दस हाइकू

सीताराम व्यास ‘राहगीर’



देर न लगी
वहाँ जगह न थी
लौटना ही था.

खाली हो गई
फिर गरूर क्यूँ
पर आदत.

गया सो गया
लौटेगा न वापिस
आएगी याद.

आ रही यादें
नजरों के रास्ते
गुनगुनाती.

निकल पडी
नजर बचा कर
परेशान थी.

जाएगा कहाँ
ऊपर है आकाश
नीचे जमीन.

नींद गहरी
सपनों की दुनियाँ
खोता इंसान.

कोरे थे पन्ने
बेदाग किताब के
सुकून मिला.

आँखें जो रोज
अश्कों से नहाई
फिर तैयार.
१०
ना ना कर कर के
हाँ हाँ करना क्या
ये रजामंदी. ?
३ ई, ३० जयनारायण व्यास कॉलोनी, बीकानेर (राज.)
मो. ९४१३६२१४०७