सात लघुकथाएँ

किशनलाल शर्मा


तीन कंधे
‘‘ पापा, आप कंधा देने हर जगह क्यों पहुँच जाते हैं?’’
अपनी या आस-पास की कॉलोनी में किसी की मृत्यु हो जाने पर धीरज अन्तिम क्रिया में शामिल होने पहुँच जाता। वह शवयात्रा के समय लाश को कंधा देने में भी सबसे आगे रहता। उसके बेटे को यह सब बिलकुल पसन्द नहीं था। एक दिन किसी की मौत होने पर धीरज जाने लगा, तो बेटे ने अपनी नाराजगी जाहिर कर ही दी थी।
‘‘बेटा इस महानगर में किसी के पास समय नहीं है। अन्तिम क्रिया में शामिल होने के लिये तो बिलकल ही नहीं। अर्थी उठाने के लिये चार कंधों की जरुरत होती है और तुम मेरे इकलौते बेटे हो’’, ‘‘मैं चाहता हूँ, जब भी मैं दुनियाँ से प्रस्थान करूँ, तो मेरी अर्थी उठाने के लिये तुम्हें तीन कंधे और मिल जायें। अगर मैं किसी को कंधा देने नहीं जाऊँगा, तो कंधा देने कौन आयेगा? और तुम्हारा अकेला कंधा, तो मेरी अर्थी उठा नहीं पायेगा। ?
तारीख
‘‘अगली बार मुझे एक भी कुत्ता स्टेशन पर न*ार आया तो....?’’
मंडल रेल प्रबन्धक थापर आगरा फोर्ट स्टेशन के निरीक्षण के लिये आये थे। निरीक्षण के दौरान प्लेटफार्म पर आवारा कुत्तों को देखते ही उनका माथा ठनक गया। उन्होंने हैल्थ इंस्पेक्टर वर्मा को सबके सामने बुरी तरह लताडा था।
वर्मा के सेवा निवृत होने में एक साल से भी कम समय रह गया था। वर्मा जानता था, थापर अक्खड स्वभाव के सख्त अफसर थे। अगर उन्होंने कोई दण्ड दे दिया, तो उसे सेवानिवृत्ति के समय भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिये वर्मा ने अगले ही दिन गुलाब जामुनों में जहर मिलाकर स्टेशन पर जगह-जगह रखवा दिये। जिसे खाकर कुत्ते मर गये।
कुत्तों के मरने का समाचार एक स्थानीय समाचार अखबार में छप गया। जिसे पढकर एक पे*मी ने कोर्ट में केस कर दिया। थापर ने कुत्तों को मारने के मौखिक आदेश दिये थे।
थापर और वर्मा दोनों ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। मौखिक आदेश देने वाले थापर सेवानिवृत्ति के बाद आराम की जिन्दगी काट रहे थे। उनके मौखिक आदेश का पालन करने वाले वर्मा को हर तारीख पर कोर्ट के चक्कर लगाने पड रहे हैं। ?
तन्त्र
रिफाइनरी में ऑडिट के लिये आये लेखा निरीक्षक ने एक करोड का डेबिट निकाल दिया। ऑडिट रिपोर्ट मंडल कार्यालय में पहुँचते ही हडकम्प मच गया। रिफाइनरी के गुड्स सुपरवाइजर को शिथिलता-लापरवाही से कार्य करने के और रेलवे राजस्व को हानि पहुँचाने का दोषी मानते हुये, उसका ट्रान्सफर कर दिया गया।
एक करोड का डेबिट निकालने पर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करने के लिये ऑडीटर को जी.एम.अवार्ड दिया गया।
रिफाइनरी में नये आये गुड्स सुपरवाइजर ने एक करोड के डेबिट के रिकार्ड को खंगाला, तो पता चला रेलवे राजस्व को कोई हानि नहीं हुई। टेक्नीकल मिस्टेक और कुछ सरक्यूलरों के रिफाइनरी में न पहुँचने की वजह से ऐसा हुआ है। गुड्स सुपरवाइजर ने जरूरी दस्तावेज और सरक्यूलर जुटाकर एक करोड का क्रेडिट ले लिया। इस कार्य के लिये गुड्स सुपरवाईजर को जी.एम.अवार्ड दिया गया।
वास्तव में एक करोड रुपया न गया, न आया। सिर्फ काग*ाों में डेबिट-क्रेडिट करके दो लोग जी.एम.अवार्ड पा गये। ?
गठजोड
थानेदार की विदाई पार्टी का आयोजन थाने में किया गया था। उसमें शहर के प्रतिष्ठित गणमान्य व अन्य लोगों को भी आमन्त्रित किया गया था।
शहर के लोगों का आरोप था कि पुलिस की गुंडे माफियाओं से मिली भगत है। जिसकी वहज से शहर में अपराध रूक नहीं है। अपराधी अपराध करने के बाद भी पुलिस के संरक्षण की वजह से सरेआम खुले घूमते हैं। कुछ नेता भी पुलिस पर उंगली उठा चुके हैं। लेकिन पुलिस के आला अफसर इस बात को मानने को तैयार नहीं थे।
लेकिन पार्टी का वीडियों वायरल होते ही पुलिस महकमें में हडकम्प मच गया। जिन अपराधियों को पुलिस वर्षों से कोर्ट में फरार बता रही थी। वे थानेदार की पार्टी में नाच गा रहे थे। ?
रंग
‘‘मुझे मेरे बेटे के लिय गोरी चिट्टी लडकी चाहिए।’’
दीपक और रेखा के एक बेटा धीरज और एक बेटी रेनू थी। धीरज की नौकरी लगते ही उसके लिये रिश्ते आने लगे। धीरज का रंग साँवला था। रेखा चाहती थी, उसके पोते-पोती गौरे पैदा हो। इसलिये वह गोरी लडकी को अपनी पुत्रवधु बनाना चाहती थी।
हरीश अपनी बेटी के रिश्ते के लिये आया था। वह अपनी बेटी निकिता का फोटो और बायोडाटा दे गया था। निकिता उच्च शिक्षित होने के साथ सब कामों सिलाई, संगीत, पेन्टिंग आदि में निपुण थी। उसके नैन नक्श भी अच्छे थे और फोटो में सुन्दर भी लग रही थी। लेकिन उसका रंग साँवला था। रंग के बारे में पढकर ही रेखा बोली थी।
‘‘केवल रंग ही नहीं, लडकी गुण योग्यता भी देखनी चाहिए।’’ पत्नी की बात सुनकर दीपक बोला, ‘‘यह मत भूलो तुम्हें अपनी बेटी की शादी करनी है और उसका रंग भी साँवला है।’’
पति की बात सुनकर रेखा सोचने लगी। अगर दूसरी औरतें भी उसी की तरह सोच रहीं होंगी, तो उसकी बेटी की शादी कैसे होगी? और यदि सभी गोरी लडकियाँ लाते रहेंगे, तो साँवली लडकियाँ तो अनब्याही रह जायेंगी।?
इशारा
‘‘मेरी जान जो न जाने कहाँ से काली कलूटी पैदा हो गई, जिससे शादी करने को कोई तैयार नहीं
हो रहा।’’
आज फिर लतिका को देखने आया लडका उसके रंग को देखकर रिश्ते से इंकार कर गया, तो रीमा बेटी पर भडक गई।
‘‘माँ, तू गोरी है, पापा भी गोरे थे। फिर भी मैं काली क्यों पैदा हुई? इसकी वजह तू अच्छी तरह
जानती है।’’
लतिका की बात सुनकर रीमा को ऐसा लगा, मानो बेटी ने बातों ही बातों में उसके अवैध सम्बन्धों की तरफ इशारा कर दिया था। ?
भरोसा
निकाह के छह महीने बाद ही सायरा मायके लौट आई। उसके शौहर नसीम को दूसरी औरत से प्यार हो गया। उससे निकाह करने के लिये नसीम ने तीन बार तलाक बोलकर सायरा को घर से निकाल दिया।
बेटी का तलाक होने से रहीस दुखी था, पर कर कुछ नहीं सकता था। उसके धर्म में ऐसा करना जायज था। मर्द अपनी बीवी से तीन बार तलाक बोल कर जब चाहे रिश्ता तोड सकता था।
रहीस को बेटी के भविष्य की चिन्ता सताने लगी। सायरा जवान थी, अभी उसके सामने पूरी जिन्दगी पडी थी। लम्बी जिन्दगी गुजारने के लिए मर्द का सहारा जरूरी था। उसने बेटी के लिये शौहर की तलाश शुरू की, तो सायरा बोली, ‘‘दूसरा निकाह करने से मुझे ऐतराज नहीं है, लेकिन इस बार मैं किसी हिन्दू मर्द से ही निकाह करूँगी।’’
‘‘यह तू क्या कह रही है?’’ बेटी की बात सुनकर रहीस चौंकते हुये आश्चर्य से बोला, ‘‘क्या हमारे धर्म में मर्दों का आकाल पड गया है, जो तू एक हिन्दू मर्द को अपना हमसफर बनाना चाहती है।’’
‘‘हमारे धर्म म मर्दों का अकाल तो नहीं पडा है, लेकिन हमारे धर्म में मर्दों को तलाक का अख्तियार दे रखा है। मर्द जब चाहे तीन तलाक बोलकर औरत को दर-दर की ठोकर खाने को घर से निकाल सकता है’’, अब्बा की बात सुनकर सायरा बोली, ‘‘हिन्दू मर्द को शौहर बनाऊँगी, तो वह भले ही मारे पीटे, तंग करे, लेकिन पूरी जिन्दगी अपनी बनाकर तो रखेगा।’’
बेटी की बात का रहीस के पास कोई जवाब
नहीं था। ?
१०३, रामस्वरूप कॉलोनी, शाहगंज, आगरा-२८२०१०
मो. ०९४५८७४०१९६
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