सीख श्रम की (कहानी )

अनिता जैन


एक अमीर व्यक्ति हर रोज सवेरे घूमने निकलता था। एक दिन उसे रास्ते में एक फटेहाल भिखारी दिखाई दिया। भिखारी अमीर को देखकर उसके पैरों में पड गया और गिडगिडा कर कहने लगा, ‘‘साहब मैंने दो दिन से खाना नहीं खाया है। बहुत भूख लगी है। आप मेहरबानी कर कुछ पैसे दे दें तो मैं खाना खा लूँगा।
उस अमीर व्यक्ति को भिखारी की हालत पर तरस आ गया। उसने अपनी जेब से पचास पैसे का सिक्का निकाला और उसे झाडियों की तरफ उछाल कर फेंका। सिक्का झाडियों में गिर गया। वह अमीर आगे निकल गया।
भिखारी झाडियों में सिक्का तलाशने लगा। आधे घंटे की मेहनत के बाद आखिर उसने सिक्का खोज ही लिया। वह प्रसन्न हो गया। रास्ते में उसे वह अमीर व्यक्ति लौटता हुआ मिल गया। भिखारी को देखकर उसने पूछा, ‘‘क्यों, वह सिक्का मिल गया न?’’
‘‘जी हाँ, मैंने उसे खोज लिया।’’ भिखारी ने जवाब दिया।
अगले दिन फिर सवेरे वह भिखारी उस अमीर को उसी रास्ते पर मिल गया। उसने फिर अमीर से पैसे माँगे। अमीर ने जेब से एक रूपए का सिक्का निकाला और फेंकते हुए कहा, ‘‘यह लो।’’
सिक्का एक गड्ढे में जा गिरा, जिसमें गंदा पानी और कीचड ही कीचड था। अमीर आगे बढ गया और भिखारी सिक्का खोजने में व्यस्त
हो गया।
एक घंटे की जी-तोड मेहनत के बाद वह सिक्का उस भिखारी को
मिल गया।
तीसरे दिन भिखारी ने फिर एक नए बहाने की आड में अमीर से पैसे माँगे। अमीर ने फिर जेब से एक रुपए का सिक्का निकाला और उसे पास के नाले में फेंक कर आगे बढ गया।
नाला काफी गंदले पानी से भरा हुआ था। एक-डेढ घंटे की कोशिश के बाद वह भिखारी सिक्का पाने में सफल हो सका। वह अमीर आदमी के वापस लौटने तक वहीं खडा रहा। अमीर व्यक्ति सैर कर लौटा तो उसने भिखारी से पूछा, ‘‘क्यों सिक्का नहीं मिला क्या?’’
‘‘बाबू जी सिक्का तो मिल गया। लेकिन मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ?’’ भिखारी ने कहा।
‘‘हाँ, हाँ पूछो क्या पूछना चाहते हो?’’ अमीर ने मुस्कराते हुए कहा।
‘‘साहब, आप हर रोज मेहरबानी कर मुझे पैसे तो दे देते हैं, लेकिन मैं समझ नहीं पाता हूँ कि आप इस तरह फेंकते हैं कि मुझे उसे ढूँढने में काफी मेहनत करनी पडती है। आखिर ऐसा करने से आपको क्या हासिल होता है?’’ भिखारी ने पूछा।
अमीर व्यक्ति ने हँसते हुए जवाब दिया, ‘‘अरे... असल में मैं तुमको मेहनत की सीख देना चाहता हूँ। तुम युवा हो, हट्टे-कट्टे हो। मेहनत कर कमा खा सकते हो। यूँ तुम्हें बिना परिश्रम किए मिलता रहा तो तुम काम से जी चुराने लगोगे। कभी मत भूलो कि व्यक्ति मेहनत करने से जीवन में सफल हो पाता है। आलस्य तो वैसे भी इंसान का सबसे बडा दुश्मन होता है। यदि तुम मेहनत से कमाओगे तो एक दिन जरूर ऊँचे उठोगे। मेहनत की कमाई का अपना सुख होता है, इस बात को क्यों भूलते हो भाई।’’
अगले दिन जब वह अमीर व्यक्ति सवेरे घूमने निकला तो उसे दूर-दूर तक वह भिखारी कहीं दिखाई
नहीं दिया।
द्वारा कैलाश जैन, एडवोकेट, ३४, बंदा रोड
भवानी मण्डी (राज.)-३२६५०२