साहित्यिक परिदृश्य



तुलसी जयंती, प्रेमचंद जयंती एवं काव्य-गोष्ठी
‘शब्ददीप’ द्वारा तुलसी जयंती, प्रेमचंद जयंती एवं काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘शब्ददीप’ के अध्यक्ष डॉ. पंकज साहा ने कहा कि आज के समय में तुलसीदास एवं प्रेमचंद ने धन के खतरे को बहुत पहले ही समझकर हम सावधान किया था। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए ही ‘कर्बला’ नाटक की रचना की। मुख्य अतिथि श्री राजकुमार मंगला, मंडल रेल्वे प्रबंधक, द.पू.रेलवे, खडगपुर ने भी तुलसी एवं प्रेमचंद के साहित्य की प्रांसगिकता एवं उसके पठन की आवश्यकता पर बल दिया। कोलकाता से आये डॉ. ऋषिकेश राय ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी उपन्यास को यथार्थ की भूमि पर लाकर खडा किया। उनकी कहानियाँ भारतीय समाज की विसंगतियों का दस्तावेज हैं। आई.आई.टी. खडगपुर के राजभाषा अधिकारी डॉ. राजीव कुमार रावत ने तुलसी-साहित्य पर विचार करते हुए कहा कि तुलसीदास का साहित्य जितना आज प्रांसगिक है, उतना उनके समय में भी नहीं था। प्रो. रणजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि पे*मचंद की कहानियों में राष्ट्रीयता की चेतना व्यक्त हुई है। इनके अलावा श्री ब्रजकिशोर सिंह, सुश्री पिंकी कुमारी बाघमार, सुश्री सलोनी कुमारी शर्मा ने भी तुलसी एवं पे*मचंद की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किये।
दूसरे सत्र में काव्य-गोष्ठी का आयोजन हुआ। कोलकाता के सर्वश्री योगेन्द्र शुक्ल ‘सुमन’, गिरिधर राय, राज्यवर्द्धन, नंदलाल रोशन, अहमद मिराज, चक्रधरपुर के श्री आशुतोष सिंह एवं कुछ स्थानीय कवियों सर्वश्री अभिनंदन प्रसाद गुप्ता, जयराम शर्मा, वेदप्रकाश मिश्र आदि ने गीत, गजल एवं कविता-पाठ द्वारा श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजीव कुमार रावत ने किया एवं प्रो. संजय कुमार पासवान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
द्य पंकज साहा, खडगपुर (प. बं.)
संवेदना, सौंदर्य और भाशा का संयोजन है साहित्य, साहित्य को विरोध का हथियार न बनने दें।
अजमेर। संवेदना का विस्तार संस्कार, सौंदर्य बोध का और भाषा का परिष्कार इन तीनों मानदण्डों में खरा उतरने वाला लेखन ही साहित्य की
प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है। तथ्य और कल्पों में उलझना वैज्ञानिकों का काम है, साहित्य का आधार संवेदना है। वर्तमान समय में हिन्दी साहित्य के साथ अनेक संकट प्रत्यक्ष हैं। वैश्विकता की आड में कई विघटनकारी ईकाईयाँ एक स्वतंत्र अस्मिता के विरोध में खडी दिखाई पडती है। विमर्श के मायने बदलते जा रहे हैं। मानवाधिकार के विभ्रम के चलते स्त्री विमर्श का अर्थ पुरुष विरोध और दलित विमर्श का अर्थ सामाजिक विरोध के रूप में माना जा रहा है। राजनीतिक विरोध के हथियार के रूप में प्रयुक्त होकर साहित्य अपनी अस्मिता को खो रहा है। रचनाकार को स्वपे*रणा से संवेदनशील रहकर अपनी उडान भरनी है, लेकिन उसे किसी अन्य प्रभाव में आन्दोलन का हथियार नहीं बनने देना चाहिए। ये विचार राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने शनिवार १६ सितम्बर २०१७ को स्वामी कॉम्पलेक्स में हुई विचार गोष्ठी में ‘हिन्दी साहित्य का वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए व्यक्त किये। नाट्यवृंद संस्था और अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के सहयोग से हिन्दी पखवाडे के तहत आयोजित इस साहित्यिक संगोष्ठी में उन्होंने अकादमी की विविध योजनाओं की जानकारी देते हुए सर्वसमावेशिकता के भाव के साथ राजस्थान के सभी साहित्यकारों को जोडने की बात
भी कही।
संयोजक और अकादमी सदस्य उमेश कुमार चौरसिया ने हिन्दी के मौलिक लेखन के स्थान पर विदेशी भाषाओं से अनूदित साहित्य को महत्व देने की मानसिकता को बदलने की बात कही। अध्यक्षीय उद्बाधन में पद्मश्री डॉ. चन्द्रप्रकाश देवल ने कहा कि साहित्य की दृष्टि संकुचित नहीं होती, इसलिए साहित्यकारों को परस्पर शत्रुता जैसे भाव से बचना चाहिए। आजादी के ७० वर्षों में प्रत्येक सत्ता द्वारा कला और साहित्य को हाशिये पर रखे जाने की प्रवृति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समस्त भारतीय भाषाओं में एकमात्र हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसने बहुत कम समय में विश्वभर में लोकप्रियता और प्रतिष्ठा हासिल की है। सारस्वत अतिथि कथाकार-चित्रकार राम जैसवाल ने कहा कि भारत में आए मुगल और अंगेजी
आक्रांताओं की दासता और संत्रास व असुरक्षा के भाव ने भारतीय मौलिक साहित्य को क्षति पहुँचाई है। इसीलिए पश्चिम के साहित्य का श्रेष्ठ कहने की परिपाटी चल पडी है। पढने की जिज्ञासा और लेखन में संवेदना कम हो रही है इसे बचाए रखना होगा। वेदविज्ञ व साहित्यविद् डॉ. बद्रीप्रसाद पंचोली ने नयी पीढी को जोडते हुए कविता में कवित्व और कहानी में कथातत्व को बचाए रखकर पाठकों के मन को छू लेने वाले साहित्य रचने पर बल दिया। प्रारंभ में सह संयोजक डॉ. पूनम पाण्डे, डॉ. शमा खान, श्याम माथुर, ड. चेतना उपाध्याय और संदीप पाण्डे ने अतिथियों का स्वागत किया। गोष्ठी में डॉ. नवलकिशोर भाभडा, बख्शीश सिंह, डॉ. शकुन्तला तंवर, देवदत्त शर्मा, विपिन जैन, डॉ. घ्वनि मिश्रा, रामविलास जांगिड इत्यादि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी में नगर के अनेक प्रबुद्धजन और साहित्यकार उपस्थित रहे।
द्य उमेश कुमार चौरसिया, अजमेर
देशवासी राष्ट्रभाषा हिन्दी पर करें गर्व
अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस के मौके पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विभाग के डॉक्टर राजेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा का राष्ट्रीयता से गहरा संबंध होता है। मध्यकाल में तुलसी ने लोक मंगल का काव्य लिखा जो जन-जन के लिए लाभकारी बना। उन्होंने कहा कि आज प्रिंट मिडिया भाषिक संरचना को विकृत कर रहा है। भाषा में सरलता व सहजता का भाव होना जरूरी है। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. राधेश्याम अग्रवाल ने कहा कि राजभाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की शर्त पूरी नहीं होने के कारण आज भी यह भाषा अपना वास्तविक दर्जा प्राप्त नहीं कर पाई है। भाषा संस्कार सिखाती है और संस्कार से ही संस्कृति का निर्माण होता है। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भाषाविद् नेमीचंद तम्बोली ने कहा कि भाषा सीखने के लिए आवश्यकता जरूरी है। किसी भी भाषा का वृहद प्रचलन आवश्यकता के आधार पर ही हो सकता है। इसलिए अधिकांश काम या पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा को स्थान प्रदान किया जाना चाहिए, जिससे यह लोगों के लिए आवश्यकता बन सके। डॉक्टर सतीश अग्रवाल ने कहा कि मातृभाषा का अपना महत्व होता है। मातृभाषा में ही वास्तविक अभिव्यक्ति कर सकता है। इस दौरान शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित बीएड महाविद्यालय के द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत नीतिन शर्मा व कुलदीप
मीणा ने भी कविता की प्रस्तुति दी। इस मौके पर
अभिनव प्रकाशन द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। द्य
मधुमती के दीनदयाल विशेषांक का लोकार्पण
राजस्थान साहित्य अकादमी की मासिक पत्रिका मधुमती के दीनदयाल विशेषांक का लोकार्पण सेक्टर ४ स्थित साहित्य अकादमी के नवनिर्मित एकात्म सभागार में समारोह पूर्वक हुआ।पेसिफिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीपी शर्मा ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर पर कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन आज के युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है, साथ ही मौजूदा समस्याओं का सटीक समाधान प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि आज पश्चिम एशिया में आतंकवाद एक बडी चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में हम सब का दायित्व है कि हम देश के लिए चिंतन करें, एकता की बात करें। उन्होंने कहा कि पंडित उपाध्याय का विचार परंपराओं की युगानुकूल व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें परिवार समाज देश और विश्व को एक सुत्र में बाँधने की बात कही
गई है।
मुख्य अतिथि प्रमुख चिंतक सिद्ध श्रीधर पराडकर ने कहा कि पंडित उपाध्याय का विचार व्यक्ति से पहले राष्ट्र के संवर्धन का था इसीलिए उन्होंने सामाजिक बदलाव की क्रांति का सूत्रपात किया। एक पत्रकार के रूप में पांचजन्य के संपादक रहते हुए उन्होंने अपने संपादकीय टिप्पणी में भी लिखा कि राष्ट्र की दिशा क्या हो और हम सब मिलकर कैसे राष्ट्र को सुध*ढ बनाएं। उन्होंने उपाध्याय के विभिन्न संस्मरणों के जरिए उनके जीवन की सादगी को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाय उपाध्याय एक विशिष्ट समाज विज्ञानी होने के साथ ही एक कुशल अर्थशास्त्री भी थे, जिन्होंने पूंजीवाद और साम्यवाद के इतर एकात्म मानववाद की व्याख्या को प्रतिस्थापित किया। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी की इच्छा थी कि योजनाएँ बनाते समय देश के हर उस अंतिम व्यक्ति का ध्यान रखा जाए जो आखिरी कतार में हैं। विकास की योजनाएँ कुछ लोगों की आकांक्षा पूरी करनी वाली ना बन जाए। प्रो. शर्मा ने पंडित उपाध्याय के उस विचार को प्रमुखता से कहा जिसमें उन्होंने कहा था कि राजनितिक प्रजातंत्र तब तक अधूरा रहेगा जब तक कि आर्थिक प्रजातंत्र की स्थापना ना हो जाए। लोकार्पण पर राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष इंदुशेखर तत्पुरुष ने दीनदयाल उपाध्याय विशेषांक की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि दीनदयाल जी न केवल एक संगठक अपितु उच्च कोटि के विचारक, पत्रकार, साहित्यकार, अर्थचिन्तक और स्तंभ लेखक थे। इस अवसर पर सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष हरीश राजानी एवं विपिन चंद्र का अभिनंदन किया गया। शुरुआत में अतिथियों का स्वागत साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. विनीत गोधल ने किया जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन अकादमी के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राव ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध गायिका मनस्वी व्यास की गणेश वंदना से हुआ। कार्यक्रम में मनस्वी के ही गाये हुए ‘एकात्म मानवगीत’ को सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन नंदवाना ने किया।
द्य डॉ. कुंजन आचार्य, उदयपुर
राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह
३ सितम्बर २०१७ के दिन साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान महाराणा प्रताप संग्रहालय हल्दीघाटी खमनोर का एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन, संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह भव्यता, गरिमा, एवं हर्षोल्लास के साथ महाराणा प्रताप संग्रहालय के सभा भवन में सम्पन्न हुआ। समारोह का आगाज कुमारी मनस्वी व्यास के द्वारा सरस्वती वंदना तथा अतिथियों के सरस्वती पूजन तथा दीप प्रज्वलन महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण, एवं पुष्प वृष्टी से हुआ। ‘‘साहित्य समाज की दिशा तय करता है। आज नैतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना की जरूरत है। साहित्य वही है जो दिल और दिमाग पर असर डाले।’’ उक्त विचार समारोह के मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए जर्नादन राय नागर राजस्थान विश्व विद्यालय उदयपुर के कुलपति प्रो. डॉ. शिवसिंह सारंगदेवोत ने अपने अभिभाषण में व्यक्त किये। अध्यक्षीय उद्बोधन में राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने कि इस समारोह में विभिन्न धाराओं के कवियों, साहित्यकारों को बुलाया है। विभिन्न धाराओं को सम्मान करना एक सुखद अनुभूति है। यह एक ऐसी संस्था है जो साहित्यकारों, शिक्षाविदों, समाजसेंवियों, इतिहासकारों, की हौसला अफजाई करती है। साहित्यकारों में जिजीविषा पैदा करती है। मंचासीन अतिथियों का सम्मान संस्थान के पदाधिकारीयों
द्वारा तिलक, उपरना, पाग, प्रभु की छवि व प्रसाद से किया। समारोह में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ आदि राज्यों के अलावा राजस्थान के उदयपुर, भीलवाडा, चित्तौड, बांसवाडा, श्रीगंगानगर, जयपुर, जोधपुर, सीकर, कोटा, झालावाड, अलवर, बीकानेर, बूंदी आदि जिलों के प्रमुख साहित्यकारों ने बडी संख्या में भाग लिया।
अतिथियों का सम्मान संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन श्रीमाली ने किया, राष्ट्रीय महासचिव एम.डी. कनेरिया ने संस्थान की अब तक की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए सभी साहित्यकारों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का प्रथम सत्र उद्घाटन का रहा जिसमें ‘‘साहित्य में जीवन मूल्य’’ विषय पर राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय अजमेर के प्रो. जितेन्द्र कुमार सिंह, नाथद्वारा के हिन्दी के व्याख्याता भगवत सिंह, शोधार्थी आशीष कुमार मिश्र एवं गिरजेश कुमार ने अपने विचार प्रकट किए। सरस्वती वंदना के पश्चात डॉ. हिनू मिश्रा बरेली ने ‘‘पधारो म्हारे देश’’ सुमधुर गीत द्वारा अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर बारां के कवि जगदीश जलजला, चित्तोड के अब्दुल जब्बार, मुम्बई के राज बुन्देला तथा राजसमन्द के शेख अब्दुल हम्मीद ने गजल एवं काव्य पाठ कर समारोह को ऊँचाईयाँ प्रदान की। दिल्ली से आए विशिष्ठ अतिथि डॉ. कपिल देव प्रसाद मिश्र (अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य सेवा संस्थान, उच्च शिक्षा विभाग में संयुक्त सचिव) तथा विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा, जयपुर के साहित्यकार डॉ. प्रबोध कुमार गोविल, ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए गरिमामय कार्यक्रम के आयोजन हेतु संस्थान की भूरि भूरि प्रशंसा की। मंचासीन अतिथियों द्वारा सीताराम चौहान, डॉ. केशवदेव शर्मा, डॉ. लवलेशदत्ता, डॉ. लालजी सहाय श्रीवास्तव, डॉ. जगदीश चन्द्र शर्मा, डॉ. मालती शर्मा, माणक तुलसी राम गौड, के.पी. सक्सेना, श्री रघुराम सिंह कर्मयोगी, डॉ. प्रदीप कुमार दीप, डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा, डॉ. कुंजन आचार्य, डॉ. मंगत बादल, डॉ. नीरज दइया, देवली रमण शर्मा, डॉ. आशा मेहता, सलित शर्मा, चाँद शेरी, जयसिंह आशावत, श्रीमती दमयंती सोलंकी, रामेश्वर पांड्या, सत्यनारायण व्यास ‘मधुप’, सत्यनारायण सत्य, कुसुम अग्रवाल, सत्यदेव संवितेन्द्र, डॉ. नीरज मेहता, शशि ओझा, डॉ. रामस्वरूप राय राज बुन्देली, मनीष पालीवाल, कमल पुरोहित, संदीप मांडोत, वीरेन्द्र पालीवाल, विनोद पालीवाल, डॉ. ओम प्रकाश हरियाण, डॉ.रामप्रबल श्रीवास्तव, डॉ. भैरूलाल गर्ग, माधव नागदा, डॉ. हितु मिश्रा, मनस्वी व्यास, पंकज सनाढय, भगवत सिंह, जितेन्द्र सनाढय, विनोद तंवर, दयाशंकर पालीवाल, डॉ.भगवानलाल बंशीवाल, डॉ.धर्मचन्द्र मेहता, आदि का सम्मान किया गया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. कपिल प्रसाद मिश्र ने की। इस अवसर पर टीकमगढ, मध्यप्रदेश की तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा डॉ. मोहन श्रीमाली, एम.डी. कनेरिया, सूर्यप्रकाश दीक्षित व मनस्वी व्यास का साफा, मेडल, सम्मान शील्ड प्रदान कर भाव भरा सम्मान किया। डॉ. मलय पानेरी ने अपना आलेख वाचन किया। डॉ. जय प्रकाश ‘ज्योतिपुंज’ ने डॉ. तारा दीक्षित की पुस्तक ‘‘जनतंत्र के नायक जर्नादन’’, मुरैना के डॉ. रामप्रबल श्रीवास्तव की पुस्तक ‘‘आलौकिक अतीत क गौरव’’ का लोकार्पण किया गया। अब्दुल जब्बार ने-मीरा, महाराणा कुम्भा, और रक्त तलाई पर रचनाएँ प्रस्तुत की। डॉ. नीरज मेहता एवं डॉ.इन्दु शेखर तत्पुरुष ने सफल और सुन्दर आयोजन के लिए संस्थान को बधाई दी। कार्यक्रम का संचालन
डॉ. प्रमोद सनाढ्य, नीना शर्मा, एवं जितेन्द्र सनाढ्य ने किया। कार्यक्रम के अंत में एम.डी.कनेरिया द्वारा आत्मीय आभार प्रकट किया।
द्य माधव नागदा, नाथद्वारा
साहित्य समाचार
कोटा। साहित्य समिति-कोटा के तत्वाधान में मासिक काव्यगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के साभागार में रघुराज सिंह कर्मयोगी की ओर से प्रायोजित किया गया। अध्यक्षता विदूषी प्रमिला आर्य ने की। मुख्य अतिथि सुनेन्द्र सिंह गौड एवं विशिष्ट अतिथि भगवती प्रसाद गौतम थे। संचालन रघुराज सिंह कर्मयोगी ने किया।
कार्यक्रम में अतिथियों के अलावा निर्मल पाण्डे, जितेन्द्र निर्मोही, वीरेन्द्र सिंह विद्यार्थी, वेद प्रकाश परकाश, रामेश्वर शर्मा, साथी जाह्नवी, शिवराज श्रीवास्तव, के.आर. निर्मल, पुखराज झाला, सलीम अफरीदी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खब गुदगुदाया।
द्य रघुराज सिंह कर्मयोगी, कोटा
हिन्दी लाओ-देश बचाओ का आयोजन
१४ सितम्बर २०१७, ‘‘हिन्दी लाओ-देश बचाओ’’ के पावन उद्घोष के साथ विद्यालयी छात्रों, शिक्षकों व देश के विभिन्न प्रान्तों से पधारे साहित्यकार महानुभावों की सहभागिता से पद यात्रा निकाली गई। साहित्य मण्डल परिसर से प्रारम्भ यह पद यात्रा अलौकिक दृश्य उत्पन्न करती हुई नगर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई पुनः साहित्य मण्डल परिसर पहुँच कर पूर्ण हुई।
साहित्य मण्डल द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय हिन्दी लाओ देश बचाओ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पण्डित श्री मदन मोहन अविचल ने की। सत्र के मुख्य अतिथि मन्दिर मण्डल, नाथद्वारा के मुख्य निष्पादन अधिकारी श्री सत्यनारायण आचार्य रहे। श्री मोहन स्वरूप भाटिया, श्री अमर सिंह वधान, श्री रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’, डॉ. राहुल व डॉ. करतार सिंह योगी जी विशिष्ट अतिथि रहे।
इसी क्रम में विट्ठलजी पारीक द्वारा श्रीनाथजी की वन्दना प्रस्तुत की गयी। आगरा के श्री अमी आधार ‘निडर’, डॉ. रविन्द्र कुमार शर्मा, मथुरा से आये डॉ. अनिल गहलत, पांडिचेरी से आई श्रीमती स्वर्णज्योति, दिल्ली से आए श्री शान्ति कुमार स्याल, डॉ. दिलीप धींग चैन्नई, मथुरा से आये श्री संतोष कुमार सिंह, मेरठ से आए पद्मश्री
डॉ. रविन्द्र कुमार ने हिन्दी भाषा के विविध पक्षों पर पत्र वाचन किए।
कैलाश नाथ गुप्त, ओमप्रकाश पाण्डेय-सिलीगुडी, श्री सुर्यकांत नागर-इंदौर, श्री योगीराज योगी, रामेश्वर दयाल गोयल, श्रीमती जयमती नार्जारी कार्बी, श्री अमी आधार ‘निडर’, डॉ. हेम चंद्र वैद्य, डॉ. रविन्द्र कुमार वर्मा ‘रवि’, रवीन्द्र नाथ सिंह चौहान, श्री शान्ति कुमार स्याल, डॉ. दिलीप धींग, मोहन स्वरूप भाटिया, गोपेश चंद्र लोधा, अभिनन्दन पत्र सम्मानित किया गया।
सांयकालीन सत्र में श्री भूपेन्द्र भरतपुरी व अंजीव अंजुम द्वारा सम्पदित साझा गजल संग्रह ‘‘निर्झर’’ का विमोचन किया गया। इसके पश्चात कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता श्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने मुख्य अतिथि श्री विट्ठल पारीक रहे।
‘‘हिन्दी लाओ-देश बचाओ’’ समारोह २०१७ के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री रविन्द्र कुमार ने की। मुख्य अतिथि श्री राधे मोहन रॉय तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. एम.गोविन्दराजन, श्री वीरेन्द्र लोढा, श्रीमती जयमती नार्जारी, डॉ. के श्रीलता व डॉ. विजय कुमार वेदालंकार रहे।
उपनिषद सत्र के अन्तर्गत शिलांग की श्रीमती अनिता पण्डा, केरल से आई डॉ. के. श्रीलता, वर्धा से आए डॉ.हेम चन्द्र वैद्य, बेंगलुरू से आए डॉ. श्रीनिवास के. पचारिया, पुणे से आए डॉ. दिनेश चंद्रा, भागलपुर से आई डॉ. आशा तिवारी ओझा, कानपुर से आए श्री हरीलाल मिलन, इंदौर से आए श्री सूर्यकांत जी नागर, इस अवसर पर श्री हरिलाल मिलन की पुस्तक ‘‘नमन भारत भारती’’ व डॉ. चंद्र पाल मिश्र गगन के काव्य संग्रह ‘‘हम ढलानों पर खडे हैं’’ का भी लोकार्पण किया गया। पद्मश्री डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. एम. गोविन्द राजन, श्री राधे मोहन राय, डॉ. अनिता पण्डा, डॉ. के. लता विष्णु, श्रीमती सुमिताधर बसु ठाकुर, श्री कन्हैयालाल शर्मा, डॉ. उमेश महादोषी, डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी, डॉ. उमाशंकर साहिल, डॉ. राजश्री रावत, डॉ. सुरचना त्रिवेदी, डॉ. अनिल कुमार सिंह गहलोत, डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि’, डॉ. कुमकुम गुप्ता, श्री राम किशन राठी, डॉ. अलका अग्रवाल, श्री विजय चित्तोरी, डॉ. आशा तिवरी ओझा, श्री एस. भाग्यम शर्मा, श्री रामबाबू नीरव, नयना डेलीवाल, डॉ. करुणा पाण्डे, श्रीमती नीरजा द्विवेदी, श्री महेश चंद्र द्विवेदी, डॉ. विक्रम सिंह, श्री धुरेन्द्र स्वरूप बिसरिया ‘प्रभंजन’, श्री आलोक चतुर्वेदी, डॉ. शान्ति चौधरी, श्री ओम प्रकाश प्रजापति, श्री राजेश वर्मा, श्री विजय बत्रा, को सम्मानित किया गया।
रात्रि में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ जिसमें देश के विभिन्न प्रान्तों से आये कवियों ने विभिन्न विधाओं में काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. अमर सिंह वधान (चंडीगढ) ने की। मुख्य अतिथि श्री विट्ठल पारीक-जयपुर तथा विशिष्ठ अतिथि श्री रामेश्वर शर्मा ‘‘रामू भैया’’-कोटा थे। संचालन डॉ. अमी आधार ‘‘निडर’’- आगरा ने किया।
‘‘हिन्दी लाओ-देश बचाओ’’ समारोह २०१७ के तीसरे और अन्तिम दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. अमर सिंह वधान ने की। मुख्य अतिथि श्री रामेश्वर शर्मा ‘‘रामू भैया’’ तथा विशिष्ट अथिति श्री शान्ति कुमार स्याल, श्री दिनेश सनाढ्य, डॉ. पे*मपाल शर्मा, डॉ. विजय कुमार वेदालंकार, डॉ. राहुल रहे।
विभिन्न सत्रों में श्रीमती स्वर्ण ज्योति, श्रीनिवास के पंचारिया, श्री विशाल के.सी., डॉ. मधु प्रधान, श्री राजेश प्रकाश शर्मा ‘आग*ेय’, डॉ. धीरेन्द्र प्रताप, विनोदिनी रस्तोगी, डॉ. उमा शंकर शुक्ल ‘शीतिकण्ठ’, श्री अवधेश शुक्ल, डॉ. ओम प्रकाश हयारण ‘दर्द’, श्री राजेन्द्र प्रसाद ओस्तवाल, श्री दिनेश चंद्रा, को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्री श्याम प्रकाश देवपुरा तथा वरिष्ठ साहित्यकार श्री विट्ठल पारिक- जयपुर ने किया।द्य
हिंदी पखवाडे का आयोजन
भारतीय रिजर्व बैंक, जयपुर में ३१ अगस्त २०१७ से १४ सितंबर २०१७ तक हिन्दी पखवाडे का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। सर्वप्रथम हिंदी में अधिकतम कार्य
करने के लिए क्षेत्रीय निदेशक महोदय की ओर से सभी स्टाफ सदस्यों के लिए ३१ अगस्त २०१७ को अपील जारी की गई जिसमें उन्होंने सभी स्टाफ-सदस्यों को अपना अधिकतम दैनंदिन कार्यालयीन कार्य हिंदी में करने का आह्वान किया।
हिन्दी माह से दौरान स्टाफ सदस्यों के लिए विभिन्न हिन्दी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें स्टाफ सदस्यों ने बहुत उत्साहपूर्वक भाग लिया। पखवाडे के दौरान ‘पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिता’, ‘आज का शब्द और वाक्य निर्माण प्रतियोगिता’, ‘स्मरण शक्ति प्रतियोगिता (केवल श्रेणी ४ के लिए)’, तथा ‘प्रश्नमंच प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया।
हिंदी समारोह का आयोजन १४ सितंबर २०१७ को किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अर्णव रॉय, क्षेत्रीय निदेशक द्वारा की गई। इस अवसर पर डॉ. इंदुशेखर ‘तत्पुरुष’, अध्यक्ष राजस्थान साहित्य अकादमी को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
हिंदी दिवस समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं ईश वंदना से हुई। तत्पश्चात कार्याकय के गैर हिंदी भाषी अधिकारीयों द्वारा माननीय वित्त मंत्री, गृह मंत्री एवं गर्वनर महोदय से हिंदी दिवस के अवसर पर प्राप्त संदेशों का वाचन किया गया।
इस अवसर पर राजभाषा कक्ष द्वारा तैयार की गई ‘राजभाषा सहायिका’ नामक पुस्तिका का विमोचन
किया गया।
समारोह में राजभाषा शील्ड प्रतियोगिता के अंतर्गत विभागों को शील्ड एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस प्रतियोगिता के अंतर्गत वर्ष २०१६-१७ के लिए सहकारी बैंक पर्यवेक्षण विभाग ने प्रथम स्थान, बैंकिग लोकपाल कार्यालय ने द्वितीय एवं गैर बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रशंसापत्र योजना के अंतर्गत १६ स्टाफ सदस्यों को पुरस्कृत किया गया। समारोह में हिंदी पखवाडे के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष महोदय श्री अर्णव रॉय, क्षेत्रीय निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि हमें अपना अधिकधिक कार्य मूल रूप से हिंदी में करने के लिए प्रयास करना चाहिए और राजभाषा के क्षेत्र में भी और अधिक कीर्तिमान स्थापित कर जयपुर कार्यालय को अन्य कार्यालयों के लिए अनुकरणीय बनाना चाहिए। क्षेत्रीय निदेशक महोदय ने जयपुर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा जयपुर कार्यालय को हिंदी प्रयोग के लिए वर्ष २०१५-१६ के दौरान राजभाषा शील्ड प्रदान किए जाने पर सभी स्टाफ-सदस्यों को हार्दिक बधाई दी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. इंदु शेखर ‘तत्पुरुष’ ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम जयपुर कार्यालय को शतप्रतिशत कार्य हिंदी में करने के लिए बधाई दी। उन्होंने भाषा और संस्कृति के परस्पर संबंध क विश्ा*ेषण किया और स्वदेशी को युगानुकूल और विदेशी को स्वदेशानुकूल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने हिंदी की वैश्विक स्थिति का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।
समारोह के दौरान स्टाफ-सदस्यों ने भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी, जिसमें ‘उरूभंगम’ नामक एकल नाट्य प्रस्तुति, गीत गायन एवं ‘शहादत’ नाटक के मंचन ने समां बांध दिया।
कार्यक्रम का समापन श्री विजय सिंह शेखावत, महाप्रबंधक (मानव संसाधन प्रबंध विभाग) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
हिन्दी दिवस के अवसर पर काव्य गोष्ठी
जोधपुर। अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद और भारत वीमेन बी.एड. कॉलेज, डिगाडीकलां के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज के सभागार में हिन्दी दिवस के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के अध्यक्ष आलोचक कवि डॉ. रमाकांत शर्मा ने कहा कि मातृ भाषा माँ के समान होती है। हिन्दी भाषा हमारा गौरव है। आपने नागार्जुन की कविता ‘अकाल के बाद’ के साथ ही अपनी कविता ‘मेरा देश महान है’ सहित कई जनवादी कविताएँ सुनाई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शाइर दिनेश सिंदल ने कहा की राष्ट्र की वंदना करना हमारा कर्तव्य है। आपने राष्ट्र की वंदना करते हुए अनेक उत्साहवर्धक कविताएँ और गजलें तरन्नुम में सुनाई। डॉ. पद्मजा शर्मा ने दुष्यंत कुमार की गजल और एक स्त्री के प्रति समाज की सोच को दर्शाती कविता ‘वे बोले’ सुनाई। हिन्दी दिवस के इस आयोजन का छात्राओं सहित सभी ने लुत्फ उठाया। परिषद के अध्यक्ष मोहन कृष्ण बोहरा के आदेशानुसार कवियों ने एक-एक कविता अन्य कवि की पढी थी।
इस अवसर पर कॉलेज की छात्राओं दुर्गा जाखड, संजू कुमार, प्रियंका जांगिड, मनीषा मीना, भूमिका पालीवाल ने भी कविताएँ प्रस्तुत की। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के मानद सचिव डॉ. भावेन्द्र शरद जैन ने कहा कि हिन्दी जन जन की भाषा है। डॉ. भावेन्द्र शरद जैन और डॉ. पद्मजा शर्मा ने छात्राओं को प्रमाण पत्र भी वितरीत किए। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संध्या शुक्ला और कॉलेज के संरक्षक ओमप्रकाश चौधरी ने अतिथियों का स्वागत किया। और अतिथियों स्मृति चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता हनुमान सिंह इंदा ने किया।
डॉ. पद्मजा शर्मा, जोधपुर
साहित्यिक गोष्ठी आयोजित
श्री हरिशंकर पारीक की ओर से उनके निवास स्थान पर ‘साहित्य सरोवर संस्था’ की गोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार श्री भंवरलाल पारीक और मुख्य अतिथि श्री रघुनाथ प्रसाद ‘उमंग’ रहे।
हरिशंकर पारीक की नवीन रचना ‘एक पहेली पाँचाली’ का विधिवत् विमोचन के पश्चात् श्री शंकरलाल गुप्त एवं श्री गोपीनाथ गोपेश ने इस खण्डकाव्य की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की। साथ ही प्रतिमाह की भाँति डॉ. श्री शिवदत्त शर्मा, श्री विवेक श्रीवास्तव, श्री उमेशचन्द्र गुप्ता, श्री मधुकर दाधीच, श्री गणपत लाल वर्मा, श्री तुलसीराम धाकड, श्री अमर सिंह कविया, श्री शंकरलाल गुप्त आदि ने काव्यपाठ किया तथा संस्था संस्थापक श्री जे.सी.विशेष और श्री राम प्रकाश पुरोहित ने साहित्य की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपादेयता पर प्रकाश डाला। संस्था के सचिव गोपीनाथ पारीक ने मंच संचालन का कार्य सम्पादित किया।
गोपीनाथ ‘गोपेश’, जयपुर
राजस्थानी लोक कथा पोथी का लोकार्पण
कोटा। विज्ञान नगर गायत्री शक्ति पीठ में राजस्थानी भाषा के लेखक देवकी दर्पण की लोककथा पोथी- ‘क्ह चकवा सुण चकवी’ का लोकार्पण हुआ। लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि कोटा के विधायक श्री संदीप शर्मा थे।
पुस्तक पर विचार व्यक्त किये विजय जोशी, कवि-साहित्यकार मुकुट मणिराज, जितेन्द्र निर्मोही, दुर्गादान सिंह, अम्बिका दत्त ने, कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती वृन्दा बोहरा ने तथा संचालन श्री पे*म शास्त्री ने किया।
हिन्दी भाषा भूषण की मानद उपाधि
कोटा, १९ सितम्बर। हिन्दी दिवस पर साहित्य मण्डल, नाथद्वारा के मंच पर, कोटा शहर के युवा कवि योगीराज योगी को उनके संग्रह- ‘‘खोल दिया मन का वातायन’’ पर श्री चंद्र योगी स्मृति सम्मान-२०१७ सहित हिन्दी भाषा भूषण की मानद उपाधि प्रदान करते हुए संस्था सचिव श्याम प्रकाश देवपुरा द्वारा शॉल, उत्तरीय, कंठहार, श्रीनाथजी की छवि और सम्मान पत्रके साथ-साथ २१००/- रु. की नगद राशि भी भेंट की गई।
रामेश्वर शर्मा, कोटा
साहित्य पुरस्कार एवं सम्मान
श्रीडूंगरगढ। साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से २८ सितम्बर २०१७ को साहित्यकार सम्मान समारोह का अयोजन किया गया। इसमें संस्था की सर्वोच्च उपाधि साहित्यश्री एवं डॉ. नन्दलाल महर्षि हिन्दी, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन व बृजरानी भार्गव युवा साहित्य पुरस्कार से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर हिन्दी वैश्विक अवधारणा विषय पर संगोष्ठी भी हुई।
संस्कृति भवन के सभागार में हुए इस समारोह में मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के रजिस्ट्रार मनोज शर्मा ने कहा कि साहित्यकारों को बढावा मिलना चाहिए, क्योंकि वह समाज को दर्पण दिखाता है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. भंवर भादाणी ने कहा कि भाषा किसी की मोहताज नही है। हिन्दी भाषा सरिता की तरह विकाशील है। पूरी दुनियाँ में वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में हिन्दी का स्थान अग्रणीय है। अतिथि अशोक माथुर ने कहा कि आज के युग में हिन्दी की बहुत जरूरत है। हिन्दी को बचाना है तो आर्थिक व तकनीकी रूप से तरक्की करनी होगी। विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि भारतीय भाषाओं को जो महत्व जार्ज ग्रियर्सन जैसे भाषाविदों ने समझा, उसे ले जाने की आवश्यकता को कोई सरकार नहीं समझ रही है। साहित्यश्री से सम्मानित प्रख्यात कथाकार समालोचक नई दिल्ली के पंकज बिष्ट ने बताया कि पुरस्कार अलंकार प्राप्त करना मेरे लिए गर्व की बात है। हिन्दी लगातार बाजार की भाषा बन गई है। हिन्दी का विकास अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को साथ लेकर ही किया जा सकता है। पुरस्कृत भरूंच की प्रभा पारीक, डॉ. आकाश मिड्ढा व मानोज स्वामी ने भी सम्बोधित किया।
समाजसेवी शिवप्रसाद सिखवाल ने कहा कि आज विदेशी नागरिक भी हिन्दी भाषा को अपना रहे हैं। यह हमारे देश के लिए सुखद अनुभव है। संस्था के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने भाषा के विकास में संस्थागत एवं जन सहयोग की हिमायत करते हुए भाषायी विकास की बात कही। युवा साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि यदि कोई साहित्यकार किसी सामाजिक विद्रुप या मूल्यगत विचलन के विरूद्ध आवाज नहीं उठाए तो यह सांस्कृतिक हमले का ही प्रतिरूप है। संस्था के मंत्री बजरंग शर्मा ने आभार जताया। इस दौरान कोषाध्यक्ष रामचन्द्र राठी, विजयसिंह पारख, विजयराज सेठिया, हरिशंकर बाहेती, सुशील कुमार बाहेती, डॉ. महावीर पंवार, भंवरलाल भोजक, श्याम सुन्दर आर्य, श्री भगवान सैनी, रतन राहगीर, एडवोकेट रेवन्त मल नैण, सहित कई विद्वजन उपस्थित थे।
विद्यार्थी भी हुए सम्मानित
इस समारोह में संस्था की ओर से आयोजित श्रुतिलेख एवं आशु भाषाण प्रतियोगिता में विजेता अवन्तिका सारस्वत, आदित्य थेपडा, भावना पुगलिया, पराकाष्ठा खेण्डेलवाल, खूशबू स्वामी व दीपिका ओझा को नगद राशि, प्रशक्ति पत्र व प्रतीक चिह्न देकर पुरस्कृत किया।
विजय महर्षि
पंडिता रमाबाई की स्मृति में व्याख्यानमाला
चूरू। साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के लिए काम कर रहा स्थानीय प्रयास संस्थान भारत में महिला शिक्षा की अलख जगाने में अग्रणी रही पंडिता रमाबाई की स्मृति में वर्ष २०१८ से व्याख्यानमाला शुरू करेगा। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने बताया कि प्रतिवर्ष देश-दुनियाँ के किसी एक चुनिंदा वक्ता को व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया जाएगा और पंडिता रमाबाई के काम को प्रकाश में लाते हुए उनके महिला-उत्थान तथा शिक्षा के प्रति संकल्प से जुडे विषय पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा।
प्रयास संस्थान के सचिव कमल शर्मा ने बताया कि संस्थान व्याख्यान के मानदेय के रूप में व्याख्यान देने आए विद्वान को एक लाख रुपये प्रदान करेगा। प्रयास संस्थान को यह राशि शिक्षाविद् प्रो. घासीराम वर्मा द्वारा संस्थान के नाम करवाई जा रही इक्कीस लाख रुपये की सावधि जमा राशि के ब्याज से प्राप्त होगा। शर्मा ने बताया कि संस्थान यह व्याख्यान प्रतिवर्ष चूरू जिला मुख्यालय पर करवाएगा और प्रथम व्याखान वर्ष २०१८ के अगस्त माह में होगा।
दुलाराम सहारण, चूरू
साहित्य-सम्मान २०१७ से अलंकृत
डॉ. ओ.पी. शर्मा चैरिटेबल ट्रस्ट, चूरू द्वारा रविवार २० अगस्त २०१७ को मनुज साहित्य सम्मान-२०१७ व लोक संगीत-संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिडावा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम जांगिड को मनुज साहित्य सम्मान-२०१७ से अलंकृत किया गया। ट्रस्ट सचिव राजेन्द्र शर्मा, ‘मुसाफिर’, प्रबंधन ट्रस्टी सुरेन्द्र शर्मा, रवीन्द्र शर्मा और स्नेहलता ने सम्मान स्वरूप साहित्यकार को ग्यारह हजार रुपये नकद, शॉल, श्री-फल, सरस्वती-प्रतिमा व अभिनन्दन-पत्र भेट किये।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता ओम सारस्वत थे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर कमलसिंह कोठारी ने किया।
राजेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’, चूरू