कविता रंगीला राजस्थान

गौरीशंकर वैश्य ‘विनम्र’


शौर्य-पराक्रम से अभिसिंचित जौहर भूमि महान् है।
छैलछबीला रंगरंगीला प्यारा राजस्थान है।
जंगल, मत्स्य, मेवात, माण्डव, शिवि, अर्बुद, हाडौती नाम।
पौराणिक इतिहास समेटे, शेखावटी बना सुरधाम,
कभी प्रवाहित रही निर्मला, सरस्वती की रसधारा
चम्बल-बनास की लहरें अब, खोजती अतीत गौरव प्यारा
अगणित अमर क्रान्तिवीरों का चिरजीवी बलिदान है।
जयमल, फत्ता, गोरा-बादल, राणा कुम्भा, हठी हमीर,
राणा प्रताप, राणा सांगा, चूडावत अमर सिंह रणवीर,
कान्ह सिंह चौहान, पद्मिनी, हाडा रानी, भामाशाह,
पन्ना धाय देशभक्तों का आभारी है कालप्रवाह,
मामृभूमि के हित सपूत ने किया समर्पित प्राण है।
उत्तर में पंजाब-हरियाणा, दक्षिण में शोभित गुजरात,
पाकिस्तान लगा पश्चिम से, करता रहता है उत्पात,
मध्य प्रदेश पूर्वोत्तर में साथ दे रहा है प्रतिपल,
अरावली की पर्वतमाला फैलाए सुषमा-आँचन,
बनी राजधानी जयपुर, जो शिल्प-कला की खान है।
रंग-बिरंगे परिधानों में महिलाओं की छवि भाती।
अंगिया, ओढनी, बडा घांघरा, चूंदडी लहरिया लहराती,
पहने पुरुष अंगरखा धोती, बहुरंगी फैटा-पगडी,
कुर्ता सदरी, कोट संग है, चादर भी डाली तगडी,
सुगठित स्वस्थ शरीर सभी का लम्बा कद छविमान है।
मेले, पर्व, स्वांग, गवरी का पूरे वर्ष खिले मधुमास,
तीज, कथा, गणगौर मनाए जाते हैं मिलकर सोल्लास,
दो भाषाएँ अति समृद्ध है, हिन्दी और राजस्थानी,
कण्ठ-कण्ठ में गूँज रही है मीराबाई की वाणी,
संत, वीर, कवि, कलाकार से पुष्पित मरु-उद्यान है।
किले, महल, आकर्षक झीलें, आमंत्रित कर रही विशेष
‘केसरिया बालम आओ नी शीघ्र पधारो म्हारे देश,
‘ऊँट’ राज्यपशु से सम्मानित,रेगिस्तान जहाज है।
राजकीय पक्षी गोडावण, अतिसंकट में आज है।
घूमर चंग, डांग नर्तन है, रसिया होलर तान है। ?
* राजस्थान का राज्य गीत है ।
११७, आदिल नगर, लखनऊ -२२६०२२
मो. ९९५६०८७५८५
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