तीन गजलें

अंजना चड्ढा


(१)
खुशबू अपनी जाफरानी दे गया
इक मकहती-सी कहानी दे गया!
इश्क में जब आ गई रूहे-कशिश
जग को इक मीरा दीवानी दे गया!
उसकी माँ से खैरियत पूछें जरा
सरहदों पर जो जवानी दे गया!
थी कोई गुमनाम अनजानी नदी
उसकी मौजों को रवानी दे गया!
दिल के रिश्तों की लिखें तहरीर क्या
इश्क का वादा जुबानी दे गया!
उसकी आँखों के कँवल महफूज हों
चाँदी वाली सुरमेदानी दे गया!
था ये वादा हर खुशी देगा मुझे
दिल को जख्मों की निशानी दे गया!!
(२)
सीप समंदर आँखे हैं
गहरा-गहरा झाँकें हैं
मिट्टी-पत्थर तितली का
मोल गजब ये आँकें हैं
अब दूजे की कौन सुने
अपनी-अपनी हाँकें हैं
कहाँ छुपा है जादूगर
चाँद-सितारे टाँकें हैं
पथराई सी आँखें ये
रस्ता किसका ताकें हैं
(३)
वो मेरा आसमान था यारों
मुझे कितना गुमान था यारों
बरस बीते मगर बरसा ही नहीं
एक जख्मे-निशान था यारों
जाते-जाते मुड के देख लिया
क्या वो पशेमान था यारों
एक दीपक उधर जला आये
एक खाली मकान था यारों
दिल कहीं, जिस्म कहीं, रू ह कहीं
कैसा ये इम्तिहान था यारों
इश्क वालो से पूछ कर देखा
गम का ये सामान था यारों
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