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दो कविताएं

मनीषा शर्मा
;१द्ध
सर्दी आई.....
सर्दी आई, सर्दी आई
खाओ भैया दूट्टा मलाई
खीर पूरी बनाए दादी
जलेबी और मेगवाओ भाई
सर्दी आई सर्दी आई।
कोट स्वेटर सबने पहने,
टोपी और लगाओ भाई,
सर्दी आई सर्दी आई।
ठंडी हवा चले, ट्टाूप कहीं ना खिले
सूरज भैया को बुलाओ भाई
सदी आई सर्दी आई।
गरम मगफली खिलाती नानी
रेवडी गजक भी लाओ भाई
सर्दी आई सर्दी आई।
कम्बल ओढे मेरे दादाजी
अलाव और जलाओ भाई
सर्दी आई सर्दी आई।
ट्टाुंट्टा का असर दिखे चारों ओर
कोहरा छाया मेरे भाई,
सर्दी आई सर्दी आई।
छोटी गुडया, गर्म कपडों की बन गई पुडया जूते भी तो पहनाओ भाई
सर्दी आई सर्दी आई।
बाहर ना जाना चुन्नू
बाहर ना जाना मुन्नू
रजाई में बैठकर करो पढाई
सर्दी आई सर्दी आई।
;२द्ध
नानी की कहानी
नानी कहानी सुनाओ ना,
कहकर अब बात ना टालो,
बहाने और बनाओ ना,
नानी कहानी सुनाओ ना।
हमसे ना य मह मोडो,
छोटे बच्चों का दिल ना तोडो,
हम संग तुम भी छोटी बन जाओ ना, नानी कहानी सुनाओ ना।
दिन बीता और रात आई,
नानी की कहानी मन को भाई,
सब काम छोड कर तुम,
झटपट आ जाओ ना,
नानी कहानी सुनाओ ना।
टीना आई मीना आई
संग सहेली को भी लाई,
मह फुलाए खडी सिया,
उसे भी तो मनाओ ना,
नानी कहानी सुनाओ ना।
सबसे प्यारी सबसे न्यारी,
तारों बीच चोद सी प्यारी,
बैयां हार डाले मुझे,
तुम गले से लगाओ ना,
नानी कहानी सुनाओ ना।
तुम्हारी कहानी मन को भाए,
और सुनने को जी ललचाए,
छोटी कहानी को,
और बडी बनाओ ना,
नानी कहानी सुनाओ ना!
ओखों में निंदिया रानी,
ना आए बिन सुने कहानी,
मेरे छोटे से मन को,
तुम और तरसाओ ना,
नानी कहानी सुनाओ ना!