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रंगमंच में सभी कलाएँ आकर समाहित हो जाती हैं

भानु भारती
विश्व रंगमंच दिवस पर नाट्यकला क्षेत्र की पाँच विभूतियों को नाट्यश्री सम्मान

जोधपुर। ’’रंगमंच मार्केटिंग कमोडिटी ना है और ना ही हो सकती है। यह वो कला है जिसमें सभी कलाएँ आकर समाहित हो जाती हैं... आज हम सबके सामने मानवीय संवेदना का जो संकट है, उससे रंगमंच ही हमें उबार सकता है...‘‘। यह उद्गार राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष, प्रसिद्ध नाटककार और प्रख्यात नाट्यनिर्देशक भानु भारती ने विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर अभिनय गुरुकुल कल्चरल एज्यूकेशनल सोसायटी व सिटीजन्स सोसायटी फॉर एज्यूकेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में सिंवांची गेट के बाहर गुरु शिवदत्त स्मारक गढी स्थित स्वामी कृष्णानंद स्मृति सभागार में आयोजित ’रंगकर्म के कुछ सुलगते प्रश्न‘ विषयक परिचर्चा के दौरान बतौर मुख्य अतिथि उस समय कहे जब एन.एस.डी. से स्नातक अरु व्यास, डॉ. हितेन्द्र गोयल, जुगल किशोर बोडा, ईशान इत्यादि ने यह प्रश्न खडे किये कि ३० साल पहले जो रंगमंच के अस्तित्व और ज्वलनशीलता के प्रश्न खडे किये।

सी.एस.ई. के अध्यक्ष किशनगोपाल जोशी ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातनाम शाइर, चिंतक और आलोचक शीन काफ निजाम की अध्यक्षता में आयोजित नाट्यश्री सम्मान समारोह २०१९ के तहत रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रामचन्द्र शर्मा, उदयकिशन पुरोहित (टेन्डू साहब), रमेश भाटी नामदेव, प्रमोद वैष्णव तथा अनुराधा आडवानी को नाट्यश्री सम्मान २०१९ प्रदान करते हुए अपने वक्तव्य में अभिनय को परकाया प्रवेश का प्रयास बताया है, जिसकी व्याख्या एलियट और पुराण के हवाले से की। डॉ. सुमिता व्यास के सरस्वती वंदना से प्रारम्भ कार्यक्रम में डॉ. सुनील माथुर ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा सम्मानित कलाकारों का परिचय कार्यक्रम संयोजक मजाहिर सुलतान जई ने दिया। कलाकारों का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. अनुराधा आडवानी ने आयोजक संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रख्यात अभिनेता एवं निर्देशक स्व. श्याम पंवार को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। कार्यक्रम में डॉ. अशोक बोहरा, डॉ. मुकेश माण्डन, राजेन्द्र पुरोहित (बन्नू भासा) आनन्दराज व्यास, गणेश बिजाणी, मोहनदास वैष्णव, जगदीश पुरोहित जगसा, पीडी जोशी, डॉ. एस.पी. रंगा, अजयकरण जोशी, शब्बीर हुसैन, अरुण पुरोहित, वाजिद हसन काजी, निखिल सोनी, सुधांशु सहित साहित्यकार, रंगकर्मी एवं शिक्षाविद् उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन किशनगोपाल जोशी ने किया तथा एन.एस.डी. स्नातक स्वाति व्यास ने आभार व्यक्त किया।

प्रस्तुति ः किशनगोपाल जोशी, जोधपुर