साहित्यिक परिदृश्य



‘राष्ट्र एवं संस्कृति : साहित्यिक अवदान’ पर केंन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
निम्बाहेडा। डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, निम्बाहेडा के हिंदी विभाग एवं राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा ‘राष्ट्र एवं संस्कृति : साहित्यिक अवदान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं पूर्व विधायक श्री अशोक नवलखा तथा अकादमी अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने किया।
मुख्य वक्ता डॉ. उदयप्रताप सिंह (वाराणसी) में कहा कि भाषायी विविधता, भौगोलिक विषमता, मत-मतान्तरों में विविधता होते हुए भी, सांस्कृतिक अन्तर्धारा का निरन्तर प्रवाह चमत्कारिक है तथा सांस्कृतिक प्रवाह में साहित्य ने अतुलनीय योगदान दिया है। मुख्य अतिथि श्री अशोक नवलखा ने उच्च स्तरीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन की शुभकामनाएँ देते हुए भारतीयता की जडे मजबूत होने की कामना की। समारोह अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने राज्य और राष्ट्र की तुलना करते हुए भारतीय चिंतन की महान धाराओं का क्रमवार विवेचन करते हुए बताया कि भारतीय साहित्य ने किस प्रकार भारतीयता के तत्त्वों को वैश्विक पटल पर स्थापित किया। विशिष्ट अतिथि जे. के. सीमेंट वक्र्स, निम्बाहेडा के अध्यक्ष श्री एस. के. राठौड ने भी अपने विचार रखे। स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. कमल नाहर ने दिया। कार्यक्रम की रूपरेखा विभागाध्यक्ष भगवान साहु ने प्रस्तुत की एवं संचालन डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी ने किया।
इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सामान्य हिन्दी’ के पाँचवें संस्करण का विमोचन अतिथियों के द्वारा
किया गया।
प्रथम चर्चा सत्र में ‘राष्ट्रीय चिंतन के परिपे*क्ष्य में साहित्य का स्वरूप’ विषय पर परिसंवाद हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. एल.एल. वैरागी (उदयपुर) ने की तथा विषय प्रवर्तन डॉ. अखिलेश चाष्टा (चित्तौडगढ) ने किया। सत्र में ०८ शोधपत्रों की प्रस्तुति की गई।
द्वितीय सत्र में ‘संस्कृति का अन्तः सम्बंध’ विषय पर परिचर्चा हुई। अध्यक्षता डॉ. सुशीला लढ्ढा (चित्तौडगढ) ने की तथा विषय प्रवर्तन डॉ. सुरेन्द्र डी. सोनी (चुरू) ने किया। सत्र में १० शोधपत्र प्रस्तुत किये गये।
दूसरे दिन तृतीय चर्चा सत्र में ‘समकालीन साहित्य में राष्ट्र एवं संस्कृति’ विषय पर डॉ. श्रीराम परिहार (खंडवा) ने व्याख्यान देते हुए कहा कि पदार्थवादी दृष्टि ने हमारे मूल्यों का क्षरण किया है। हम स्वंय अपने अतीत और वर्तमान की तुलना कर लें, पता चल जाएगा कि कौन श्रेष्ठ है। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. विमला सिंहल (भीलवाडा) ने की तथा विषय प्रवर्तन डॉ. विवेक शंकर (कोटा) ने किया। सत्र में ०८ शोधपत्र प्रस्तुत किये गए।
‘राष्ट्रीय चुनौतियाँ एवं वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य’ विषय पर केंद्रित चतुर्थ चर्चा सत्र के प्रमुख वक्ता डॉ. राजेश व्यास (जयपुर) ने कला एवं संस्कृति पर बाजारीकरण के प्रभाव का उल्लेख किया। अध्यक्षता डॉ. अनिता नायर ने की तथा विषय प्रवर्तन डॉ. नवीन नंदवाना ने किया। इस सत्र में ०९ शोधपत्र प्रस्तुत किये गये।
समापन समारोह राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री बलदेव भाई शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ जबकि अध्यक्षता राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. देव कोठारी ने की। श्री बलदेव भाई शर्मा ने इस मौके पर कहा कि वैदिक काल से आधुनिक काल तक राष्ट्रीय संस्कृति के निर्माण में संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभश, हिन्दी सहित समस्त भारतीय भाषाओं में रचे गये साहित्य की विलक्षण भूमिका रही है। डॉ. देव कोठारी ने अप्रकाशित पांडुलिपियों में छिपी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की बात कही। आभार आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी ने ज्ञापित किया।
संगोष्ठी में कुल १०३ शोधपत्र प्राप्त हुए जिनमें से चयनित पत्रों की प्रस्तुति की गई। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में राजस्थान के सुदूर क्षेत्रों सहित मध्यप्रदेश,
उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ से विषय-विशेषज्ञों ने
प्रतिभागिता की।
प्रस्तुति : डॉ. राजेन्द कुमार सिंघवी
ई-लोक’ का हिन्दी-साहित्य पर प्रभाव विषय पर जिला साहित्यकार सम्मेलन
चुरू। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर एवं डॉ. ओ.पी.शर्मा चैरिटैबल ट्रस्ट, चुरू के संयुक्त तत्वावधान में रविवार, १७ दिसम्बर २०१७ को चुरू के नगर-श्री संस्थान केप्रांगण में ‘ई-लोक का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव’ विषय पर जिला साहित्यकार सम्मेलन आयोजित किया गया। उसकी अध्यक्षता राजस्थान साहित्य अकादमी , उदयपुर के अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्त्पुरुष’ ने की। मुख्य अतिथि ओम सारस्वत थे। बीज-भाषण राजस्थान साहित्य आकादमी, उदयपुर और राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर के सदस्य डॉ. सुरेन्द्र डी. सोनी ने दिया। डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। पत्र-वाचन डॉ. अमृता जोशी और आशीष पुराहित ने किये। चर्चा-सत्र में हुए विमर्श का सारांश डॉ. सुमेरसिंह स्वामी ने प्रस्तुत किया। ट्रस्ट के सचिव राजेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’ ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अकादमी की ओर से पर्यवेक्षक की भूमिका निभा रहे डॉ. सुरेन्द्र डी.सोनी और ट्रस्ट की ओर से स्नेहलता शर्मा ने अतिथियों और जिले भर से आये साहित्यकारों का आभार प्रकट किया। संचालन राजकुमार लाटा ने किया।
स्वागत उद्बोधन देते हुए ट्रस्ट के सचिव श्री राजेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’ ने कहा कि ट्रस्ट का सौभाग्य है कि साहित्य अकादमी ने जिले के साहित्यकारों में संवाद करवाने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि अकादमी अध्यक्ष के कुशल सम्पादन में ‘मधुमती’ पत्रिका का साहित्यिक-स्वरूप निखर कर आया है। अनेक नये स्तम्भ और नवोदित साहित्यकारों को आगे लाने का प्रयास
स्तुत्य है। डॉ. सुरेन्द्र डी. सोनी ने कहा कि सोशल मीडिया ने बडे-बडे पारम्परिक मठों को ढहा दिया है। अब छोटे से
छोटा साहित्यकार भी अपनी रचना विश्व स्तर तक पहुँचाने के लिए सक्षम है।
मुख्य अतिथि श्री ओम सारस्वत ने कहा कि सोशल मीडिया साहित्यिक अभिव्यक्ति का अच्छा साधन है परन्तु इसके प्रभाव में पुस्तकालय, वाचनालय और पुस्तकें अप्रासंगिक न हो जायें। अध्यक्षता करते हुए डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने ‘मधुमती’ के स्तंभ ई-लोक चौपाल से बात आरम्भ करते हुए ‘ई’ शब्द की व्याकरणिक विवेचना की। उन्होंने सोशल मीडिया को संचार का सच्चा प्रजातंत्र बताया और कहा कि ई-लोक सभी को अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार देता है। प्रजातंत्र में जो अच्छाइयाँ और बुराइयाँ हैं, वे यहाँ भी मिलेंगी। श्रेष्ठ प्रजातंत्र के लिए सोच की परिपक्वता, विवेक और गहरी समझ की जरूरत होती है। आभार ज्ञापन करते हुए डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि इस कडाके की ठण्ड में जिले भर के साहित्यकारों का आना परिलक्षित करता है कि विषय पर चर्चा के लिए साहित्यकार उत्साहित हैं। पत्र वाचन करते हुए कविताकोष के श्री आशीष पुरोहित ने कहा कि सन २०१० के पहले हिन्दी लेखकों को फॉण्ट की समस्या आती थी, जो तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा यूनिकोड फॉण्ट से दूर की गई। उन्होंने कविताकोष के ललितकुमार के सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि कविताकोष और गद्यकोष पर प्रचुर मात्रा में हिन्दी साहित्य मौजूद है।
डॉ. अमृता जोशी ने पत्र-वाचन में कहा कि फॉण्ट परिवर्तन के अनेक एप्स की सुविधा से हम अपना साहित्य सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकते हैं। वर्तनी चैक-अप, अनुवाद, स्पीक टू टैक्स्ट आदि की सुविधाएँ साहित्य के विकास के अनेक आयाम प्रशस्त करती है। सोशल मीडिया के हानि-लाभ पर सविस्तार तथ्य देते हुए उन्होंने कहा कि हर सुविधा के उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है कि वह उसे किस रूप में काम में लेता है। उन्होंने कहा कि यहाँ कॉपीराईट अधिकार का उल्लंघन होता है परन्तु आजकल ऐेसे सोफ्टवेयर आ चुके हैं जो चोरी को पकड भी लेते हैं।
चर्चा सत्र में मनोज चारण, मांगीलाल शर्मा, किशोर निर्वाण, घनश्यामनाथ कच्छावा, डॉ. रामकुमार घोटड व अनिल शास्त्री, डॉ. चंद्रलेखा शर्मा, बनवारी लाल खामोश, भंवरसिंह सामौर, हरिसिंह आदि ने चर्चा सत्र में अपने विचार व्यक्त किये। समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने कहा कि श्रेष्ठतम ही कालजयी होता है। श्रेष्ठ कम होते हैं परन्तु श्रेष्ठ की तलाश में लोग अपने आप ही पहुँच जाते है। कोई भी नई तकनीक, विचार या शुरूआत होती है तो उसका विरोध भी होता है, शंकाएँ होती है परन्तु अंततः आत्मसातिकरण होता है। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि जिला साहित्यकार सम्मेलन में सार्थक चर्चा हुई है। अकादमी की ओर से डॉ. सुरेन्द्र डी. सोनी और ट्रस्ट की ओर से श्रीमती स्नेहलता शर्मा ने सभी अतिथियों और आंगतुकों का आभार प्रकट किया।
प्रस्तुति : डॉ. सुरेन्द्र डी. सोनी
काव्यगोष्ठी संपन्न
भीलवाडा। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की भीलवाडा शाखा के रूप में कार्यरत विक्रमशिला काव्य मंच की नववर्ष के उपलक्ष्य में मासिक काव्यगोष्ठी भदादा बाग के पीछे स्थित ओशो सुरधाम ध्यान केन्द्र में आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता व संचालन जिलाध्यक्ष डॉ. एस.के. लोहानी खालिस ने की एवं विशिष्ट अतिथि थे डॉ. अशोक सोडाणी। डॉ. महावीर बैरागी की पहली बार प्रस्तुत राजस्थानी भाषा में सुमधुर सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
ओशो सुरधाम की कविता लोहानी ने बताया कि महेन्द्र शर्मा, डॉ. एस. के. लोहानी खालिस, डॉ. महावीर बैरागी ने रचनाएँ सुनाकर गोष्ठी में चार चाँद लगा दिए। ओम उज्ज्वल ने राजस्थानी कविता और नरेन्द्र वर्मा ने ‘मनखूबा भई मनखूबा रोज बनावे मनसूबा’ व ‘जिंदगी दरयाफ्त करती रह गई, मुफलिसी तो बदनसीबी सह गई’ से नई ऊँचाई प्रदान की।
प्रस्तुति : डॉ. एस. के. लोहानी
काव्यगोष्ठी आयोजित
राजसमंद। राजस्थान साहित्यकार परिषद् कांकरोली की मासिक काव्य गोष्ठी नगेन्द्र कुमार मेहता की अध्यक्षता, राधारमण सनाढ्य के मुख्य अतिथ्य तथा राजेन्द्र सोमानी के विशिष्ट आतिथ्य, प्रमोद सनाढ्य की मेजबानी में सम्पन्न हुई। अफजल खाँ अफजल, इलिसास मोहम्मद, कमर मेवाडी ने काव्य का पाठ किया। जवान सिंह सिसोदिया, किशन कबीरा, नगेन्द्र कुमार मेहता, माधव नगदा, भँवरलाल पालीवाल, राजेन्द्र सोमानी, प्रमोद सनाढ्य ‘प्रमोद’, राधारमण सनाढ्य, मुरलीधर कनेरिया, शेख अब्दुल हमीद इत्यादि ने भी रचना पाठ किया।
प्रस्तुति : नगेन्द्र कुमार मेहता
कवि नंद चतुर्वेदी की स्मृति में काव्यगोष्ठी
उदयपुर। प्रसंग संस्थान, नंद चतुर्वेदी फाउण्डेशन एवं वर्धमान महावीर कोटा खुला विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में वरिष्ठ कवि नंद चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर ‘स्मरणांजलि २०१७’ के अन्तर्गत ‘काव्य गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। डॉ. रश्मि बोहरा ने आगंतुक साहित्कारों का स्वागत किया। काव्य गोष्ठी में नंद चतुर्वेदी के गीत-कविताओं का डॉ. मधु अग्रवाल, प्रीता भार्गव, श्रेय चतुर्वेदी, डॉ. रजनी कुलश्रेष्ठ, डॉ. राजकुमार व्यास एवं आदर्श चतुर्वेदी ने पाठ किया।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए पत्रकार हिम्मत सिंह सेठ ने कहा कि नंद बाबू आम आदमी के कवि थे। उनका जीवन उनके कवि कर्म का पर्याय था। विशिष्ट अतिथि प्रो. माधव हाडा ने श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए कहा- ‘नंद बाबू ने हमेशा अभिनव और अद्भुत, सरल और अर्थवान गद्य लिखा। पत्रकार उग्रसेन राव ने कहा कि नंद बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर और अधिक गवेषणापूर्वक शोध अध्ययन किया जाना अपेक्षित है।
‘गोष्ठी’ का संयोजन डॉ. इन्द्र प्रकाश श्रीमाली ने करते हुए नंद बाबू के राजस्थानी काव्य को प्रस्तुत किया।
गोष्ठी के द्वितीय चरण में नंद चतुर्वेदी पर डॉ. मंजु चतुर्वेदी, डॉ. ज्योतिपुंज, लालदास पर्जन्य एवं श्री किशन दाधीच ने काव्यांजलि प्रस्तुत की।
अध्यक्ष पद से बोलते हुए डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि नंद बाबू वंचितों के साथ सदैव खडे रहने वाले महान व्यक्तित्व थे।
प्रस्तुति : डॉ. इन्द्रप्रकाश श्रीमाली
डॉ. मदन केवलिया के व्यंग्य संग्रह तथा आत्मकथा का लोकार्पण
बीकानेर। आत्मकथा ईमानदार लेखन है। इसमें झूठ नहीं चलता। आत्मकथा में लेखक को खुद को खंगालना पडता है और डॉ. केवलिया ने अपनी आत्मकथा में इस पक्ष का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी के साथ किया है। साहित्यकार भावानीशंकर व्यास ‘विनोद’ ने बीकानेर में आयोजित, वरिष्ठ लेखक ड. मदन केवलिया के व्यंग्य संग्रह ‘सन्यासः फर्स्ट क्लास लेखन से’ तथा आत्मकथा ‘सिंध दरिया से रेत के समंदर तक’ के विमोचन के अवसर पर ये उद्गार व्यक्त किए। प्रतिमान संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मकथा में डॉ. केवलिया के बचपन की मस्ती है, विभाजन का दर्द है। बीकानेर और डेरा इस्माइल खाँ का इतिहास इस पुस्तक में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि डॉ. केवलिया की व्यंग्य यात्रा ६० वर्ष पूर्ण करने की ओर अग्रसर है।
इतिहासकार डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा ने कहा कि डॉ. केवलिया की आत्मकथा इतिहास के शोधार्थियों के लिए महत्त्वपूर्ण दस्तावेज सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि डॉ. केवलिया की आत्मकथा दो निष्क्रमण के मध्य लिखी आत्मकथा है। व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि डॉ. केवलिया की कलम में ऐसी ताकत है कि एक ओर उनके व्यंग्य हँसाते हैं, तो दूसरी ओर उनकी आत्मकथा के अंश करुणा से ओतप्रोत कर देते हैं। कथाकार प्रमोद कुमार
चमोली ने डॉ. केवलिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. केवलिया का समूचा जीवन साहित्य एवं लेखन को समर्पित रहा। कवि-कथाकार संजय पुरोहित ने डॉ. केवलिया के व्यंग्य संग्रह ‘संन्यासः फर्स्ट क्लास लेखन’ तथा पत्रकार-कथाकार हरीश बी. शर्मा ने आत्मकथा ‘सिंध दरिया से रेत के समंदर तक’ का अंश वाचन किया। अपने उद्बोधन में डॉ. मदन केवलिया ने कहा कि हास्य एवं व्यंग्य की जुगलबंदी होती है। व्यंग्य हमारी जिंदगी से ही सहज रूप से निकलकर आता है। उन्होंने कहा कि घनीभूत पीडा को वही जानता है, जिसने दर्द झेला है। इसलिए यह दर्द उनके साहित्य में
मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि राजेन्द्र जोशी ने ड. केवलिया के लेखन कर्म के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। कथाकार शरद केवलिया ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा जाह्नवी केवलिया ने आभार जताया। इस अवसर पर डॉ. केवलिया के लेखन का अनेक साहित्यकारों, शिक्षाविदों ने सम्मान किया। इससे
पहले अतिथियों ने डॉ. केवलिया की दो पुस्तकों का लोकार्पण किया।
समारोह में सरल विशारद, नंदकिशोर सोलंकी, दीपचंद सांखला, डॉ. उमाकान्त गुप्त, आनन्द वि. आचार्य,विकास पारीक, शीला व्यास, डॉ. सोमनारायण पुरोहित, शिशिर चतुर्वेदी, दिनेश चंद्र सक्सेना, अमर सिंह चौहान, हरिशंकर आचार्य, कमल रंगा, नवनीत पांडे, नरपत सांखला, डॉ. बसंती हर्ष, डॉ. रचना शेखावत, असद अली, डॉ. जिया उल हसन, नदीम अहमद, रमेश महर्षि, उदयशंकर व्यास, अशोक परिहार, डॉ. मदन सैनी, डॉ. मेघराज शर्मा, आत्माराम भाटी, कासिम बीकानेरी, राजू कादरी, मोहन थानवी, मनीष जोशी, डॉ. मिजार् अहमद बेग, डॉ. अजाज अहमद, डॉ. हरिशंकर मारू, वेदप्रकाश अग्रवाल, मनोज कल्ला, मुकेश व्यास, रीता आहूजा, डॉ. मोहम्मद फारूक, अरविन्द, सुधीर, गौतम केवलिया,
ज्योतिमित्रा आचार्य, चंद्रशेखर जोशी, योगेन्द्र पुरोहित सहित बडी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद् पत्रकार मौजूद थे।
प्रस्तुति ः प्रमोद कुमार चमोली
‘जंग जारी है’ का लोकार्पण
हनुमानगढ। राजस्थान साहित्य परिषद् के तात्त्वावधान में दीनदयाल शर्मा की रेडियो नाट्यकृति ‘‘जंग जारी है’’ का लोकार्पण समारोह का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि एवं आर.जे.एस. ऋचा चौधरी (मजिस्ट्रेट), विशिष्ट अतिथि सूचना एवं जनसम्फ अधिकारी सुरेश बिश्जोई, वरिष्ठ उद्घोषक राजेश चड्ढा, वरिष्ठ पत्रकार गोपाल झा, प्राचार्य डॉ. संतोष राजपुरोहित, केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कवयित्री ऋतुप्रिया उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता बबी हैप्पी मॉर्डन पीजी कॉलेज के डायरेक्टर तरुण विजय ने की। ऋचा चौधरी ने कहा कि समय की माँग के अनुसार बेटियों को केन्द्र में रखकर जो नाटक रचे गए हैं, वे वास्तव में उल्लेखनीय हैं। पीआरओ सुरेश बिश्जोई ने कहा कि दीनदयाल जी की रचनाओं का मैं शुरु से ही प्रशंसक रहा हूँ। आपकी नाट्य कृति भी समाज हित के लिए सर्वोपरि होगी। राजेश चड्ढा ने कहा कि नाट्य कला प्राचीनकाल से चली आ रही है। जिसकी परम्परा को कायम करने में दीनदयाल शर्मा का योगदान सराहनीय है। इस अवसर पर दीनदयाल शर्मा ने नाटक की रचना प्रक्रिया के बारे में श्रोताओं को जानकारी दी। समारोह में युवा कवि दुष्यंत जोशी, संस्था के चेयरमेन आशीष विजय, प्रशासक परमानंद सैनी, उपप्राचार्य डॉ. मनोज शर्मा, छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष दुर्गाप्रताप शेखावत, बाल कथाकार मानसी शर्मा आदि उपस्थित थे।
प्रस्तुति : राजेन्द्र डाल
कवि प्रभात को दाधीच साहित्य सम्मान
जोधपुर। अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद, जोधपुर द्वारा पहला ‘डॉ. रामप्रसाद दाधीच साहित्य सम्मान’ २०१७ सवाईमाधोपुर के युवा कवि प्रभात को उनकी
पुस्तक ‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ पर प्रदान किया गया। आलोचक डॉ. जीवन सिंह के मुख्य आतिथ्य में युवा कवि व बाल साहित्यकार प्रभात को सम्मान राशि इक्यावन सौ रुपए, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र तथा शॉल ओढाकर सम्मानित किया गया।
डॉ. जीवन सिंह ने कहा कि कविता शब्द की कला है किन्तु वह अर्थ का उन्नयन कर के ही सार्थकता प्राप्त करती है। वह अपने समय के उपेक्षित कोनों और जीवन के उन हाशियों को पाठक के सामने लाती है, जो समान्यतः हमारी आँखों के सामने होते हुए भी ओझल रहते हैं। कवि प्रभात की कविता यही करती है। कवि प्रभात ने अपनी कविताएँ याद, हार, ऊँटगाडी में बैठी स्त्रियाँ, मुआवजा, झाडू, हमसफर, समारोह में मिली स्त्रियाँ, एक सुख था आदि कविताएँ सुनाई और कहा कि मैं राजस्थान के जिस माड-जगरौली अंचल से आता हूँ, वहाँ लोक गीतों की बडी समृद्ध परंपरा रही है। वरिष्ठ कवि, अनुवादक, संपादक डॉ. रामप्रसाद दाधीच ने सम्मानित कवि प्रभात, मुख्य अतिथि डॉ. जीवन सिंह, अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् और श्रोताओं का आभार ज्ञापन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आचार्य मोहनकृष्ण बोहरा ने कहा कि जब आप कविता कर रहे हैं तो चिंतन की भाषा नहीं कविता की भाषा बोलिए।
डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय ने कहा कि डॉ. दाधीच ने मौलिक काव्य कृतियों के साथ ही वेदों, पुराणों, उपनिषदों के ढेर सारे प्रसंगों को आधार बनाकर उनका काव्यान्तर किया है। जो सिर्फ अनुवाद नहीं है बल्कि पुनर्सृजन है।
युवा समीक्षक माधव राठौड ने प्रभात की कविता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रभात की कविता लोक संवदेना की कविता है, जिसमें जीवन तत्त्व दिखाई देता है। कार्यक्रम के संचालक कमलेश तिवारी ने कहा कि कविता हर दौर में परिवर्तन की साक्षी रही है फिर वह चाहे भाव बोध के स्तर पर हो चाहे शैली के स्तर पर।
प्रस्तुति : डॉ. पद्मजा शर्मा
साहित्यकार रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’ सम्मानित
अलवर। दीप ज्योति पत्रिका संस्थान के तत्त्वावधान में एक भव्य साहित्यकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कोटा के प्रसिद्ध साहित्यकार रघुराज सिंंह ‘कर्मयोगी’ को श्री लालचंद भंसाली स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।
सम्मान के रूप में आदर की चादर (शॉल) मन के उद्गार (मोतियों की माला) स्मृति चिन्ह, अभिनंदन फ्रेमिंग एवं इक्कीस सौ रुपये की धनराशि प्रदान की। रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’ का एक उपन्यास, एक बाल कहानी संग्रह, एक लघुकथा संग्रह, चार कहानी संग्रह तथा एक नाटक संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
प्रस्तुति : सुरेन्द्र सिंह गौड
कथा सम्मान : २०१७ की घोषणा
जोधपुर। कथा संस्थान की राज्यस्तरीय कथा अलंकरण श्रृंखला के अन्तर्गत इस वर्ष हिन्दी के जाने-माने लेखक सत्यनारायण को उनके समग्र लेखन पर ‘सूर्यनगर शिखर सम्मान’ कवयित्री प्रीता भार्गव (उदयपुर) को उनकी काव्यकृति ‘बाकी सब खैरियत है’ पर ‘नन्द चतुर्वेदी कविता सम्मान’, कथाकार चरणसिंह पथिक (करौली) को उनके कहानी संग्रह ‘गौरु का लेपटाप और गौर्की की भैंस’ पर ‘पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी कथा सम्मान’ कथाकार दिनेश पंचाल (डूंगरपुर) को उनकी कथाकृति ‘बहुरूपिये लोग’ पर ‘रघुनंदन त्रिवेदी कथा सम्मान’ घोषित किया गया है।
इसी तरह राजस्थानी के कवि एवं अनुवादक ओम नागर (कोटा) को उनके समग्र काव्य सर्जन एवं अनुवाद कर्म पर ‘सत्यप्रकाश जोशी कविता सम्मान’, कथाकार रामेश्वर गोदारा (परलीका-हनुमानगढ) को उनके कहानी संग्रह ‘वीरे तू लाहौर वेखण आईं’ पर ‘संवाद दइया कथा सम्मान’ तथा लेखक एवं अनुवादक डॉ. नीरज दइया (बीकानेर) को नंदकिशोर आचार्य की हिन्दी से राजस्थानी में अनूदित काव्य कृति ‘ऊंडै अंधारै कठैई’ पर ‘डॉ.
नारायणसिंह भाटी अनुवाद सम्मान’ घोषित किया गया है।
वरिष्ठ पत्रकार भुवनेश जैन को ‘गौवर्द्धन हेडाऊ रचनात्मक पत्रकारिता सम्मान’ तथा फोटो पत्रकार शिवलाल वर्मा को ‘सूरज एन. शर्मा फोटो पत्रकारिता सम्मान’ हिन्दी कवि-कथाकार और साहित्यिक त्रैमासिक ‘सम्बोधन’ के संपादक रहे कमर मेवाडी (कांकरोली-राजसमंद) को प्रकाश जैन ‘लहर’ साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान, राजस्थानी त्रैमासिक ‘अनुसिरजण’ के संपादक-अनुवादक दुलाराम सहारण को ‘पारस अरोडा’ ‘अपरंच’ साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान’ घोषित किया गया है।
संस्थान के सचिव मीठेश निर्मोही ने बताया कि हिन्दी एंव राजस्थानी साहित्य के घोषित कथा अलंकरणों- ‘सूर्यनगर शिखर सम्मान’ में प्रोफेसर जहूर खां मेहर, न्यायमूर्ति मुरलीधर वैष्णव एवं डॉ. अर्जुनदेव चारण (जोधपुर), ‘नंद चतुर्वेदी कविता सम्मान’ में डॉ. रमाकांत शर्मा (जोधपुर) नंद भारद्वाज एवं गोविन्द माथुर (जयपुर), ‘पण्डित चन्द्रधर गुलेरी कथा सम्मान’ में धीरेन्द्र अस्थाना (मुम्बई), डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (जयपुर) एवं चैनसिंह परिहार (जोधपुर), ‘रघुनंदन त्रिवेदी कथा सम्मान’ में माधव नागदा (राजसमंद), हबीब कैफी (जोधपुर) एवं पुरुषोत्तम पोमल (जालौर), ‘सत्यप्रकाश जोशी कविता सम्मान’ में डॉ. मंगत बादल (रायसिंह नगर), डॉ. आईदानसिंह भाटी एवं मीठेश निर्माही (जोधपुर), ‘सांवर दइया कथा सम्मान’ में डॉ. सी.पी. देवल (अजमेर), मालचंद तिवाडी एवं मधु आचार्य (बीकानेर), डॉ. नारायणसिंह भाटी अनुवाद सम्मान में डॉ. अर्जुनदेव चारण (जोधपुर), कुन्दन माली (उदयपुर) तथा डॉ. मदन सैनी (बीकानेर) निर्णायक रहे।
प्रस्तुति : मीठेश निर्मोही
काव्य कृति लोकार्पण
जयपुर। राजस्थान लेखक साहित्य संस्थान जयपुर के तत्त्वावधान में दिनांक ३ दिसम्बर रविवार को सुपरिचित
सभागार में मलेशिया से आईं कवयित्री श्रीमती अंजू पुरोहित का काव्य संग्रह ‘अतीत के स्वर’ का लोकार्पण एवं चर्चा रखी गई। यह आयोजन दो सत्रों में संपन्न हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सुधा अरोडा ने नवोदित लेखिकाओं को लेखन की बारीकियों से अवगत कराया। संस्था की कतिपय लेखिकाओं ने अपनी शंकाओं का निराकरण भी करवाया जिनमें स्नेह प्रभा परनामी, कमलेश शर्मा, कविता मुखर, ऋतुवर्मा, प्रीति जैन आदि रहे। मुख्य अतिथि वरिष्ठ लेखिका श्रीमती सुधा अरोडा, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. वीणा छंगानी (प्राचार्य एपेक्स गर्ल्स महा. जयपुर) तथा साहित्यकार, समाजसेवी डॉ. साधना प्रधान थे। इस आयोजन की अध्यक्षता भू.पू. निदेशक भौतिक प्रयोगशाला, रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के डॉ. आर. के. पुरोहित ने की। मुख्य वक्ता के रूप में काव्य संग्रह का परिचय दिया एवं समालोचना डॉ. आशा शर्मा तथा डॉ. रत्ना शर्मा ने प्रस्तुत की। संचालन डॉ. रचना शर्मा ने किया और आभार ज्ञापन संस्था की सचिव डॉ. सुषमा शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. पानगडिया, नन्द भारद्वाज, पुष्पा गोस्वामी आदि
उपस्थित थे।
प्रस्तुति : सुषमा शर्मा
कहानी संग्रह का विमोचन
नई दिल्ली। तिलक विहार स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में प्रो. अवध किशोर प्रसाद के कहानी संग्रह ‘‘जीवन-दीप’’ का विमोचन पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्ण तीरथ के द्वारा किया गया। इस अवसर पर सांसद श्री महाबल मिश्र, पार्षद श्रीमती अमृता धवन, श्री प्रदीप शर्मा एवं नगर के गण-मान्य व्यक्ति उपस्थित थे। वकार हुसैन ने प्रो. अवध किशोर प्रसाद की साहित्यिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन-दीप प्रो. प्रसाद की पाँचवीं पुस्तक और पहला कहानी संग्रह है। श्रीमती कृष्णा तीरथ ने इन कहानियों को सामाजिक जीवन का वृत्त चित्र कहा। उन्होंने जीवन दीप शीर्षक कहानी को
नारी सशक्तिकरण की कहानी कहते हुए पुरुष के जीवन में नारियों के महत्त्व पर प्रकाश डाला। निगम पार्षद श्रीमती अमृता धवन ने कहानियों की गुणवत्ता की चर्चा की तथा प्रो. प्रसाद से भविष्य में अन्य उत्कृष्ट रचनाओं की अपेक्षा की। श्रीमती आशा प्रसाद ने संकलन की समग्र, उन्नीस कहानियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया तथा इन कहानियों को ‘सामाजिक सरोकार की कहानियाँ’ की संज्ञा दी।
प्रस्तुति : आशा प्रसाद
काव्य गोष्ठी का आयोजन
जयपुर। २६ नवम्बर को राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान तिलकनगर के प्रांगण में दिवाली मिलन एवं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। संस्था की करीब तीस से अधिक कवयित्रियों ने अपनी स्वरचित कविताएँ प्रस्तुत की। संचालन डॉ. शिवानी ने किया, अध्यक्षता संस्था के निदेशक सुधीर उपाध्याय ने की। आभार संस्था की अध्यक्ष वीना चौहान ने व्यक्त किया। कवयित्री शिवानी की कविता में आज के माहौल पर कटाक्ष था। कमला शुक्ला की कविता में सकारात्मक दृष्टि रही। विनीता किरण की कविता ‘‘इन्सानियत’’ में प्रश्ा* उठाती है कहा ढूँढे अपना अस्तित्व, वह अस्तित्व कहाँ खो गया? उषा नांगिया की कविता ‘‘कर्मदोष’’ में रावण को संबोधित करते हुए पूछती हैं- रावण हर बार मरता है और हर बार पैदा कैसी विडंबना है- क्या यही विधि के विधान है? उर्वशी चौधरी की कविता ‘‘पायदान’’ में वे कहती है ‘‘मैं अपना धर्म निभा रही हूँ, मेरी पीडा को कोई समझ नहीं रहा है, मेरी व्यथा मौन है इस मौन को कौनसा शब्द दूँ।’’
प्रस्तुति : सुषमा शर्मा
साहित्यकार स्मृति समारोह
बारां। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से सम्बद्ध संस्था युवा मण्डल संस्थान, बारां द्वारा अंचल के आध्यात्मिक संत कवि एवं साहित्यकार पं. गोपीबल्लभ शर्मा ‘पथिक’ की स्मृति में दिनांक २६ नवम्बर २०१७
रविवार को ‘‘पं. गोपीबल्लभ शर्मा पथिक स्मृति साहित्यकार समारोह’’ का आयोजन किया गया। संस्थान अध्यक्ष श्री राजेन्द्र बंसल ने स्वागत भाषण किया। वरिष्ठ साहित्यकार श्री विभु विकल ने ‘पथिक जी’ के जीवन वृत्त का वाचन किया तथा संत श्री सिद्दीक बाबा ने कहा कि ‘‘पथिक साहित्यकार ही नहीं थे, वे साधनाकार भी थे। वे पूर्ण आध्यात्मिक चिन्तक भी थे।’’
साहित्य मनीषी श्री बशीर अहमद मयूख, संस्थान के संस्थापक संरक्षक प्रख्यात समन्वयी सन्त श्री सिद्दिक बाबा, राष्ट्रीय चिन्तक एवं विचारक डॉ. नरेन्द्र चतुर्वेदी, प्रान्त स्तरीय महिला साहित्यकार श्रीमती क्षमा चतुर्वेदी, श्रीमती प्रमिला आर्य, समीक्षक साहित्यकार प्रो. राधेश्याम मेहर, ओम नागर, श्री विजय जोशी, संस्थान अध्यक्ष श्री रजेन्द्र बंसल, शिक्षाविद् साहित्यकार रमेशचन्द्र शर्मा, नगर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री चन्द्रमोहन व्यास, श्री हेमराज बंसल की उपस्थिति में ‘पथिक जी’ की कृति ‘पथिक का सफर’ का विमोचन संयुक्त रूप से किया गया। द्वितीय सत्र में श्रीमती दीपा शर्मा ने ‘‘पथिक के साहित्य में अध्यात्म भाव चिन्तन’’ विषय पर पत्रवाचन किया। मुख्य अतिथि डॉ. नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि वे ‘‘वे अन्दर की यात्रा के लिए बाहरी संसार का सर्वस्व छोडने को तैयार रहने वाले चिन्तक थे और उन्होंने ऐसा कर भी दिखाया।’’ ओम नागर ने कहा कि ‘‘पथिक जी ने जात-पाँत, सम्प्रदाय की सीमा लाँघकर विशुद्ध मानवतावादी चिन्तन की हिमायत की और समाज को ईश्वरीय पथ का संदेश दिया।’’ श्रीमती क्षमा चतुर्वेदी ने कहा कि ‘‘उनके भीतर की स्वचेतना उन्हें सामाजिक विसंगतियों से लडने को प्रेरित करती थी।’’ अध्यक्षता करते हुए समीक्षक प्रो. राधेश्याम मेहर ने कहा कि जहाँ ‘‘तुलसी और कबीर का साहित्य हमारे लिए पे*रणादायी और कल्याणकारी है, वहीं पथिक जी का गद्य साहित्य समाज को इन्सानियत की राह दिखाता है।’’ अन्तिम सत्र के मुख्य अतिथि श्री बशीर अहमद मयूख ने कहा कि ‘‘पथिक जी के काव्य में
आध्यात्मिक चेतना के स्वर सिद्ध करते हैं कि कवि एवं सन्त दोनों का अटूट नाता है। सन्त हुए बिना कवि नहीं बना जा सकता है।’’ गीतकार दुर्गादान सिंह गौड ने कहा कि ‘‘पत्रवाचक डॉ. कौशल तिवारी ने पथिक के काव्य में जिस स्वचेतना को इंगित किया है, वह सभी साहित्यकारों को सृजन की प्रेरणा देती है।’’ अम्बिकादत्त चतुर्वेदी ने कहा कि ‘‘जब कवि का दर्द व्यष्टि से समष्टि में परिवर्तित हो जाता है तब वह शाश्वत सत्य का उद्घोषक बन जाता है। प्रो. कृष्ण बिहारी भारतीय ने पथिक जी के काव्य में सर्वधर्म समन्वय, थोथे पाखण्ड और दिखावे की विवेचना कर कहा कि ‘‘वे सच्चे मायने में सन्त थे, जिन्होंने समाज का भय न रख कर काव्य के माध्यम से सभी को संदेश दिया।’’ श्री हेमराज बंसल ने कहा कि ‘‘पथिक जी जीवन पर्यन्त मौन रह कर सृजन करते रहे। श्रीमती प्रमिला आर्य ने कहा कि ‘‘शाश्वत सत्यों के उद्घाटन के लिए कवि के अन्दर जिस निर्भीकता का होना नितान्त आवश्यक है, वह पथिक जी में देखने को मिलती है।’’ श्री प्रीतम लखवाल ने कहा कि ‘‘उनके साहित्य में समाज को दिशा देने वाले हर पक्ष के दर्शन होते हैं। वे कहीं मठाधीशों और मुल्ला मौलवियों को लताडते हैं, तो कहीं राजनेताओं और भष्ट अधिकारियों को।’’ विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ गीतकार द्वारकालाल गुप्त ने पथिक जी को आध्यात्मिक गीत के माध्यम से स्मरण किया और उन्हें बारां के साहित्य समाज का गौरव बताया।
प्रस्तुति : जितेन्द्र शर्मा ‘पम्मी’