभा पुरस्कार प्राप्त कैलाशदान लालस की काव्यकृति ’रसवेल‘ तथा दीपा परिहार राव की काव्यकृति ’आभौ‘ का लोकार्पण कर कृतिकारों का सम्मान किया गया। कृतियों पर रंगकर्मी एवं समीक्षक मजाहिर सुलतान जई, सी.एस.ई. मोहनदास वैष्णव तथा वाजिद हसन काजी ने पत्रवाचन किया। विशिष्ट अतिथि लायन महेन्ध् लोढा, एस.डी. बिस्सा, अचलेश्वर बोहरा, अशोक बोहरा, पद्म विभूषण नारायणसिंह माणकलाव, पूर्व विट्टाायक कैलाश भंसाली, प्रोफेसर जहूर खान मेहर, बसन्ती पंवार, श्यामसिंह सजाडा, लुम्बाराम मेघवाल, दीपाराम सुथार, रामेश्वर व्यास, डॉ. मुकेश माण्डन, कमलेश दवे, शेखर पुरोहित, एस.पी. रंगा, राजेश शेखावत, कमला व्यास, रमाकांत शर्मा, मांगीलाल कुमावत, उर्मिला व्यास, संजु व्यास सहित साहित्य, शिक्षा तथा रंगमंच से जुडे बडी संख्या में प्रबु=जन उपस्थित थे। अंत में अनिल बोडा ने आभार व्यक्त किया। कार्यर्मत का संचालन किशनगोपाल जोशी ने किया।
प्रस्तुति ः किशनगोपाल जोशी
पुस्तक लोकार्पण
जोट्टापुर। ’’दो लाख से अट्टिाक शब्दों को राजस्थानी में तलाश कर उसकी उत्पा और व्याख्या पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस ने इसलिये की कि किसी भाषा के अस्तित्व के लिए उसका इतिहास, व्याकरण और शब्द भण्डार होना चाहिए। यह सब समाविष्ट किया अपने शब्दकोष में जिसे सम्पूर्ण उदाहरणों, महावरों के साथ १९३८ तक व्यापक सांस्कृतिक कोष की रचना कर डाली।‘‘ यह उद्गार उनके साथी रहे इतिहासकार एवं राजस्थानी भाषा के साहित्यकार प्रोफेसर जहूर खान मेहर ने सिंवाचीगेट गढी स्थित स्वामी कृष्णानंद स्मृति सभागृह में सिटीजन्स सोसायटी फॉर एज्युकेशन द्वारा राजस्थानी भाषा के शब्दकोष रचियता पद्मश्री ;डॉ.द्ध सीताराम लालस की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति दिवस एवं लोकार्पण समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोट्टान में व्यक्त किये। कार्यर्म की अट्टयक्षता पूर्व सांसद पद्मभूषण नारायणसिंह माणकलाव ने की।
समारोह में लेखिका चोदकौर जोशी रचित कहानी-संग्रह ’उपहार‘ तथा ’ट्टाार्मिक प्रतीक चिँ‘ पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। पुस्तक पर बसन्ती पेवार ने पत्रवाचन किया। लोकार्पणकर्ता जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाट्टयक्ष नन्दलाल कल्ला के लेख का वाजिद हसन काजी ने वाचन किया। तारा लक्ष्मण के कृतित्व व व्यक्तित्व पर निट्टिा गहलोत ने परिचय दिया, जिन्हें कार्यर्मि उपरान्त श्र=ांजलि अर्पित की गई। स्वागताट्टयक्ष तेजदान चोचलवा, लक्ष्मणदान लालस, लुम्बाराम मेघवाल, दीपाराम सुथार, रामेश्वर व्यास, मुकेश माण्डन, अनिल बोडा, श्यामसुन्दर भारती, हबीब कैफी, जैबा रशीद, संतोष रतनू, कैलाशदान लालस, गुरु गोविन्द कल्ला, जुगलकिशोर बोडा, हरिप्रकाश राठी, रामकिशोर फिडोदा सहित साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा तथा राजस्थानी भाषा आंदोलन से जुडे बडी संख्या में प्रबु=जन उपस्थित थे। मोहनदास वैष्णव ने आभार व्यक्त किया। कार्यर्म का संचालन किशनगोपाल जोशी ने किया। प्रातःकालीन सत्र में मथुरादास माथुर अस्पताल शॉपिंग कॉम्पलेक्स, लालस चौराहे पर स्थित पद्मश्री डॉ. सीतारामल लालस की मूर्ति पर पुष्पांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें महिपालसिंह उज्ज्वल, तेजदान लालस, भंवरदान कविया, हींगलाजदान भाटेलाई तथा लालस परिवार के सदस्य एवं प्रबु=जन उपस्थित थे।
प्रस्तुति ः किशनगोपाल जोशी
लोकार्पण
जयपुर। सैनी नसिङग कॉलेज के सभागार में दैनिक प्रजाजन के पूर्व सम्पादक गोवर्ट्टानलाल गर्ग की पुस्तक ’हमारा जीवन कैसा हो - वैदिक मार्ग पर चलने वालों जैसा हो‘ का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर लोकायुक्त सज्जनसिंह कोठारी ने पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वेदों में छन्द अलंकार ऐसे गिने हुए हैं, जिनमें मिलावट नहीं हो सकती।
लेखक ने अपनी पुस्तक पर बोलते हुए मंत्राों की सापेक्षता व इनकी मानव कल्याण के सभी पहलुओं पर बात की। अन्य वक्ताओं में ब्र॰सिंह गुर्जर, अजय कुमार आर्य, राजाराम चेयरमैन, आचार्य षिुर्वुट्टा, डॉ. सुमित्रा आदि ने विचार व्यक्त किए। महेन्धिसंह ट्टााकण एवं विमान ने वेद महिमा गीत प्रस्तुत किये। कार्यर्मं का संचालन यशपाल यश ने किया। शुभकाम, प्रमोद पाल ने आभार व ट्टान्यवाद ज्ञापित किया।
प्रस्तुति ः प्रभाशंकर उपाट्टयाय
काव्य-संग्रह का विमोचन
डूंगरपुर। महर्षि साहित्य एवं लोक कला संस्थान के तवावट्टाान में कवि सत्यदेव पंचाल सत्येश रचित काव्य-संग्रह ’लौटती शाम‘ का विमोचन सम्पन्न हुआ।
कार्यर्म- की अट्टयक्षता ज्योतिपुंज ने की और मुख्य अतिथि हिन्दी पत्रिका विश्वगाथा के सम्पादक पंकज त्रिवेदी थे। विशिष्ट अतिथि गीतकार उपेन्ध् अणु और भरतचन्ध् शर्मा थे। पंकज त्रिवेदी ने कहा कि सत्यदेव पंचाल की कविताऐ समकालीन विध्ूपताओं को उजागर करती हैं और मनन करने पर मजबूर करती हैं। उन्होंने नई पीढी के रचनाकारों से आह्वान किया कि वे साहित्य की हर विट्टाा में लेखन करें और अपना मौलिक दृष्टिकेाण समाज के सामने रखें।
कार्यर्मि के अट्टयक्ष ज्योतिपुंज ने कहा कि प्रकाशित साहित्य हमेशा अमर होता है बशर्ते कि वह साहित्य के मापदण्डों पर लिखा गया हो। साहित्यकार को आत्मश्लाघा से बचना चाहिए। प्रारम्भ में दिनेश पंचाल ने स्वागत उद्बोट्टान दिया। सत्यदेव पंचाल ने अपनी रचना प्रर्या् पर प्रकाश डाला और अपनी कृति से कुछ कविताओं का पाठ किया। उपेन्ध् सिंह ने ’लौटती शाम‘ काव्य-संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की।
कार्यर्म- में भोगीलाल पाटीदार, इस्माइल निसार, राजेन्ध् उपाट्टयाय, छत्रपाल शिवाजी, विपुल विधेही, तरुण शावडे, विरेन्ध् सिंह बेडसा, भूपेन्ध् सिंह देवला, के. प्रेमी, राजेन्ध् पंचाल, मीनाक्षी जोशी, मनीषा पंड्या, डॉ. उर्वशी भड्ड, रेखाश्री खराडी, हर्षिल पाटीदार, दशरथ पारीक, भविष्य दा, हीरालाल यादव, विपिन वत्सल, जयेश शर्मा और जीवेन्ध् समेत कई साहित्यकार और साहित्य-रसिक उपस्थित थे।
संचालन निट्टिा जोशी ने किया और विशाल पंचाल ने आभार प्रदर्शित किया।
प्रस्तुति ः विशाल पंचाल
पुस्तक का लोकार्पण
नई दिल्ली। भारतीय दलित साहित्य अकादमी के दो दिवसीय अंतरराष्टत्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन में देश-विदेश से हजारों लेखकों एवं समाजसेवियों ने शिरकत की। इस सम्मेलन में जोट्टापुर के साहित्यकार राजनलाल जावा ’निर्मोही‘ को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए ’डॉ. अम्बेडकर राष्टत्रीय अवार्ड‘ महाराष्टत्र् के पूर्व मंत्री श्री बबनराव ट्टाोलप एवं अकादमी के राष्टत्रीय अट्टयक्ष डॉ. एस.पी. सुमनाक्षर द्वारा सम्मानित किया गया।
इस सम्मेलन में निर्मोही की पुस्तक ’अम्बेडकर अभिज्ञान प्रश्नोारी‘ का लोकार्पण किया गया।
प्रस्तुति ः बाबूलाल चांवरिया
पुस्तक विमोचन
उदयपुर। श्री हरमन चौहान की नई पुस्तक ’टेढी-टेढी चाल‘ का युगट्टाारा साहित्यिक संस्था के तवावट्टाान में उक्त हास्य-व्यंग्य नाटक का विमोचन किया गया। इस समारोह में राजस्थान साहित्य अकादमी के अट्टयक्ष डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष ने अट्टयक्षता की। मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के डॉ. देव कोठारी थे और विशिष्ट अतिथि राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत थे। विशिष्ट अतिथि विज्ञान समिति के संस्थापक डॉ. कुंदनलाल कोठारी थे। समीक्षक थे - प्रख्यात आलोचक एवं व्यंग्यकार डॉ. देवेन्ध् इन्ध्ेश एवं साहित्यकार डॉ. तरुण दाट्टाीच। संचालन डॉ. शकुन्तला सरूपरिया ने किया।
इस अवसर पर डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष ने कहा कि राजस्थान साहित्य अकादमी साहित्यकारों से निकट सम्बन्ट्टा बनाती है एवं प्रतिभावानों को प्रोत्साहित करती है। हरमन चौहान प्रतिभावान लेखक हैं, उनकी व्यंग्य रचनाऐ सामयिक व सटीक होती हैं। डॉ. देव कोठारी ने कहा कि हरमन से मेरा निकट सम्बन्ट्टा रहा है और इनकी व्यंग्य रचनाओं में तंज, सामाजिक विध्ूपताओं, विसंगतियों पर करारा व्यंग्य होता है। डॉ. कुंदनलाल कोठारी ने लेखक की नई पुस्तक ’टेढी टेढी चाल‘ आज की छिछली राजनीति पर करारा व्यंग्य बताया। समीक्षा करते हुए डॉ. देवेन्ध् इन्ध्ेश एवं डॉ. तरुण दाट्टाीच ने पुस्तक की विशिष्टताऐ बताते हुए लेखक को बट्टााई दी।
अंत में लेखक ने अपनी पुस्तक के बारे में विश्लेषण करते हुए राजस्थान साहित्य अकादमी के अट्टयक्ष श्री तत्पुरुष का आभार प्रकट किया कि उन्होंने इस पुस्तक पर अकादमी की तरफ से आर्थिक अनुदान दिया है। डॉ. देव कोठारी, डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत, के.एल. कोठारी व दोनों समीक्षाकर्ताओं का भी आभार प्रकट किया। डॉ. शकुन्तला सरूपरिया का कार्यर्मय संचालन के लिए बहुत-बहुत आभार प्रकट किया।
प्रस्तुति ः मट्टाुलिका सिंह
व्याख्यानमाला
जोट्टापुर। गोट्टाी शांति प्रतिष्ठान केन्ध् एवं ग्रामीण विकास विज्ञान समिति के संयुक्त तवावट्टाान में बा-बापू १५०‘ व्याख्यानमाला का आयोजन गोट्टाीभवन सभागार में किया गया। व्याख्यानमाला के मुख्य अतिथि यू.के. से पट्टाारे दम्पा डॉ. निकोलस ग्रे और डॉ. मैरी ग्रे थे। निकोलस और मैरी ग्रे गोट्टाीवादी चिंतक और सामाजिक कार्यकाार् हैं। आप दोनों ने अपनी बात पी.पी.टी. के माट्टयम से बताई। उन्होंने बताया कि किस तरह उन पर गोट्टाी का प्रभाव पडा और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खडे आदमी के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि गोट्टाी हमें सिखाते हैं कि सबकी जरूरत तो पूरी हो सकती हैं लेकिन लालच की भूख पूरी नहीं हो सकती है। हमें कोई भी काम करने से पूर्व यह सोचना चाहिए कि इससे गरीब का कितना हित हो सकता है। व्याख्यानमाला की अट्टयक्षता करते हुए देवेन्ध्नाथ मोदी ने गोट्टाी के एकादश व्रतों की चर्चा की। कार्यर्मम की विशिष्ट अतिथि ग्राविस की सचिव शशिबहन त्यागी ने डॉ. निकोलस व मैरी ग्रे के सामाजिक उत्थान के कायोङ का जिर्‍ किया। युवा कार्यकाार् याशी रूटिया ने मैरी व निकोलस ग्रे के वक्तव्य का हिन्दी में अनुवाद किया एवं गोट्टाी शांति प्रतिष्ठान केन्ध् और अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य का परिचय देते हुए संस्थापक-सचिव नेमिचन्ध् जैन ’भावुक‘ को याद किया गया। युवा कार्यकाार् अशोक चौट्टारी ने मंचासीन अतिथि वक्ताओं का परिचय दिया। कार्यर्मच के अंत में पद्मविभूषण से सम्मानित जस्टिस चन्ध्शेखर ट्टार्माट्टिाकारी को दो मिनट का मौन रखकर श्र=ांजलि अर्पित की। कार्यर्म का संचालन ट्टार्मेश रूटिया तथा ट्टान्यवाद ज्ञापन अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् की महामंत्री डॉ. पद्मजा शर्मा ने किया व साहित्य यात्रा से अवगत कराया। प्रारम्भ में अतिथियों ने गोट्टाी के चित्र पर सूतांजली अर्पित की। हेना भड्डाचार्या ने गोट्टाी के प्रिय भजन ’तू ही राम है - तू रहीम है...‘ से कार्यर्मह को गरिमा प्रदान की एवं मंचासीन अतिथियों को सूत की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गीता भड्डाचार्या, डॉ. कमल मोहनोत, सुशीला बोहरा, माट्टाव राठौड, दशरथ सोलंकी, निरूपमा हजारिका, बादलराज सिंघवी, शहरकाजी मोहम्मद तैह्यब अंसारी, डॉ. हर प्रसाद रे, डॉ. संजय श्रीवास्तव, यशपाल सिंघवी, राजेन्धिसंह जुगतावत, गोविन्दसिंह पंवार, विश्व शांति एवं सद्भावना अभियान के राजेन्ध् सिंह गहलोत, मनोहर सिंह चौहान, नवीन चितारा, रामकिशोर जाखड, डॉ. अनुलता गहलोत, जयपाल सिंह चम्पावत, कमलेश एवं मोहन महाो सहित गोट्टाीभवन के कार्यकाार्ओं एवं शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों, साहित्यप्रेमियों व विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
प्रस्तुति ः पद्मजा शर्मा
पुरस्कार समारोह
राजस्थान पत्रिका सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार समारोह का आयोजन पत्रिका प्रट्टाान कार्यालय जयपुर के प्रांगण में आयोजित किया गया। पंडित झाबरमल स्मृति व्याख्यान के अन्तर्गत आयोज्य उक्त समारोह के मुख्य वक्ता पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओ.पी. रावत थे।
कहानी विट्टाा का प्रथम पुरस्कार शिल्पा श्री अहमदाबाद को दिया गया। कहानी विट्टाा में द्वितीय पुरस्कार बांसवाडा राजस्थान के भरतचन्ध् शर्मा को दिया गया।
पत्रिका साहित्यिक प्रकोष्ठ ने भरतचन्ध् के लेखन को आम आदमी को छू जाने वाला लेखन बताया। राजस्थान के कहानीकारों में अपना खास मुकाम रखने वाले भरतचन्ध् शर्मा की कहानी, कविता और व्यंग्य की पोच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। बैंक अट्टिाकारी रह चुके बांसवाडा के भरतचन्ध् शर्मा की देश की विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाऐ सतत् प्रकाशित होती रही हैं। कहानी के इनके विषय आम आदमी को छूने वाले होते हैं।
परिवार परिशिष्ट में प्रकाशित उनकी कहानी ’गोद भराई‘ का कथानक वागड की आंचलिक पृष्ठभूमि पर आट्टाारित है। यह कहानी कुरीति एवं स्वांग के खिलाफ एक महिला के साहस को दर्शाती हैं। आदिवासी जनजीवन की निरक्षर कथा नायिका गोद भराई की रस्म एवं प्रतिशोट्टा स्वरूप स्वांग के झंझावात में घिर जाती है। वो साहसपूर्वक इसके प्रतिकार में खडी हो जाती है।
पुरस्कार स्वरूप श्री शर्मा को शॉल, प्रशस्ति-पत्र एवं रुपये ग्यारह हजार की राशि भेंट की गई। कविता विट्टाा में श्री विद्दल विनोद एवं श्री शंकरानन्द को पुरस्कृत किया गया।
ज्ञातव्य है कि उक्त प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में प्रतिष्ठित कथाकार गंगाप्रसाद विमल दिल्ली, डॉ. सत्यनारायण जोट्टापुर एवं मीता दास भिलाई सम्मिलित थे।
प्रस्तुति ः डॉ. दीपक आचार्य
नंद बाबू के पास संवेदनाओं के पंख थे - गिरिजा व्यास
पूर्व केन्धीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास ने कहा कि प्रो. नंद चतुर्वेदी के काव्य में संवेदनाओं के पंख थे, जिससे उन्होंने सम्पूर्ण समाज को संस्कारित किया। नंद बाबू अस्तित्ववाद के पक्षट्टार थे। डॉ. व्यास २५ दिसम्बर को प्रसंग संस्थान, श्री नंद चतुर्वेदी फाउण्डेशन और वर्ट्टामान महावीर खुला विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय कार्यालय उदयपुर के संयुक्त तवावट्टाान में विश्वविद्यालय सभागार में प्रो. नंद चतुर्वेदी की चौथी पुण्यतिथि पर आयोजित ’स्मरणांजलि‘ काव्य-गोष्ठी को सम्बोट्टिात कर रही थी। इस अवसर पर उन्होंने श्र=ांजलि प्रस्तुत करते हुए काव्य-पाठ भी किया।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यर्मे और भी होते रहने चाहिए। स्मरणांजलि के प्रारम्भ में डॉ. रश्मि बोहरा ने सभी का स्वागत किया एवं फाउण्डेशन के अट्टयक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने संस्था की गतिविट्टिायों का परिचय देते हुए कवि पिता के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।कार्यर्म की अट्टयक्षता करते हुए प्रसि= गीतकार श्री किशन दाट्टाीच ने नंद बाबू पर गीत पढा। उन्होंने यह भी कहा कि नंद बाबू कवि गोष्ठी के स्थाई अट्टयक्ष हैं।
काव्य गोष्ठी में डॉ. इन्ध जैन, डॉ. मंजु त्रिपाठी, डॉ. चन्ध्कांता बंसल, डॉ. रजनी कुलश्रेष्ठ, डॉ. निर्मल गर्ग, डॉ. प्रीता भार्गव, आदर्श चतुर्वेदी ने नंद चतुर्वेदी के काव्य को प्रस्तुत किया। श्री नंद चतुर्वेदी को काव्यांजलि प्रस्तुत की डॉ. जयप्रकाश पंड्या ’ज्योतिपुंज‘, डॉ. सर्वतुन्निसा खान, डॉ. मुश्ताक चंचल ने। इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. माट्टाव हाडा ने नंद जी के काव्य में समय बोट्टा को विशेष रूप से रेखांकित किया, जो प्रायः कम कवियों में दिखाई देता है। डॉ. हरिराम मीणा ने कविता प्रसतुत की।
कवि पिता श्री नंद चतुर्वेदी को भावभीनी श्र=ांजलि अर्पित करते हुए कवयित्री, समालोचक डॉ. मंजु चतुर्वेदी ने कहा कि उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित ’स्मरणांजलि‘ नंद बाबू के काव्य के भाव पक्ष पर केन्ध्ति है, जिसमें समकालीन काव्य बोट्टा को रूपायित किया जाता है। नेहा राव, श्रेणीदान चारण, एस.पी. बठवाल, शकुंतला सोनी ने भी काव्य-पाठ किया। इस अवसर पर श्री नंद चतुर्वेदी से व्यक्तिगत रूप से परिचित एवं उनके काव्य से प्रभावित शोट्टाार्थियों/ काव्य प्रेमियों ने नंद बाबू को सोशल मीडिया से श्र=ांजलि प्रस्तुत की।