दो कविताएँ

सांवलाराम नामा


मुस्कुराते रहो
फूल की तरह तुम मुस्कुराते रहो,
मीठी वाणी से हरदम गुनगुनाते रहो।
जीवन के पथ पर फूल भी, काँटे भी हैं,
प्यार की माला गूँथ कर पहनाते रहो।
जिन्दगी छोटी है पर मोड बहुत हैं,
हर मोड पर संयम की पताका फहराते रहो।
जीवन की राह में जख्म मिलेंगे जरूर,
नामा अच्छाई का अर्थ समझाते रहो। ?

जाग जाएँ नष्ट होने से
तरस न जाएँ हम बरसात में पानी की बूँदों को।
सर्दी में सूर्य की मीठी तपती धूप को।
खो न दें वृक्षों की हरियाली, मिट्टी की सौंधी महक।
चहचहाहट बंद न हो जाए बागों में,
घरों में चिडियों की।
भूल न जाएँ हम मानवीय रिश्तों को।
भौतिक सुखों को बटोरने की हसरत में।
याद रखें हम अनमोल कृति है विधाता की।
हमसे ही न हो ऐसी गलतियाँ,
जिससे तबाह हो जाए प्रकृति की सुंदरता।
नष्ट न हो जाएँ स्वयं के ही हाथों। ?
सदर बाजार रोड, निकट बडा चौराहा, भीनमाल-३४३०२९, जालोर, (राज.)