‘बचपन पुकारे ! बालक मन के भोले गीत’/बच्चों का महके बचपन/ हम भारत के बालक/

मनीषा शर्मा


‘बचपन पुकारे ! बालक मन के भोले गीत’
इस बाल काव्य कृति में कुल तियालीस कविताएँ संग्रहीत हैं। बाल मनोविज्ञान से परिचित कवयित्री विमला महरिया ने इस संग्रह के माध्यम से बालकों के विशुद्ध मनोरंजन के साथ-साथ सुसंस्कारित करने का भी सराहनीय प्रयास किया है, मूलतः एक शिक्षिका होने के कारण आदर्श व नैतिक मूल्यों का पाठ लेखिका ने बहुत ही सरसता से पढाया है। अभिभावकों से भी बाल्यावस्था में बालकों को अधिकाधिक प्राकृतिक व आत्मीय वातावरण प्रदान कर तनावमुक्त जीवन जीने का अवसर प्रदान करने का आग्रह किया है। इस संग्रह में भारतीय संस्कृति की धुरी संयुक्त परिवार व्यवस्था दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-ताऊ भाई-बहन के परस्पर आत्मीय सम्बंध को सुदृढ बनाये रखने तथा उनका सम्मान करने की सीख स्थान-स्थान पर दी है। दूसरी और खेल-खेल में मधुर व सरस शैली में बच्चों को प्रकृति प्रेम तथा प्रकृति के विभिन्न उपादानों विविध-प्रकार के फूल, फल, खाद्यान्न, पशु-पक्षियों, सूर्य-चन्द्रमा, वृक्षों की विस्तृत जानकारी का रसास्वादन कराया है।
भारतीय समाज में गरिमापूर्ण स्थान पर प्रतिष्ठित गुरु, माता-पिता, एवं मातृभूमि के प्रति वन्दन तथा नमन का भाव भी शान्त व कोमलचित्त बालकों में जागृत करने का प्रयास भी कवयित्री ने किया है।
विमला जी ग्रामीण अंचल के निश्छल, निर्मल व स्नेहिल वातावरण का अंकन भी बडी मधुरता से किया है। कोमल, सरल, निश्छल बालमन की अठखेलियों का वर्णन करते हुए वे स्वयं बाल हृदय के आनन्द सरोवर में डूबती नजर आती हैं। लेखिका ने इस बाल संग्रह की रचना करते समय स्वयं को बचपन की सरस स्मृतियों के साथ पूर्णतः एकाकार कर लिया है, यही कारण है कि खेल-खेल में वर्णनमाला ज्ञान, भोजन व स्वच्छता की आदतें, पर्व व त्यौहार, जल संरक्षण, कम्प्यूटर परिचय तथा राष्ट्रप्रेम का संदेश देने में सफल रही है।
भाषा शिल्प की दृष्टि से भी यह बाल कविता संग्रह अपनी भावात्मकता, सहजता और सरलता के साथ पठनीय बन पडा है। ?
बच्चों का महके बचपन
आज के भौतिकतावादी युग में जहाँ विज्ञान, तकनीक तथा संचार के क्षेत्र में मनुष्य ने सर्वथा नवीन आयाम स्थापित किये हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव से वह नैतिक पतन के गर्त में समाता जा रहा है। ऐसी स्थिति में साहित्य ही समाज का मार्गदर्शक बनकर सद्मार्ग सिखा सकता है। वर्तमान में अनेक साहित्यकार इस पुनीत कार्य में रत हैं। हाडौती के चर्चित बाल साहित्यकार सुरेश चन्द ‘सर्वहारा’ का सद्यप्रकाशित बाल कविता संग्रह ‘बच्चों का महके बचपन’ इस दृष्टि से उल्लेखनीय है।
इस बालकविता संग्रह में कुल तीस कविताएँ संकलित हैं। ये कविताएँ बाल मनोविनोद के साथ-साथ प्रेरणास्पद भी हैं, जिनमें विषय वैविध्य स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। इन कविताओं के माध्यम से कवि ने बालकों को राष्ट्रपे*म, पर्यावरण संरक्षण, बालिका शिक्षा व सम्मान का पाठ पढाया है तो दूसरी ओर बालकों को प्रकृति से जोडते हुए प्रकृति के विविध उपादानों जल, फल, फूल, वृक्ष, नदी, वर्षा, गर्मी व सर्दी ऋतु आदि का सहजता व सरसता के साथ वर्णन करते हुए ज्ञानार्जन करवाने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।
इस संग्रह की प्रथम कविता ‘देश वन्दना’ में कवि ने भारत की भोगौलिक स्थिति का चित्रण करते हए समृद्ध ऐतिहासिक व सांस्कृतिक परम्परओं का भी ज्ञान करवाया है। प्रकृति से सम्बद्ध सभी कविताओं में बालकों को कोई न कोई संदेश अवश्य दिया है, मुख्य रूप से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने एवं जल संरक्षण की बात अनेक स्थानों पर माधुर्यपूर्ण शैली में व्यक्त की है जो आज की ज्वलंत समस्या है। उदाहरण स्वरूप-
१. स्वस्थ सुखी यदि रहना हमको नहीं उजाडें हम जंगल पेड उगाएँ और बचाएँ तब होगा सबका मंगल।।
(कविता-पेड पृष्ठ संख्या-४८)
२. हो भू के जल का संरक्षण और वनों का वर्धन, रहते समय करें हम सब मिल, जल का उचित प्रबंधन।
(कविता-जल, पृष्ठ संख्या-५०)
कवि ने बालकों में सेवा भाव, त्याग, परोपकार, मधुर वाणी, गुरु व माता-पिता,वृद्धों के सम्मान की भावना जागृत करने का भी सराहनीय प्रयास किया है।
शिल्प की दृष्टि से सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ का यह संग्रह सफल कहा जा सकता है, कवि ने बडे गम्भीरतापूर्ण चिन्तन के पश्चात् सार्थक शब्द रूपी सुन्दर मोती अपनी बाल कविता रूपी माला में पिरोए हैं, कहीं भी शब्द क्रम की असम्बद्धता दिखायी नहीं देती है। सरल व मधुर शब्दों के साथ लयात्मकता पठनीय है।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि यह बाल कविता संग्रह बाल मनोरजंन व ज्ञानवर्धन की दृष्टि से अपनी कोमलता व लालित्य के साथ सभी पाठकों के लिए उपयोगी है। ?
हम भारत के बालक
हाडौती अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार रामगोपाल ‘राही’ के बाल कविता संग्रह में कुल ५२ बाल कविताएँ संकलित हैं। इस संग्रह में साहित्यकार ने बाल मनोररूप प्रेरणास्पद व मनोरंजक विषयों को समाहित करते हुए आज के साइबर क्रांति के युग में उपभोक्तावादी भौतिक चकाचौंध की संस्कृति से प्रभावित हो निरंतर मोबाइल, टेलीविजन, और इंटरनेट में व्यस्त बालकों को भारतीय संस्कृति व नैतिक मूल्यों से संस्कारित करने का प्रयास किया है। समीक्ष्य कृति में विषय वैविध्य स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। रचनाकार ने जहाँ एक ओर प्रकृति के विविध उपादानों पृथ्वी, जल, वायु, फल, फूल, वृक्ष, तारे सर्दी व गर्मी की ऋतु तथा पर्यावरण संरक्षण को वर्ण्य विषय बनाया, वहीं भारतीय इतिहास के महापुरुषों राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, लाल बहादुर शास्त्री, नेहरु के माध्यम से देशप्रेम, राष्ट्रीयता एकात व चेतना की दृष्टि से भारत के प्रमुख पर्व और त्यौहार दीपावली, दशहरा तथा राष्ट्रीय पर्व छब्बीस जनवरी, पन्द्रह अगस्त, कविता द्वारा बालकों के लिये इन पर्वों का आह्वान किया है। उदाहरण स्वरूप-
‘‘अजर-अमर भारत वो शक्ति, समझें समझा देगें।
दुनिया क्या हम आसमान भी मुठ्ठी में कर लेगें।।
(कविता-हम भारत के बालक-पृष्ठ संख्या-२२)
कवि राही ने तकनीकी विकास के फलस्वरूप आये सामाजिक परिर्वतनों को देखते हुए अनेक समसामयिक विषयों को अपनी कविता में स्थान दिया है सर्वाधिक बल ‘पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए ‘अभयारण्य’ अतिवृष्टि, ‘पर्यावरण’ ‘आओ पेड लगाएँ’ ‘तुलसी’ ‘पीपल’ आदि कविताओं की रचना की है- उदाहरण स्वरूप निम्न पंक्तियाँ-
हो संकल्पि करें इरादा फिर ना होगी कोई बाधा।
अधिक प्रदूषण बढ ना पाए, आओ, आओ पेड लगाएँ।
(कविता-आओ, आओ पेड लगाएँ पृष्ठ-८१)
इसी प्रकार देश में व्याप्त राजनैतिक विकृतियों को दृष्टिपात करते हुए ‘कौमी बालकों से साम्प्रदायिक सद्भाव अपनाकर देश की रक्षा करने का आह्वान किया है। ‘विज्ञान की बातें’ ‘उडने वाली कार’ ‘मेट्रोरेल’ कविताएँ देश के निरन्तर विकास के पथ पर अग्रसर होने की ओर संकेत करती हैं।
कुछ कविताएँ विशुद्ध मनोरंजन और बालविनोद करने वाली है जैसे ‘चन्दा मामा’ ‘खिसियानी बिल्ली’ उल्टे-बाँस बरेली के’ इत्यादि।
कलात्मक दृष्टि से इस कविता संग्रह की भाषा में सहजता और सरसता है, कुछ स्थलों पर भावों का क्रम व भाषा की लय टूटती नजर आती है। अंततः यह कहा जा सकता है कि ‘हम भारत के बालक’ कविता संग्रह अपने शीर्षक के अनुरूप भारतीय बालकों को नैतिकता का पाठ पढाने वाली कृति है जहाँ रचनाकार ने छोटे-छोटे पदों के माध्यम से सत्य, अहिंसा, त्याग, सम्मान, प्रकृति प्रेम व कर्तव्यनिष्ठा की गहरी सीख बालकों को देने का सफल प्रयास किया है। ?
म.न. ५५४, केशव कुंज, पोस्ट ऑफिस वाला मकान
नगर निगम-कॉलोनी, छावनी-कोटा-३२४००७
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