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चरित्रहीन

रमेश मनोहरा
’’देख कमल, मैं अब तेरी एक भी नहीं सुनगा।‘‘ कहकर किशोरीरमण ने गुस्से से अपनी बात कह दी।
सुनकर कमल बोला, ’’हो कहो पापा?‘‘
’’जो लडकी मैंने पसन्द की है, उससे तुझे शादी करनी पडेगी।‘‘ कहकर अंतिम अल्टीमेटम किशोरीरमण ने देकर अपनी बात कह दी। आगे बोले, ’’अब मैं तेरा कोई बहाना नहीं सुनगा।‘‘
’’आपने अपने लिए बहू पसन्द करी है। निश्चित मेरे अनुकूल होगी।‘‘
’’अरे मैंने तो कई लडकियो तलाश कर दी, मगर तुझे एक भी पसन्द नहीं आई है आज तक। न जाने कौनसा दिमाग पाया है।‘‘
’’पापा मेरी जिंदगी का सवाल है।‘‘
’’मैं कोई तुम्हारा दुश्मन ह, जो तेरी जिंदगी बरबाद करूेगा।‘‘
’’ठीक है पापा, कौन है वो लडकी?‘‘
’’भंवरलाल जी की संगीता, पढी-लिखी सभ्य और सुशील है।‘‘
’’मगर मुझसे अट्टिाक मोटी है पापा।‘‘ कमी निकालते हुए कमल बोला।
’’मोटी हुई तो क्या हुआ, शादी के बाद यदि मोटी हुई तब उसे छोड दोगे?‘‘ किशोरीरमण सवाल उठाते हुए बोले, ’’बस ये मेरा अंतिम फैसला है, अब इन्कार नहीं करेगा।‘‘
’’मगर पापा, मैं उससे शादी नहीं कर सकता ह।‘‘
’’फिर वही जवाब, तुझे कौनसी लडकी चाहिए?‘‘
’’जो समाज से उपेक्षित हो, गरीब घर की हो।‘‘
’’तब तो अपने समाज में ऐसी लडकी मिलने वाली नहीं है।‘‘ हताश होकर किशोरीरमण बोले। क्षणभर बाद बोले, ’’ऐसी लडकियो तो झुग्गी झोपडी में मिल सकती हैं।‘‘
’’मगर अपने समाज में भी ऐसी लडकी है पापा।‘‘
’’कौन है वो?‘‘ किशोरीरमण ने प्रश्न पूछते हुए कहा। मगर कमल तत्काल जवाब नहीं दे पाया। कैसे कहे जिस लडकी को उसने अपने लिए पसन्द किया है। क्या पापा इसके लिए राजी हो जायेंगे? जब वह कुछ क्षण तक जवाब न दे पाया, किशोरीरमण ने फिर पूछा, ’’चुप क्यों है? बता कौन लडकी है वो?‘‘
’’भवानीराम जी की कंचन है।‘‘ उसने सहजता से उार देकर पिताजी की तरफ देखा, जिनकी ओखें र्‍ोट्टा से लाल हो उठी थी। अतः उसी र्‍ोट्टा से बोले, ’’क्या कहा, उस कंचन से शादी करेगा, जिसके पति ने उसे चरित्रहीन कहकर छोड दिया।‘‘
’’क्या बुराई है?‘‘ उसने सवाल उठाते हुए कहा।
’’बुराई यह है कि वह चरित्रहीन है, ऐसी चरित्रहीन औरत को मैं अपनी बहू नहीं बना सकता।‘‘ अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए किशोरीरमण बोले।
’’मगर पापा...‘‘
’’मगर वगर कुछ नहीं, तुझे संगीता से शादी करनी है। कंचन को अपने दिलो-दिमाग से निकाल दे।‘‘ गुस्से से उबलते हुए किशोरीरमण बोले।
’’पापा आपकी जिड्ढ है तो मेरी भी जिड्ढ है। मैं शादी करूेगा तो कंचन से ही।‘‘ जवाबी हमला करते हुए कमल बोला।
’’देखता ह, कैसे करता है उससे शादी।‘‘ कहकर गुस्से से खखार होकर किशोरीरमण चले गये। जैसी कमल को शंका थी वही हुआ। कितने दिनों से यह बात उसने मन के भीतर छिपा रखी थी। यही कारण है कि पापा जितनी भी लडकियों के रिश्ते लेकर आये, वो उसे पसन्द नहीं आये। उसे वह खारिज कर देता था। ऐसी कोई बात नहीं थी कि लडकियो पसन्द नहीं आयी थीं। कंचन को उसने बहुत पहले से ही मन में बसा लिया था। वह तलाकशुदा पत्नी है, वह यह भी जानता है। उसके पति ने चरित्रहीनता के कारण तलाक ले लिया है। अब वो अपने पिता भवानीराम के साथ रहकर प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर रही है।
वह अपने पिता की दूसरी संतान है। उसका भाई संदीप इंजीनियर है, जो सागर में कार्यरत है। पिता सेवानिवृा ऑडिटर है। अभी पिछले साल ही वे रिटायर हुए। उसकी नौकरी बैंक में लग गई, बडे भाई की शादी हो चुकी है। वे अपने परिवार के साथ सागर में रहते हैं। कभी-कभी छुड्डी लेकर परिवार सहित यहो आ जाते हैं। उसकी माता पोच वर्ष पहले कैंसर के कारण स्वर्ग सिट्टाार गई। मो के न रहने से पापा भीतर से बहुत टूट चुके थे। स्त्री का घर में रहना बहुत जरूरी है। यह मो के जाने के बाद उसने अहसास कर लिया था। पिता भी यही चाहते थे कि घर में बहू आ जाए तो चौका-चूल्हा सम्भाल ले। मो के न रहने से रोटी बनाने वाली एक बाई मंगला रख ली थी, वह घर का सदस्य बनकर रहती है। एक तरह से काम वाली बाई मंगला ने मो की पूर्ति कर दी थी।
कंचन से जब उसकी मुलाकात हुई, उसकी छवि मन में बस गई। इतनी सीट्टाी-सादी लडकी पर उसके पति ने चरित्रहीनता का आरोप लगाकर क्यों छोड दिया, जबकि ऐसा कुछ नहीं था। कंचन से उसकी मुलाकात मौसी के लडके प्रभात की शादी में हुई थी। वहो कंचन भी आई थी। जितनी वृ= महिलाऐ थीं, उसने उससे दूरी बना रखी थी, बल्कि वे कंचन को देखकर आपस में बतियाती थी*- देखो चरित्रहीन है। हमारी जवान लडकियों को न बिगाड दे। इससे बचाकर रखना। ऐसे ताने-उलाहने सुनकर भी वह चुप रहा करती थी। अपनी प्रतिर्यार जाहिर नहीं करती थी। वह जानती थी, शादी के बाद सारे मेहमान अपने घर चले जाऐगे। वह भी अपने पिता के यहो चली जायेगी। उसने कंचन से बात करने की बहुत कोशिश की, मगर वह कभी अकेली नहीं मिली। उसकी हमउम्र सहेलियों के बीच घिरी रहती। उस दिन वह कमरे में अकेली बैठकर ब्लाउज के बटन टांक रही थी, तब वह अचानक पहच गया। उदास चेहरे को देखकर बोला, ’’कंचन!‘‘
’’हो कमल जी, कहिये।‘‘ उसने गर्दन ेची करके कहा।
’’तुमको ताने सुनने को मिलते हैं, अच्छा नहीं लगता होगा।‘‘
’’अब तो कमल जी आदत पड गई है, सुनने की।‘‘
’’आखिर ये लोछन कब तक सुनना पडेगा।‘‘
’’जब तक ये समाज मुझे चरित्रहीन मानता रहेगा।‘‘
’’आपने आसानी से इस बात को स्वीकार कर लिया।‘‘
’’क्या करती, औरत जात जो ठहरी।‘‘
’’यहीं आप कमजोर पड गई। अपना पक्ष मजबूती से रखती तो आप जीत जाती।‘‘
’’कहा न, मैं औरत ह। मगर आप ये क्यों पूछ रहे हैं?‘‘
’’मैं यह जानना चाहता ह कंचन जी, आफ पिर चरित्रहीन होने का आरोप लगा, क्या आप उससे पूर्ण रूप से सहमत हैं?‘‘
’’नहीं, बिल्कुल नहीं।‘‘
’’क्यों?‘‘
’’मुझ पर झूठा आरोप लगाया गया।‘‘
’’झूठा आरोप, थोडा स्पष्ट करें।‘‘
’’दरअसल मेरे ससुराल में दो-तीन बार मेरे क्लासफैलो कमलेश ने आकर मुझसे खुलकर बातें की। मेरे ससुराल वालों और मेरे पति को लगा कि मेरे उसके साथ अनैतिक सम्बन्ट्टा है। अतः क्यों आता है, बार-बार। बस गलतफहमी उनके बीच पड गई, जो अंत तक दूर नहीं हो सकी।‘‘ कहकर कंचन ने अपनी सारी व्यथा कह डाली।
’’मतलब, तुम चरित्रहीन नहीं हो?‘‘
’’बिल्कुल नहीं, कमल जी।‘‘
’’अब क्या विचार है?‘‘
’’विचार! कौन सा विचार?‘‘
’’लम्बी उम्र आफ सामने है। कैसे कटेगी? अपने पिता के भरोसे ये जिंदगी।‘‘
’’क्या कहना चाहते हैं आप?‘‘
’’मैं यह कहना चाहता ह कि शादी के बारे में क्या सोचा है?‘‘
’’शादी की अब कभी सोच भी नहीं सकती।‘‘ जरा नाराजगी से कंचन बोली।
’’क्यों नहीं सोच सकती हैं?‘‘
’’मुझ चरित्रहीन से कौन करेगा शादी?‘‘
’’यदि कोई मिल जाये तब करोगी शादी?‘‘
’’अरे कमल जी, मुझसे कौन करेगा शादी, जबकि मैं बदनाम हो चुकी ह।‘‘
’’अगर तुम अपनी स्वीकृति दो तो मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार ह।‘‘ कहकर उसने अपने भीतर की बात कह दी। सुनकर कंचन ने शरमाकर ओखें नीची कर ली। वह उार की प्रतीक्षा करता रहा, मगर इसी बीच मौसी आ गई कमरे में। तब उसे जवाब तो नहीं मिला, मगर जब तक वे शादी में रहे, कंचन उसे देख मुस्कुरा देती। उसकी मुस्कान यह बताती थी कि वह शादी के लिए तैयार है। जब वे शादी के बाद विदा हुए, तब इशारों में ही कंचन ने कह दिया, मैं इंतजार करूेगी।
तभी मंगला बाई आकर बोली, ’’अरे बाबू किस सोच में डूबे हुए हो।‘‘ तब कहीं जाकर वह अतीत से वर्तमान में लौटा। मंगला बाई बोली, ’’क्या सोच रहे थे बाबू और इतने उदास क्यों लग रहे हो?‘‘
’’मंगला बाई, आप मेरी मो के बराबर हैं।‘‘ भूमिका बनाते हुए कमल बोला, ’’आप ही मेरी समस्या का निदान कर सकती हो।‘‘
’’समस्या? कौन सी समस्या है बाबू?‘‘
’’मंगला बाई, जिस लडकी को मैंने पसन्द किया, पापा ने उसे खारिज कर दिया। मैंने जिस लडकी को पसन्द किया है, उसी से शादी करनी है। अब पापा को आप समझाओगे मंगला बाई।‘‘
’’नहीं बाबू, उनका गुस्सा बडा तेज है।‘‘ कहकर मंगला बाई ने इन्कार कर दिया। ’’उनको समझाना मेरे बस की बात नहीं है। मैं तो कहती ह बाबू, पापा ने जिस लडकी से शादी करने को कहा है, कर लो उस लडकी से शादी। उनका दिल मत तोडो। तुम्हारी मो के गुजर जाने के बाद वैसे भी वे काफी टूट गये हैं।‘‘
कहकर मंगला बाई किचन में चली गई। वह भी उसकी समस्या का समाट्टाान न कर सकी। उस दिन के बाद कमल निराशा की गहरी खाई में गिर गया। अब पापा से उसकी ओखें मिलाने की हिम्मत न होती। अब जब भी उनसे बात होती, ओखों में गुस्सा होता। कंचन के फोन भी आते हैं। तब उसे कैसे कहे पापा ने उसे पसन्द नहीं किया, उसकी चरित्रहीनता के कारण। यदि उसने कंचन से शादी कर भी ली, तब भी उसे हीन दृष्टि से देखेंगे। क्या करे, वह एक तरफ खाई दूसरी तरफ कुओ है।
तब एक दिन पापा ने बुलाकर कहा, ’’मैं हारा, तू जीता कमल।‘‘
’’मैं आपका मतलब नहीं समझा?‘‘
’’बहुत सोच-विचार करने के बाद मैं इस निर्णय पर पहचा कमल, कंचन के साथ शादी करने की स्वीकृति देता ह।‘‘
’’सच पापा।‘‘ कहकर हर्ष से उसकी ओखें दुगुनी चमक उठी।
’’हो कमल, तुम्हारा निर्णय सही निर्णय है।‘‘ अपनी स्वीकृति देते हुए किशोरीरमण बोले, ’’क्योंकि कंचन चरित्रहीनता के कारण वैसे भी बदनाम है, अतः कोई भी उससे शादी करने को तैयार नहीं होगा। मगर लडका यदि बदचलन हो तो उससे शादी करने को लडकियो तैयार हो जाती है।‘‘
’’पापा आप कितने महान हैं, जो आपने एक चरित्रहीन को बहू बनाना स्वीकार किया।‘‘ हर्ष से उसकी ओखें फिर से चमक उठी।
वह तो सारी निर्णायक लडाई जीत चुका था। जिस समस्या से वह ग्रसित था, पापा ने आगे रहकर उस समस्या का निदान कर दिया। वैसे भी कंचन समाज की निगाह में चरित्रहीन है, मगर वो जानता है, कंचन चरित्रहीन नहीं है। गलतफहमी ने उसको समाज की नजर में चरित्रहीन बना दिया। ये दाग लाख चाहे तब भी इतनी जल्दी छूटने वाला नहीं है। जब वह कुछ नहीं बोला, तब पिता बोले, ’’अब क्या सोचने लगा है?‘‘
’’कुछ नहीं पापा।‘‘
’’निश्चित कंचन के बारे में सोच रहा होगा। मैं भवानीराम से बात करता ह।‘‘ कहकर वे मोबाइल निकालकर बात करने लगे। इट्टार कमल ने मोबाइल निकाला और कंचन से बात करने लगा।