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फन और शख्सियत‘ का लोकार्पण

शीन काफ निजाम
’’साहित्य बुनियादी तौर पर अन्वेषण है और साहित्य में असहमति साहित्यकार के अस्तित्व की स्वीकारोक्ति है।‘‘ ये विचार प्रसिद्ध कवि और आलोचक डॉ. नन्दकिशोर आचार्य ने मशहूर शाइर और नक्काद शीन काफ निजाम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तक ’सारा शहर गजल कहता है‘ के लोकार्पण में बतौर अध्यक्ष प्रकट किए। उन्होंने कहा कि निजाम की गजलें भी मुझे पसन्द हैं लेकिन उनकी नज्में उर्दू शाइरी में इजाफा है। मुख्य अतिथि मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. अख्तरूल वासे ने कहा कि निजाम की शोहरत का सबब शाइरी है, मगर उन्होंने एक आलोचक और गद्य निगार की हैसियत से भी अलग पहचान बनाई है तथा गालिब पर उनके लेख संगमील का दर्जा रखते हैं। इस अवसर पर निजाम ने कहा कि आलोचना अदब के रहस्य खोलती है। शाइरी सिखाने की चीज नहीं है तथा एक सीनियर शाइर जूनियर शाइर की इस्लाह करता है। किताब के सम्पादक डॉ. निसार राही ने बताया कि पुस्तक में निजाम के फन और व्यक्तित्व पर लिखे गए लेख, भूमिकाएँ, साक्षात्कार तथा यादगार तस्वीरें सम्मिलित हैं। विशिष्ट अतिथि अमरचन्द पुरोहित, राजेन्द्र पुरोहित थे। इस अवसर पर श्रीमती कमला बिस्सा जिन्हें पुस्तक समर्पित की गई है, का अभिनन्दन किया गया। समारोह में हिन्दी, उर्दू और राजस्थानी भाषा के साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। संचालन सेक्रेट्री किशनगोपाल जोशी ने किया।

प्रस्तुति ः निसार राही