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धूप तुम्हारे कितने रूप

सन्तोष पारीक ’नीरज‘
बात सैकडों वर्ष पुरानी है। उस समय एक राजा किसी राज्य में शासन करता था। राजा पढा-लिखा होने के साथ-साथ न्यायप्रिय भी था। वह कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करता था और अपराट्टाी को सख्त से सख्त सजा देने में माहिर था। उसके न्याय के चर्चे हर किसी की जुबान पर होते थे। इसी राज्य में एक व्यक्ति रहता था। नाम था - रघु। उसके दो लडके थे। पहले का नाम था मट्टाु तथा दूसरे का नाम था भानु। दोनों जुडवा भाई थे। रघु गरीब था। गरीबी के कारण वह जंगल से लकडयो काटकर लाता और शहर में बेचकर अपने परिवार का गुजर-बसर करता था। दिन बीत गये। रघु बूढा हो गया। एक दिन वह हमेशा की तरह जंगल में लकडयो काटने जा रहा था। तभी राजा भी उट्टार शिकार खेलने गया। वह रघु को देखकर बोला - ’’बाबा कहो जा रहे हो?‘‘
’’जंगल में लकडयो काटने।‘‘
’’क्या मिल जाता है?‘‘
’’गुजारा हो जाता है।‘‘
’’यह सामने की जमीन तुम्हारी है। अब तुम जंगल नहीं जाओगे बल्कि अपनी मेहनत से इसी से गुजारा करोगे।‘‘ इतना कहकर राजा वहो से चला गया।
राजा की बात सुनकर रघु चकित था। रघु ने राजा की बात अपने दोनों बेटों को सुनाई। सुनकर दोनों खूब प्रसन्न हुए। समय बीता। इस बीच रघु मर गया। दोनों बेटे होशियार और मेहनती थे। उन्होंने बरसात के पानी को रोकने के लिए अपने खेत में एक बडा गड्ढा खोदा। कुछ वषोङ बाद गड्ढा पानी से लबालब भर गया। दिन और बीत गये।
एक बार राज्य में पानी नहीं बरसा। पानी नहीं बरसने के कारण राज्य में अकाल पडा। प्रजा पानी को लोकर त्राहि-त्राहि करने लगी। चारा पानी नहीं मिलने से जानवर मरने लगे। यह देखकर राजा बडा दुःखी हुआ। उसने अपने मंत्रियों के साथ अकाल पर बडी गम्भीरता से विचार किया, परन्तु कोई हल नहीं निकला। तब राजा अपनी प्रजा को लेकर ऐसे स्थान की खोज में निकला। जहो ठहर कर लोगों को बचाया जा सके।
चलते हुए राजा काफी दूर निकल गये। इस बीच एक हरा-भरा बाग दिखाई दिया। बाग में एक बडा सा तालाब देखकर राजा के चेहरे पर चमक आ गई। उसने प्रजा सहित वहो ठहरने का निश्चय किया। वह घूमता हुआ बाग में गया। बाग में फलों की डालियो देखकर उसके मह में पानी आ गया। उसने देखा कि मट्टाु पूरी एकाग्रता से अपने काम में व्यस्त है। राजा उसे काफी देर तक य ही देखता रहा। अचानक उसने पीछे मुडकर देखा तो वहो खडे राजा को देखकर घबरा गया। बोला, ’’क्षमा करना महाराज! मैं काम में व्यस्त था। मुझे पता नहीं था कि आप यहो हैं वरना...।‘‘
’’तुम्हें अपने काम में व्यस्त देखकर मुझे बडी प्रसन्नता हुई। दरअसल राज्य का प्रत्येक नागरिक तुम्हारी तरह मेहनत करे तो सबका भला हो सकता है।‘‘ राजा ने उसकी बात को काटते हुए कहा। राजा ने उसे पूरी बात सुना दी। सुनकर उसने अपने सारे फल प्रजा में बोट दिए। राजा ने मट्टाु की सहायता से राज्य में कई बागों और तालाबों का निर्माण करवाया। बरसात में तालाब पानी से लबालब भर गये। बागों में खूब फल आए। इस तरह फिर राज्य में अकाल नहीं पडा।