रपट प्रस्तुति



राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी आयोजित
भीलवाडा। राजस्थान साहित्य अकादमी एवं बालसाहित्य मासिकी ‘बालवाटिका’ के संयुक्त तत्वावधान में द्विदिवसीय (२८-२९ अक्टूबर २०१७) राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह विनायक विद्यापीठ, भक्तिपुरम् में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता राजस्थान साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने की, वहीं मुख्य अतिथि भीलवाडा के विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी थे। विशिष्ठ अतिथि के रूप में समाज सेवी आर. एल. नौलखा तथा जम्मू से पधारे प्रोफेसर डॉ. शिवदेव मन्हास
मंचस्थ थे।
स्वागताध्यक्ष विनायक विद्यापीठ के निदेशक डॉ.देवेंद्र कुमावत ने सभी का भावभीना स्वागत किया। ‘बालवाटिका’ के संपादक एवं वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार डॉ. भैंरूलाल गर्ग ने सभी का हार्दिक स्वागत करते हुए अपने वक्तव्य में ‘बालवाटिका’ की २२ वर्षीय प्रकाशन-यात्रा और बाल साहित्य उन्नयन में इसके योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि- यह बच्चों की पत्रिका ही नहीं अपितु बाल साहित्य और विमर्श की हिन्दी की एक मात्र पत्रिका है जो बालसाहित्य उन्नयन में कई स्तरों पर अपनी महती भूमिका निभा रही है। उन्होंने बालसाहित्य रचनाकारों पर प्रकाशित अबतक दस विशेषांकों एवं विविध विषयों पर आधारित लगभग ५० विशेषांकों पर भी प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि आए.एल. नौलखा प्रो. शिवदेव मन्हास ने कहा कि हमने जम्मू विश्वविद्यालय में ‘डोगरी मंच’ की स्थापना की है, यह गर्ग जी और उनके आयोजनों की प्रेरणा से ही हुआ है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी ने कहा कि बालसाहित्य सेवा एक तरह से राष्ट्र-सेवा ही है। बच्चा आज भले ही मोबाइल चलाने में हम से ज्यादा माहिर है लेकिन जो ज्ञान उसे किताबों से मिलेगा वह मोबाइल से नहीं। हम बच्चों को श्रेष्ठ बालसाहित्य से जोडकर एक अच्छा इंसान बना सकते हैं। चरित्र-निर्माण के लिए आज भी श्रेष्ठ माध्यम अच्छी पुस्तकें ही हैं।
इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे साहित्य आकादमी के उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा कि आज पहली बार बालसाहित्यकारों और बच्चों के बीच आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इस परिसर में शांतिपूर्ण और स्वच्छ वातावरण में जैसे शांतिनिकेतन-सी अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि आज भी हिन्दी बालसाहित्यकारों से ‘ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार’ जैसी बाल कविता की दरकार है। बालसाहित्य ऐसा हो जो बच्चों को अपने आकर्षण में बाँध ले। उन्हने बालसाहित्य के ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इनके माध्यम से हम भावीपीढी को सुसंस्कृत बनाने में सफल हो सकते हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन कवयित्री रेखा लोढा ‘स्मित’ ने किया।
प्रथम चर्चा-सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ बालसाहित्य रचनाकार शिव मृदुल ने की, वहीं मुख्य अतिथि जम्मू विश्वविद्यालय के डोगरी विभागाध्यक्ष प्रो. शिवदेव मन्हास थे। विशिष्ट अतिथि दिल्ली से पधारे प्रो. डॉ. नृत्यगोपाल शर्मा थे। विषय का प्रवर्तन जम्मू से आए डॉ. सुनीलदत्त शर्मा ने किया। केंद्रीय विषय ‘बालसाहित्य और राष्ट्रीय चेतना’ से संबद्ध बालकाव्य संदर्भित पत्र ‘बालकाव्य में राष्ट्रीय चेतना के विविध रंग’ प्रस्तुत किया कोटा से पधारे वरिष्ठ रचनाकार भगवती-प्रसाद गौतम ने।
सत्र के विशिष्ट अतिथि डॉ. नृत्यगोपाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय चेतना के अभााव में राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मुख्य अतिथि प्रो. मन्हास ने कहा कि बालसाहित्य केवल मनोरंजन का साधन भर नहीं है, उसका संदेशपरक होना अत्यावश्यक है। इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ रचनाकार एवं शिक्षाविद् शिव मृदुल ने कहा कि आज हमने राष्ट्रीयता जैसे मूल्य को नजरंदाज कर दिया है, उसी के भयावह परिणाम आज हम भोगने को विवश हैं। राष्ट्रीयता बालकाव्य की मूल चेतना है और ऐसा बालसाहित्य ही देश को श्रेष्ठ नागरिक दे सकता है, सत्र का संचालन हीरालाल लोहार ने किया।
द्वितीय संगोष्ठी-सत्र के मुख्य अतिथि थे सिहोरा (म.प्र.) से पधारे वरिष्ठ रचनाकार अश्वनीकुमार पाठक, वहीं अध्यक्षता की अल्मोडा (उत्तराखंड) से पधारे बालप्रहरी के संपादक उदय किरोला ने। विशिष्ट अतिथि थे झालावाड से पधारे शिवचरण सेन शिवा। ‘हिन्दी बाल कहानी और राष्ट्रीय चेतना’ विषयक विषय प्रर्वतन किया भीलवाडा के श्यामसुंदर तिवाडी ने। इस सत्र में वरिष्ठ बालसाहित्य आलोचक एवं समीक्षक प्रो. शकुंतला कालरा के पत्र का वाचन किया प्रो. अवधेश जौहरी ने।
अश्वनीकुमार पाठक ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के संरक्षक और प्रसार में हिन्दी बाल कहानी का महत्त्वपूर्ण योगदान है। बचपन में दादी-नानी से सुनी कहानियों से हम आज भी यथावसर प्रेरणा लेते हैं।
सत्र के अध्यक्ष उदय किरोला ने अपनी यात्राओं के कई संदर्भ देते हुए कहा कि आज हम बच्चों को श्रेष्ठ बालसाहित्य से जोडकर कई भावी समस्याओं से अपने को मुक्त रख सकेंगे।
इस सत्र का संचालन बालकहानीकार डॉ. सत्यनारायण सत्य ने किया। इसी दिन रात्रि में एक काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। अश्वनी कुमार पाठक मुख्य अतिथि शिव मृदुल, विशिष्ट अतिथि भगवती प्रसाद गौतम के सान्निध्य में उदय किरोला, शिवचरण सेन शिवा, रमेश मयंक, अश्वनी कुमार पाठक, भगवतीप्रसाद गौतम, नंदकिशोर निर्झर, गोविंद शर्मा, बंशीलाल पारस, चिरंजीलाल टॉक ‘देशप्रमी’, नृत्यगोपाल शर्मा, सुधांशु शुक्ला, दिव्य राम रामस्नेही आदि ने काव्यपाठ किया। काव्यगोष्ठी का कुशल और सफल संचालन गोविंद शर्मा एवं
नंदकिशोर ‘निर्झर’ ने किया। काव्यगोष्ठी के समन्वयक थे श्यामसुंदर ‘सुमन’।
दूसरे दिन तृतीय संगोष्ठी सत्र के अध्यक्ष दिल्ली से पधारे डॉ. सुधांशु शुक्ल थे, वहीं मुख्य अतिथि नारनौल से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनिवास मानव। विशिष्ट अतिथि साहित्यिक प्रकाशक फतहसिंह लोढा थे। गोविंद भारद्वाज द्वारा विषय प्रर्वतन के पश्चात् डॉ. रमेश मयंक द्वारा पत्र-‘बालसाहित्य और राष्ट्रीय चेतना’ प्रस्तुत किया
गया। मुख्य अतिथि डॉ. मानव ने अपने दिवंगत पुत्र की स्मृति में आयोज्य गतिविधियों की रूपरेखा, पुरस्कार योजना आदि से अवगत कराते हुए कहा कि यह आप लोगों की आत्मीयता और सहज पे*म ही है जिसके कारण तीन वर्षों बाद शोकसंतप्त वातावरण से मुक्त होकर यहाँ तक आने के लिए विवश हो गया। सत्र के अध्यक्ष डॉ. सुधांशु शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय चेतना के अभाव में देश और दुनिया में हम कैसी-कैसी अराजक स्थिितयाँ देख रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रवाद को मजबूत करने में कविता की भूमिका का प्रतिपादन किया। इस सत्र का सफल संचालन डॉ. विष्णु व्यास ने किया।
चतुर्थ संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उदय किरोला तथा अध्यक्ष शिक्षाविद् एवं यायावर काशीलाल शर्मा थे। विशिष्ट अतिथि नारनौल से आए शिक्षाविद् पंकज गौड थे। जम्मू से आए डॉ. मनोज हीर ने विषय प्रर्वतन के साथ ही पूर्व में ‘बालवाटिका’ के आयोजन में भागीदारी संबंधी यादें साझा करते हुए कहा कि हम यहाँ आकर बहुत कुछ सीखते हैं। उसी के परिणाम स्वरूप डोगरी बालमंच द्वारा हमारी कई पुस्तकें बालसाहित्य की आ चुकी हैं। डॉ. कुंजन आचार्य द्वारा प्रस्तुत पत्र ‘राष्ट्रीय-चेतनाः बालसाहित्य और बालपत्रिकाएँ’ में जहाँ उन्होंने बालसाहित्य में राष्ट्रीय चेतना की पडताल की, वहीं पत्रिकाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। ममता जोशी के पत्र का प्रतिपाद्य पं. दीनदयाल उपाध्याय का बाल किशोर उपन्यास ‘सम्राट चंद्रगुप्त’ था। जोशी ने उपाध्यायजी के इस उपन्यास के रचना-उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए ‘राष्ट्रीय-चेतना’ की दृष्टि से इसका मूल्यांकन कर वैशिष्ट्य प्रतिपादित किया। प्रोफेसर अवधेश जौहरी ने अपने पत्रचावन में बालसाहित्य के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालते हुए बालसाहित्य में राष्ट्रीय चेतना की प्रवृत्ति की पडताल की।
समग्रतः तीनों ‘पत्रों’ पर चर्चा करते हुए पंकज गौड ने बच्चों के प्रति शिक्षकों और अभिभावकों के दायित्व-बोध पर जोर दिया, उदय किरोला ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमने ६२ बालपत्रिकाओं का संग्रह किया है, बालप्रहरी के माध्यम से निरंतर बच्चों के बीच कई वर्षों से
कार्य करते आ रहे हैं। लेकिन इस सबका श्रेय डॉ. गर्ग जी और उनकी ‘बालवाटिका’ को जाता है। ‘बालवाटिका’ के प्रकाशन के कई वर्षों बाद हमने ‘बालप्रहरी’ के प्रकाशन की योजना बनाई। सत्र की अध्यक्षता कर रहे काशीलाल शर्मा ने अपने विदेश भ्रमण की बातें साझा करते हुए बालकों के चरित्र-निर्माण पर विशेष बल दिया। इस सत्र का सफल संचालन जम्मू से आई सोनिका जसरोटिया ने किया। अपराह्न तीन बजे समापन एवं सम्मान सत्र में मुख्य अतिथि कालूलाल गुर्जर मुख्य सचेतक-राजस्थान सरकार थे, वहीं अध्यक्षता राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने की। विशिष्ट अतिथि लक्ष्मीनारायण डाड एवं राजसमंद से पधारे मुरलीधर कनेरिया सहित सुवाणा प्रधान सरोजदेवी गुर्जर एवं अंकित बाँगड भी थे। भगवतीप्रसाद गौतम की सरस्वती वंदना, सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वल से सत्र का शुभारंभ हुआ। डॉ. देवेंद्र कुमावत ने मंचस्थ अतिथियों का तिलक एवं माल्यार्पण कर स्वागत-अभिनंदन किया।
विशिष्ट अतिथि लक्ष्मीनारायण डाड ने कहा कि बाल मनोविज्ञान देश और दुनिया से जुडा जीवंत मसला है। भारत में देशभक्ति विवादास्पद है। इस चुनौती का सामना केवल राष्ट्रीय चेतना ही कर सकती है और बालसाहित्य के माध्यम से यह कार्य आसानी से संभव है। उन्होंने कहा कि बिना संवेदना के राष्ट्रीयता का विकास संभव नहीं है।
इसी क्रम में मेवाड की संस्कृति और यहाँ की शौर्यगाथाओं को जन-जन तक पहुँचाने में महती भूमिका निभाने वाले कुंभलगढ के लोककवि एवं गीतकार माधव दरक एवं महाराणा प्रताप संग्रहालय के संस्थापक मोहनलाल श्रीमाली का शॉल, श्रीफल, माल्यार्पण, अभिनंदन पत्र एवं नकद राशि भेंटकर अभिनंदन किया गया। श्रीमालीजी ने नकद राशि आयोजन संस्था को लौटाते हुए सभी को हल्दीघाटी आने और संग्रहालय का अवलोकन करने का आत्मीय निमंत्रण दिया। सम्मान के इसी क्रम में बालसाहित्य के शोध निदेशक डॉ. रामनिवास मानव एवं ‘बालवाटिका’
पर पहली पीएच.डी. हेतु शोध कर उपाधि प्राप्त करने के लिए सत्यनारायण ‘सत्य’ को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सात प्रदेशों से सहभागिता करने वाले रचनाकारों में से वरिष्ठतम पाँच रचनाकारों-शिव मृदुल, अश्वनीकुमार पाठक, भगवतीप्रसाद गौतम, डॉ. रामनिवास मानव एवं डॉ. शिवदेव मन्हास का बालसाहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए विनायक विद्यापीठ के निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमावत ने शॉल, श्रीफल, माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंटकर अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कालूलाल गुर्जर ने अपने उद्बोधन में कहा कि बालसाहित्य की चरित्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि बालसाहित्य द्वारा हम बच्चों को संस्कारित करके अच्छे इंसान बना सकते हैं। आज संस्कारों की कमी के चलते अपराधवृत्ति बढ रही है। उन्होंने ऐसे आयोजनों की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ बालक ही देश का श्रेष्ठ नागरिक हो सकता है, अतः बालसाहित्य से बालकों का जुडाव अत्यावश्यक है।
इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे अकादमी अध्यक्ष डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने अपने उदबोधन में बालसाहित्य विमर्श पर जोर देते हुए कहा कि जब तक हमारे विचार के केंद्र में बालक और बालसाहित्य विमर्श नहीं आएँगे तबतक बालसाहित्य उपेक्षित रहेगें। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य में स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श आए लेकिन बाल अथवा बालसाहित्य विमर्श क्यों नहीं? चर्चा में आज बच्चा विमर्श से क्यों गायब है? आज बालसाहित्य विमर्श भी समय की माँग है और यह हम सब की चिंता का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संवाद आगे बढना चाहिए और ‘बालवाटिका’ को बालसाहित्यकारों के प्रबोधन का माध्यम बनना चाहिए।
अंत म समारोह संयोजक डॉ. भैंरूलाल गर्ग एवं विनायक विद्यापीठ के निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमावत ने अपने सौजन्य के लिए राजस्थान साहित्य अकादमी, समस्त अतिथियों एवं सहभागी रचनाकारों एवं आयोजन में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अपना आत्मीय सहयोग देनेवालों के प्रति
हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस सत्र का सफल संचालन डॉ. कैलाश पारीक ने किया। ?
प्रस्तुतिः वेदांत प्रभाकर
कहानी संग्रह का विमोचन
जोधपुर। अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् के तत्वाधान में डॉ. शालिनी गोयल के प्रथम कहानी संग्रह ‘अन्तर्द्वन्द्व’ तथा अन्य कहानियाँ’ का विमोचन गाँधी भवन में हुआ। लेखिका ने आत्मकथ्य में कहा कि मेरा लेखन शायद तब शुरू हुआ जब पहली बार मेरी माँ ने स्लेट पर अ लिखकर उसके ऊपर चाक फिराकर लिखना
सिखाया होगा। उन्होंने अपनी एक कहानी ‘रिश्ता’ का पाठ भी किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण ने कहा कि संग्रह में पारिवारिक, मानव मन व रिश्तों की छोटी छोटी कहानियाँ हैं। लेखिका ने स्त्री मन को ज्यादा टटोला है। चाहे वह कहानी फिर ‘अन्तर्द्वन्द्व’ हो या ‘रिश्ता’ हो चाहे ‘विदाई’ या ‘करवा चौथ’ या ‘डिग्री’ हो। असल में ये कहानियाँ ढहते रिश्तों के बीच बचते रिश्तों की कहानियाँ हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो असंभव के बीच संभव की कहानियाँ हैं। मुख्य अतिथि डॉ. हरीदास व्यास ने कहा कि शालिनी जी की कहानियाँ जीवन के पहले स्तर की संप्रेषित होने वाली कहानियाँ हैं जिनमें बेहद सादगी के साथ कई समस्याओं के समाधान हैं।
अनुराधा श्रीवास्तव ने कहा कि शालिनी जी की कहानियाँ आत्मीयता की भूमि पर रची बसी कहानियाँ हैं। आत्मीय रिश्तों से परिपूर्ण ये कहानियाँ पढने वाले को मुग्ध करती हैं तथा ये कहानियाँ मानव जीवन के दुःख से उनके रिश्ते को व्यक्त करने का प्रयास करती हैं। मधुर परिहार ने अपने पर्चे में कहा कि नेक इरादों से लिखी ये कहानियाँ हर रिश्ते के मुखडे पर खुशी की चमक चाहती हैं। ये यथार्थ जीवन की कहानियाँ हैं। कहानियों में ताजगी है, सादगी है। ये कहानियाँ विविध रंगी हैं। भरोसा करती हूँ कि इन कहानियों को पाठकों का प्यार मिलेगा। डॉ. पद्मजा शर्मा ने कहा कि शालिनी में अपार संभावनाएँ हैं। उनमें चीजों को देखने की दृष्टि तथा समझ है। कार्यक्रम की सूत्रधार शायरा रेणु वर्मा ने कहा कि ‘अन्तर्द्वन्द्व तथा अन्य कहानियाँ’ की कहानियाँ हमारे आसपास की कहानियाँ हैं। स्वागत भाषण की रस्म अदा की गांधी प्रतिष्ठान के मानद सचिव डॉ. भावेन्द्र शरद जैन ने। ?
प्रस्तुति : डॉ. पद्मजा शर्मा
काव्य-गोष्ठी का आयोजन
अजमेर। अन्तर्भारती साहित्य एवं कला परिषद् द्वारा साहित्यकार स्व. डॉ. रामगोपाल गोयल की स्मृति में ‘‘शब्द साधना’’ शास्त्री नगर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता अनिल गोयल ने की। सचिव डॉ. अरूणा माथुर ने मधुर स्वर में मां सरस्वती की वंदना की। वरिष्ठ साहित्यकार तथा विशिष्ठ अतिथि डॉ. नवल किशोर भामडा ने गीत ‘‘मैं और ये उधेडबुन, यह उधेडबुन और मैं’’ तथा धूप चाँद पर चाँदनी हो जाती है’’ से गोष्ठी को समृद्ध किया। सरदार बख्शीश सिंह ने ‘‘उसे सीने से लगाऊँ तो धडकने गिनने लगता है, हाथ मिलाँऊ तो उंगलियाँ गिनने लगता है’’ सुनाकर सब का दिल जीता।
डॉ. ब्रजेश माथुर ने गजल पढी। बाल साहित्यकार गोविन्द भारद्वाज ने गजल ‘‘साँसों की हकीकत को बताता कौन है, जिन्दगी का साथ निभाता कौन है’’ सुनाई। डॉ. चेतना उपाध्याय ने ‘‘जीवन एक मेला है या कोई झमेला है’’ देवदत्त शर्मा ने ‘‘इंसान बिन मुहूर्त जन्म लेता है फिर भी आजीवन मुहूर्त में उलझता है’’ तथा ‘‘छोडी करुणा छोडी नारी, पीयूष स्रोत्र सी बहना छोडी’’ सुनाकर श्रोताओं को आकर्षित किया। ओज के कवि वरिष्ठ साहित्यकार मोहनलाल तंवर ने अपनी कविता का वाचन किया तथा कल्याण राय ने बालगीत प्रस्तुत किया। लीना खत्री, युवा साहित्यकार रामावतार यादव तथा सतीश गोधा ने भी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। ? प्रस्तुति : अनिल गोयल
विविध भाषाओं पर केंद्रित सेमिनार तथा सम्मान समारोह का आयोजन
टोंक। मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान, टोंक, राजस्थान में तीन दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार तथा ‘‘अरबी, फारसी, उर्दू एवं इतिहास अवार्ड सम्मान’’ समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि अजीत सिंह मेहता, विधायक, विधानसभा क्षेत्र टोंक थे। अध्यक्षता मेजर अनवर शाह खान ने की। ‘‘अरबी फारसी और उर्दू में संस्कृत भाषा की धरोहर’’ विषय पर केंद्रित इस अखिल भारतीय सेमिनार में भारत के विभिन्न प्रांतो उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, आन्धप्रदेश तेलंगाना, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान आदि से विद्वान उपस्थित थे। सेमिनार में लगभग ५० स्कालर्स एवं शोध कर्ताओं ने अपने शोध पत्र
प्रस्तुत किये।
संस्थान २०१३-१४ से प्रतिवर्ष अरबी, फारसी, उर्दू एवं इतिहास विषय से संबंधित विद्वानों को अवार्ड देकर सम्मानित करता रहा है। वर्ष २०१७-१८ में अरबी भाषा एवं साहित्य के लिए जनाब मोहम्मद जाकिर, जयपुर, फारसी भाषा एवं साहित्य के लिए जनाब एस. वहीद अहमद बरकाती, जयपुर, उर्दू भाषा एवं साहित्य के लिए सैयद मुखतार अली मुखतार टोंकी, टोंक और इतिहास
विषय के लिए साहिजाद अब्दुल माईद खान, पूर्व निदेशक, एमएएपीआरआई, टोंक को इस अवसर पर अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। प्रस्तुति : आयोजक
कहानी पाठ का आयोजन
चित्तौडगढ। ‘सम्भावना’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहनीकार कर्नल मुकुल जोशी ने अपनी कहानी ‘नेचुरल रिंगटोन’ का पाठ किया।
कहानी में पहाडी गाँव के वातावरण, खानपान, आस्थाएँ, मानवीय, पारिवारिक सम्बन्धों से लेकर गीत और परम्पराओं को पिरोया गया है। कुमाऊंनी भाषाओं के आँचलिक शब्दों ने कहानी को मर्मस्पर्शी बना दिया। आधुनिक जीवन में पढाई या आजीविका के कारण गाँव छोड कर मजबूरी में शहर में बस जाने पर होने वाली छटपटाहट भी कहानी में बारीकी से चित्रित हुई है।
कहानी पाठ के बाद महेन्द्र खेरारू के प्रश्न के जवाब में कहानीकार ने बताया कि आधुनिक सोशल मीडिया के कारण बडी संख्या में रचनाएँ इन पर आ रही हैं, पर जल्दबाजी के चलते इनमें सार्थकता की कमी है। हालांकि नये रचनाकारों को इससे प्रोत्साहन मिल रहा है। इन रचनाओं में से वे ही बचेंगी जो शाश्वत होगीं। जोशी ने बताया कि भारतीय संस्कृति विश्व में प्राचीन और श्रेष्ठतम मानी जाती है, पर हमें सभी से उपयोगी तत्वों को ग्रहण करना चाहिए। कवि नन्दकिशोर निर्झर ने कहानी पर अपने विचार प्रकट किये। प्रश्नों के जवाब में कर्नल जोशी ने बताया कि सेना में काम करना नौकरी मात्र नहीं है, यह देश की सेवा और जीवन जीने की शैली और कला है।
कार्यक्रम में स्थानीय कॉलेज के अखिलेश चाष्टा, चित्रकार मुकेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार नटवर त्रिपाठी, विकास अग्रवाल, गोपाल जाट, ओम पालीवाल, रमेश शर्मा, बाबुखां मंसूरी, वर्षा वाडिका, पूजा जोशी, हरीश खत्री आदि साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। डॉ. साधना मण्डलोई ने कहानीकार जोशी का स्वागत करते हुए उनके उद्बोधन को विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणास्पद बताया। अध्यक्ष डॉ. के.सी. शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। ?
प्रस्तुतः डॉ. कनक जैन
काव्य-पुस्तक का विमोचन
कोटा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् कोटा के तत्वाधान में कवि एवं गीतकार हनुमान प्रसाद विजय की पुस्तक ‘‘मेरे गीत, मेरे मीत, यही है मेरा जीवन संगीत’’ का लोकार्पण समारोह संबल गार्डन स्थित मोजीबाबा आश्रम पर हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. मृणाल सेन एवं मोजीबाबा लोक कल्याण ट्रस्ट की अध्यक्षा महामंडलेश्वर हेमानंद सरस्वती रही। अध्यक्षता विजय नागपाल ने की। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट सदस्य रामेश्वर शर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभांरभ द्वीप प्रज्ज्वलित कर वंदना से हुआ। ?
प्रस्तुतिः हनुमान प्रसाद विजय
पुस्तक का लोकार्पण
जोधपुर। सृजना संस्था की ओर से कवि, पत्रकार, नाटककार, उद्घोषक स्वर्गीय विष्णुदत्त जोशी के अप्रकाशित शब्द चित्रों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उनकी धर्म पत्नी श्रीमती पुष्पा जोशी ने बताया कि विष्णुजी के लिखे कागजों की फाईलों को पुत्र अभिनव जोशी ने टटोलते हुए इन अप्रकाशित रचनाओं को ढूँढा तथा अपने पापा के मित्रों से सलाह-मशविरा कर यह कृति छपवाई।
डॉ. रमाकांत शर्मा ने कहा कि रचनाकार विष्णुदत्त जोशी को लोग कवि, नाटककार और उद्घोषक के रूप में भली-भाँति जानते थे। परन्तु अपने जीवन के आखिरी समय में उन्होंने शब्द चित्र जैसी नई विधा में गंभीर रचना कर्म किया। इन शब्द चित्रों के माध्यम से उनका पत्रकार और रचनाकार का संयुक्त व्यक्तित्व अभिव्यक्त हुआ है। इस शब्द-चित्र संग्रह में ठेले वाला, कबाड वाला, टिफिन वाला, गाँव से शहर में पहुँचा आदमी है, मजदूर है। जोशी ने उस सर्वहारा वर्ग के शब्द चित्र लिखे हैं जो जीवन पर्यंत संघर्ष कर के भी हारता नहीं है। रंगकर्मी कमलेश तिवारी ने कहा कि विष्णुदत्त जोशी ने जोधपुर रंगमंच की पूरी नई पीढी के निर्माण में कदाचित सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका
निभाई है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरीदास व्यास ने कहा कि विष्णुदत्त जोशी कविता, नाटक, पत्रकारिता के क्षेत्र में
विधाओं के अनुरूप बहुआयामी व्यक्तित्व रखते थे। इस अवसर पर स्व. जोशी के पुत्र अभिनव जोशी ने पिता के शब्द चित्रों को सहेज कर प्रकाशन करने की यात्रा से अवगत करवाया जब कि पूर्णदत्त जोशी ने आभार अभिव्यक्त किया। ? प्रस्तुति ः डॉ. हरीदास व्यास
कविता पुस्तक का लोकार्पण
राजसमंद। टीकमचंद बोहरा ‘अनजाना’ की कविता संग्रह कृति ‘माँ से प्यारा नाम नहीं’ पुस्तक का लोकार्पण समारोह अणुव्रत विश्व भारती कांकरोली के सभागार में जिला कलेक्टर प्रेमचंद बेरवाल की अध्यक्षता, हरिओम सिंह राठौड सांसद के मुख्य आतिथ्य तथा डॉ. नगेन्द्र कुमार मेहता ‘भव्य’, कमर मेवाडी, फतहलाल गुर्जर ‘अनोखा’, त्रिलोकी मोहन पुरोहित, देवकी नंदन गुर्जर के विशिष्ट आतिथ्य म सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर शरद बागोरा, मदन सिंह रावल, धर्मचंद मेहता भगवानलाल बंशीवाल ‘भला’, राजस्थान साहित्यकार परिषद् कांकरोली के अफजल खाँ अफजल, शेख अब्दुल हमीद, भँवरलाल पालीवाल ‘बॉस’, राधेश्याम सरावगी, हरिनारायण डाबी का अभिनंदन किया गया। लोकार्पित कृति पर आलेख वाचन नगेन्द्र कुमार मेहता ने किया। टी.सी. बोहरा की कविताओं को संवेदनाओं का सागर बताया। गीतकार त्रिकोकी मोहन पुरोहित ने प्रशासकीय दायित्व के निर्वहन के साथ साहित्य सर्जन को प्रशंसनीय बताया। मुख्य अतिथि हरिओम सिह राठौड, सांसद, (राजसमंद) ने नाथद्वारा और राजसंमद की धरा को साहित्य सर्जन की उर्वरा माटी बताया। कृतिकार टीकमचंद बोहरा ने संग्रह की चयनित कविताओं का काव्य पाठ किया। इस अवसर पर घनश्याम वागरेचा, गणपत धर्मावत,
ब्रजमोहन बैरवा (ए.डी.एम.राजसमंद), जगदीशचंद्र खंडेलवाल, जीवनराम मीणा, जसराज सरगरा, डॉ. विजय खिलनानी, भगवत शर्मा, गिरिजा शंकर पालीवाल, साबिर शुक्रिया, पीरदान चारण, दिनेशचंद्र शर्मा, दुर्गा शंकर पुरोहित, सुखवीर सिंह चौहान, गोविन्द सिंह चौहान, रमेश आचार्य, राजकुमार दक, एकता बोहरा, अंशु बोहरा, नारायण सिंह भाटी, घनश्याम पालीवाल, प्रदीप पालीवाल, उदयगोपाल इत्यादि उपस्थित थे। आभार मधुप्रकाश लड्ढा ने ज्ञापित किया तथा मंच संचालन दिनेश श्रीमाली ने किया। ?
प्रस्तुति : नगेन्द्र कुमार मेहता
पुस्तक प्रदर्शनी
उदयपुर। महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर की ओर से सिटी पेलेस म्यूजियम उदयपुर में ‘बाल दिवस’ पर दिनांक १४ से १९ नवम्बर, २०१७ को पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन उदयपुर के संभागीय आयुक्त श्री भवानी सिंह देथा ने किया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य बाल श्रमिकों को श्रम से दूर करते हुए उनके हाथों म पुस्तक पहुँचाना है। इस प्रदर्शनी में उदयपुर संभाग के पुस्तक विक्रताओं, विभिन्न संस्थानों की पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई। राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई।
उदयपुर संभाग के विभिन्न स्कूली बच्चों ने पुस्तकों प्रदर्शनी का अवलोकन किया और अपनी मनपसन्द पुस्तकों की खरीद की पुस्तक प्रदर्शनी के समापन पर अकादमी सचिव डॉ. विनीत गोधल ने पुस्तक प्रदर्शनी संयोजिका पूर्वा भाटिया को इस सफल प्रदर्शनी के लिए बधाई दी और भविष्य में बाल साहित्य को बढावा देने के लिए और अधिक प्रयास करने पर बल दिया। प्रस्तुति : प्रकाश नेभनानी