उदयपुर, 11 सितम्बर।
राजस्थान साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठित साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘मधुमती’ के अगस्त 2025 अंक का लोकार्पण गुरुवार को भव्य आयोजन में संपन्न हुआ। यह अंक पूर्णतः जनजातीय विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। लोकार्पण समारोह का आयोजन अरावली ताज रिसोर्ट में “आदि कर्मयोगी अभियान – रेस्पॉन्सिव गवर्नेंस प्रोग्राम” के समापन अवसर पर हुआ, जिसकी अध्यक्षता जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने की।
इस अवसर पर पत्रिका की प्रधान संपादक एवं प्रशासक, साथ ही संभागीय आयुक्त श्रीमती प्रज्ञा केवलरानी के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में अंक का विमोचन संपन्न हुआ।

राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव एवं प्रबंध संपादक डॉ. बसंतसिंह सोलंकी ने बताया कि यह विशेषांक जनजातीय परंपराओं, उनकी सांस्कृतिक धरोहर, लोकगीतों, लोककथाओं और रीति-रिवाजों के संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें लेखकों, शोधार्थियों और साहित्यकारों ने अपनी गहन सामग्री प्रदान की है, जो जनजातीय जीवन की विविधताओं को पाठकों के समक्ष जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।
समारोह में संपादक मंडल सदस्य डॉ. चन्द्रकांता बंसल, डॉ. आशीष सिसोदिया, डॉ. कीर्ति चूण्डावत तथा प्रबंध सहयोगी राजेश मेहता उपस्थित रहे। साथ ही टीएडी आयुक्त के. एल. स्वामी, माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक ओ.पी. जैन, संयुक्त निदेशक (कृषि) अनुराग भटनागर, अतिरिक्त निदेशक (सांख्यिकी) ज्योति मेहता सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
डॉ. सोलंकी ने बताया कि ‘मधुमती’ का यह अंक न केवल जनजातीय लोकजीवन की गहराई को उजागर करता है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बनेगा। उन्होंने इसे जनजातीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में साहित्य अकादमी की एक ऐतिहासिक पहल बताया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने इस विशेषांक को जनजातीय समाज और मुख्यधारा के बीच सेतु बनाने वाला प्रयास बताया तथा इस पर अकादमी के प्रयासों की सराहना की।
