भारतीयता के अनुगायक

डा दया कृष्ण


राजनीति में हुए अवतरित लिये दार्शनिक ढाल,
भारतीयता के अनुगायक पंडित दीनदयाल।
दिया दमित जन जीवन हित
अन्त्योदय का मन्त्र
प्रस्तुत किया नया ही भौतिक
समतावादी तन्त्र,
स्वार्थ नदी पर नैतिकता की बाँधी नूतन पाल।
भारतीयता के अनुगायक पंडित दीनदयाल।
रोकी भूमि कृषक की छिनती
सहकारी के नाम,
दिया नकार देश ने, थोपित
शासन का पथ वाम,
कर दी सिद्ध समय ने असफल पर की चाल कुचाल।
भारतीयता के अनुगायक पंडित दीनदयाल।
राष्ट्रवाद का दे समाज को
ज्ञानात्मक सम्बोध,
दिये हटा संस्कृति पथ के सब
बाह्यगर्त अवरोध,
देश चल पडा वैदिक पथ पर ऊँचा कर निज भाल।
भारतीयता के अनुगायक पंडित दीनदयाल।
बना बाह्य अनुकूल देश के
कहा, करें स्वीकार,
चलें, सनातन पुरा सोच के
जोडे युग से तार,
खडा कर दिया सुदृढ नींव पर भारत भवन विशाल।
भारतीयता के अनुगायक पंडित दीनदयाल।
लिया काल ने आकर हमसे
असमय तुमको छीन,
मौन हो गई सहसा बजती
राष्ट्रवाद की बीन,
खडी प्रतीक्षा में थी शायद और कहीं जयमाल।
भारतीयता के अनुगायक पंडित दीनदयाल।