fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar
fix bar

व्यास सम्मान २०१८

लीलाधर जगूडी
के.के. बिरला फाउण्डेशन के वर्ष २०१८ के ’व्यास सम्मान‘ के लिए श्री लीलाधर जगूडी के वर्ष २०१३ में प्रकाशित काव्य संग्रह ’जितने लोग उतने प्रेम‘ का चयन किया गया है। जगूडी का यह संग्रह ’जितने लोग उतने प्रेम‘, ’जितनी आत्माएँ उतरे खतरे‘, ’जितने रास्ते उतने कुशल क्षेम‘ की अवधारणाओं के साथ सामने आया है। जगूडी इस प्रकार से शब्द यात्रा करते हैं, जिसमें मजबूत से मजबूत लोहे जैसे विचार को भी शब्दों के घन से पीट-पीटकर एक लचीली काया में बदल देते हैं।

लीलाधर जगूडी उन थोडे-से कवियों में आते हैं, जिन्होंने अनुभव और भाषा के बीच कविता को जीवित रखा है। अनुभव के आकाश में उडान भरने वाले वे हिन्दी के ऐसे कवि हैं, जिनके यहाँ शब्द किसी कौतुक या क्रीडा का उपक्रम नहीं हैं। वे एक सार्थक सर्जनात्मकता की कोख से जन्म लेते हैं। संवेदना एवं संरचना की नवीनता जगूडी की कविताई का पहला लक्ष्य है, किन्तु यह नवीनता एकरस नहीं है, बल्कि अनुभव संसार, भाषा, संवेदना, कथ्य सभी में एक ताजगी के अहसास की तरह है।

उनके यहाँ जीवनानुभव और भाषा का अनुभव अभेद हैं। उनकी कविता अपनी परम्परा खुद निर्मित करती है। जगूडी की कविताओं में जितनी आधुनिकता दिखती है, परम्पराओं से उनका कवित्व उतना ही संवलित भी जान पडता है। हर बार कविता की एक नई प्रजाति को जन्म देने के आकांक्षी जगूडी यह कहने से गुरेज नहीं करते कि ’’विचारों के ओम-तोम और जीनोम से पैदा हुआ/परम्पराओं का आधुनिक संस्करण हूँ मैं।‘‘