चार कविताएँ

रमेश चन्द्र पंत


जेब्रा
है घोडे की
जाति जेब्रा,
मोहक धारीदार जेब्रा।
अफ्रीका में
पाया जाता,
और नहीं यह कहीं जेब्रा।
श्वेत देह पर
काली धारी,
कुछ ऐसा ही बना जेब्रा।
होते हैं सब
अलग-अलग पर,
दिखते जैसे एक जेब्रा।
अगर कभी
चिडियाघर जाना,
वहाँ देखना ढूँढ जेब्रा। ?
बिजूका
बडे काम का
बना बिजूका,
खेतों में है खडा बिजूका।
रखवाली
करता फसलों की,
हाड-मांस के बिना बिजूका।
डर जाते
पशु एवं पक्षी,
कुछ ऐसा ही बना बिजूका।
लगता जैसे
खडा हो कोई,
लेकिन पुतला एक बिजूका।
लोक-संस्कृति
का परिचायक,
है किसान का मित्र बिजूका। ?
विद्युत मछली
अद्भुत सच में
विद्युत मछली,
है जलचारी विद्युत मछली।
विद्युतं रे,
और ‘ईल’ नाम से,
जानी जाती विद्युत मछली।
पाँच-सौ-पाँच
वोल्ट तक झटका,
दे सकती है विद्युत मछली।
इसीलिए सब
दूर ही रहते,
पास देखकर विद्युत मछली।
है बचाव का
साधन, अपनी
रक्षा करती विद्युत मछली। ?
केले
ऊर्जा के
भण्डार हैं केले,
खूब बनाते स्वास्थ्य हैं केले।
अगर दूध के
सँग हम खा लें,
तो हैं पूर्ण आहार ये केले।
हष्ट-पुष्ट यदि
होना चाहें
खाएँ सुबह-शाम ये केले।
देते सबल
बना निर्बल को,
प्रकृति की सौगात ये केले।
खूब लगाएँ
पेड घरों में,
अपने आस-पास ये केले । ?
‘उत्कर्ष’, विद्यापुर द्वाराहट, अल्मोडा-२६३६५३ (उत्तराखण्ड)

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