सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा का वर्चस्व

डॉ. पुखराज


वर्तमान में अपने विचारों या भावों को आमजन तक पहुँचाने में सोशल मीडिया महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह एक वर्चुअल वर्ल्ड बनाता है जो इन्टरनेट के माध्यम से एक व्यक्ति दूसरों से जुड जाता है। सोशल मीडिया एक विशाल नेटवर्क है, जो कि सारे विश्व को सूत्रता में बाँधता है। यह विश्व का सुगम एवं सस्ता माध्यम है जो तीव्र गति से सूचनाओं का आदान-प्रदान करके हर क्षेत्र की घटनाओं को आमजन तक पहुँचाता है। इस माध्यम के द्वारा किसी भी व्यक्ति, संस्था, समूह और देश आदि को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध बनाया जा सकता है।
हम ऐसे कई उदाहरण देख चुके हैं जो कि उपर्युक्त बातों को प्रमाणित सिद्ध करते हैं जिनमें INDIA AGAINST CORRUPUTION को देख सकते हैं जो कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध महा अभियान था; जिसे सडकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लडा गया, जिसके परिणामस्वरूप विशाल जन समूह जुड गया। सन् २०१४ के आम चुनावो के अंतर्गत राजनीतिक पार्टियों द्वारा जमकर सोशल मीडिया का उपयोग कर आमजन को चुनाव के प्रति जागरूक बनाने तथा मतदान करने की अपील की गई थी। इस आम चुनाव में सोशल मीडिया के उपयोग से वोटिंग प्रतिशत बढा, साथ ही युवाओं में चुनाव के प्रति जागरूकता बढी एवं कर्त्तव्यपालन देखने को मिला। सोशल मीडिया के माध्यम से ही ‘निर्भया’ को न्याय दिलाने के लिए विशाल संख्या में युवा सडकों पर आ गये, जिससे सरकार दबाव में आकर एक नया एवं प्रभावशाली कानून बनाने पर मजबूर हो गई।
लोकप्रियता के प्रचार-प्रसार में मीडिया एक बेहतरीन प्लेटफार्म है। जहाँ व्यक्ति स्वयं को अथवा अपने किसी उत्पाद को ज्यादा लोकप्रिय बना सकता है। आज फिल्मों के ट्रेलर, टीवी प्रोग्राम का प्रसारण भी सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है। वीडियो तथा ऑडियो चैट भी सोशल मीडिया के माध्यम से सुगम हो गया है जिनमें फेसबुक, व्हाट्सअप, इन्स्टाग्राम, ब्लॉग कुछ प्रमुख प्लेटफार्म हैं।
कुछ समय पहले जब सोशल मीडिया का अवतार हुआ तब ज्यादातर लोग अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करते थे, उस समय हिंदी भाषी लोग सोशल मीडिया का सहज उपयोग नहीं कर पाते थे। लेकिन अब बदलते परिदृश्य के साथ-साथ हिंदी भाषा ने सोशल मीडिया के मंच पर दस्तक देकर अपने अस्तित्व को और भी बुलंद तरीके से स्थापित किया है। आज सोशल मीडिया पर हिन्दी का प्रयोग लोगों के लिए अलग पहचान दिलाने में आकर्षक साबित हुआ है। आज जहाँ फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सअप पर अंगे*जी में लिखे गये पोस्ट या फिर कमेंट्स की भीड में हिंदी में लिखी गई पोस्ट या फिर कमेंट्स प्रयोगकर्ताओं को ज्यादा आकर्षित करती है। आज विभिन्न कम्पनियाँ हिन्दी भाषा में अपना विज्ञापन तथा सूचनाओं का प्रचार-प्रसार करती है, क्योंकि उनका मानना है कि आज हिंदी भाषा का विस्तृत फलक है और अगर उन्हें भी अपनी सूचनाओं को बहुसंख्यक लोगों तक पहुँचाना है तो वही भाषा चुननी होगी, जिसके पाठक वर्ग अधिक हो तथा ग्राहक सहज और परिवारिकता महसूस करें।
इसके लिए हिंदी से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता। सोशल मीडिया में हिंदी भाषा का वर्चस्व का प्रमुख कारण यह है कि हिंदी भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त एवं वैज्ञानिक माध्यम है। संबंधित पोस्ट के भावों को समझने में असुविधा नहीं होती है। लिखी गई बात पाठक तक उसी भाव में पहुँचती है, जिस भाव से लिखा जाता है। सोशल मीडिया पर मौजूद हिंदी का ग्राफ दिन दो गुनी रात चौगुनी आसमान छू रहा है। यह हिंदी भाषा की सुगमता, सरलता और समृद्धता का ही प्रतीक है। वैश्विक पटल पर आज हिंदी सोशल हिंदी सोशल मीडिया के मंच पर विराजमान है।
सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा के विस्तार की गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपैल २०१५ तक देश में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या १४.३ करोड थी, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की संख्या पिछले साल में १००
प्रतिशत तक बढकर ढाई करोड पहुँच गई, जबकि शहरी इलाकों में यह संख्या ३५ प्रतिशत बढकर ११.८ करोड रही। सबसे अहम बात यह है कि न केवल उम्रदराज भारतीय, बल्कि अंग्रेजी भाषा का अच्छा ज्ञान रखने वाले युवा वक्ता भी अब सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा में अपनी पहचान बना रहे हैं।
आज बहुत-सा वर्ग हिंदी भाषा में ट्वीट करता है। आज सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा ने ट्विटर के माध्यम से शब्दों में कहने के अभ्यास को संभव बनाया है। हिंदी भाषा में किये गये ट्वीट ने आज सार्वजनिक अभिव्यक्ति की ओर बहुसंख्यक समुदाय का ध्यान आकर्षित करवाया है। ट्विटर ने करोडों लोगों को एक नई ताकत, छोटी बडी बहसों में भागीदारी सुनिश्चित की है। इस नई ताकत ने सरकारों और राजनेताओं को ज्यादा पारदर्शी, संवादमुखी, और जवाबदेह बनाया है। हिंदी भाषा ने जनता के मन और विचारधारा को जानने का नया माध्यम दिया है। हिंदी भाषा के इस सोशल मीडिया ने अपनी ताकत से सरकारों को अपने फैसलों, नीतियों और व्यवहारों की ओर ध्यान आकर्षित करवाया है। इस मीडिया ने लोक-बोल-सुन रहे हैं इन मंचों पर सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता बढी है तथा लोगों का स्तर हिंदी भाषा में बेहतर हुआ है।
आज फेसबुक,ट्विटर ब्लाक,व्हाट्सअप एप्प या अन्य कोई नेतवक्रिग साइट्स सभी पर हिदी भाषा का प्रयोग निरंतर बढ रहा है। गूगल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार २०१८ तक लगभग आधा देश इन्टरनेट से जुड जायेगा। वर्तमान में, मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की रैंकिंग में सबसे आगे है। हिंदी भाषा में चैट एप्प भी बहुत सक्रिय है। हिंदी ब्लॉगिंग पत्रकारिता के साथ ही रचनाकारों की रचनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त मंच है। हिंदी में करीब ३५ हजार ब्लॉगर हैं, जिनमें से ४ हजार के करीब नियमित ब्लॉग लेखक है। हिंदी भाषा ने टेक्नोलॉजी की वेबदुनिया में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है। मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में हिंदी का पर्दापण वर्ष २००५ के बाद आरम्भ हुआ। गत ८ वर्षों में हिंदी भाषा का प्रयोग सोशल मीडिया पर करने वालों की संख्या में लगभग ५० प्रतिशत की वृद्धि भारत के अतिरिक्त नेपाल, मारिशस, फिजी, यूगांडा, दक्षिण अफ्रीका, कैरेबियन देशों और कनाडा आदि देशों में भी हिंदी भाषा का प्रयोग करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके अलावा इंग्लैंड, अमेरिका, फ्रांस, मध्य एशिया में भी इसे बोलने-समझने वाले पाठक हैं। वैश्वीकरण के दौर में भारत के बढते प्रभाव के कारण पिछले कुछ समय से हिंदी के प्रति विश्व के लोगों की रूचि बढी है। यह अहम तथ्य है कि किसी भी मीडिया की लोकप्रियता उसके पाठकों की संख्या पर निर्भर करती है। इससे स्पष्ट होता है हि सोशल मीडिया के वैश्विक मानचित्र पर हिंदी भाषा का ग्राफ निरंतर प्रगतिशील है और रहेगा।
सोशल मीडिया पर हिंदी का चलन बढता जा रहा है। गूगल जैसी कंपनियां भी हिंदी भाषियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। ट्विटर के अनुसार वर्ष २०११ में युजर्स की संख्या १० करोड पहुँच जाने पर कंपनी ने अपनी वेबसाइट्स पर हिंदी इनपुट की व्यवस्था की थी। हिंदी जो कुछ आगे बढी है, इसी बा*ाारवाद के कारण आगे बढी है। पहले सिनेमा, फिर टीवी और सब इन्टरनेट ने हिंदी के अथाह बा*ाार के कारण उसे पैसा कामाऊ भाषा तो बना ही दिया है। हिंदी सिनेमा के बाद अब हिंदी के टीवी चैनल, अखबार, इन्टरनेट कम्पनियाँ भी विज्ञापनों के जरिये अरबों रुपये सालाना कमा रहे हैं। अब मोबाइल पर इन्टरनेट के लगातार प्रसार के कारण हिंदी और भी मजबूत होगी, क्योंकि जो भी विशाल हिंदी भाषी बा*ाार से पैसा कमाना चाहेगा, उसे हिंदी सोशल मीडिया को अपनाना ही पडेगा।
दरअसल सोशल मीडिया और पांरपरिक कथा संसार के बीच एक अटूट रिश्ता भी है। हालाँकि पारंपरिक लेखक शायद सोशल मीडिया की तरफ से आ रहे लेखन को कुछ अनुदार होकर देखते हैं। जैसे वह लोकप्रिय या बाजारू हो। पिछले दिनों मूलतः सोशल मीडिया में सक्रिय
अनु सिंह चौधरी के कहानी संग्रह ‘नीला स्कार्फ’ की करीब १५०० प्रतियाँ हिंदी युग्म प्रकाशन की नेट-मार्केटिंग और लेखिका की अपनी नेट-पहचान के साझा संयोग से छापने से पहले ही बिक गई।
मूलतः ब्लॉगिंग और फेसबुक के जरिये पहचान बनाने वाली युवा कवयित्री बाबुषा कोहली को ज्ञानपीठ जैसे मूर्धन्य संस्थान ने कविता के लिए युवा ज्ञानपीठ देकर इसी की पुष्टि की है। दरअसल फिर दुहराने की जरूरत है की आज का युग सोशल मीडिया का है। इसलिए इससे जुडना अत्यावश्यक है। बीते दिनों टाइम्स ऑफ इंडिया में ट्विटर कहानियों के बहाने एक लेख छपा जिसमें दुनिया की सबसे छोटी कथा का जिक्र है। बताया गया कि सिर्फ छह शब्दों की यह कहानी शायद अर्नेस्टे हेमिंग्वे ने लिखी है। कहानी बस इतनी सी है- ‘फॉर सेल, बेबी शूज नेवर वोर्न। (बिकाऊ हैं बच्चे के जूते, बिलकुल अछूते)। आज सोशल मीडिया के माध्यम से साहित्य का लोकतंत्र बन रहा है। फेसबुक, ट्विटर पर लिखने वाले लेखक किसी खलीफा, किसी मठाधीश से पूछ कर, उससे सहमति, स्वीकृति लेकर नहीं लिख रहे हैं। ये नये लेखक प्रयोग कर रहे हैं, ये साहित्य का लोकतंत्र है, जो बन रहा है। अरविन्द जोशी ने कहा कि नई तकनीक, नए मंचों को पहचान मिल रही है। विदेशों में इन्टरनेट पर लिखे गये साहित्य के लिए पुरस्कारों की व्यवस्था है। पुस्तकों के बाहर भी साहित्य के लिए जगह बन रही है। देश में हिंदी क शुरूआती ब्लॉगरों में से एक प्रतीक पाण्डे ने कहा है कि तकनीक ने लेखन-साहित्य का लोकतंत्रीकरण किया है। साहित्य किसी सीनियर आलोचक की बपौती नहीं है, जो ये लाइसेंस दे कि कौन लेखक और कौन कवि। तकनीकी ने हर किसी को लेखक, कवि होना संभव किया है। किसने कैसा लिखा, यह सोशल मीडिया तय कर देगा।
माननीय प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेन्द्र मोदीजी ने देश के लिए एक नारा दिया- ‘डिजिटल इंडिया’ का। आज सोशल मीडिया के माध्यम से कम समय में दुनिया की हर जानकारी को आम लोगों तक पहुँचाया जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी का अमरिका में दिया गया भाषण बहुत प्रख्यात और चर्चित रहा। जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘दुनिया हमें साँप-सपेरों के देश के तौर पर जानती थी, पर आज दुनिया को यह एहसास हो गया है कि साँप-सपेरों वाले लोग अभी अँगुलियों से माउस चलाते हैं।’ एक पहेली थी कि ट्विटर केवल अंग्रेजी पढे-लिखे लोगों के लिए है; जो अधिकांश भारत के शहरों में रहते हैं। कुछ समय पहले विश्व कप (क्रिकेट) के समय भारत बनाम पाकिस्तान मैच के दौरान, भारतीय टीम के प्रशंसकों ने ‘जयहिंद’ नामक ट्वीट को ट्रेंड करने का प्रयत्न किया और बडे गर्व के साथ हम आपको बताना चाहते हैं कि ट्विटर ‘जयहिंद’ के नाम से गूंज उठा और यह भारत तक ही सीमित न रहकर पूरे विश्व में गूंज उठा। ट्विटर की जनसंख्या में आज हमारा देश तीसरे स्थान पर है। सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले १७ प्रतिशत भारतीय ट्विटर का उपयोग करते हैं। पहली बार यह हुआ कि हिंदी # hashtag ने ट्विटर पर बवाल कर दिया तो उसके दो दिन बाद दूसरा हिंदी hashtag # हरहरमहादेव भी ट्विटर पर ट्रेंड हुआ। लोग सोचते थे कि सोशल मीडिया के आने से हिंदी का वर्चस्व कम हो जायेगा; लेकिन डिजिटल युग में तो यह उल्टा हो गया। आज ट्विटर पर हिंदी भाषा अपनी जडें जमा चुकी है।
आज फेसबुक पर हिन्दी की पोस्ट और ट्वीट को हजारों लाइक्स और आरटी मिल रहे हैं। राहुल देव जैसे पत्रकार फेसबुक पर हिंदी के प्रयोग को लेकर अभियान चला रहे हैं। फेसबुक के कई गुप हैं, जो हिंदी में ही चैट करना पसंद करते हैं। लिंक्डइन पर भी हिंदी का प्रभाव बढता जा रहा है। सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा के बढते वर्चस्व को देखते हुए माननीय प्रधानमंत्री महोदय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों ने अपने सोशल मीडिया अपडेट्स हिंदी में प्रस्तुत किये हैं। इन अपडेट्स में लगभग ४० प्रतिशत हिंदी का प्रयोग होता है। सोशल मीडिया पर हिंदी का परचम इतना लहरा गया कि कुछ भारतीय भाषाओं के लोगों को ही इस पर इतनी आपत्ति हुई, जैसा कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों की सोशल मीडिया साइट पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता महोदया ने तो इसके बारे में प्रधानमंत्री महोदय से भी शिकायत की। राजनाथ सिंह की तरफ से गृह मंत्रालय के अकाउंट से एक सन्देश हिंदी भाषा में लिखा गया कि- भारत के गृहमंत्री के अधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर आपका स्वागत है। इससे तमिलनाडु में हिंदी विरोध और बढ गया और जयललिता ने कहा कि गृह मंत्रालय केवल हिंदी में ट्वीट क्यों करें? गृह मंत्रालय को बाद यह सफाई देनी पडी कि हम केवल हिंदी भाषी राज्यों से ही हिंदी में वार्तालाप करते हैं।
जैसा कि आमतौर पर देखा गया कि फेसबुक ने सम्पूर्ण साहित्यिक जगत को एक मंच पर ला दिया है। आज सोशल मीडिया के द्वारा लेखक/कवि अपने पाठकों के इतने नजदीक पहुँच गये कि हाथों हाथ प्रत्युत्तर प्राप्त हो रहे हैं। पाठकों, साहित्यकारों, संपादकों तथा प्रकाशकों की आपसी दूरियाँ कम हुई हैं। यह एक ऐसा सोशल मीडिया का प्रभाव है जो साहित्य के सुनहरे भविष्य के लिए आश्वस्त करता है। आज साहित्यकार व्हाट्सअप, यूट्यूब और ट्विटर पर अपनी रचनाओं का प्रसार-प्रचार कर रहें हैं। व्हाट्सअप ग्रुप में साहित्यकार एक-दूसरे की रचनाएँ पढ उनकी खूबियों-खामियों पर विचार अभिव्यक्त कर रहें हैं तो दूसरी ओर ट्विटर पर अपने प्रिय लेखकों के विचार पढ प्रत्युत्तर भी दे रहे हैं। हिंदी भाषा में यूट्यूब पर भी कहानियों/कविताओं के कई ऑडियो-विडियो डाउनलोड किये हुए हैं और प्रतिदिन नये अपलोड हो रहे हैं। जिन्हें सुनने-देखने वाले पाठकों की निरंतर वृद्धि हो रही है। निस्संदेह यह कह जा सकता है कि सोशल मीडिया आज हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा
रहा है। द्य
प्राध्यापक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बावडी (जोधपुर)
मो. ९४६०७७४२९३