fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar

तुम ही मेरे शब्द हो

लहरी राम मीना
हम
एक ही शहर में
पढे-बढे।
तुम
इस शहर में
नहीं हो अब
तुम्हारे अंदर
चल रहा था मैं
लेकिन नहीं ह अब।
तुम अब भी घूमती हो
मेरे भीतर किसी
उड्ढीप्त विचार की तरह
नहीं भूला जा सकता
स्मृतियों के शहर को
अचानक।
आज भी जानता और देखता ह
इस शहर को तुम्हारी निगाह से
मैं इस शहर का ह
और शहर मेरा
पाया बहुत कुछ इससे
जो तुम जानती हो
आज भी स्मृतियों में है
तुम ही मेरे शब्द हो
बनता ह रोज इससे
बिगडता ह भी इसी से
मेरी दुनिया इसी से
रचती हैं अपना विन्यास
और मैं उसमें विन्यस्त
हो जाता ह।