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बीकानेर थिएटर फेस्टिवल बना प्रदेश का सबसे बडा रंगमंचीय आयोजन, देशभर में चर्चा का विषय

हर साल की तरह इस बार भी बीकानेर थिएटर फेस्टिवल-२०१९ का आयोजन अनुराग कला केन्द्र, लोकायन, श्री तोलाराम हंसराज डागा चेरिटेबल ट्रस्ट, विरासत संवर्धन संस्थान एवं उत्तर पश्चिम रेलवे ललित कला एक सांस्कृतिक संस्थान द्वारा किया गया। कम समय में ही देशभर के रंग जगत में इस समारोह ने अपनी अलग पहचान बना ली है।

इस बार का फेस्टिवल राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एवं संगीत नाटक अकादमी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित बीकानेर के ही लेखक, नाटककार डॉ. नंदकिशोर आचार्य को समर्पित किया गया।

समारोह के अन्तर्गत अनुराग कला केन्द्र के संस्थापक एवं प्रदेश की तीनों अकादमियों से सम्मानित एवं सुप्रसिद्ध नाटककार स्वर्गीय निर्मोही व्यास की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाने वाला निर्मोही नाट्य सम्मान इस साल जयपुर के सुप्रसिद्ध रंगकर्मी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक और टीवी एवं सिने अभिनेता जयरूप जीवन को अर्पित किया गया।

फेस्टिवल के उद्घाटन के अवसर पर प्रख्यात रंगकर्मी एवं टीवी, सिने अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता, संजना कपूर, प्रीता माथुर और अशोक बांठिया ने भी शिरकत की।

इस आयोजन को संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली का विशेष सहयोग रहा, जिसने इस फेस्टिवल में छह नाटक प्रायोजित किए। इसके अलावा पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला, उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र इलाहाबाद, हरियाणा कला परिषद चंडीगढ और राजस्थान संगीत नाटक अकादेमी जोधपुर और कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग राजस्थान सरकार का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।

फेस्टिवल में इस बार स्थानीय प्रशासन का योगदान भी भरपूर सराहनीय रहा। बीकानेर कलक्टर कुमार पाल गौतम ने भी निजी स्तर पर भागीदारी निभाई।

इसके अलावा नगर विकास न्यास और होटल मिलेनियम के मधुसूदन अग्रवाल का सहयोग भी सराहनीय रहा।

इस बार समारोह ज्यादा भव्य, अनूठी नाट्य प्रस्तुतियों और रंग जगत के जाने-माने नामों के जमावडे के कारण काफी समय तक याद किया जाएगा।

५ दिन, १४ राज्य, २६ नाट्य प्रस्तुतियों और देशभर से लगभग ४०० से ज्यादा कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया।

फेस्टिवल का भव्य आगाज सुप्रसिद्ध नगाडा वादक नत्थू खान और उनके समूह की प्रस्तुति से हुआ।

इस साल का फेस्टिवल एक तरफ जहाँ पौराणिक कथाओं पर आधारित भव्य नाटकों-दिल्ली से महाभारत, अहमदाबाद से कृष्णा, भोपाल से रामायण का गवाह बना, वहीं ख्यातिप्राप्त निर्देशक भानु भारती निर्देशित एकल नाटक बापू, जिसमें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार विजेता टीकम जोशी ने अभिनय कर गाँधीजी के अंतिम वर्षो को मंच पर जीवन्त कर दिया। इसके अलावा गोआ के विजय नाइक निर्देशित मैं नाटकवाला, दिल्ली से युवा निर्देशक अमित तिवारी निर्देशित द व्हाइट साडी, हिसार से पतलून, दिल्ली से गोरखधंधा, कोटा से कथा सुकवि सूर्यमल की, भीलवाडा भोपा भैरूनाथ, जयपुर से राजपूताना सरीखे नाटक सशक्त अभिनय से दर्शकों में छाप छोडने में कामयाब रहे।

अलग-अलग प्रान्त-भाषाई प्रस्तुतियों से समारोह बहुभाषीय भी रहा। मणिपुर, जम्मू, तमिलनाडु की प्रस्तुतियाँ मंचन के बाकी हर क्षेत्र में बहुत ही उच्चस्तरीय रही, पर संवाद अलग भाषा में होने की वजह से दर्शक समझ नहीं पाए, अगर संवाद हिन्दी में होते, तो दर्शक अच्छे से समझ पाते।

दूसरी ओर कुछ प्रस्तुतियाँ भाषायी सीमा को तोडते हुए अभिनय, संगीत, कम्पोजिशन की वजह से दर्शकों तक पहुँचने में कामयाब रही।

फेस्टिवल के अंतिम दिन केरल से आये बिशोय ने सेक्सोफोन और बैम्बूस्टिक वाद्ययंत्र की प्रस्तुति और फ्रांस के मिशेल ने कथकली की प्रस्तुति दी।

फेस्टिवल के समापन पर जम्मू के युवा निर्देशक द्वारा मैकबेथ और चंडीगढ से जी.एस. चैनी के निर्देशन में मिर्जा साहिबान जैसी प्रस्तुतियाँ दर्शकों को काफी समय तक याद रहेंगी।

समापन समारोह पर बीकानेर कलेक्टर कुमार पाल गौतम ने सम्बोधित करते हुए कहा कि इस फेस्टिवल को आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिले, उसके लिए प्रशासन का भरपूर सहयोग लगातार बना रहेगा।

समारोह को सफल रूप से आयोजित करने में गोपाल सिंह चौहान और नवल किशोर व्यास के नेतृत्व में विकास शर्मा, के.के. रंगा, राजशेखर शर्मा, सुनील जोशी, टोनी स्वामी, सौरभ व्यास, सौरभ कुमावत, हेमन्त जैन, केशव सोनी का योगदान रहा।

प्रस्तुति ः अमित सोनी